गिरावट कुछ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित नहीं रही। सेमीकंडक्टर और टेक शेयरों में व्यापक बिकवाली हुई। इसके बावजूद मर्कारी, शिसीडो और ओत्सुका होल्डिंग्स जैसी कुछ कंपनियां बढ़त दर्ज करने में सफल रहीं।
एशियाई बाजारों को तत्काल नकारात्मक संकेत अमेरिका से मिला। 18 अगस्त को अमेरिका का डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 0.22%, एसएंडपी 500 0.69% और नैस्डैक कंपोजिट 1.33% गिरा। तीनों प्रमुख इंडेक्स लगातार तीसरे सत्र में नुकसान में रहे। इस दौरान पीएचएलएक्स सेमीकंडक्टर इंडेक्स करीब 5% टूट गया।
जापान में इसका असर इसलिए भी अधिक हुआ क्योंकि निवेशकों की बड़ी हिस्सेदारी सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी से जुड़े शेयरों में थी। अमेरिका में चिप शेयरों की बिकवाली शुरू होते ही उसी वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ी जापानी कंपनियों में भी मुनाफावसूली और जोखिम घटाने की कोशिश शुरू हो गई।
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में नुकसान सबसे ज्यादा रहा। क्योक्षिया होल्डिंग्स 12.60% और फुरुकावा इलेक्ट्रिक 13.69% गिर गई। ट्रेडिंगइकोनॉमिक्स ने फुरुकावा इलेक्ट्रिक, सॉफ्टबैंक और फुजिकुरा को भी सत्र की प्रमुख गिरने वाली कंपनियों में शामिल किया।
इस गिरावट के पीछे जरूरी नहीं कि किसी एक कंपनी से जुड़ी नई समस्या हो। जब ब्याज दरें और बॉन्ड यील्ड बढ़ती हैं, तो भविष्य में मिलने वाली कमाई का आज का मूल्य कम हो जाता है। इसलिए ऐसी कंपनियां, जिनकी वैल्यूएशन ऊंची है और जिनकी कमाई का बड़ा हिस्सा भविष्य में आने की उम्मीद होती है, यील्ड बढ़ने पर अधिक संवेदनशील हो जाती हैं।
टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस निवेशों से जुड़ा सॉफ्टबैंक भी इसी कारण दबाव में रहा। नतीजा यह हुआ कि बिकवाली पारंपरिक जापानी उद्योगों तक सीमित न रहकर बाजार के सबसे तेज रफ्तार और ऊंची वैल्यूएशन वाले शेयरों में फैल गई।
30-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड कुछ समय के लिए 5.337% तक पहुंच गई, जो 2007 के बाद का सबसे ऊंचा इंट्राडे स्तर था। इस तेजी को महंगाई, सरकारी उधारी और दुनिया भर में बढ़ती वित्तीय लागत को लेकर चिंता से जोड़ा गया।
बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयर बाजार पर कई तरह का दबाव बनता है:
जापान की लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड भी ऊंचे स्तरों पर बंद हुई। इससे घरेलू शेयरों पर अतिरिक्त दबाव आया और यह समझने में मदद मिलती है कि अमेरिकी बाजार से शुरू हुआ झटका जापान के टेक-प्रधान क्षेत्रों तक इतनी तेजी से क्यों पहुंचा।
भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार की घबराहट और बढ़ा दी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ कोई बातचीत न तो चल रही है और न ही तय है। इसी बीच अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रही और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक जहाज को अज्ञात प्रक्षेप्य से निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई।
यूएई ने भी ईरान के साथ व्यापार, वाणिज्यिक लेनदेन और वित्तीय लेनदेन निलंबित करने की घोषणा की। इससे यह चिंता बढ़ी कि जहाजरानी और ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान लंबे समय तक जारी रह सकता है।
तेल की कीमतों में भी तेजी आई। 17 अगस्त को ब्रेंट क्रूड 90.87 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई 84.50 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। बाद की रिपोर्टों में ब्रेंट करीब 92 डॉलर और डब्ल्यूटीआई 85 डॉलर से ऊपर बताया गया।
निवेशकों के लिए महंगा तेल केवल ईंधन लागत बढ़ने का मामला नहीं है। यदि होर्मुज़ के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो माल ढुलाई, आयात और औद्योगिक कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है। इससे महंगाई फिर तेज होने और केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना कठिन होने की आशंका पैदा होती है।
बढ़ती बॉन्ड यील्ड, महंगा तेल और लगातार महंगाई की चिंता ऐसे समय सामने आई जब बाजार फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स और जैक्सन होल संगोष्ठी का इंतजार कर रहा था। इन घटनाओं से निवेशक यह समझना चाहते थे कि महंगाई और उधारी लागत में हालिया बढ़ोतरी भविष्य की मौद्रिक नीति को किस तरह प्रभावित कर सकती है।
यदि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो लंबी अवधि की कमाई पर निर्भर टेक कंपनियों की वैल्यूएशन पर दबाव बना रह सकता है। इस तरह अमेरिकी चिप शेयरों की गिरावट और बॉन्ड यील्ड में उछाल ने एक-दूसरे को मजबूत किया: टेक शेयरों में नुकसान से जोखिम लेने की इच्छा घटी, जबकि ऊंची यील्ड ने उन शेयरों को पहले के स्तरों पर महंगा बना दिया।
यही दबाव अन्य टेक-प्रधान बाजारों में भी दिखाई दिया। दक्षिण कोरिया की मेमोरी-चिप कंपनियां एसके हाइनिक्स और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स करीब 7% गिर गईं। भारत में सेंसेक्स और निफ्टी 50 की गिरावट जारी रही और निफ्टी लगातार सातवें सत्र में नुकसान में रहा।
भारत से 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के करीब 25 अरब डॉलर के बहिर्वाह का आंकड़ा उपलब्ध साक्ष्यों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं होता, इसलिए इसे सावधानी से देखना चाहिए। हालांकि व्यापक तस्वीर स्पष्ट थी: बढ़ती यील्ड, महंगी ऊर्जा, भू-राजनीतिक जोखिम और टेक शेयरों में ऊंची वैल्यूएशन के बीच निवेशक जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी बना रहे थे।
19 अगस्त की जापानी बाजार गिरावट मुख्य रूप से जापान-विशेष संकट नहीं, बल्कि वैश्विक बाजारों में जोखिम का एक साथ दोबारा आकलन थी। वॉल स्ट्रीट में सेमीकंडक्टर शेयरों की बिकवाली ने नकारात्मक माहौल बनाया। लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड बढ़ने से महंगे ग्रोथ शेयरों पर दबाव और बढ़ा। इसके बाद ईरान, होर्मुज़ और तेल आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं ने महंगाई का जोखिम फिर सामने ला दिया।
इसी वजह से क्योक्षिया और फुरुकावा इलेक्ट्रिक जैसी चिप-लिंक्ड कंपनियों में बाजार की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। जब वैश्विक निवेशक ऊंची वैल्यूएशन वाले टेक शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटाते हैं, तो जापान के सेमीकंडक्टर और एआई से जुड़े शेयर अक्सर उस बिकवाली का शुरुआती और तेज असर दिखाते हैं।