इस घटनाक्रम के दौरान UAE अधिकारियों ने मोबाइल फोन पर लोगों को संभावित मिसाइल खतरे के चलते किसी सुरक्षित इमारत के भीतर जाने की चेतावनी दी। बाद में यह अलर्ट हटा लिया गया। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि देश अब भी हाई अलर्ट पर है और अपनी संप्रभुता तथा सुरक्षा के खिलाफ किसी भी खतरे का दृढ़ता से जवाब देने के लिए तैयार है।
UAE के आधिकारिक विवरण से संकेत मिलता है कि यह मिसाइल खतरे को समय रहते पहचानकर रोकने की घटना थी, न कि किसी शहर या जमीन पर स्थित लक्ष्य पर सफल हमला। दोनों मिसाइलें समुद्र में गिरीं, हालांकि उनमें से एक UAE के क्षेत्रीय जल के भीतर गिरी। उपलब्ध रिपोर्टों में मिसाइलों के संभावित लक्ष्य, ईरान के भीतर उनके सटीक प्रक्षेपण स्थल या इस्तेमाल की गई विशेष अवरोधन प्रणालियों की जानकारी नहीं दी गई है।
गृह मंत्रालय का फोन अलर्ट एहतियाती कदम था। लोगों से निकटतम सुरक्षित इमारत के भीतर शरण लेने को कहा गया। जब अधिकारियों ने आकलन किया कि कोई मिसाइल जमीन से नहीं टकराई है, तो अलर्ट हटा लिया गया।
रक्षा मंत्रालय ने लोगों से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने और अफवाहें नहीं फैलाने की अपील की। मंत्रालय के बयान में कहा गया कि UAE की सेनाएं देश की संप्रभुता, सुरक्षा, हितों और राष्ट्रीय क्षमताओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
यह मिसाइल घटना अमेरिका-ईरान संघर्ष को स्थिर करने की कोशिशों के कमजोर पड़ने के समय हुई। 17 जून को हुए एक समझौता-ज्ञापन का उद्देश्य शांति वार्ता के लिए समय देना था। इसमें हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने से जुड़े प्रावधान भी शामिल थे। हालांकि, दोनों पक्षों पर समझौते का उल्लंघन करने के आरोपों के बीच यह समझौता समाप्त हो गया।
रॉयटर्स ने 17 अगस्त को रिपोर्ट किया कि एक ईरानी अधिकारी के अनुसार, कूटनीति के ठहर जाने के बाद तेहरान ने अपनी नीति रक्षात्मक रुख से बदलकर “पूरी तरह आक्रामक” कर ली है। इसी रिपोर्ट में कहा गया कि युद्ध समाप्त करने और हॉर्मुज़ के रास्ते टैंकर यातायात फिर शुरू करने को लेकर वार्ता गतिरोध में पहुंच गई है।
इसलिए UAE की घटना को केवल एक अलग वायु रक्षा अलर्ट के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह खाड़ी की सुरक्षा, वाणिज्यिक जहाजरानी और वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए महत्वपूर्ण इस जलमार्ग को लेकर बढ़ते व्यापक तनाव का हिस्सा है।
UAE ने कहा कि 14 अगस्त को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरते समय अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी यानी ADNOC से जुड़े दो जहाजों पर हमला हुआ। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ADNOC ने कहा कि स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया।
इसके बाद जलडमरूमध्य से गुजरने वाला यातायात काफी धीमा पड़ गया। रॉयटर्स ने आगे के हमलों के बाद यातायात लगभग ठप होने की बात कही, जबकि लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के आंकड़ों के अनुसार जहाजरानी पूरी तरह बंद नहीं हुई थी, बल्कि बहुत कम स्तर पर जारी रही। प्रारंभिक आंकड़ों में 3 से 9 अगस्त के बीच 78 ट्रांजिट दर्ज किए गए, जो पिछले सप्ताह के 95 से कम थे।
यह अंतर महत्वपूर्ण है। उपलब्ध साक्ष्य हॉर्मुज़ में गंभीर व्यवधान और जहाजरानी में बड़ी गिरावट की पुष्टि करते हैं, लेकिन पूरे संबंधित दौर में जलडमरूमध्य के लगातार और पूरी तरह बंद रहने का दावा साबित नहीं करते।
