इन तारों की रोशनी भले ही कमजोर हो, लेकिन वे आकाशगंगा के कुल तारकीय द्रव्यमान का बड़ा हिस्सा छिपा सकते हैं। इसलिए मिल्की वे जैसा IMF मानकर किए गए पारंपरिक अनुमान इन आकाशगंगाओं का वास्तविक द्रव्यमान कम आँक सकते हैं।
सबसे पुरानी दो आकाशगंगाओं के लिए इस मापे गए IMF को लागू करने पर अनुमानित तारकीय द्रव्यमान तीन से चार गुना बढ़ जाता है। ये दोनों वस्तुएँ JWST से देखी गई असामान्य रूप से शुरुआती परिपक्व आकाशगंगाओं की वंशज मानी जाती हैं।
JWST ने बहुत शुरुआती ब्रह्मांड में ही विशाल और विकसित आकाशगंगाएँ खोजी हैं। उदाहरण के लिए, GS-9209 नामक एक निष्क्रिय आकाशगंगा की स्पेक्ट्रोस्कोपिक पुष्टि उस समय की गई जब ब्रह्मांड की उम्र लगभग 1.25 अरब वर्ष थी।
अध्ययन में चर्चा की गई सबसे पुरानी तारकीय आबादियों में से एक संभवतः बिग बैंग के 1.5 अरब वर्ष से भी कम समय बाद बनी थी। यदि उस समय बनी आकाशगंगाओं में भी ऐसा ही bottom-heavy IMF था, तो उन्हें पहले के अनुमानों से कहीं अधिक तारकीय द्रव्यमान और उससे भी कम समय में इकट्ठा करना पड़ा होगा।
इससे आकाशगंगा-निर्माण के मौजूदा मॉडलों पर दबाव कम नहीं होता, बल्कि बढ़ जाता है। हालांकि, लगभग 50 करोड़ वर्ष बाद दिखाई देने वाली सबसे शुरुआती ‘असंभव रूप से जल्दी बनी’ आकाशगंगाओं के लिए यह निष्कर्ष एक वैज्ञानिक extrapolation है—इन अत्यधिक रेडशिफ्ट वाली आकाशगंगाओं में IMF का प्रत्यक्ष मापन अभी नहीं हुआ है। वर्तमान ठोस माप z≈0.7 वाली आकाशगंगाओं के हैं।
यदि शुरुआती ब्रह्मांड में bottom-heavy तारा-निर्माण आम था, तो लंबे समय तक जीवित रहने वाले कम-द्रव्यमान वाले तारों की संख्या भी अनुमान से अधिक रही होगी। ऐसे तारे ग्रह-तंत्रों के संभावित मेजबान हो सकते हैं। इसलिए शुरुआती दौर में बने ग्रह-तंत्रों की अनुमानित संख्या बढ़ सकती है।
फिर भी, यह अध्ययन सीधे ग्रहों की मौजूदगी या ग्रह बनने की दर को नहीं मापता। यह केवल उस तारकीय आबादी की ओर संकेत करता है जिसमें ग्रह-तंत्र बनने की संभावनाएँ हो सकती हैं।
शोधकर्ता इसी तरह की अति-गहरी और व्यापक तरंगदैर्ध्य वाली स्पेक्ट्रोस्कोपी को अधिक दूर, अधिक उच्च-रेडशिफ्ट वाली आकाशगंगाओं पर लागू करना चाहते हैं। लक्ष्य अंततः उन प्रणालियों तक पहुँचना है जो ब्रह्मांड में पहले तारों के बनने के युग के करीब थीं।