जारेड कुशनर और बेंजामिन नेतन्याहू की लगभग चार घंटे की बैठक के बाद प्रक्रियागत सहमति बनी, लेकिन राजनीतिक समझौता नहीं हो सका। [3][5] इजरायल का कहना है कि हमास के पूरी तरह निरस्त्रीकरण तक उसकी सेना गाजा से नहीं हटेगी और पुनर्निर्माण शुरू नहीं होगा; हमास पहले इजरायल से युद्धविराम की शर्तें निभाने की मांग कर रहा है। [2][...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What happened during and after Jared Kushner’s Monday mission to revive the U.S. backed Gaza peace plan—including his nearly four hour meeti. Article summary: Kushner’s mission produced procedural agreements but no political breakthrough: Netanyahu maintained that Israel would not withdraw or allow reconstruction until Hamas disarmed, while Hamas said Israel must first meet it. Topic tags: general web, workflow, security, regulation, marketing. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermar
जारेड कुशनर का दो-दिवसीय कूटनीतिक प्रयास गाजा शांति योजना को आगे बढ़ाने में किसी निर्णायक सफलता के बिना समाप्त हुआ। प्रक्रियागत स्तर पर कुछ सहमतियां बनीं, लेकिन इजरायल और हमास अब भी इस मूल सवाल पर अड़े हैं कि पहले कदम की जिम्मेदारी किसकी होगी। बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि हमास के निरस्त्रीकरण से पहले इजरायल न तो गाजा से हटेगा और न ही पुनर्निर्माण की अनुमति देगा। हमास इसके उलट अक्टूबर 2025 के युद्धविराम से जुड़ी इजरायल की प्रतिबद्धताओं को पहले पूरा करने की मांग कर रहा है।
कुशनर ने सोमवार को यरुशलम में नेतन्याहू से लगभग चार घंटे मुलाकात की। यह बैठक मिस्र में हमास के राजनीतिक नेता खलील अल-हय्या और अन्य प्रतिनिधियों से उनकी बातचीत के एक दिन बाद हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और मध्य-पूर्व दूत के रूप में कुशनर का उद्देश्य रुकी हुई अमेरिकी समर्थित गाजा योजना को फिर से पटरी पर लाना था।
बैठक का प्रमुख मतभेद नेतन्याहू की इस मांग पर रहा कि इजरायल को 7 अक्टूबर 2023 के हमले में शामिल बताए जाने वाले हमास के सदस्यों के खिलाफ लक्षित हमले जारी रखने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। कुशनर ने युद्धविराम के ढांचे के तहत आगे बढ़ने और हमास की प्रतिबद्धताओं को परखने के लिए छोटे, ठोस कदम उठाने पर जोर दिया।
अमेरिका और ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से जुड़ी 15-सूत्रीय योजना में हमास का चरणबद्ध निरस्त्रीकरण, इजरायली सेना की क्रमिक वापसी और गाजा का पुनर्निर्माण शामिल है। योजना का उद्देश्य दोनों पक्षों के कदमों को एक-दूसरे से जोड़ना था।
नेतन्याहू ने इस क्रम को अधिक कठोर रूप में रखा। इजरायली अधिकारियों के अनुसार, हमास के पूरे गाजा में वास्तविक और पूर्ण रूप से निरस्त्रीकरण से पहले न तो सेना की वापसी होगी और न ही पुनर्निर्माण शुरू होगा।
कुशनर ने भी कहा कि हमास के हथियारबंद रहने तक गाजा का पुनर्निर्माण नहीं किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि यदि हमास निरस्त्रीकरण से पीछे हटता है, तो अमेरिका इजरायल को सैन्य कार्रवाई के लिए व्यापक समर्थन दे सकता है।
बैठक के बाद इजरायली और अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि दो कार्य-समूह बनाए जाएंगे:
हथियारों के हस्तांतरण या उन्हें निष्क्रिय किए जाने की पुष्टि के लिए एक अमेरिकी सैन्य जनरल को जिम्मेदारी देने पर भी चर्चा हुई। प्रस्तावित व्यवस्था में हमास से हथियार जमा कराने को विसैन्यीकरण की पहली सीढ़ी माना गया, जबकि इजरायली सेना तब तक गाजा में बनी रह सकती है जब तक पूरी प्रक्रिया पूरी न हो जाए।
