हालांकि, ईरान ने मिसाइल दागने से इनकार किया है। इसलिए हमले की जिम्मेदारी और उसके उद्देश्य को लेकर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यूएई के अनुसार, उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने ईरानी क्षेत्र से छोड़ी गईं दो बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाया। यह घटनाक्रम रात करीब 9 बजे हुआ। अबू धाबी का आकलन था कि मिसाइलें जमीन पर मौजूद लक्ष्यों के बजाय समुद्री यातायात को निशाना बना रही थीं। एक मिसाइल यूएई के क्षेत्रीय जल में गिरी, जबकि दूसरी अंतरराष्ट्रीय जल में जा गिरी।
यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि इससे पहले आरोप मुख्य रूप से होरमुज़ जलडमरूमध्य से गुजर रहे जहाजों पर हमलों तक सीमित थे। मिसाइलों का यूएई के पास या उसके क्षेत्रीय जल में पहुंचना, अबू धाबी की नजर में, सीधे अमीराती सुरक्षा को चुनौती देने वाला अगला चरण था।
मिसाइल घटना से पहले यूएई ने आरोप लगाया था कि ईरानी बलों ने होरमुज़ से गुजर रहे उसकी सरकारी ऊर्जा कंपनी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) से जुड़े कम-से-कम तीन जहाजों को निशाना बनाया। इनमें एक कथित मिसाइल हमला और बाद में दो टैंकरों पर कथित ड्रोन हमले शामिल थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इन घटनाओं में कोई हताहत नहीं हुआ।
इन हमलों के बाद यूएई ने इन्हें समुद्री डकैती जैसे कृत्य बताया और ईरान से शत्रुतापूर्ण गतिविधियां रोकने तथा जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की मांग की।
ऐसे माहौल में आर्थिक संबंध रोकना यूएई के लिए दोहरा संदेश था: यह एक दंडात्मक कदम भी था और यह संकेत भी कि जहाजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बने रहने के दौरान ईरान के साथ सामान्य कारोबारी संबंध जारी रखना स्वीकार्य नहीं है।
होरमुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ने वाला प्रमुख समुद्री मार्ग है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के बड़े हिस्से के लिए यह रास्ता बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए यहां जहाजों पर हमले या आवाजाही में रुकावट का असर ऊर्जा बाजार और वैश्विक आपूर्ति पर पड़ सकता है।
हाल के दिनों में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या काफी कम हो गई। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह पंजीकृत आवाजाही 19.5% घटकर 95 पारगमन रह गई, जबकि रविवार को केवल तीन जहाज इस जलमार्ग से गुजरे। इसका अर्थ है कि प्रभावी रूप से मार्ग पर रोक केवल आधिकारिक प्रतिबंधों से नहीं, बल्कि बीमा कंपनियों, जहाज मालिकों और चालक दल के हमले के डर से भी बनी।
ईरान और ओमान नए समुद्री मार्गों को लेकर बातचीत कर रहे थे। दोनों पक्षों ने संकेत दिया था कि समझौता करीब है, लेकिन ईरान ने स्पष्ट किया कि ओमान के साथ अकेला समझौता होरमुज़ को तुरंत नहीं खोलेगा।
तेहरान ने जलमार्ग खोलने के लिए अमेरिका से कई अतिरिक्त कदमों की मांग की, जिनमें अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और प्रतिबंध हटाना, क्षेत्र से अमेरिकी बलों की वापसी तथा युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा शामिल था।
इससे तनाव कम करने की कोशिशें अटक गईं। जून में हुए समझौता ज्ञापन में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और 60 दिनों के लिए वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की बात थी, लेकिन यह स्थायी समाधान साबित नहीं हुआ।
