प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रोडमैप को उसके प्रस्तावित रूप में स्वीकार नहीं किया। उनका कहना है कि हमास को पहले “वास्तविक और सत्यापन योग्य” तरीके से निरस्त्र होना होगा। नेतन्याहू कार्यालय ने निरस्त्रीकरण और सैन्यीकरण खत्म करने के लिए एक कार्यसमूह बनाने की बात कही और संकेत दिया कि यह प्रक्रिया पूरी होने से पहले पुनर्निर्माण शुरू नहीं होना चाहिए।
हमास ने कहा कि उसने रोडमैप स्वीकार कर लिया है, लेकिन इसका क्रियान्वयन तभी संभव है जब इजरायल पहले अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करे। काहिरा में बैठक करने वाले फलस्तीनी गुटों ने भी इजरायल पर रोडमैप ठुकराने, पहले चरण की जिम्मेदारियां पूरी न करने और सीजफायर का लगातार उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
इससे बातचीत एक बेहद व्यावहारिक, लेकिन राजनीतिक रूप से निर्णायक सवाल पर अटक गई: क्या इजरायली वापसी और सुरक्षा आश्वासन हमास के निरस्त्रीकरण के लिए जरूरी माहौल बनाएंगे, या वापसी शुरू होने से पहले ही निरस्त्रीकरण पूरा होना चाहिए?
कतर ने इजरायल और हमास से सीजफायर के तहत सभी प्रतिबद्धताएं पूरी करने का आग्रह किया। दोहा का कहना था कि हमास ने रोडमैप के तहत उससे अपेक्षित जिम्मेदारियां निभाई हैं और इजरायल पर अपनी प्रतिबद्धताएं लागू करने के लिए दबाव बनाया जाना चाहिए। मध्यस्थों ने यह भी कहा कि जारी इजरायली हमले समझौते और उसके दूसरे चरण को शुरू करने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
मिस्र, कतर और तुर्किये ने अलग-अलग बयानों में स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा ढांचे को प्रभावित करने वाले हमलों समेत कथित इजरायली हमलों की निंदा की। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी कार्रवाई सीजफायर के अगले चरण को खतरे में डालती है।
16 अगस्त को तुर्किये, मिस्र, इंडोनेशिया, जॉर्डन, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी कर इजरायल द्वारा रोडमैप ठुकराए जाने की कड़ी आलोचना की। बयान में कहा गया कि यह रुख अमेरिका समर्थित व्यापक योजना के क्रियान्वयन को खतरे में डालता है और संघर्ष समाप्त करने के प्रयासों में बाधा बनता है।
अमेरिकी दूत जारेड कुशनर ने मिस्र में हमास नेता खलील अल-हय्या से दुर्लभ मुलाकात की। इसके बाद वे यरुशलम गए, जहां उन्होंने नेतन्याहू से बातचीत की। इन बैठकों का उद्देश्य 15-सूत्री योजना को बचाना और सीजफायर वार्ता को फिर पटरी पर लाना था।
अमेरिकी पक्ष चाहता था कि हमास अपनी निरस्त्रीकरण प्रक्रिया को सत्यापन योग्य बनाए और भविष्य में गाजा के शासन की भूमिका छोड़ने की प्रतिबद्धता दे। इजरायल की स्थिति थी कि हमास के पहले निरस्त्र हुए बिना सैन्य वापसी नहीं हो सकती। वहीं हमास का कहना था कि वह तभी हथियार छोड़ना शुरू करेगा जब नेतन्याहू सार्वजनिक रूप से रोडमैप की शर्तों का पालन करने की प्रतिबद्धता जताएं।
बैठकों के बाद किसी भी पक्ष ने अपनी मूल स्थिति में सार्वजनिक बदलाव का संकेत नहीं दिया। रॉयटर्स के अनुसार, कुशनर यरुशलम से बिना किसी सफलता के लौटे और इजरायल तथा हमास योजना की प्रमुख मांगों पर अब भी आमने-सामने थे।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल से गाजा पर हमले रोकने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अगर इजरायल अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करता है, तो हमास हथियार डालने पर सहमत है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टिंग में यह बयान जारी बातचीत का हिस्सा बताया गया, न कि पूर्ण और स्वतंत्र रूप से सत्यापित समझौता।
