ये आंकड़े बाजार की बदलती धारणा को दिखाते हैं, न कि BOJ की गारंटी। फिर भी, जब किसी केंद्रीय बैंक के फैसले से पहले बाजार लगातार 78–81% संभावना को कीमतों में शामिल करने लगे, तो यह संकेत होता है कि निवेशक बढ़ोतरी को सबसे संभावित परिणाम मान रहे हैं।
रॉयटर्स ने तीन ऐसे सूत्रों के हवाले से बताया कि BOJ सितंबर में ही दर बढ़ा सकता है और उसके बाद मौजूदा लगभग साल में दो बढ़ोतरी की गति को तेज करने पर विचार कर रहा है। एक सूत्र के अनुसार, “जल्द दर वृद्धि नजर आने लगी है”—जिससे 17–18 सितंबर की बैठक में कदम उठाने की संभावना का संकेत मिलता है।
यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे औपचारिक नीति घोषणा नहीं समझना चाहिए। अज्ञात सूत्रों से मिली जानकारी केंद्रीय बैंक के भीतर चल रही बहस का संकेत देती है; अंतिम फैसला BOJ के नीति बोर्ड का होगा।
BOJ ने जुलाई के अंत में अपनी नीतिगत दर 1% पर स्थिर रखी। साथ ही, उसने पहली बार संकेत दिया कि अंतर्निहित महंगाई उसके 2% लक्ष्य से ऊपर जा सकती है और भविष्य की नीति चर्चा में कीमतों के ऊपर की ओर बढ़ने वाले जोखिमों पर ध्यान दिया जाएगा।
जुलाई के थोक-मूल्य आंकड़ों ने भी कीमतों के दबाव के व्यापक होने का संकेत दिया। कमजोर येन से आयातित वस्तुएं और ऊर्जा महंगी होती हैं, जिसका असर परिवारों और खुदरा कारोबार पर पड़ता है। ऐसे माहौल में 1% की नाममात्र दर महंगाई को घटाने के लिए पर्याप्त कड़ी नहीं मानी जा सकती—खासकर जब वास्तविक ब्याज दर महंगाई समायोजन के बाद नकारात्मक बनी रहे।
मिजुहो फाइनेंशियल ग्रुप के ग्लोबल मार्केट्स प्रमुख केन्या कोशिमिजु ने कहा है कि सितंबर में दर बढ़ने की संभावना “काफी अधिक” है। उनके अनुसार कमजोर येन और महंगाई BOJ को पहले की अपेक्षा जल्दी कार्रवाई करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
उनके परिदृश्य में साल के अंत तक दो और 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे नीति दर 1.5% तक पहुंच जाएगी। लेकिन यह बाजार विशेषज्ञ का अनुमान है, BOJ का घोषित लक्ष्य नहीं। अलग-अलग विश्लेषकों के अनुमान 1.5% से लेकर 1.75% या 2% से ऊपर तक हैं।
जुलाई के अंत में जापान और अमेरिका की ओर से येन को सहारा देने के लिए किया गया दुर्लभ संयुक्त हस्तक्षेप अधिकारियों की चिंता को रेखांकित करता है। इस कदम से येन कुछ समय के लिए मजबूत हुआ, लेकिन विश्लेषकों ने चेतावनी दी कि केवल विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप से मुद्रा को लंबे समय तक संभालना मुश्किल हो सकता है।
येन करीब 159.20–159.30 प्रति डॉलर के स्तर तक सुधरने के बाद भी 160 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे ही रहा। हस्तक्षेप का असर कमजोर पड़ने और येन के दोबारा 160 की ओर जाने पर बाजार अतिरिक्त कार्रवाई की आशंका देख सकता है।
यही वजह है कि BOJ के सामने दो रास्ते हैं: वह बार-बार मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करे या ब्याज-दर अंतर को कम करने के लिए मौद्रिक नीति को अधिक प्रभावी ढंग से कड़ा करे। अमेरिका और जापान के बीच बड़ा यील्ड अंतर येन की कमजोरी का मुख्य बुनियादी कारण बना हुआ है।
अमेरिकी खुदरा बिक्री में जुलाई के दौरान 0.6% की गिरावट और अपेक्षाकृत नरम महंगाई के बाद बाजार ने तत्काल फेड दर वृद्धि की उम्मीद घटाई। 14 अगस्त के आसपास ट्रेडरों ने सितंबर में फेड वृद्धि की संभावना करीब 31% और दिसंबर तक करीब 69% आंकी।
