हातमी के संदेश के तीन प्रमुख हिस्से थे:
ये ईरान की घोषित सैन्य और राजनीतिक स्थिति हैं। अपने-आप में इन बयानों से होरमुज़ की अंतरराष्ट्रीय कानूनी स्थिति नहीं बदलती और न ही जलमार्ग की संप्रभुता अमेरिका या ईरान को हस्तांतरित होती है।
हातमी ने होरमुज़ को ईरानी राष्ट्र की “ईश्वर-प्रदत्त भू-राजनीतिक संपत्ति” बताया। उनके अनुसार, युद्ध ने इस जलमार्ग की रणनीतिक क्षमता को सक्रिय कर दिया है।
तेहरान के नजरिए में होरमुज़ केवल समुद्री यातायात का रास्ता नहीं, बल्कि युद्ध की आर्थिक और कूटनीतिक कीमत बढ़ाने का साधन है। हातमी ने संकेत दिया कि इस दबाव को बनाए रखना युद्ध समाप्त कराने और ईरान पर मंडरा रहे लगातार संघर्ष के खतरे को हटाने के लिए ज़रूरी है।
इसी सोच के कारण ईरान युद्ध से पहले वाली व्यवस्था में सीधे लौटने से इनकार कर रहा है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिकी और इज़राइली हमले शुरू होने से पहले यह जलडमरूमध्य व्यावसायिक यातायात के लिए सामान्य रूप से खुला था। इसके बाद तेहरान ने इस बात पर अधिक प्रत्यक्ष नियंत्रण की कोशिश की कि कौन-से जहाज़ गुजरेंगे और किन शर्तों पर।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की व्यवस्था में सीमित पहुंच, संभावित शुल्क और जहाज़ों की राजनीतिक जांच—तीनों शामिल हैं। ईरान के फ़ारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण से जुड़े एक समुद्री परामर्श में कहा गया कि वैध पासिंग परमिट के बिना कोई जहाज़ होरमुज़ से नहीं गुजर सकता। इसमें अतिरिक्त बीमा-संबंधी शुल्क लगाने का अधिकार भी सुरक्षित रखा गया था।
अन्य रिपोर्टों में कहा गया कि ईरान जहाज़ों से उनके माल के मूल्य का लगभग 5% से 7% तक शुल्क लेने की योजना बना रहा है। ईरानी संसद में विचाराधीन एक प्रस्ताव के तहत अमेरिका, इज़राइल और अन्य “शत्रुतापूर्ण देशों” से जुड़े जहाज़ों को रोका जा सकता है। उल्लंघन की स्थिति में माल के मूल्य के 20% तक जुर्माने का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि, प्रस्तावित नीति और पूरी तरह लागू नियम में अंतर है। स्रोत ईरानी योजनाओं, समुद्री परामर्शों और रिपोर्ट किए गए प्रवर्तन प्रबंधों की पुष्टि करते हैं, लेकिन यह साबित नहीं करते कि हर शुल्क, प्रतिबंध या जुर्माना सभी जहाज़ों पर समान रूप से लागू हो चुका था।
ईरान और ओमान के बीच जलडमरूमध्य से होकर नए नौवहन मार्ग बनाने पर समझौता करीब बताया गया था। लेकिन तेहरान ने बार-बार कहा कि केवल मार्ग-प्रबंधन समझौता जलमार्ग को पूरी तरह नहीं खोलेगा।
ईरान ने पूर्ण पुनःखोलने को अमेरिकी कदमों से जोड़ा—इनमें नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, प्रतिबंध समाप्त करना, क्षेत्र से अमेरिकी सेनाओं की वापसी और युद्ध से हुए नुकसान का मुआवज़ा शामिल था। दूसरी ओर, अमेरिका ने वाणिज्यिक जहाज़ों के लिए निर्बाध मार्ग पर जोर दिया। ट्रंप ने युद्धों, हमलों और प्रदर्शनों से प्रभावित लोगों को ईरान से मुआवज़ा दिलाने की मांग भी रखी।
इस गतिरोध में दो अलग सवाल बने हुए हैं:
इस टकराव का सबसे स्पष्ट और स्रोत-समर्थित असर कच्चे तेल पर पड़ा। टैंकर यातायात रुकने या सीमित होने से वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी। साथ ही, निकट भविष्य में कूटनीतिक समझौते की उम्मीद कमजोर पड़ने से कीमतों पर अतिरिक्त दबाव आया। रॉयटर्स के अनुसार, होरमुज़ खोलने को लेकर अमेरिका और ईरान की अलग-अलग मांगों के बीच एक कारोबारी सत्र में तेल लगभग 5% चढ़ा।
