हालिया बदलाव से पहले ईरानी हमलों और मांगों के कारण यातायात में तेज गिरावट आई थी। बीबीसी द्वारा उद्धृत Kpler के आँकड़ों के अनुसार, एक बुधवार को केवल 23 टैंकर और मालवाहक जहाज़ जलडमरूमध्य से गुजरे, जबकि एक सप्ताह पहले यह संख्या 47 थी। अन्य दिनों में स्थिति और भी खराब रही: रॉयटर्स के अनुसार, 17 जुलाई को केवल तीन कमोडिटी जहाज़ों ने हॉर्मुज़ पार किया, जबकि एक अन्य रिपोर्ट में टैंकर यातायात को लगभग बंद बताया गया।
इसलिए ओमान वाले मार्ग पर 80% से अधिक जहाज़ों का जाना सामान्य स्थिति की वापसी नहीं, बल्कि संकट के बीच कारोबार के टिके रहने का संकेत है। वाणिज्यिक ऑपरेटर उस मार्ग को चुन रहे हैं जिसका ईरान विरोध करता है और जिसे उसने निशाना भी बनाया है—संभवतः इसलिए कि अमेरिकी नौसैनिक सुरक्षा ने इसे व्यावहारिक विकल्प बनाए रखा है। CNN के विश्लेषण के अनुसार, ओमान की ओर से जाने की कोशिश करने वाले दर्जनों जहाज़ों पर ईरान ने हमला किया, जबकि अमेरिका इस जलमार्ग में गश्त कर रहा है।
यह अंतर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “पूरे नियंत्रण” के दावे को समझने में महत्वपूर्ण है। उपलब्ध साक्ष्य एक सीमित निष्कर्ष का समर्थन करते हैं: अमेरिकी सैन्य गतिविधि ने कुछ जहाज़ों को चलते रहने में मदद की और ईरान की मार्ग तय करने की क्षमता घटाई, लेकिन हमले खत्म नहीं हुए और यातायात सामान्य स्तर पर नहीं लौटा। 18 अगस्त को पाँच दिनों का औसत यातायात केवल 10 क्रॉसिंग बताया गया, जबकि ट्रंप ने कहा कि जलडमरूमध्य “खुला और संचालित” है।
ईरान को प्रभाव डालने के लिए हर जहाज़ को रोकना जरूरी नहीं है। धमकियाँ, हमले, निरीक्षण, देरी, मार्ग संबंधी आदेश और बीमा को लेकर अनिश्चितता किसी यात्रा को व्यावसायिक रूप से नुकसानदेह बना सकते हैं। जुलाई में एक क़तरी LNG टैंकर और एक सऊदी कच्चे तेल के टैंकर पर हमलों के बाद समुद्री अधिकारियों ने खतरे का स्तर “गंभीर” कर दिया था।
ओमान वाले मार्ग की लोकप्रियता बढ़ने के बावजूद हमले जारी रहे। संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि अगस्त में हॉर्मुज़ से गुजरते समय ADNOC द्वारा संचालित दो टैंकरों पर हमला किया गया। इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन इससे जलमार्ग का इस्तेमाल करने वाले जहाज़ों के सामने मौजूद जोखिम फिर उजागर हुआ।
नतीजा यह है कि हॉर्मुज़ को केवल “खुला” या “बंद” कहना वास्तविक स्थिति को नहीं बताता। कुछ जहाज़ खुले तौर पर गुजर रहे हैं, कुछ रास्ता बदल रहे हैं या वापस लौट रहे हैं, और कुछ अपनी ट्रैकिंग प्रणालियाँ बंद कर रहे हैं। इसलिए दिखाई देने वाला यातायात कुल आवाजाही का अधूरा संकेत है।
किसी मार्ग का चालू होना अपने-आप तेल की आपूर्ति को सामान्य स्तर पर नहीं लाता। उपलब्ध रिपोर्टिंग के अनुसार, खाड़ी से तेल का मौजूदा प्रवाह लगभग 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन है, जबकि युद्ध से पहले यह करीब 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन बताया गया था। मौजूदा प्रवाह का अनुमान CNBC द्वारा उद्धृत अमेरिकी ऊर्जा विभाग के आँकड़ों में भी मिलता है, हालांकि खाड़ी से वास्तव में बाहर निकलने वाले तेल की मात्रा पर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग अनुमान हैं।