यदि BOJ सितंबर में दर बढ़ाता है और फेड कुछ समय तक इंतजार करता है, तो दोनों केंद्रीय बैंकों की नीतियों के बीच अपेक्षित अंतर येन के लिए पहले जितना नकारात्मक नहीं रहेगा। हालांकि, अमेरिका-जापान का वास्तविक ब्याज-दर अंतर अब भी काफी बड़ा होगा, इसलिए इससे येन पर दबाव पूरी तरह समाप्त नहीं होगा।
जापान की अप्रैल–जून तिमाही GDP तिमाही आधार पर केवल 0.3% बढ़ी। वार्षिकीकृत वृद्धि 1.1% रही, जबकि बाजार का अनुमान 2.0% था। कमजोर घरेलू खपत और कारोबारी खर्च ने आर्थिक गतिविधि पर दबाव डाला।
सामान्य स्थिति में ऐसा आंकड़ा केंद्रीय बैंक को दर वृद्धि टालने के लिए प्रेरित कर सकता है। लेकिन रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह कमजोरी अकेले सितंबर की बढ़ोतरी की संभावना को खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही। BOJ महंगाई और येन की कमजोरी को भी आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण जोखिम मान सकता है।
BOJ की अंतिम या “टर्मिनल” दर को लेकर अनुमान अलग-अलग हैं। इसका एक कारण जापान की तटस्थ ब्याज दर को लेकर अनिश्चितता है। तटस्थ दर वह स्तर है जिस पर मौद्रिक नीति न तो अर्थव्यवस्था को विशेष प्रोत्साहन देती है और न ही उसे दबाती है।
यदि पूंजीगत निवेश से उत्पादकता में स्थायी सुधार आता है, तो जापान की तटस्थ दर बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में भविष्य की नीति दर भी पहले के अनुमान से ऊपर जा सकती है। कुछ बाहरी विश्लेषकों ने 1.5%–1.75% का लक्ष्य बताया है, जबकि अन्य ने 2% से ऊपर की दर की संभावना जताई है।
फिलहाल उपलब्ध साक्ष्य यह साबित नहीं करते कि BOJ ने 1.5%, 1.75% या 2% से ऊपर की किसी एक टर्मिनल दर पर सहमति बना ली है। इसलिए सितंबर की एक बढ़ोतरी और साल के अंत तक 1.5% की दर—दोनों को निश्चित मानना जल्दबाजी होगी।
दर वृद्धि की तेज गति से जापान के सरकारी बॉन्ड यील्ड और सरकार के ब्याज भुगतान का बोझ बढ़ सकता है। जापान की कमजोर राजकोषीय स्थिति के कारण ऊंची दरें राजनीतिक और वित्तीय रूप से संवेदनशील विषय हैं।
दूसरी ओर, यदि येन फिर 160 या उससे कमजोर स्तर की ओर जाता है, तो सरकार अतिरिक्त हस्तक्षेप कर सकती है। इससे तुरंत दर वृद्धि की जरूरत कुछ कम हो सकती है, लेकिन यदि हस्तक्षेप का असर बार-बार खत्म होता रहा, तो बाजार BOJ से मूल समस्या—अमेरिका-जापान के बड़े यील्ड अंतर—को संबोधित करने की अधिक मांग कर सकता है।
जापानी सरकार के जल्द दर बढ़ाने के प्रति अनुकूल रुख की खबरें भी सामने आई हैं, हालांकि ऐसी रिपोर्टों को आधिकारिक BOJ प्रतिबद्धता नहीं माना जा सकता।
कुल मिलाकर, उपलब्ध साक्ष्य सितंबर में BOJ की दर वृद्धि के पक्ष में झुकते हैं। बाजार की करीब 78–81% प्राइसिंग, रॉयटर्स के सूत्रों की रिपोर्ट, महंगाई का दबाव, कमजोर येन और मिजुहो का आकलन—ये सभी संकेत एक ही दिशा में हैं। इसके बाद तिमाही आधार पर बढ़ोतरी भी संभव है, खासकर यदि महंगाई और मुद्रा पर दबाव बना रहता है।
फिर भी कमजोर GDP, जापान की राजकोषीय स्थिति, संभावित मुद्रा हस्तक्षेप और तटस्थ दर को लेकर अनिश्चितता तेज नीति-चक्र के रास्ते में जोखिम हैं। इसलिए सबसे संतुलित निष्कर्ष यही है: सितंबर की बढ़ोतरी की संभावना मजबूत है, लेकिन न तो यह तय है और न ही साल के अंत तक 1.5% की दर।