इसके बाद हमास ने मध्यस्थों और सीजफायर के गारंटर देशों—खासकर वॉशिंगटन—से इजरायल पर रोडमैप के अगले चरण को मंजूरी देने और लागू करने के लिए दबाव बनाने को कहा।
गाजा के सरकारी मीडिया कार्यालय ने बताया कि सीजफायर लागू होने के बाद से कथित इजरायली उल्लंघनों में 1,262 फलस्तीनी मारे गए और 4,168 घायल हुए। ये आंकड़े गाजा के अधिकारियों द्वारा बताए गए दावे हैं; उपलब्ध स्रोतों में इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसी कार्यालय के पहले के बयानों में कुछ अलग आंकड़े दिए गए थे—जिनमें 4,000 से अधिक कथित उल्लंघन और इससे कम मृतक व घायल संख्या शामिल थी। बदलते आंकड़े दिखाते हैं कि हताहतों का अनुमान अभी अपडेट किया जा रहा था।
बातचीत के दौरान भी कई घटनाओं की खबरें आईं। इनमें ड्रोन और तोपखाने के हमले शामिल थे, जिनमें फलस्तीनियों के मारे जाने और घायल होने की सूचना दी गई।
कतर गाजा वार्ता के अलावा अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की एक अलग कूटनीतिक प्रक्रिया में भी शामिल था। दोहा ने ईरान और ओमान के बीच होरमुज जलडमरूमध्य को फिर खोलने तथा व्यापक बातचीत बहाल करने में मदद करने वाली व्यवस्था के प्रयासों का समर्थन किया।
कतर का रुख था कि जलडमरूमध्य खोलने और व्यापक सीजफायर या तनाव कम करने की व्यवस्था पर एक साथ सहमति बनाई जानी चाहिए। रिपोर्टों में इन वार्ताओं को प्रगति पर या संभावित समझौते के करीब बताया गया, लेकिन इसे अंतिम रूप से हुआ समानांतर समझौता नहीं बताया गया।
तत्काल बाधा अब भी कदमों का क्रम है। इजरायल चाहता है कि वापसी या पुनर्निर्माण से पहले हमास का सत्यापित निरस्त्रीकरण हो। हमास और क्षेत्रीय मध्यस्थ इसके उलट ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिसमें निरस्त्रीकरण, इजरायली वापसी और पुनर्निर्माण आपसी वचनबद्धताओं के साथ जुड़े हुए कदमों के रूप में आगे बढ़ें।
अगस्त में हुई कूटनीतिक गतिविधियों ने इजरायल पर दबाव बढ़ाया और बातचीत के नए रास्ते खोले, लेकिन मूल मतभेद दूर नहीं हुआ। इसलिए सीजफायर का रोडमैप अब भी अटका हुआ है और समझौते को फिर से जीवित करने की कोशिशों के बीच गाजा में हिंसा की खबरें जारी हैं।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रोडमैप को उसके प्रस्तावित रूप में स्वीकार नहीं किया। उनका कहना है कि हमास को पहले “वास्तविक और सत्यापन योग्य” तरीके से निरस्त्र होना होगा। नेतन्याहू कार्यालय ने निरस्त्रीकरण और सैन्यीकरण खत्म करने के लिए एक कार्यसमूह बनाने की बात कही और संकेत दिया कि यह प्रक्रिया पूरी होने से पहले पुनर्निर्माण शुरू नहीं होना चाहिए।
हमास ने कहा कि उसने रोडमैप स्वीकार कर लिया है, लेकिन इसका क्रियान्वयन तभी संभव है जब इजरायल पहले अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करे। काहिरा में बैठक करने वाले फलस्तीनी गुटों ने भी इजरायल पर रोडमैप ठुकराने, पहले चरण की जिम्मेदारियां पूरी न करने और सीजफायर का लगातार उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
इससे बातचीत एक बेहद व्यावहारिक, लेकिन राजनीतिक रूप से निर्णायक सवाल पर अटक गई: क्या इजरायली वापसी और सुरक्षा आश्वासन हमास के निरस्त्रीकरण के लिए जरूरी माहौल बनाएंगे, या वापसी शुरू होने से पहले ही निरस्त्रीकरण पूरा होना चाहिए?
