मर्ज़ के रूढ़िवादी गठबंधन CDU/CSU के विदेश नीति प्रवक्ता युर्गेन हार्ड्ट ने इससे भी आगे जाकर EU से बेन-ग्विर पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। हालांकि, हार्ड्ट का बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन यह जर्मन कैबिनेट का औपचारिक प्रतिबंध-निर्णय नहीं है।
बेन-ग्विर पहले भी गाज़ा में इज़राइली बस्तियां बसाने और बड़ी संख्या में फ़िलिस्तीनियों के “प्रवास” की वकालत कर चुके हैं। इन विचारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ़िलिस्तीनियों के जबरन विस्थापन के समर्थन के तौर पर देखा गया है। ताज़ा बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया क्योंकि इसमें तत्काल सैन्य खतरे से परे लोगों की हत्या का समर्थन दिखाई दिया।
इसी पृष्ठभूमि में उनके “लक्षित हत्याओं” वाले बयान को केवल राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं, बल्कि नागरिकों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वाली भाषा के रूप में लिया गया।
जून 2025 में यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूज़ीलैंड और नॉर्वे ने बेन-ग्विर तथा इज़राइल के वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच के खिलाफ अपने-अपने राष्ट्रीय कानूनों के तहत प्रतिबंध या अन्य पाबंदियां लागू की थीं। इन देशों ने दोनों मंत्रियों पर पश्चिमी तट में फ़िलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसा भड़काने का आरोप लगाया।
इन उपायों में संबंधित देशों की व्यवस्था के अनुसार प्रवेश या यात्रा प्रतिबंध और वित्तीय पाबंदियां, जैसे संपत्तियों को फ्रीज़ करना, शामिल थे।
कुछ अन्य यूरोपीय देशों ने भी दोनों मंत्रियों के प्रवेश पर रोक लगाई है। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर के ऐसे कदम EU के सभी 27 देशों पर लागू होने वाले सामूहिक प्रतिबंध से अलग होते हैं।
EU स्तर पर प्रतिबंध लगाने के लिए सभी 27 सदस्य देशों की सर्वसम्मति ज़रूरी है। इसका अर्थ है कि एक भी देश असहमति जताए तो प्रस्ताव रुक सकता है। EU की विदेश नीति प्रमुख काया कालास ने जून में कहा था कि कई सदस्य देश प्रतिबंधों के पक्ष में हैं, लेकिन आवश्यक सहमति नहीं बन सकी।
यही प्रक्रिया जर्मनी के बदले रुख को महत्वपूर्ण तो बनाती है, लेकिन निर्णायक नहीं। बर्लिन का समर्थन बढ़ने पर भी प्रतिबंध तभी लागू होंगे जब बाकी संदेह करने वाले देश भी सहमत हों।
EU के विदेश मंत्री 1–2 सितंबर को आयरलैंड में होने वाली अनौपचारिक “Gymnich” बैठक में इस मुद्दे पर फिर चर्चा कर सकते हैं। यह बैठक प्रतिबंधों पर विचार करने का मंच होगी; वहां स्वतः कोई प्रतिबंध लागू नहीं हो जाएगा।
अब दो बातें अहम होंगी: क्या जर्मनी अपनी कड़ी बयानबाज़ी को बेन-ग्विर को EU प्रतिबंध सूची में शामिल करने के औपचारिक समर्थन में बदलता है, और क्या सभी 27 सरकारें इस पर सहमत होती हैं। हालिया कूटनीतिक रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक से पहले किसी समझौते की संभावना अभी भी कम बताई जा रही थी।