17 अगस्त को ब्रेंट कच्चा तेल 2.35 डॉलर या 2.65% बढ़कर 90.87 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। निवेशकों ने आपूर्ति संबंधी चिंताओं और ठप कूटनीति पर प्रतिक्रिया दी। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भी सीमित नौवहन के बीच तेल वायदा कीमतों में बढ़ोतरी की खबर दी।
उपलब्ध सामग्री में सोने, एशियाई शेयर बाज़ारों या एसएंडपी 500 में उसी दिन के बदलाव के लिए पर्याप्त विश्वसनीय और स्रोत-समर्थित आंकड़े नहीं हैं। इसलिए इन परिसंपत्तियों के प्रदर्शन पर निश्चित दावे करना उचित नहीं होगा।
होरमुज़ का संकट ईरान पर और कड़े अमेरिकी आर्थिक दबाव की आशंकाओं के बीच बढ़ रहा था। रॉयटर्स ने बताया कि ट्रंप प्रशासन नई कार्रवाइयों की तैयारी कर रहा था और ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने उन्हें असाधारण रूप से सख्त बताया। ईरानी नेतृत्व को डर था कि इससे आर्थिक कठिनाइयां और घरेलू असंतोष बढ़ सकता है।
अलग रॉयटर्स रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि यदि अंतरिम समझ लागू नहीं होती और कूटनीति विफल रहती है, तो ईरान “पूरी तरह आक्रामक” रुख अपना सकता है। रिपोर्ट में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी तोड़ने के लिए संभावित अभियान का भी उल्लेख था। चूंकि यह किसी वरिष्ठ अधिकारी की कथित चेतावनी थी, इसलिए इसे घोषित सैन्य नीति या निश्चित अभियान के बजाय रिपोर्ट किए गए खतरे के रूप में देखना चाहिए।
इसी सावधानी के साथ सेंट्रल कमांड द्वारा जहाज़ों को मोड़ने, उन्हें निष्क्रिय करने या उन पर सवार होने जैसे विशिष्ट दावों को भी देखना चाहिए। उपलब्ध सामग्री इन सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करती।
होरमुज़ जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने का ट्रंप का कथित प्रस्ताव इस जलमार्ग पर नियंत्रण को लेकर चल रही राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा था। उन्होंने अमेरिकी नागरिकों से ईंधन की ऊंची कीमतों को स्वीकार करने की अपील भी की और इसे ईरान को रोकने तथा उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की कीमत के रूप में पेश किया।
लेकिन किसी राष्ट्रपति का बयान अपने-आप जलडमरूमध्य की संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानूनी स्थिति नहीं बदल सकता। इसलिए हातमी की प्रतिक्रिया केवल इस सवाल पर नहीं थी कि जहाज़ों को व्यावहारिक रूप से कौन नियंत्रित करेगा; वह वॉशिंगटन के एकतरफा क्षेत्रीय दावे को भी चुनौती दे रही थी।
मुख्य गतिरोध अब भी कायम है: ईरान कहता है कि होरमुज़ उसका स्थायी रणनीतिक दबाव-बिंदु है और यह युद्ध-पूर्व स्थिति में वापस नहीं जाएगा। अमेरिका ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं कर रहा जिसमें तेहरान को वाणिज्यिक जहाज़ों के मार्ग पर निर्बाध नियंत्रण मिले। जब तक दोनों पक्षों की ये मूलभूत स्थितियां नहीं बदलतीं, होरमुज़ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का bottleneck, तेल बाज़ार के जोखिम का स्रोत और व्यापक अमेरिका-ईरान संघर्ष में सबसे बड़ा सौदेबाजी का साधन बना रहेगा।