इन सहमतियों के बावजूद कोई स्पष्ट राजनीतिक प्रतिबद्धता सामने नहीं आई कि इजरायल योजना के तहत अपनी सेना वापस हटाएगा। इसी वजह से बैठक का माहौल सकारात्मक बताए जाने के बावजूद नतीजा ठोस राजनीतिक सफलता से दूर रहा।
इजरायल की सार्वजनिक प्रतिक्रिया एक जैसी नहीं रही। अंग्रेजी भाषा में जारी संदेशों में बातचीत को रचनात्मक और प्रगति वाली बताया गया, जबकि हिब्रू मीडिया रिपोर्टों और कुछ अधिकारियों के बयानों में जोर दिया गया कि इजरायली सेना गाजा में रहेगी और उसे सैन्य अभियान चलाने की स्वतंत्रता बरकरार रहेगी।
यानी, ‘कार्य-समूह’ और निगरानी तंत्र जैसे प्रशासनिक कदमों पर सहमति बनी, लेकिन सेना की वापसी, हमलों पर रोक और पुनर्निर्माण शुरू करने की समय-सीमा जैसे मूल प्रश्न अनसुलझे रहे।
हमास ने इजरायल की शर्तों और घटनाक्रम को स्वीकार नहीं किया। उसका कहना है कि योजना का क्रियान्वयन तभी शुरू हो सकता है जब इजरायल अक्टूबर 2025 के युद्धविराम के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाए—जिसमें कथित उल्लंघन रोकना और सहमत वापसी की दिशा में आगे बढ़ना शामिल है।
इससे बातचीत का गतिरोध और गहरा हो गया: इजरायल पहले हमास का निरस्त्रीकरण चाहता है, जबकि हमास पहले इजरायली हमले रोकने और सेना हटाने की मांग कर रहा है। दोनों पक्ष दूसरे से पहले कदम की अपेक्षा कर रहे हैं।
मंगलवार को गाजा सिटी के मछली पकड़ने वाले बंदरगाह के पास स्थित ‘स्वीट एंड बिटर’ समुद्रतटीय कैफे पर इजरायली हवाई हमला हुआ। यह इलाका विस्थापित लोगों के लिए अस्थायी ठिकाने में बदल गया था। फिलिस्तीनी चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, हमले में कम-से-कम छह फिलिस्तीनी मारे गए, जिनमें एक बच्चा भी शामिल था, जबकि 14 लोग घायल हुए।
इजरायली सेना ने कहा कि उसका निशाना कैफे या नागरिक स्थल नहीं, बल्कि हमास के कमांडर थे। सेना के अनुसार, इनमें ऐसे लोग शामिल थे जो इजरायली सैनिकों पर हमले की योजना बना रहे थे।
यह हमला कुशनर की बातचीत के तुरंत बाद हुआ और उसने युद्धविराम लागू करने की कठिनाई को रेखांकित किया। कूटनीतिक मंच पर शांति योजना और निरस्त्रीकरण की बात चल रही थी, वहीं गाजा में विस्थापन और हवाई हमले जारी रहे।
गाजा में लगातार हमलों और विस्थापन का सामना कर रहे फिलिस्तीनियों के लिए यह कूटनीतिक प्रक्रिया तत्काल सुरक्षा और मानवीय जरूरतों से कटी हुई दिखाई दी। जमीन पर हिंसा जारी रहने से वार्ता की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे।
विश्लेषकों के अनुसार, 27 अक्टूबर को होने वाले इजरायली चुनाव से पहले नेतन्याहू के लिए राजनीतिक रूप से महंगी रियायत देना मुश्किल हो सकता है। उनकी सरकार के भीतर गाजा से जुड़े किसी भी समझौते का विरोध है, जबकि वे चुनावी दबाव का सामना कर रहे हैं। इसलिए निकट भविष्य में किसी निर्णायक समझौते की संभावना कम आंकी जा रही है।
कुल मिलाकर, कुशनर की यात्रा ने बातचीत के लिए कुछ संस्थागत ढांचा जरूर तैयार किया, लेकिन सबसे अहम सवाल—निरस्त्रीकरण, इजरायली वापसी और हमले रोकने का क्रम—अब भी जस का तस है।
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जारेड कुशनर और बेंजामिन नेतन्याहू की लगभग चार घंटे की बैठक के बाद प्रक्रियागत सहमति बनी, लेकिन राजनीतिक समझौता नहीं हो सका। [3][5]
जारेड कुशनर और बेंजामिन नेतन्याहू की लगभग चार घंटे की बैठक के बाद प्रक्रियागत सहमति बनी, लेकिन राजनीतिक समझौता नहीं हो सका। [3][5] इजरायल का कहना है कि हमास के पूरी तरह निरस्त्रीकरण तक उसकी सेना गाजा से नहीं हटेगी और पुनर्निर्माण शुरू नहीं होगा; हमास पहले इजरायल से युद्धविराम की शर्तें निभाने की मांग कर रहा है। [2][15]
दो कार्य समूह बनाने और अमेरिकी सैन्य जनरल की निगरानी में हथियार जमा कराने या निष्क्रिय करने पर चर्चा हुई। [12][13][16]