प्रीमियम फोन का उत्पादन केवल असेंबली लाइन को एक देश से दूसरे देश ले जाने जितना आसान नहीं होता। इसमें उत्पादन प्रक्रिया की विश्वसनीयता, गुणवत्ता नियंत्रण, कंपोनेंट्स का समन्वय और लॉन्च के समय उत्पादन तेजी से बढ़ाने की क्षमता जरूरी होती है। वियतनाम में हाई-एंड Pixel उत्पादन की सफलता से संकेत मिलता है कि Google ने व्यापक स्थानांतरण से पहले इन क्षमताओं को व्यवहार में परखा है।
भारत को दूसरा बड़ा उत्पादन केंद्र बनाया जा सकता है। इससे Google को किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अधिक व्यापक विनिर्माण नेटवर्क मिलेगा। उपलब्ध रिपोर्टें वियतनाम और भारत को संभावित गंतव्य बताती हैं, लेकिन यह साबित नहीं करतीं कि हर अपस्ट्रीम कंपोनेंट या हर सप्लायर संबंध भी उसी समय चीन से बाहर चला जाएगा। यानी “चीन के बाहर निर्मित” का मतलब मुख्य रूप से डिवाइस के उत्पादन और अंतिम असेंबली का स्थान होगा, हर पुर्जे का मूल देश नहीं।
Google के लिए यह बदलाव इसलिए भी अपेक्षाकृत आसान हो सकता है क्योंकि Pixel फोन चीन में बेचे ही नहीं जाते। ऐसे में चीन में अंतिम असेंबली बंद करने के फैसले के साथ उसे किसी बड़े घरेलू Pixel बाजार और आपूर्ति-श्रृंखला रणनीति के बीच संतुलन नहीं बनाना पड़ेगा।
Apple की स्थिति अधिक जटिल है। चीन iPhone के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार भी है और Apple के विनिर्माण तंत्र का बड़ा केंद्र भी। उत्पादन में विविधता लाने से भू-राजनीतिक और परिचालन जोखिम घट सकते हैं, लेकिन बहुत तेज बदलाव से सप्लायर नेटवर्क, श्रम व्यवस्था, गुणवत्ता और नए मॉडल के लॉन्च पर असर पड़ सकता है। साथ ही Apple को उस बाजार की जरूरतों का भी ध्यान रखना पड़ता है, जहां Google Pixel फोन नहीं बेचता।
यही अंतर Google को अपेक्षाकृत आक्रामक “चीन-प्लस-वन” रणनीति अपनाने में मदद करता है। कंपनी चीन से विनिर्माण जोखिम कम कर रही है, लेकिन चीन में अपना कोई बड़ा Pixel फोन कारोबार बंद नहीं कर रही। अमेरिका–चीन व्यापार और तकनीकी तनाव के बीच टेक उद्योग में उत्पादन को कई देशों में फैलाने की व्यापक प्रवृत्ति भी इसी दिशा की ओर इशारा करती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, Google ने 2025 में लगभग 1.2 करोड़ Pixel फोन भेजे और 2026 में 8–10% वृद्धि का लक्ष्य रखा है। इससे कुल शिपमेंट करीब 1.3 करोड़ यूनिट तक पहुंच सकता है।
यह लक्ष्य ऐसे समय में रखा गया है जब उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में मेमोरी चिप की लागत तेजी से बढ़ रही है। AI डेटा सेंटरों के विस्तार ने मेमोरी की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा खपा लिया है, जबकि निर्माता AI इंफ्रास्ट्रक्चर में इस्तेमाल होने वाले अधिक मार्जिन वाले कंपोनेंट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। DRAM, NAND और अन्य मेमोरी श्रेणियों पर दबाव की खबरें हैं। इसका असर डिवाइस की कीमतों और मांग, दोनों पर पड़ सकता है।
Google कथित तौर पर अपने क्लाउड-कंप्यूटिंग कारोबार की बड़ी खरीद क्षमता को Pixel की मांग के साथ जोड़कर मेमोरी और अन्य कंपोनेंट्स की खरीद पर बेहतर सौदेबाजी करना चाहता है। Micron और SK Hynix जैसे बड़े सप्लायरों के साथ बातचीत में यह रणनीति Google को केवल स्मार्टफोन कारोबार की तुलना में अधिक प्रभाव दे सकती है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टें इस तरह की खरीद-बंडलिंग व्यवस्था की सटीक शर्तों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करतीं। इसलिए इसे रिपोर्ट की गई रणनीति के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
