ट्रेजरी यील्ड में गिरावट: अमेरिकी बॉन्ड बाजार में बिकवाली थमने और हालिया ऊंचाई से यील्ड घटने के कारण डॉलर की ब्याज-दर बढ़त कम हुई। 10-वर्षीय और 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड को बाजार अमेरिकी आर्थिक वृद्धि, महंगाई और सरकार की दीर्घकालिक उधारी की उम्मीदों के संकेतक के रूप में देखता है। 19 अगस्त को 10-वर्षीय यील्ड 4.702% और 30-वर्षीय यील्ड 5.282% बताई गई। ऐसे में यील्ड में गिरावट डॉलर रखने की आकर्षकता को कम कर सकती है।
प्रमुख मुद्राओं में हलचल: यूरो 1.1614 डॉलर के दो महीने के उच्च स्तर तक पहुंचा और इसके बाद भी उसी के आसपास बना रहा। पाउंड भी तीन महीने के उच्च स्तर के करीब रहा। येन करीब 160 येन प्रति डॉलर के स्तर पर रहा, जबकि बाजार का ध्यान अगले महीने होने वाली बैंक ऑफ जापान की बैठक पर भी था। डॉलर स्विस फ्रैंक के मुकाबले भी कमजोर हुआ।
सितंबर में फेड की दर बढ़ोतरी की उम्मीद घटी: जुलाई में अमेरिकी अर्थव्यवस्था से अप्रत्याशित रूप से 23,000 नौकरियां कम हुईं। इसके बाद जुलाई की खुदरा बिक्री 0.6% घट गई, जबकि जून में इसमें 0.2% की बढ़त हुई थी। नरम महंगाई और उत्पादक कीमतों के आंकड़ों ने भी दर बढ़ाने के पक्ष को कमजोर किया। बाजार ने सितंबर की 25 बेसिस प्वाइंट दर बढ़ोतरी की संभावना करीब 31% आंकी, जबकि दिसंबर तक बढ़ोतरी की संभावना 69% बताई गई।
‘लॉन्ग-डॉलर’ पोजीशन का बंद होना: जिन निवेशकों ने फेड की सख्त नीति की उम्मीद में डॉलर खरीदे थे, उन्होंने दर बढ़ोतरी की संभावना घटते ही अपनी पोजीशन कम करनी शुरू कर दी। अमेरिकी आर्थिक वृद्धि की रफ्तार को लेकर चिंता ने इस बिकवाली को और तेज किया।
तत्काल नजरिए से डॉलर के लिए माहौल मंदी वाला या कम-से-कम सतर्क दिख रहा था, क्योंकि बाजार कमजोर आंकड़ों के बाद फेड की अपेक्षाकृत नरम प्रतिक्रिया को कीमतों में शामिल कर रहा था। हालांकि इसे डॉलर के लिए पूरी तरह नकारात्मक संकेत नहीं माना जा सकता। महंगाई का भविष्य, फेड की वास्तविक नीति प्रतिक्रिया, वैश्विक आर्थिक वृद्धि और लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी कर्ज की जरूरतें बाजार में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकती हैं।
अमेरिका-ईरान संघर्ष में बढ़ोतरी का असर डॉलर पर दो दिशाओं में पड़ा। जब हमलों से मध्य-पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन को खतरा बढ़ा, तो तेल की कीमतें चढ़ीं। इससे महंगाई का जोखिम बढ़ने और फेड के सख्त रुख की संभावना के कारण डॉलर तथा अन्य सुरक्षित परिसंपत्तियों—जिन्हें बाजार में ‘सेफ-हेवन’ कहा जाता है—को अस्थायी समर्थन मिल सकता है।
इसके उलट, तनाव कम होने की उम्मीद और अमेरिका-ईरान के बीच समझौता ज्ञापन की खबरों ने तेल वायदा कीमतों और निकट अवधि की महंगाई-अपेक्षाओं को नीचे धकेला। इससे फेड के लिए ब्याज दर बढ़ाने का एक प्रमुख तर्क कमजोर हुआ।
इसलिए भू-राजनीतिक घटनाओं का असर सीधा नहीं रहा: तनाव बढ़ने पर तेल और सुरक्षित परिसंपत्तियों की मांग डॉलर को सहारा दे सकती है, लेकिन तनाव कम होने पर तेल और महंगाई की उम्मीदें घट सकती हैं, जिससे दर बढ़ोतरी का आधार कमजोर पड़ता है।
फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के मिनट्स यह संकेत दे सकते हैं कि अधिकारी महंगाई को लेकर कितने चिंतित हैं और वे कमजोर आर्थिक गतिविधि तथा महंगाई के जोखिम के बीच संतुलन कैसे देख रहे हैं। खासतौर पर जुलाई की बैठक में तत्काल दर बढ़ाने के पक्ष में मत देने वाले तीन अधिकारियों की भूमिका पर बाजार की नजर रहेगी।
यदि मिनट्स से पता चलता है कि ये तीनों अधिकारी व्यापक रूप से मौजूद ‘हॉकिश’ यानी सख्त नीति समर्थक धड़े का हिस्सा थे, तो ट्रेजरी यील्ड और डॉलर को समर्थन मिल सकता है। लेकिन अगर अधिकांश अधिकारी धीमी पड़ती वृद्धि को प्राथमिक चिंता मानते हैं या महंगाई के जोखिम को कम होता देखते हैं, तो सितंबर में दर बढ़ोतरी की घटती बाजार-उम्मीदों को बल मिलेगा।