यह पूरा घटनाक्रम पांच महीने से चल रहे अमेरिका-ईरान युद्ध और होरमुज़ में बाधित नौवहन की पृष्ठभूमि में हुआ। वॉशिंगटन ने कहा कि ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही थी, जबकि ईरान ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी कि अमेरिकी सैन्य अभियानों में मदद या सुविधा देना उन्हें संघर्ष का पक्ष बना सकता है।
ओमान की स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील रही। वह ईरान के साथ मध्यस्थता कर रहा था और साथ ही यूएई की सुरक्षा चिंताओं के साथ तालमेल भी कर रहा था। सऊदी अरब और अन्य सुन्नी-बहुल देश संयुक्त समुद्री रक्षा व्यवस्था की दिशा में बढ़ रहे थे, जिससे संकेत मिलता है कि उन्हें डर है कि अलग-अलग टैंकर हमले पूरे खाड़ी क्षेत्र के सामूहिक सुरक्षा संकट में बदल सकते हैं।
यूएई का व्यापारिक और वित्तीय प्रतिबंध कथित मिसाइल हमले को अलग-थलग घटना के रूप में नहीं, बल्कि ADNOC से जुड़े जहाजों पर हमलों और होरमुज़ में बढ़ते समुद्री खतरे की श्रृंखला के हिस्से के रूप में देखने का परिणाम था। अबू धाबी के लिए यह अपनी सुरक्षा और समुद्री व्यापार की रक्षा का कदम था।
फिर भी, मिसाइल हमले की जिम्मेदारी विवादित है क्योंकि ईरान ने इसमें शामिल होने से इनकार किया है। इसी तरह, कुछ अन्य दावे—जैसे निशाना बनाए गए जहाजों की संख्या, प्रतिदिन जहाजों की सटीक तुलना, अन्य जहाजों पर मौतों और चोटों के आंकड़े तथा क़ेश्म द्वीप के पास टैंकर हिरासत में लिए जाने का विवरण—यहां उपलब्ध सबसे मजबूत स्रोतों से स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हैं। इन्हें स्थापित तथ्यों के बजाय रिपोर्ट किए गए दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
हालांकि, ईरान ने मिसाइल दागने से इनकार किया है। इसलिए हमले की जिम्मेदारी और उसके उद्देश्य को लेकर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यूएई के अनुसार, उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने ईरानी क्षेत्र से छोड़ी गईं दो बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाया। यह घटनाक्रम रात करीब 9 बजे हुआ। अबू धाबी का आकलन था कि मिसाइलें जमीन पर मौजूद लक्ष्यों के बजाय समुद्री यातायात को निशाना बना रही थीं। एक मिसाइल यूएई के क्षेत्रीय जल में गिरी, जबकि दूसरी अंतरराष्ट्रीय जल में जा गिरी।
यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि इससे पहले आरोप मुख्य रूप से होरमुज़ जलडमरूमध्य से गुजर रहे जहाजों पर हमलों तक सीमित थे। मिसाइलों का यूएई के पास या उसके क्षेत्रीय जल में पहुंचना, अबू धाबी की नजर में, सीधे अमीराती सुरक्षा को चुनौती देने वाला अगला चरण था।
मिसाइल घटना से पहले यूएई ने आरोप लगाया था कि ईरानी बलों ने होरमुज़ से गुजर रहे उसकी सरकारी ऊर्जा कंपनी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) से जुड़े कम-से-कम तीन जहाजों को निशाना बनाया। इनमें एक कथित मिसाइल हमला और बाद में दो टैंकरों पर कथित ड्रोन हमले शामिल थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इन घटनाओं में कोई हताहत नहीं हुआ।
इन हमलों के बाद यूएई ने इन्हें समुद्री डकैती जैसे कृत्य बताया और ईरान से शत्रुतापूर्ण गतिविधियां रोकने तथा जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की मांग की।
ऐसे माहौल में आर्थिक संबंध रोकना यूएई के लिए दोहरा संदेश था: यह एक दंडात्मक कदम भी था और यह संकेत भी कि जहाजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बने रहने के दौरान ईरान के साथ सामान्य कारोबारी संबंध जारी रखना स्वीकार्य नहीं है।
होरमुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ने वाला प्रमुख समुद्री मार्ग है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के बड़े हिस्से के लिए यह रास्ता बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए यहां जहाजों पर हमले या आवाजाही में रुकावट का असर ऊर्जा बाजार और वैश्विक आपूर्ति पर पड़ सकता है।
हाल के दिनों में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या काफी कम हो गई। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह पंजीकृत आवाजाही 19.5% घटकर 95 पारगमन रह गई, जबकि रविवार को केवल तीन जहाज इस जलमार्ग से गुजरे। इसका अर्थ है कि प्रभावी रूप से मार्ग पर रोक केवल आधिकारिक प्रतिबंधों से नहीं, बल्कि बीमा कंपनियों, जहाज मालिकों और चालक दल के हमले के डर से भी बनी।
ईरान और ओमान नए समुद्री मार्गों को लेकर बातचीत कर रहे थे। दोनों पक्षों ने संकेत दिया था कि समझौता करीब है, लेकिन ईरान ने स्पष्ट किया कि ओमान के साथ अकेला समझौता होरमुज़ को तुरंत नहीं खोलेगा।
तेहरान ने जलमार्ग खोलने के लिए अमेरिका से कई अतिरिक्त कदमों की मांग की, जिनमें अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और प्रतिबंध हटाना, क्षेत्र से अमेरिकी बलों की वापसी तथा युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा शामिल था।
इससे तनाव कम करने की कोशिशें अटक गईं। जून में हुए समझौता ज्ञापन में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और 60 दिनों के लिए वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की बात थी, लेकिन यह स्थायी समाधान साबित नहीं हुआ।
यह पूरा घटनाक्रम पांच महीने से चल रहे अमेरिका-ईरान युद्ध और होरमुज़ में बाधित नौवहन की पृष्ठभूमि में हुआ। वॉशिंगटन ने कहा कि ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही थी, जबकि ईरान ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी कि अमेरिकी सैन्य अभियानों में मदद या सुविधा देना उन्हें संघर्ष का पक्ष बना सकता है।
ओमान की स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील रही। वह ईरान के साथ मध्यस्थता कर रहा था और साथ ही यूएई की सुरक्षा चिंताओं के साथ तालमेल भी कर रहा था। सऊदी अरब और अन्य सुन्नी-बहुल देश संयुक्त समुद्री रक्षा व्यवस्था की दिशा में बढ़ रहे थे, जिससे संकेत मिलता है कि उन्हें डर है कि अलग-अलग टैंकर हमले पूरे खाड़ी क्षेत्र के सामूहिक सुरक्षा संकट में बदल सकते हैं।
यूएई का व्यापारिक और वित्तीय प्रतिबंध कथित मिसाइल हमले को अलग-थलग घटना के रूप में नहीं, बल्कि ADNOC से जुड़े जहाजों पर हमलों और होरमुज़ में बढ़ते समुद्री खतरे की श्रृंखला के हिस्से के रूप में देखने का परिणाम था। अबू धाबी के लिए यह अपनी सुरक्षा और समुद्री व्यापार की रक्षा का कदम था।
फिर भी, मिसाइल हमले की जिम्मेदारी विवादित है क्योंकि ईरान ने इसमें शामिल होने से इनकार किया है। इसी तरह, कुछ अन्य दावे—जैसे निशाना बनाए गए जहाजों की संख्या, प्रतिदिन जहाजों की सटीक तुलना, अन्य जहाजों पर मौतों और चोटों के आंकड़े तथा क़ेश्म द्वीप के पास टैंकर हिरासत में लिए जाने का विवरण—यहां उपलब्ध सबसे मजबूत स्रोतों से स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हैं। इन्हें स्थापित तथ्यों के बजाय रिपोर्ट किए गए दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।