Google लंबे समय तक बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ खुद उठाएगा, ऐसा जरूरी नहीं है। कंपनी ने पुष्टि की है कि मेमोरी संकट के बीच Pixel फोन महंगे होंगे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से हर मॉडल और हर बाजार में कीमत बढ़ने की अंतिम राशि स्पष्ट नहीं है।
Pixel की बिक्री बढ़ाने का उद्देश्य केवल अधिक हार्डवेयर बेचना नहीं है। Pixel उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ने से Google को Gemini की सुविधाएं दिखाने और Android डिवाइसों को अपनी सेवाओं से जोड़ने के अधिक अवसर मिलेंगे।
इसी वजह से Google का कुछ अतिरिक्त कंपोनेंट लागत स्वीकार करने का फैसला समझ में आता है। कंपनी Pixel को अपनी AI रणनीति के उपभोक्ता-केंद्रित मंच के रूप में देख सकती है, भले ही मेमोरी महंगाई और उत्पादन बदलावों के कारण फोन का मार्जिन दबाव में आए।
फिर भी, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस रणनीति से अमेरिका, जापान या यूरोप में Apple से Google को महत्वपूर्ण बाजार हिस्सेदारी मिल जाएगी। उपलब्ध साक्ष्य में यह लक्ष्य के रूप में सामने आता है, हासिल हो चुका परिणाम नहीं।
Apple पर भी कंपोनेंट लागत बढ़ने का वही दबाव है। कंपनी ने संकेत दिया है कि मेमोरी की बढ़ती कीमतें मुनाफे पर असर डालने लगी हैं, जबकि मेमोरी निर्माता AI से जुड़ी मांग के लिए उत्पादन क्षमता का रुख कर रहे हैं।
Apple के सामने विकल्प आसान नहीं हैं: बढ़ी हुई लागत खुद वहन करना, कम मार्जिन स्वीकार करना, कीमतें बढ़ाना या उत्पादों के कॉन्फिगरेशन में बदलाव करना। उपभोक्ता डिवाइसों की कीमतें बढ़ने की चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी से Mac, iPad या iPhone जैसे किसी खास उत्पाद की कीमत बढ़ने का समय और राशि तय नहीं होती।
विनिर्माण में विविधता लाने की कोशिश Apple भी कर रहा है, लेकिन उसका बदलाव संरचनात्मक रूप से कठिन है। उसे चीन से जुड़ी बड़ी आपूर्ति-श्रृंखला संभालते हुए चीनी ग्राहकों को भी सेवा देनी है। इसके विपरीत, Google वियतनाम और भारत के जरिये Pixel उत्पादन स्थानांतरित कर सकता है, बिना चीन में किसी बड़े फोन कारोबार को तत्काल प्रभावित किए।
अगर योजना आगे बढ़ती है, तो Pixel की पैकेजिंग पर लिखा उत्पादन देश बदल सकता है। लेकिन खरीदारों के लिए अधिक महत्वपूर्ण सवाल गुणवत्ता, उपलब्धता और कीमतों से जुड़े होंगे। Google को वियतनाम और भारत में उत्पादन बढ़ाते हुए प्रीमियम फोन की गुणवत्ता बनाए रखनी होगी। साथ ही उसे बढ़ती मेमोरी लागत को इस तरह संभालना होगा कि मांग पर बहुत बड़ा असर न पड़े।
इसलिए 2027 का बदलाव केवल फैक्ट्री बदलने की कवायद नहीं है। इसमें आपूर्ति-श्रृंखला का विविधीकरण, Pixel उपयोगकर्ता आधार बढ़ाने की कोशिश और Gemini को आगे बढ़ाने के लिए Google के हार्डवेयर कारोबार का इस्तेमाल—तीनों शामिल हैं। वियतनाम में हाई-एंड उत्पादन की सफलता इस समयसीमा को कुछ विश्वसनीयता देती है, जबकि भारत अतिरिक्त क्षमता और भौगोलिक विकल्प उपलब्ध कराता है।
फिर भी योजना के सामने कई जोखिम हैं: नए उत्पादन केंद्रों में क्रियान्वयन, महंगे कंपोनेंट्स, संभावित कीमत बढ़ोतरी और यह सवाल कि क्या Pixel की मांग Google की अपेक्षा के मुताबिक तेजी से बढ़ पाएगी।