संघर्ष के दौरान लगातार नए हमले हुए हैं, इसलिए मृतकों, घायलों और रोकी गई मिसाइलों के आंकड़ों को उनकी रिपोर्टिंग की तारीख के साथ समझना जरूरी है। 1 मार्च को UAE अधिकारियों ने कहा था कि 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों के बाद उनकी सेनाओं ने 165 बैलिस्टिक मिसाइलों, दो क्रूज़ मिसाइलों और 541 ईरानी ड्रोन से निपटा था। उस समय की रिपोर्टों में तीन लोगों की मौत और 58 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई थी।
3 मार्च को UAE सरकार की एक ब्रीफिंग में इससे अधिक आंकड़े दिए गए—186 बैलिस्टिक मिसाइलों और 812 ड्रोन का पता लगने की बात कही गई। उस समय तीन मौतों और 68 मामूली चोटों की जानकारी दी गई थी। इससे स्पष्ट है कि शुरुआती आंकड़ों को पूरे संघर्ष का अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
ये संख्याएं अलग-अलग तारीखों पर स्थिति को दर्शाती हैं और 18 अगस्त की मिसाइल घटना तक का सत्यापित संचयी आंकड़ा नहीं देतीं। फिर भी, वे यह दिखाती हैं कि ताजा घटना ऐसे लंबे अभियान की पृष्ठभूमि में हुई जिसमें बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज़ मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल शामिल रहा है।
सऊदी अरब और 13 अन्य देशों ने 30 जुलाई को मल्टीनेशनल मैरीटाइम डिफेंस अलायंस की घोषणा की थी। इस गठबंधन का घोषित उद्देश्य सामूहिक समुद्री सुरक्षा मजबूत करना और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य, लाल सागर तथा अदन की खाड़ी से गुजरने वाली आवाजाही, व्यापार मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति की रक्षा करना है।
बाद में सऊदी अरब ने इस गठबंधन के संस्थागत और परिचालन रूप से सक्रिय होने की घोषणा की। 18 अगस्त को सऊदी कैबिनेट ने वाणिज्यिक जहाजों और टैंकरों पर ईरान के बार-बार हो रहे हमलों की भी निंदा की।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों से यह साबित नहीं होता कि गठबंधन को UAE की ओर दागी गई इन दो मिसाइलों के जवाब में विशेष रूप से सक्रिय किया गया था। गठबंधन का दायरा क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा है, जबकि 18 अगस्त की घटना मुख्य रूप से UAE के ऊपर या उसके निकट हुई वायु रक्षा कार्रवाई थी।
इस घटना से जुड़े कुछ दावे उपलब्ध साक्ष्यों से आगे जाते हैं। स्रोत यह स्थापित नहीं करते कि ईरान ने इस खास UAE घटनाक्रम को आधिकारिक रूप से “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4” नाम दिया था। इसी तरह, यह भी प्रमाणित नहीं है कि सऊदी अरब ने व्यापक रूप से वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की निंदा से अलग, इसी मिसाइल घटना की विशिष्ट निंदा की थी।
हॉर्मुज़ को लेकर ईरान का रुख अपेक्षाकृत बेहतर प्रमाणित है, लेकिन “दुश्मनों को छोड़कर सभी के लिए जलडमरूमध्य खुला रहेगा” जैसी संक्षिप्त व्याख्या से अधिक सशर्त है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने जलमार्ग को पूरी तरह खोलने को अमेरिका की कुछ रियायतों से जोड़ा है, जिनमें युद्ध समाप्त करना भी शामिल है। रॉयटर्स ने यह भी रिपोर्ट किया कि ईरान की योजना में अमेरिकी और इजरायली जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने पर रोकने की बात थी।
सबसे स्पष्ट निष्कर्ष यही है: UAE के अनुसार, उसने ईरान से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को निष्क्रिय कर दिया और दोनों में से कोई भी जमीन पर नहीं गिरी। अधिकारियों ने लोगों को कुछ समय के लिए सुरक्षित स्थानों में जाने की चेतावनी दी, सैन्य तैयारियों का स्तर बढ़ाया और किसी भी खतरे का दृढ़ जवाब देने की बात कही। यह घटना यह भी दिखाती है कि UAE की हवाई सुरक्षा अब ईरान और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़े अनसुलझे कूटनीतिक तथा समुद्री संकट से कितनी गहराई से जुड़ गई है।