यह अनिश्चितता भी महत्वपूर्ण है। जहाज़ों की निगरानी प्रणालियाँ उन “डार्क” टैंकरों को नहीं पकड़ पातीं जिनके ट्रांसपोंडर बंद होते हैं। इसके अलावा सुरक्षा देरी, बीमा प्रतिबंध, टैंकरों की उपलब्धता और जहाज़-से-जहाज़ तेल हस्तांतरण के कारण वास्तविक तेल प्रवाह की तुलना दिखाई देने वाली आवाजाही से करना कठिन हो जाता है।
व्यावहारिक निष्कर्ष यह है कि हॉर्मुज़ इतना खुला हो सकता है कि तेल का कुछ प्रवाह जारी रहे, लेकिन इतना भरोसेमंद नहीं कि युद्ध-पूर्व आपूर्ति व्यवस्था पर विश्वास लौट आए। कुछ सफल यात्राएँ यह साबित नहीं करतीं कि सप्लाई चेन सामान्य हो गई है।
तेहरान ने ओमान के साथ ऐसा मार्ग समझौता करने की कोशिश की है, जिसमें खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाज़ों के प्रबंधन में ईरान की औपचारिक भूमिका हो। रॉयटर्स के अनुसार, ईरानी प्रस्ताव में माल के मूल्य का 5% से 7% तक शुल्क लेने की बात थी। उद्योग जगत के सूत्रों ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों और बीमा पाबंदियों के कारण इस मॉडल को लागू करना कठिन होगा।
ओमान का प्रस्ताव इससे अलग है। वह नौवहन, पर्यावरण सुरक्षा, खोज एवं बचाव तथा संबंधित सेवाओं के लिए एक संयुक्त क्षेत्रीय व्यवस्था चाहता है, जिसमें शुल्क अनिवार्य के बजाय स्वैच्छिक हों। रॉयटर्स ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून तटीय देशों को केवल गुजरने की अनुमति देने के बदले शुल्क मांगने की इजाजत नहीं देता, हालांकि विशिष्ट सेवाओं के लिए शुल्क का मामला अलग हो सकता है।
ईरान और ओमान ने कहा है कि वे मार्ग या “शिपिंग मैप” पर समझौते के करीब हैं और ईरानी अधिकारियों ने निर्देशांकों पर सहमति की बात कही है। लेकिन सार्वजनिक रिपोर्टिंग से यह साबित नहीं होता कि अंतिम और संचालन योग्य व्यवस्था लागू हो चुकी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि मार्ग को अधिकृत करने और शुल्क वसूलने का अधिकार किसके पास होगा।
मार्ग संबंधी आँकड़े इस विवाद का महत्व साफ करते हैं: यदि अधिकांश जहाज़ ईरान की पसंद वाले गलियारे से बचते हैं, तो तेहरान के पास पारगमन शुल्क वसूलने की व्यावहारिक क्षमता कम हो जाती है।
ऊर्जा कंपनियाँ पूरी तरह स्थिर स्थिति लौटने का इंतजार करने के बजाय जोखिम के अनुरूप अपनी रणनीति बदल रही हैं। सऊदी अरामको ने ओमान के पास जहाज़-से-जहाज़ हस्तांतरण के जरिए Arab Medium और Arab Heavy कच्चा तेल उपलब्ध कराने की पेशकश की है। इससे माल को यात्रा के सबसे जोखिमपूर्ण हिस्से से आगे ले जाना संभव हो सकता है।
लेकिन ऐसी व्यवस्था जटिलता बढ़ाती है। इसके लिए अतिरिक्त समन्वय, जहाज़ और बीमा चाहिए, जिससे माल ढुलाई और हैंडलिंग लागत बढ़ सकती है। जब जहाज़ अपनी स्थिति सार्वजनिक रूप से प्रसारित नहीं करते, तब पूरी सप्लाई चेन पर नजर रखना भी कठिन हो जाता है।
इराक ने अलग रास्ता अपनाने की कोशिश की है। उसकी सरकारी तेल विपणन कंपनी SOMO ने कथित तौर पर अमेरिकी और जर्मन शिपिंग कंपनियों से इराकी झंडे वाले टैंकरों के जरिए हॉर्मुज़ से कच्चा तेल ले जाने पर बातचीत की। यह प्रयास बगदाद की राजनीतिक रूप से स्वीकार्य रास्ता सुरक्षित करने की कोशिश दिखाता है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टिंग यह स्थापित नहीं करती कि कोई स्थायी समझौता या सफल निर्यात व्यवस्था पूरी हो चुकी है।
