महंगा तेल भविष्य की महंगाई को बढ़ा सकता है। इसके बाद बाजार को डर रहता है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती टाल सकता है या लंबे समय तक दरें ऊंची रख सकता है। यही वजह रही कि मध्य-पूर्व का जोखिम सोने के लिए सुरक्षित निवेश की मांग तो पैदा कर रहा था, लेकिन महंगाई और यील्ड का दबाव अधिक प्रभावी साबित हुआ। ब्रेंट क्रूड 91.02 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 24 जुलाई के बाद का सबसे ऊंचा बंद स्तर था।
अमेरिका में दिसंबर डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स शुरुआती कारोबार में करीब 0.5–0.6% नीचे थे। एक रिपोर्ट में यह 4,452.90 डॉलर पर 0.5% नीचे और दूसरी में 4,447.30 डॉलर पर 0.6% नीचे बताया गया। दिन के अंत तक दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट 1.2% गिरकर 4,420.60 डॉलर पर बंद हुआ।
बाजार के उपलब्ध आंकड़ों में गोल्ड फ्यूचर 4,393.80 डॉलर पर 0.54% नीचे भी दर्ज किया गया। अलग-अलग समय और कॉन्ट्रैक्ट संदर्भों के कारण इन आंकड़ों में अंतर है।
पिछले सत्र में कमजोर अमेरिकी डॉलर और फेड की निकट भविष्य में ब्याज दर बढ़ाने की घटती उम्मीदों ने सोने को सहारा दिया था। डॉलर कमजोर होने पर डॉलर में कीमत वाला सोना अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए सस्ता पड़ता है।
सोमवार को स्पॉट गोल्ड करीब 0.9% बढ़कर 4,417.24 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचा और लगातार बढ़त के बाद ऊंचे स्तर पर बंद हुआ। उपलब्ध स्रोत सोमवार की इस बढ़त को 1% से अधिक नहीं बताते; इसलिए “सोमवार को 1% से ज्यादा तेजी” का दावा इन आंकड़ों से पूरी तरह पुष्ट नहीं होता।
निवेशक फेड की जुलाई बैठक के मिनट्स में यह देखना चाहते थे कि अधिकारियों ने कमजोर आर्थिक आंकड़ों—जैसे रोजगार, महंगाई और खुदरा बिक्री से जुड़े नरम संकेतों—को तेल कीमतों से पैदा हो रहे नए महंगाई जोखिम के मुकाबले कैसे तौला। इन मिनट्स से यह स्पष्ट हो सकता था कि कमजोर अर्थव्यवस्था दरों में नरमी की ओर इशारा करती है या महंगा तेल फेड को सतर्क बनाए रखेगा।
बाजार में साल के अंत तक दरों के अपरिवर्तित रहने की लगभग 65% संभावना बताई गई थी, लेकिन उपलब्ध स्रोत इस सटीक अनुमान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करते। इसलिए इसे स्थापित तथ्य के बजाय बाजार की अपुष्ट अपेक्षा के रूप में देखना चाहिए।
संक्षेप में, सोने के लिए अगला संकेत दो दिशाओं से आना था: यदि फेड मिनट्स नरम रुख दिखाते, तो कमजोर डॉलर और कम दरों की उम्मीद सोने को फिर सहारा दे सकती थी। लेकिन यदि उनमें तेल-जनित महंगाई और ऊंची यील्ड पर जोर मिलता, तो बुलियन पर दबाव जारी रह सकता था।
मंगलवार के उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार:
इससे संकेत मिला कि ऊंची बॉन्ड यील्ड और महंगे तेल का दबाव केवल सोने तक सीमित नहीं था, बल्कि व्यापक कीमती धातु बाजार में भी दिखाई दिया।