उत्तर कोरिया की 19 अगस्त की निंदा केवल सैन्य अभ्यास के आकार पर निर्भर नहीं थी; फरवरी की पार्टी कांग्रेस ने दक्षिण कोरिया को शत्रुतापूर्ण राज्य बताया, परमाणु विस्तार को प्राथमिकता दी और अमेरिका से बातचीत के लिए सशर्त र... डोनाल्ड ट्रंप ने 16 अगस्त को अभ्यास में अमेरिकी भागीदारी 'काफी घटाने' का आदेश दिया था। उन्होंने...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: How did Kim Jong Un’s threats and weapons-development plans announced at North Korea’s February 19–25 Workers’ Party Congress—including the. Article summary: Kim’s February platform made the August denunciation strategically consistent: Pyongyang treats allied exercises as evidence of a hostile military posture and uses them to justify a larger, more survivable nuclear force—. Topic tags: general, news, general web, government. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with f
उत्तर कोरिया की 19 अगस्त को जारी निंदा को केवल उलची फ्रीडम शील्ड सैन्य अभ्यास पर तत्काल प्रतिक्रिया मानना अधूरा होगा। यह बयान किम जोंग उन की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें दक्षिण कोरिया के खिलाफ कड़ा रुख, परमाणु और मिसाइल क्षमता का विस्तार और अमेरिका के साथ सशर्त संवाद—तीनों एक साथ मौजूद हैं।
इसीलिए अमेरिकी भागीदारी घटाने का आदेश आने के बाद भी प्योंगयांग का विरोध समाप्त नहीं हुआ। उसके लिए मुद्दा केवल एक अभ्यास का आकार नहीं, बल्कि अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन और उत्तर कोरिया की परमाणु पहचान को लेकर चल रही बड़ी सौदेबाजी है।
19 से 25 फरवरी तक हुई वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया की नौवीं कांग्रेस में किम ने दक्षिण कोरिया के प्रति बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि यदि उत्तर कोरिया की सुरक्षा को खतरा हुआ तो उनका देश पड़ोसी को “पूरी तरह नष्ट” कर सकता है। साथ ही, उन्होंने सियोल के साथ सार्थक संवाद की संभावना खारिज की, लेकिन यह संकेत दिया कि यदि अमेरिका अपनी कथित शत्रुतापूर्ण नीतियां छोड़ दे और उत्तर कोरिया की परमाणु स्थिति को स्वीकार करे, तो वॉशिंगटन के साथ संबंध सुधर सकते हैं।
कांग्रेस में परमाणु और सैन्य क्षमता का विस्तार भी अगले रणनीतिक चरण के केंद्र में रखा गया। किम ने कहा कि उत्तर कोरिया अपनी परमाणु शक्ति को बढ़ाएगा और एक परमाणु राष्ट्र के रूप में अपनी स्थिति का इस्तेमाल करेगा।
इससे अगस्त का बयान एक परिचित राजनीतिक क्रम का हिस्सा दिखाई देता है: सहयोगी देशों की सैन्य गतिविधियों को बाहरी खतरे के प्रमाण के रूप में पेश करना और फिर हथियारों के विकास को आत्मरक्षा के तौर पर उचित ठहराना।
ट्रंप ने 16 अगस्त को कहा कि अमेरिका वार्षिक अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास में अपनी भागीदारी काफी घटाएगा। उन्होंने अभ्यास की लागत और ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियानों में सियोल के शामिल न होने का हवाला दिया।
लेकिन यह फैसला अभ्यास को पूरी तरह रद्द करने के लिए बहुत देर से आया। उलची फ्रीडम शील्ड 17 अगस्त को शुरू हो गया और बाद में इसके कुछ हिस्सों को छोटा करने या रोकने की उम्मीद जताई गई।