सबसे गंभीर खतरा जरूरी नहीं कि जलडमरूमध्य का हमेशा के लिए भौतिक रूप से बंद हो जाना हो। बड़ा जोखिम एक ऐसे सैन्यीकृत जलमार्ग का है, जहाँ यातायात फिर शुरू हो और किसी नए हमले, समुद्री खदान की घटना, मार्ग शुल्क को लेकर विवाद या ईरान-ओमान वार्ता टूटने के बाद दोबारा ढह जाए। यातायात के आँकड़े दिखाते हैं कि लड़ाई बढ़ते ही वाणिज्यिक ऑपरेटर कितनी तेजी से अपना व्यवहार बदलते हैं।
ऐसी अस्थिरता से माल ढुलाई दरें, युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम, सुरक्षा खर्च और ट्रांसशिपमेंट लागत बढ़ सकती है। इससे तेल और LNG की आपूर्ति की विश्वसनीयता प्रभावित होगी और यह खतरा भी बढ़ेगा कि किसी वाणिज्यिक जहाज़ से जुड़ी घटना व्यापक क्षेत्रीय टकराव को जन्म दे।
इसलिए ओमान वाले मार्ग का बहुमत किसी एक पक्ष के “पूरे नियंत्रण” का प्रमाण नहीं, बल्कि नियंत्रण में बदलाव का पैमाना है। ईरान की ओर से खतरा पैदा करने की क्षमता अब भी वास्तविक है। लेकिन ईरान के विरोध के बावजूद अधिकांश ट्रैक किए गए जहाज़ों का वैकल्पिक मार्ग चुनना बताता है कि तेहरान की यह क्षमता कमजोर हुई है कि वह तय करे कि वाणिज्यिक जहाज़ हॉर्मुज़ का इस्तेमाल कैसे करें। अमेरिकी नौसैनिक सुरक्षा ने यह रास्ता खोलने में मदद की है, लेकिन इसे स्थायी सामान्य स्थिति में बदलने के लिए एक विश्वसनीय और टिकाऊ क्षेत्रीय समझौता जरूरी होगा।
हालिया बदलाव से पहले ईरानी हमलों और मांगों के कारण यातायात में तेज गिरावट आई थी। बीबीसी द्वारा उद्धृत Kpler के आँकड़ों के अनुसार, एक बुधवार को केवल 23 टैंकर और मालवाहक जहाज़ जलडमरूमध्य से गुजरे, जबकि एक सप्ताह पहले यह संख्या 47 थी। अन्य दिनों में स्थिति और भी खराब रही: रॉयटर्स के अनुसार, 17 जुलाई को केवल तीन कमोडिटी जहाज़ों ने हॉर्मुज़ पार किया, जबकि एक अन्य रिपोर्ट में टैंकर यातायात को लगभग बंद बताया गया।
इसलिए ओमान वाले मार्ग पर 80% से अधिक जहाज़ों का जाना सामान्य स्थिति की वापसी नहीं, बल्कि संकट के बीच कारोबार के टिके रहने का संकेत है। वाणिज्यिक ऑपरेटर उस मार्ग को चुन रहे हैं जिसका ईरान विरोध करता है और जिसे उसने निशाना भी बनाया है—संभवतः इसलिए कि अमेरिकी नौसैनिक सुरक्षा ने इसे व्यावहारिक विकल्प बनाए रखा है। CNN के विश्लेषण के अनुसार, ओमान की ओर से जाने की कोशिश करने वाले दर्जनों जहाज़ों पर ईरान ने हमला किया, जबकि अमेरिका इस जलमार्ग में गश्त कर रहा है।
यह अंतर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “पूरे नियंत्रण” के दावे को समझने में महत्वपूर्ण है। उपलब्ध साक्ष्य एक सीमित निष्कर्ष का समर्थन करते हैं: अमेरिकी सैन्य गतिविधि ने कुछ जहाज़ों को चलते रहने में मदद की और ईरान की मार्ग तय करने की क्षमता घटाई, लेकिन हमले खत्म नहीं हुए और यातायात सामान्य स्तर पर नहीं लौटा। 18 अगस्त को पाँच दिनों का औसत यातायात केवल 10 क्रॉसिंग बताया गया, जबकि ट्रंप ने कहा कि जलडमरूमध्य “खुला और संचालित” है।
