रूसी प्रतिनिधियों ने कहा कि रूस संकट की इस घड़ी में क्यूबा के साथ खड़ा है और समर्थन जारी रखने का इरादा रखता है। क्यूबाई पक्ष ने सहायता के लिए आभार जताया और इसे ऐसे सहयोग के रूप में बताया जो लोगों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने तथा उम्मीद बनाए रखने में मदद करता है।
यह स्थानीय सहायता रूस की व्यापक मानवीय प्रतिबद्धता से अलग है। रूस ने 2026 में क्यूबा की मानवीय परियोजनाओं के लिए विश्व खाद्य कार्यक्रम को 20 लाख डॉलर देने की योजना भी घोषित की थी। रूसी अधिकारियों के अनुसार, 2018 से 2025 के बीच ऐसे कार्यक्रमों के लिए रूस ने 1.8 करोड़ डॉलर का योगदान दिया था।
2–3 अगस्त 2026 को क्यूबा का राष्ट्रीय बिजली ग्रिड पूरी तरह ठप हो गया। यह साल का छठा देशव्यापी ब्लैकआउट था। बिजली बहाल करने की कोशिशों के दौरान ग्रिड दोबारा गिर पड़ा, जिससे बहाली की प्रक्रिया और लंबी हो गई।
क्यूबा का बिजली तंत्र पहले से ही पुराने बिजलीघरों, कमजोर बुनियादी ढांचे, ईंधन की कमी और लंबे समय से कम निवेश की समस्या से दबाव में था। ग्रिड ऑपरेटर ने बहाली के दौरान अस्पतालों और खाद्य उत्पादन केंद्रों जैसी जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता दी, लेकिन सामान्य उपभोक्ताओं तक बिजली की आपूर्ति बेहद सीमित रही।
लंबी कटौती ने रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया। लोगों को खाना पकाने, पानी पंप करने, मोबाइल चार्ज करने, काम करने, सोने और जरूरी खरीदारी तक का समय बिजली आने के छोटे-छोटे अंतराल के हिसाब से तय करना पड़ा। गर्मी से राहत के लिए कुछ लोग रात में घरों से बाहर सोने या बैठने को मजबूर हुए।
ईंधन की कमी ने सार्वजनिक परिवहन और खाद्य पदार्थों की ढुलाई को भी प्रभावित किया। बिजली न होने पर रेफ्रिजरेशन, खाना पकाना, पानी की आपूर्ति और अस्पतालों का संचालन अधिक कठिन हो जाता है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टें इन प्रभावों की पुष्टि करती हैं, वे हर क्षेत्र के लिए पूरे देश का कोई विश्वसनीय, अलग-अलग मात्रात्मक आंकड़ा नहीं देतीं।
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों ने 2026 में संकट के तेज होने को तेल आपूर्ति में प्रभावी रुकावट से जोड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को तेल देने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जिसके बाद द्वीप की ईंधन उपलब्धता पर दबाव बढ़ा।
हालांकि, उपलब्ध स्रोतों में जहाज-दर-जहाज या खेप-दर-खेप तेल आपूर्ति में कमी का स्वतंत्र रूप से सत्यापित, पर्याप्त मजबूत आंकड़ा नहीं है। इसलिए गिरावट की कोई सटीक मात्रा बताना उचित नहीं होगा। क्यूबा अमेरिकी प्रतिबंधों और ईंधन दबाव को संकट का कारण बताता है, जबकि अमेरिका क्यूबा की घरेलू आर्थिक नीतियों और राज्य-प्रबंधित व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराता है।
ऊर्जा संकट के बीच चीन ने क्यूबा को 5,000 फोटोवोल्टिक यानी सौर ऊर्जा सिस्टम की दूसरी खेप दी। इनका इस्तेमाल दूरदराज के ग्रामीण घरों और जरूरी सेवाओं—जैसे स्वास्थ्य केंद्र, आपात चिकित्सा सेवाएं, बच्चों के केंद्र और बैंक शाखाओं—को बिजली उपलब्ध कराने के लिए किया जाना है। यह सहायता क्यूबा की सभी 169 नगरपालिकाओं तक पहुंचाने के उद्देश्य से बताई गई है।
कुछ रिपोर्टों में चीन की सौर ऊर्जा से चलने वाली इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिलों के समर्थन का भी उल्लेख है, जिनका उद्देश्य कम ईंधन में स्थानीय परिवहन उपलब्ध कराना है। लेकिन उपलब्ध सामग्री में इन वाहनों की संख्या और तैनाती का पर्याप्त स्वतंत्र सत्यापन नहीं मिलता।
क्यूबा ने घरेलू और गैर-घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादकों से राष्ट्रीय ग्रिड को दी जाने वाली बिजली के लिए 90 क्यूबाई पेसो प्रति किलोवाट-घंटा (CUP 90/kWh) की निश्चित खरीद दर तय की है। यह दर केवल सौर ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य पात्र नवीकरणीय स्रोतों पर भी लागू होती है।
इसके अलावा, फोटोवोल्टिक सिस्टम और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े अन्य उपकरणों के आयात पर सीमा शुल्क में छूट को 31 दिसंबर 2027 तक बढ़ाया गया है। कर प्रोत्साहनों में स्वच्छ ऊर्जा उपकरण, निवेश और कुछ नवीकरणीय ऊर्जा बिक्री से जुड़े उपाय भी शामिल हैं।
इन कदमों का उद्देश्य तत्काल बिजली कमी से निपटने के साथ-साथ क्यूबा की ऊर्जा व्यवस्था को धीरे-धीरे जीवाश्म ईंधन से हटाकर सौर और अन्य नवीकरणीय स्रोतों की ओर ले जाना है।