ट्रेजरी यील्ड में गिरावट: अमेरिकी बॉन्ड बाजार में बिकवाली थमने और हालिया ऊंचाई से यील्ड घटने के कारण डॉलर की ब्याज-दर बढ़त कम हुई। 10-वर्षीय और 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड को बाजार अमेरिकी आर्थिक वृद्धि, महंगाई और सरकार की दीर्घकालिक उधारी की उम्मीदों के संकेतक के रूप में देखता है। 19 अगस्त को 10-वर्षीय यील्ड 4.702% और 30-वर्षीय यील्ड 5.282% बताई गई। ऐसे में यील्ड में गिरावट डॉलर रखने की आकर्षकता को कम कर सकती है।
प्रमुख मुद्राओं में हलचल: यूरो 1.1614 डॉलर के दो महीने के उच्च स्तर तक पहुंचा और इसके बाद भी उसी के आसपास बना रहा। पाउंड भी तीन महीने के उच्च स्तर के करीब रहा। येन करीब 160 येन प्रति डॉलर के स्तर पर रहा, जबकि बाजार का ध्यान अगले महीने होने वाली बैंक ऑफ जापान की बैठक पर भी था। डॉलर स्विस फ्रैंक के मुकाबले भी कमजोर हुआ।
सितंबर में फेड की दर बढ़ोतरी की उम्मीद घटी: जुलाई में अमेरिकी अर्थव्यवस्था से अप्रत्याशित रूप से 23,000 नौकरियां कम हुईं। इसके बाद जुलाई की खुदरा बिक्री 0.6% घट गई, जबकि जून में इसमें 0.2% की बढ़त हुई थी। नरम महंगाई और उत्पादक कीमतों के आंकड़ों ने भी दर बढ़ाने के पक्ष को कमजोर किया। बाजार ने सितंबर की 25 बेसिस प्वाइंट दर बढ़ोतरी की संभावना करीब 31% आंकी, जबकि दिसंबर तक बढ़ोतरी की संभावना 69% बताई गई।
‘लॉन्ग-डॉलर’ पोजीशन का बंद होना: जिन निवेशकों ने फेड की सख्त नीति की उम्मीद में डॉलर खरीदे थे, उन्होंने दर बढ़ोतरी की संभावना घटते ही अपनी पोजीशन कम करनी शुरू कर दी। अमेरिकी आर्थिक वृद्धि की रफ्तार को लेकर चिंता ने इस बिकवाली को और तेज किया।
तत्काल नजरिए से डॉलर के लिए माहौल मंदी वाला या कम-से-कम सतर्क दिख रहा था, क्योंकि बाजार कमजोर आंकड़ों के बाद फेड की अपेक्षाकृत नरम प्रतिक्रिया को कीमतों में शामिल कर रहा था। हालांकि इसे डॉलर के लिए पूरी तरह नकारात्मक संकेत नहीं माना जा सकता। महंगाई का भविष्य, फेड की वास्तविक नीति प्रतिक्रिया, वैश्विक आर्थिक वृद्धि और लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी कर्ज की जरूरतें बाजार में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकती हैं।
अमेरिका-ईरान संघर्ष में बढ़ोतरी का असर डॉलर पर दो दिशाओं में पड़ा। जब हमलों से मध्य-पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन को खतरा बढ़ा, तो तेल की कीमतें चढ़ीं। इससे महंगाई का जोखिम बढ़ने और फेड के सख्त रुख की संभावना के कारण डॉलर तथा अन्य सुरक्षित परिसंपत्तियों—जिन्हें बाजार में ‘सेफ-हेवन’ कहा जाता है—को अस्थायी समर्थन मिल सकता है।
इसके उलट, तनाव कम होने की उम्मीद और अमेरिका-ईरान के बीच समझौता ज्ञापन की खबरों ने तेल वायदा कीमतों और निकट अवधि की महंगाई-अपेक्षाओं को नीचे धकेला। इससे फेड के लिए ब्याज दर बढ़ाने का एक प्रमुख तर्क कमजोर हुआ।
इसलिए भू-राजनीतिक घटनाओं का असर सीधा नहीं रहा: तनाव बढ़ने पर तेल और सुरक्षित परिसंपत्तियों की मांग डॉलर को सहारा दे सकती है, लेकिन तनाव कम होने पर तेल और महंगाई की उम्मीदें घट सकती हैं, जिससे दर बढ़ोतरी का आधार कमजोर पड़ता है।
फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के मिनट्स यह संकेत दे सकते हैं कि अधिकारी महंगाई को लेकर कितने चिंतित हैं और वे कमजोर आर्थिक गतिविधि तथा महंगाई के जोखिम के बीच संतुलन कैसे देख रहे हैं। खासतौर पर जुलाई की बैठक में तत्काल दर बढ़ाने के पक्ष में मत देने वाले तीन अधिकारियों की भूमिका पर बाजार की नजर रहेगी।
यदि मिनट्स से पता चलता है कि ये तीनों अधिकारी व्यापक रूप से मौजूद ‘हॉकिश’ यानी सख्त नीति समर्थक धड़े का हिस्सा थे, तो ट्रेजरी यील्ड और डॉलर को समर्थन मिल सकता है। लेकिन अगर अधिकांश अधिकारी धीमी पड़ती वृद्धि को प्राथमिक चिंता मानते हैं या महंगाई के जोखिम को कम होता देखते हैं, तो सितंबर में दर बढ़ोतरी की घटती बाजार-उम्मीदों को बल मिलेगा।