19 अगस्त के उत्तर कोरियाई बयान में ट्रंप के आदेश का कोई उल्लेख नहीं था। इसके बजाय, सरकारी मीडिया ने अभ्यास को सैन्य खतरा बताया और कहा कि प्योंगयांग आत्मरक्षा का अधिकार जारी रखेगा, जिसमें “उन्नत नई शक्ति” का इस्तेमाल भी शामिल है।
इस चुप्पी को किसी गुप्त रणनीतिक गणना का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। फिर भी, यह उत्तर कोरिया के व्यापक संदेश से मेल खाती है। ट्रंप के आदेश को स्वीकार करने पर प्योंगयांग अनजाने में अमेरिका की रियायत या ट्रंप के इस दावे को मान्यता दे सकता था कि किम के साथ उनका व्यक्तिगत संपर्क नतीजे दे रहा है। आदेश की अनदेखी करके उत्तर कोरिया ने ध्यान सैन्य अभ्यास के वास्तविक आकार से हटाकर अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन पर केंद्रित रखा।
इससे वह यह दावा भी जारी रख सकता है कि हथियारों का विकास अभ्यास छोटा होने के बावजूद जरूरी है।
ट्रंप के बताए कारण इस फैसले की प्रकृति को समझने में महत्वपूर्ण हैं। कटौती को उत्तर कोरिया के साथ बातचीत में तय किए गए पारस्परिक कदम के रूप में पेश नहीं किया गया था। यह फैसला लागत और ईरान संबंधी अभियानों में सियोल की असहमति से जुड़ा था।
इसलिए यह कदम अपने-आप में अमेरिकी प्रतिरोधक नीति में स्थायी बदलाव या अमेरिका-उत्तर कोरिया के साझा कूटनीतिक ढांचे का प्रमाण नहीं है। हालांकि इससे सहयोगी देशों की सैन्य तैयारी और रक्षा समन्वय को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है। कुछ विश्लेषकों और रिपोर्टों ने यह चिंता भी जताई कि अभ्यास घटाने से किम को फायदा मिल सकता है, जबकि उत्तर कोरिया को बदले में कोई समान रियायत नहीं मिली।
प्योंगयांग के लिए राजनीतिक लाभ स्पष्ट है: वह इस विवाद का इस्तेमाल वॉशिंगटन और सियोल के बीच मतभेद दिखाने के लिए कर सकता है, जबकि यह दावा बरकरार रख सकता है कि सैन्य दबाव ही मूल समस्या है।
दक्षिण कोरिया ने पहले की “पहले परमाणु निरस्त्रीकरण” नीति की सीमाओं को देखते हुए अब “पहले शांति” की दिशा अपनाई है। नए ढांचे में पारस्परिक कदमों के जरिए उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को शुरुआती स्तर पर रोकने को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि लंबे समय का लक्ष्य अब भी परमाणु निरस्त्रीकरण है।
यह नीति उत्तर कोरिया को स्थायी परमाणु शक्ति के रूप में स्वीकार करने का समर्थन नहीं है। इसका उद्देश्य मौजूदा परिस्थितियों में जोखिम नियंत्रित करना है। सिद्धांततः, परमाणु कार्यक्रम पर रोक उसके आगे विस्तार को धीमा कर सकती है और हथियार नियंत्रण या शांति वार्ता के लिए जगह बना सकती है। लेकिन इसके लिए सत्यापन, पारस्परिक रियायतें और सीमाओं को स्वीकार करने वाला वार्ताकार जरूरी होगा।
किम की फरवरी में रखी गई स्थिति इसके उलट है। प्योंगयांग चाहता है कि वॉशिंगटन संबंध सुधारने से पहले उसकी परमाणु स्थिति को एक वास्तविकता के रूप में स्वीकार करे। वह अपने परमाणु हथियारों को बातचीत की शुरुआत में छोड़ने योग्य संपत्ति के रूप में पेश नहीं कर रहा।
2019 में ट्रंप-किम वार्ता टूटने के बाद से उत्तर कोरिया ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संवाद फिर शुरू करने के प्रयासों को बड़े पैमाने पर नजरअंदाज किया है। अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च सर्विस के अनुसार, उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य और परमाणु क्षमताएं, रूस के साथ विस्तारित साझेदारी और चीन के साथ बेहतर संबंध उसे अमेरिका और उसके सहयोगियों का सामना करने में अधिक आत्मविश्वास दे सकते हैं।