कतर ने इजरायल और हमास से सीजफायर के तहत सभी प्रतिबद्धताएं पूरी करने का आग्रह किया। दोहा का कहना था कि हमास ने रोडमैप के तहत उससे अपेक्षित जिम्मेदारियां निभाई हैं और इजरायल पर अपनी प्रतिबद्धताएं लागू करने के लिए दबाव बनाया जाना चाहिए। मध्यस्थों ने यह भी कहा कि जारी इजरायली हमले समझौते और उसके दूसरे चरण को शुरू करने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
मिस्र, कतर और तुर्किये ने अलग-अलग बयानों में स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा ढांचे को प्रभावित करने वाले हमलों समेत कथित इजरायली हमलों की निंदा की। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी कार्रवाई सीजफायर के अगले चरण को खतरे में डालती है।
16 अगस्त को तुर्किये, मिस्र, इंडोनेशिया, जॉर्डन, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी कर इजरायल द्वारा रोडमैप ठुकराए जाने की कड़ी आलोचना की। बयान में कहा गया कि यह रुख अमेरिका समर्थित व्यापक योजना के क्रियान्वयन को खतरे में डालता है और संघर्ष समाप्त करने के प्रयासों में बाधा बनता है।
अमेरिकी दूत जारेड कुशनर ने मिस्र में हमास नेता खलील अल-हय्या से दुर्लभ मुलाकात की। इसके बाद वे यरुशलम गए, जहां उन्होंने नेतन्याहू से बातचीत की। इन बैठकों का उद्देश्य 15-सूत्री योजना को बचाना और सीजफायर वार्ता को फिर पटरी पर लाना था।
अमेरिकी पक्ष चाहता था कि हमास अपनी निरस्त्रीकरण प्रक्रिया को सत्यापन योग्य बनाए और भविष्य में गाजा के शासन की भूमिका छोड़ने की प्रतिबद्धता दे। इजरायल की स्थिति थी कि हमास के पहले निरस्त्र हुए बिना सैन्य वापसी नहीं हो सकती। वहीं हमास का कहना था कि वह तभी हथियार छोड़ना शुरू करेगा जब नेतन्याहू सार्वजनिक रूप से रोडमैप की शर्तों का पालन करने की प्रतिबद्धता जताएं।
बैठकों के बाद किसी भी पक्ष ने अपनी मूल स्थिति में सार्वजनिक बदलाव का संकेत नहीं दिया। रॉयटर्स के अनुसार, कुशनर यरुशलम से बिना किसी सफलता के लौटे और इजरायल तथा हमास योजना की प्रमुख मांगों पर अब भी आमने-सामने थे।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल से गाजा पर हमले रोकने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अगर इजरायल अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करता है, तो हमास हथियार डालने पर सहमत है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टिंग में यह बयान जारी बातचीत का हिस्सा बताया गया, न कि पूर्ण और स्वतंत्र रूप से सत्यापित समझौता।
इसके बाद हमास ने मध्यस्थों और सीजफायर के गारंटर देशों—खासकर वॉशिंगटन—से इजरायल पर रोडमैप के अगले चरण को मंजूरी देने और लागू करने के लिए दबाव बनाने को कहा।
गाजा के सरकारी मीडिया कार्यालय ने बताया कि सीजफायर लागू होने के बाद से कथित इजरायली उल्लंघनों में 1,262 फलस्तीनी मारे गए और 4,168 घायल हुए। ये आंकड़े गाजा के अधिकारियों द्वारा बताए गए दावे हैं; उपलब्ध स्रोतों में इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसी कार्यालय के पहले के बयानों में कुछ अलग आंकड़े दिए गए थे—जिनमें 4,000 से अधिक कथित उल्लंघन और इससे कम मृतक व घायल संख्या शामिल थी। बदलते आंकड़े दिखाते हैं कि हताहतों का अनुमान अभी अपडेट किया जा रहा था।
बातचीत के दौरान भी कई घटनाओं की खबरें आईं। इनमें ड्रोन और तोपखाने के हमले शामिल थे, जिनमें फलस्तीनियों के मारे जाने और घायल होने की सूचना दी गई।
कतर गाजा वार्ता के अलावा अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की एक अलग कूटनीतिक प्रक्रिया में भी शामिल था। दोहा ने ईरान और ओमान के बीच होरमुज जलडमरूमध्य को फिर खोलने तथा व्यापक बातचीत बहाल करने में मदद करने वाली व्यवस्था के प्रयासों का समर्थन किया।
कतर का रुख था कि जलडमरूमध्य खोलने और व्यापक सीजफायर या तनाव कम करने की व्यवस्था पर एक साथ सहमति बनाई जानी चाहिए। रिपोर्टों में इन वार्ताओं को प्रगति पर या संभावित समझौते के करीब बताया गया, लेकिन इसे अंतिम रूप से हुआ समानांतर समझौता नहीं बताया गया।
तत्काल बाधा अब भी कदमों का क्रम है। इजरायल चाहता है कि वापसी या पुनर्निर्माण से पहले हमास का सत्यापित निरस्त्रीकरण हो। हमास और क्षेत्रीय मध्यस्थ इसके उलट ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिसमें निरस्त्रीकरण, इजरायली वापसी और पुनर्निर्माण आपसी वचनबद्धताओं के साथ जुड़े हुए कदमों के रूप में आगे बढ़ें।
अगस्त में हुई कूटनीतिक गतिविधियों ने इजरायल पर दबाव बढ़ाया और बातचीत के नए रास्ते खोले, लेकिन मूल मतभेद दूर नहीं हुआ। इसलिए सीजफायर का रोडमैप अब भी अटका हुआ है और समझौते को फिर से जीवित करने की कोशिशों के बीच गाजा में हिंसा की खबरें जारी हैं।