ईरान को प्रभाव डालने के लिए हर जहाज़ को रोकना जरूरी नहीं है। धमकियाँ, हमले, निरीक्षण, देरी, मार्ग संबंधी आदेश और बीमा को लेकर अनिश्चितता किसी यात्रा को व्यावसायिक रूप से नुकसानदेह बना सकते हैं। जुलाई में एक क़तरी LNG टैंकर और एक सऊदी कच्चे तेल के टैंकर पर हमलों के बाद समुद्री अधिकारियों ने खतरे का स्तर “गंभीर” कर दिया था।
ओमान वाले मार्ग की लोकप्रियता बढ़ने के बावजूद हमले जारी रहे। संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि अगस्त में हॉर्मुज़ से गुजरते समय ADNOC द्वारा संचालित दो टैंकरों पर हमला किया गया। इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन इससे जलमार्ग का इस्तेमाल करने वाले जहाज़ों के सामने मौजूद जोखिम फिर उजागर हुआ।
नतीजा यह है कि हॉर्मुज़ को केवल “खुला” या “बंद” कहना वास्तविक स्थिति को नहीं बताता। कुछ जहाज़ खुले तौर पर गुजर रहे हैं, कुछ रास्ता बदल रहे हैं या वापस लौट रहे हैं, और कुछ अपनी ट्रैकिंग प्रणालियाँ बंद कर रहे हैं। इसलिए दिखाई देने वाला यातायात कुल आवाजाही का अधूरा संकेत है।
किसी मार्ग का चालू होना अपने-आप तेल की आपूर्ति को सामान्य स्तर पर नहीं लाता। उपलब्ध रिपोर्टिंग के अनुसार, खाड़ी से तेल का मौजूदा प्रवाह लगभग 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन है, जबकि युद्ध से पहले यह करीब 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन बताया गया था। मौजूदा प्रवाह का अनुमान CNBC द्वारा उद्धृत अमेरिकी ऊर्जा विभाग के आँकड़ों में भी मिलता है, हालांकि खाड़ी से वास्तव में बाहर निकलने वाले तेल की मात्रा पर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग अनुमान हैं।
यह अनिश्चितता भी महत्वपूर्ण है। जहाज़ों की निगरानी प्रणालियाँ उन “डार्क” टैंकरों को नहीं पकड़ पातीं जिनके ट्रांसपोंडर बंद होते हैं। इसके अलावा सुरक्षा देरी, बीमा प्रतिबंध, टैंकरों की उपलब्धता और जहाज़-से-जहाज़ तेल हस्तांतरण के कारण वास्तविक तेल प्रवाह की तुलना दिखाई देने वाली आवाजाही से करना कठिन हो जाता है।
व्यावहारिक निष्कर्ष यह है कि हॉर्मुज़ इतना खुला हो सकता है कि तेल का कुछ प्रवाह जारी रहे, लेकिन इतना भरोसेमंद नहीं कि युद्ध-पूर्व आपूर्ति व्यवस्था पर विश्वास लौट आए। कुछ सफल यात्राएँ यह साबित नहीं करतीं कि सप्लाई चेन सामान्य हो गई है।
तेहरान ने ओमान के साथ ऐसा मार्ग समझौता करने की कोशिश की है, जिसमें खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाज़ों के प्रबंधन में ईरान की औपचारिक भूमिका हो। रॉयटर्स के अनुसार, ईरानी प्रस्ताव में माल के मूल्य का 5% से 7% तक शुल्क लेने की बात थी। उद्योग जगत के सूत्रों ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों और बीमा पाबंदियों के कारण इस मॉडल को लागू करना कठिन होगा।
ओमान का प्रस्ताव इससे अलग है। वह नौवहन, पर्यावरण सुरक्षा, खोज एवं बचाव तथा संबंधित सेवाओं के लिए एक संयुक्त क्षेत्रीय व्यवस्था चाहता है, जिसमें शुल्क अनिवार्य के बजाय स्वैच्छिक हों। रॉयटर्स ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून तटीय देशों को केवल गुजरने की अनुमति देने के बदले शुल्क मांगने की इजाजत नहीं देता, हालांकि विशिष्ट सेवाओं के लिए शुल्क का मामला अलग हो सकता है।