रूस के साथ भी उत्तर कोरिया के संबंध गहरे हुए हैं। किम और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सहयोग को दोहराया है, जबकि कई रिपोर्टों में मॉस्को के साथ उत्तर कोरिया के सैन्य संबंधों और उनसे मिलने वाले युद्धक्षेत्र अनुभव पर प्रकाश डाला गया है।
इन घटनाक्रमों से किम की उस प्रतिबंध राहत पर निर्भरता घटती है, जो पहले कूटनीतिक सौदे का एक अहम हिस्सा थी। इसके चलते ऐसा हथियार-नियंत्रण समझौता प्योंगयांग के लिए अधिक आकर्षक हो सकता है जिसमें भविष्य के विस्तार पर सीमा लगाई जाए, लेकिन मौजूदा परमाणु भंडार को अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार किया जाए। तत्काल और पूर्ण निरस्त्रीकरण उसके लिए कम स्वीकार्य विकल्प दिखता है।
ट्रंप ने कहा है कि किम ने उनके संपर्क का जवाब दिया, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि जवाब किस रूप में आया या किसी वार्ता एजेंडे पर सहमति बनी है या नहीं। सैन्य अभ्यास में कटौती बातचीत की एक संभावित खिड़की खोल सकती है, लेकिन इससे मूल मतभेद दूर नहीं होते।
वॉशिंगटन और सियोल को तय करना होगा कि क्या वे लंबे समय के परमाणु निरस्त्रीकरण लक्ष्य को बनाए रखते हुए, पारस्परिक रियायतों के साथ अंतरिम रोक का समर्थन कर सकते हैं। दूसरी ओर, प्योंगयांग को बिना किसी सार्थक सीमा के परमाणु राष्ट्र के रूप में मान्यता मांगने के बजाय सत्यापन योग्य सीमाएं स्वीकार करनी होंगी। 2019 के बाद उत्तर कोरिया की वार्ता में लौटने की अनिच्छा को देखते हुए नतीजा अनिश्चित है।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा संकेत किसी तत्काल कूटनीतिक सफलता का नहीं, बल्कि असमान सौदेबाजी का है। वॉशिंगटन और सियोल तनाव घटाने के रास्ते तलाश रहे हैं, जबकि प्योंगयांग सियोल के साथ टकराव बनाए रखते हुए अमेरिका के लिए सशर्त संवाद का रास्ता खुला रख रहा है। बढ़ी हुई परमाणु क्षमता और रूस के साथ गहरे सैन्य संबंधों के कारण किम अब पहले की ट्रंप-किम प्रक्रिया की तुलना में अधिक मजबूत सैन्य स्थिति से बातचीत कर रहे हैं।
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उत्तर कोरिया की 19 अगस्त की निंदा केवल सैन्य अभ्यास के आकार पर निर्भर नहीं थी; फरवरी की पार्टी कांग्रेस ने दक्षिण कोरिया को शत्रुतापूर्ण राज्य बताया, परमाणु विस्तार को प्राथमिकता दी और अमेरिका से बातचीत के लिए सशर्त र...
उत्तर कोरिया की 19 अगस्त की निंदा केवल सैन्य अभ्यास के आकार पर निर्भर नहीं थी; फरवरी की पार्टी कांग्रेस ने दक्षिण कोरिया को शत्रुतापूर्ण राज्य बताया, परमाणु विस्तार को प्राथमिकता दी और अमेरिका से बातचीत के लिए सशर्त र... डोनाल्ड ट्रंप ने 16 अगस्त को अभ्यास में अमेरिकी भागीदारी 'काफी घटाने' का आदेश दिया था। उन्होंने इसकी लागत और ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियानों में दक्षिण कोरिया के शामिल न होने को कारण बताया। [2] [3]
सियोल की नई 'शांति पहले' नीति तत्काल परमाणु निरस्त्रीकरण के बजाय पहले सत्यापन योग्य रोक और पारस्परिक रियायतों पर जोर देती है, लेकिन रूस से गहरे संबंध और बढ़ते परमाणु भंडार ने किम की सौदेबाजी की स्थिति मजबूत कर दी है।...