इस घटनाक्रम के दौरान UAE अधिकारियों ने मोबाइल फोन पर लोगों को संभावित मिसाइल खतरे के चलते किसी सुरक्षित इमारत के भीतर जाने की चेतावनी दी। बाद में यह अलर्ट हटा लिया गया। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि देश अब भी हाई अलर्ट पर है और अपनी संप्रभुता तथा सुरक्षा के खिलाफ किसी भी खतरे का दृढ़ता से जवाब देने के लिए तैयार है।
UAE के आधिकारिक विवरण से संकेत मिलता है कि यह मिसाइल खतरे को समय रहते पहचानकर रोकने की घटना थी, न कि किसी शहर या जमीन पर स्थित लक्ष्य पर सफल हमला। दोनों मिसाइलें समुद्र में गिरीं, हालांकि उनमें से एक UAE के क्षेत्रीय जल के भीतर गिरी। उपलब्ध रिपोर्टों में मिसाइलों के संभावित लक्ष्य, ईरान के भीतर उनके सटीक प्रक्षेपण स्थल या इस्तेमाल की गई विशेष अवरोधन प्रणालियों की जानकारी नहीं दी गई है।
गृह मंत्रालय का फोन अलर्ट एहतियाती कदम था। लोगों से निकटतम सुरक्षित इमारत के भीतर शरण लेने को कहा गया। जब अधिकारियों ने आकलन किया कि कोई मिसाइल जमीन से नहीं टकराई है, तो अलर्ट हटा लिया गया।
रक्षा मंत्रालय ने लोगों से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने और अफवाहें नहीं फैलाने की अपील की। मंत्रालय के बयान में कहा गया कि UAE की सेनाएं देश की संप्रभुता, सुरक्षा, हितों और राष्ट्रीय क्षमताओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
यह मिसाइल घटना अमेरिका-ईरान संघर्ष को स्थिर करने की कोशिशों के कमजोर पड़ने के समय हुई। 17 जून को हुए एक समझौता-ज्ञापन का उद्देश्य शांति वार्ता के लिए समय देना था। इसमें हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने से जुड़े प्रावधान भी शामिल थे। हालांकि, दोनों पक्षों पर समझौते का उल्लंघन करने के आरोपों के बीच यह समझौता समाप्त हो गया।
रॉयटर्स ने 17 अगस्त को रिपोर्ट किया कि एक ईरानी अधिकारी के अनुसार, कूटनीति के ठहर जाने के बाद तेहरान ने अपनी नीति रक्षात्मक रुख से बदलकर “पूरी तरह आक्रामक” कर ली है। इसी रिपोर्ट में कहा गया कि युद्ध समाप्त करने और हॉर्मुज़ के रास्ते टैंकर यातायात फिर शुरू करने को लेकर वार्ता गतिरोध में पहुंच गई है।
इसलिए UAE की घटना को केवल एक अलग वायु रक्षा अलर्ट के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह खाड़ी की सुरक्षा, वाणिज्यिक जहाजरानी और वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए महत्वपूर्ण इस जलमार्ग को लेकर बढ़ते व्यापक तनाव का हिस्सा है।
UAE ने कहा कि 14 अगस्त को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरते समय अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी यानी ADNOC से जुड़े दो जहाजों पर हमला हुआ। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ADNOC ने कहा कि स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया।
इसके बाद जलडमरूमध्य से गुजरने वाला यातायात काफी धीमा पड़ गया। रॉयटर्स ने आगे के हमलों के बाद यातायात लगभग ठप होने की बात कही, जबकि लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के आंकड़ों के अनुसार जहाजरानी पूरी तरह बंद नहीं हुई थी, बल्कि बहुत कम स्तर पर जारी रही। प्रारंभिक आंकड़ों में 3 से 9 अगस्त के बीच 78 ट्रांजिट दर्ज किए गए, जो पिछले सप्ताह के 95 से कम थे।
यह अंतर महत्वपूर्ण है। उपलब्ध साक्ष्य हॉर्मुज़ में गंभीर व्यवधान और जहाजरानी में बड़ी गिरावट की पुष्टि करते हैं, लेकिन पूरे संबंधित दौर में जलडमरूमध्य के लगातार और पूरी तरह बंद रहने का दावा साबित नहीं करते।