ईरान और ओमान ने कहा है कि वे मार्ग या “शिपिंग मैप” पर समझौते के करीब हैं और ईरानी अधिकारियों ने निर्देशांकों पर सहमति की बात कही है। लेकिन सार्वजनिक रिपोर्टिंग से यह साबित नहीं होता कि अंतिम और संचालन योग्य व्यवस्था लागू हो चुकी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि मार्ग को अधिकृत करने और शुल्क वसूलने का अधिकार किसके पास होगा।
मार्ग संबंधी आँकड़े इस विवाद का महत्व साफ करते हैं: यदि अधिकांश जहाज़ ईरान की पसंद वाले गलियारे से बचते हैं, तो तेहरान के पास पारगमन शुल्क वसूलने की व्यावहारिक क्षमता कम हो जाती है।
ऊर्जा कंपनियाँ पूरी तरह स्थिर स्थिति लौटने का इंतजार करने के बजाय जोखिम के अनुरूप अपनी रणनीति बदल रही हैं। सऊदी अरामको ने ओमान के पास जहाज़-से-जहाज़ हस्तांतरण के जरिए Arab Medium और Arab Heavy कच्चा तेल उपलब्ध कराने की पेशकश की है। इससे माल को यात्रा के सबसे जोखिमपूर्ण हिस्से से आगे ले जाना संभव हो सकता है।
लेकिन ऐसी व्यवस्था जटिलता बढ़ाती है। इसके लिए अतिरिक्त समन्वय, जहाज़ और बीमा चाहिए, जिससे माल ढुलाई और हैंडलिंग लागत बढ़ सकती है। जब जहाज़ अपनी स्थिति सार्वजनिक रूप से प्रसारित नहीं करते, तब पूरी सप्लाई चेन पर नजर रखना भी कठिन हो जाता है।
इराक ने अलग रास्ता अपनाने की कोशिश की है। उसकी सरकारी तेल विपणन कंपनी SOMO ने कथित तौर पर अमेरिकी और जर्मन शिपिंग कंपनियों से इराकी झंडे वाले टैंकरों के जरिए हॉर्मुज़ से कच्चा तेल ले जाने पर बातचीत की। यह प्रयास बगदाद की राजनीतिक रूप से स्वीकार्य रास्ता सुरक्षित करने की कोशिश दिखाता है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टिंग यह स्थापित नहीं करती कि कोई स्थायी समझौता या सफल निर्यात व्यवस्था पूरी हो चुकी है।
सबसे गंभीर खतरा जरूरी नहीं कि जलडमरूमध्य का हमेशा के लिए भौतिक रूप से बंद हो जाना हो। बड़ा जोखिम एक ऐसे सैन्यीकृत जलमार्ग का है, जहाँ यातायात फिर शुरू हो और किसी नए हमले, समुद्री खदान की घटना, मार्ग शुल्क को लेकर विवाद या ईरान-ओमान वार्ता टूटने के बाद दोबारा ढह जाए। यातायात के आँकड़े दिखाते हैं कि लड़ाई बढ़ते ही वाणिज्यिक ऑपरेटर कितनी तेजी से अपना व्यवहार बदलते हैं।
ऐसी अस्थिरता से माल ढुलाई दरें, युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम, सुरक्षा खर्च और ट्रांसशिपमेंट लागत बढ़ सकती है। इससे तेल और LNG की आपूर्ति की विश्वसनीयता प्रभावित होगी और यह खतरा भी बढ़ेगा कि किसी वाणिज्यिक जहाज़ से जुड़ी घटना व्यापक क्षेत्रीय टकराव को जन्म दे।
इसलिए ओमान वाले मार्ग का बहुमत किसी एक पक्ष के “पूरे नियंत्रण” का प्रमाण नहीं, बल्कि नियंत्रण में बदलाव का पैमाना है। ईरान की ओर से खतरा पैदा करने की क्षमता अब भी वास्तविक है। लेकिन ईरान के विरोध के बावजूद अधिकांश ट्रैक किए गए जहाज़ों का वैकल्पिक मार्ग चुनना बताता है कि तेहरान की यह क्षमता कमजोर हुई है कि वह तय करे कि वाणिज्यिक जहाज़ हॉर्मुज़ का इस्तेमाल कैसे करें। अमेरिकी नौसैनिक सुरक्षा ने यह रास्ता खोलने में मदद की है, लेकिन इसे स्थायी सामान्य स्थिति में बदलने के लिए एक विश्वसनीय और टिकाऊ क्षेत्रीय समझौता जरूरी होगा।