पहले के GBD विश्लेषण में 10,000 आबादी पर 80/100 UHC स्तर के लिए कम-से-कम 20.7 डॉक्टर, 70.6 नर्स और दाइयां, 8.2 दंत-स्वास्थ्यकर्मी तथा 9.4 फार्मास्यूटिकल स्वास्थ्यकर्मी जरूरी बताए गए थे। नए विश्लेषण में अद्यतन आंकड़ों और देशों में वास्तव में देखे गए घनत्व के आधार पर अलग, अपेक्षाकृत कम सीमाएं सामने आती हैं।
स्रोत सारांश के अनुसार, इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए डॉक्टरों की ही अतिरिक्त जरूरत करीब 7.1 मिलियन है। उपलब्ध सामग्री में नर्सों और दाइयों, दंत चिकित्सकों तथा फार्मासिस्टों के लिए अलग-अलग कुल आंकड़ों को स्वतंत्र रूप से पुनर्निर्मित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।
इन दोनों क्षेत्रों की चुनौती अलग है: दक्षिण एशिया में बड़ी आबादी के कारण कुल कमी बहुत बड़ी है, जबकि उप-सहारा अफ्रीका में आबादी और जरूरत की तुलना में उपलब्धता बेहद कम है। केवल वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या बढ़ाने से यह क्षेत्रीय असमानता दूर नहीं होगी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और लैंसेट/GBD विश्लेषण एक ही सवाल का जवाब नहीं देते। दोनों में कमी की परिभाषा, अध्ययन वर्ष, शामिल पेशे और गणना-पद्धति अलग है।
WHO ने पहले जरूरत-आधारित अनुमान में वैश्विक स्वास्थ्यकर्मी कमी को 2013 में 20 मिलियन से घटकर 2020 में 15 मिलियन बताया था और 2030 तक इसके 10 मिलियन रहने का अनुमान लगाया था।
इसके विपरीत, GBD का 34.4 मिलियन वाला अनुमान 100 में 80 के UHC प्रभावी-कवरेज स्तर से जुड़ा है। इसमें तय पेशेवर समूहों को शामिल कर उन देशों के स्वास्थ्यकर्मी घनत्व को बेंचमार्क बनाया गया है, जिन्होंने यह कवरेज हासिल की है।
इसलिए WHO का कम आंकड़ा और GBD का अधिक आंकड़ा जरूरी नहीं कि एक-दूसरे का खंडन करते हों। वे अलग सेवा-मानक, अलग पेशागत दायरा या अलग समय-सीमा माप सकते हैं। लक्ष्यों और शामिल स्वास्थ्यकर्मी समूहों को समान किए बिना दोनों की सीधी तुलना भ्रामक होगी।
प्रशिक्षण और नियुक्तियां बढ़ाना जरूरी है, लेकिन अकेली भर्ती समस्या का समाधान नहीं करेगी। यदि वेतन कम, काम असुरक्षित, रोजगार अस्थिर और करियर के अवसर सीमित रहें, तो नए स्वास्थ्यकर्मियों का टिकाव कमजोर हो सकता है। इससे कर्मचारियों का बार-बार बदलना, देश के भीतर असमानता और अंतरराष्ट्रीय ‘ब्रेन ड्रेन’ बढ़ सकता है।
नीतिगत प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए:
मुख्य विरोधाभास यही है: 1990 के बाद दुनिया ने 80 मिलियन से अधिक स्वास्थ्यकर्मी जोड़े, जिनमें महिलाओं का योगदान निर्णायक रहा। फिर भी असमान वितरण, कम निवेश, कमजोर कर्मचारी-प्रतिधारण और लैंगिक पेशागत पदानुक्रम के कारण कई देश उस स्वास्थ्यकर्मी क्षमता से बहुत नीचे हैं, जो मध्यम स्तर की सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लिए भी जरूरी मानी जाती है।