संघर्ष के दौरान लगातार नए हमले हुए हैं, इसलिए मृतकों, घायलों और रोकी गई मिसाइलों के आंकड़ों को उनकी रिपोर्टिंग की तारीख के साथ समझना जरूरी है। 1 मार्च को UAE अधिकारियों ने कहा था कि 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों के बाद उनकी सेनाओं ने 165 बैलिस्टिक मिसाइलों, दो क्रूज़ मिसाइलों और 541 ईरानी ड्रोन से निपटा था। उस समय की रिपोर्टों में तीन लोगों की मौत और 58 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई थी।
3 मार्च को UAE सरकार की एक ब्रीफिंग में इससे अधिक आंकड़े दिए गए—186 बैलिस्टिक मिसाइलों और 812 ड्रोन का पता लगने की बात कही गई। उस समय तीन मौतों और 68 मामूली चोटों की जानकारी दी गई थी। इससे स्पष्ट है कि शुरुआती आंकड़ों को पूरे संघर्ष का अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
ये संख्याएं अलग-अलग तारीखों पर स्थिति को दर्शाती हैं और 18 अगस्त की मिसाइल घटना तक का सत्यापित संचयी आंकड़ा नहीं देतीं। फिर भी, वे यह दिखाती हैं कि ताजा घटना ऐसे लंबे अभियान की पृष्ठभूमि में हुई जिसमें बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज़ मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल शामिल रहा है।
सऊदी अरब और 13 अन्य देशों ने 30 जुलाई को मल्टीनेशनल मैरीटाइम डिफेंस अलायंस की घोषणा की थी। इस गठबंधन का घोषित उद्देश्य सामूहिक समुद्री सुरक्षा मजबूत करना और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य, लाल सागर तथा अदन की खाड़ी से गुजरने वाली आवाजाही, व्यापार मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति की रक्षा करना है।
बाद में सऊदी अरब ने इस गठबंधन के संस्थागत और परिचालन रूप से सक्रिय होने की घोषणा की। 18 अगस्त को सऊदी कैबिनेट ने वाणिज्यिक जहाजों और टैंकरों पर ईरान के बार-बार हो रहे हमलों की भी निंदा की।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों से यह साबित नहीं होता कि गठबंधन को UAE की ओर दागी गई इन दो मिसाइलों के जवाब में विशेष रूप से सक्रिय किया गया था। गठबंधन का दायरा क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा है, जबकि 18 अगस्त की घटना मुख्य रूप से UAE के ऊपर या उसके निकट हुई वायु रक्षा कार्रवाई थी।
इस घटना से जुड़े कुछ दावे उपलब्ध साक्ष्यों से आगे जाते हैं। स्रोत यह स्थापित नहीं करते कि ईरान ने इस खास UAE घटनाक्रम को आधिकारिक रूप से “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4” नाम दिया था। इसी तरह, यह भी प्रमाणित नहीं है कि सऊदी अरब ने व्यापक रूप से वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की निंदा से अलग, इसी मिसाइल घटना की विशिष्ट निंदा की थी।
हॉर्मुज़ को लेकर ईरान का रुख अपेक्षाकृत बेहतर प्रमाणित है, लेकिन “दुश्मनों को छोड़कर सभी के लिए जलडमरूमध्य खुला रहेगा” जैसी संक्षिप्त व्याख्या से अधिक सशर्त है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने जलमार्ग को पूरी तरह खोलने को अमेरिका की कुछ रियायतों से जोड़ा है, जिनमें युद्ध समाप्त करना भी शामिल है। रॉयटर्स ने यह भी रिपोर्ट किया कि ईरान की योजना में अमेरिकी और इजरायली जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने पर रोकने की बात थी।
सबसे स्पष्ट निष्कर्ष यही है: UAE के अनुसार, उसने ईरान से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को निष्क्रिय कर दिया और दोनों में से कोई भी जमीन पर नहीं गिरी। अधिकारियों ने लोगों को कुछ समय के लिए सुरक्षित स्थानों में जाने की चेतावनी दी, सैन्य तैयारियों का स्तर बढ़ाया और किसी भी खतरे का दृढ़ जवाब देने की बात कही। यह घटना यह भी दिखाती है कि UAE की हवाई सुरक्षा अब ईरान और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़े अनसुलझे कूटनीतिक तथा समुद्री संकट से कितनी गहराई से जुड़ गई है।