दोनों पक्षों ने बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखी वेनेजुएला की अंतरराष्ट्रीय आरक्षित संपत्तियों को वापस पाने के लिए मिलकर कदम उठाने की बात कही है। वार्ता के इसी दौर में वेनेजुएला के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के नवीनीकरण की प्रक्रिया फिर से शुरू करने पर भी सहमति बनने की खबर है।
प्रस्तावित धन का इस्तेमाल मानवीय राहत और पुनर्निर्माण से जुड़े कामों में किया जाना है। प्राथमिकताओं में घरों और बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाना, भूकंप का मलबा हटाना तथा उन परिवारों की सहायता करना शामिल है जिनके घर नष्ट हुए या जिन्हें विस्थापित होना पड़ा।
विपक्षी प्रतिनिधि रैमोन लोपेज़ ने कहा कि बरामद धन को अमेरिकी ट्रेजरी के माध्यम से संचालित खाते में रखा जाएगा और योग्य अंतरराष्ट्रीय ऑडिट कंपनियां इसके इस्तेमाल की निगरानी करेंगी। लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्पष्ट नहीं है कि योजना में सोने की भौतिक खेप अमेरिका भेजना, सोना बेचकर रकम स्थानांतरित करना या कोई अन्य कस्टोडियल व्यवस्था शामिल होगी। अमेरिकी ट्रेजरी से जुड़े इस विवरण की राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज़ के प्रशासन ने भी सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड के पास वेनेजुएला का करीब 31 टन सोना मौजूदा विवाद से पहले से जमा है। 2018 में ब्रिटेन ने निकोलस मादुरो की सरकार को मान्यता देना बंद कर दिया। इसके बाद वेनेजुएला में प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक प्राधिकरण इस बात को लेकर आमने-सामने आ गए कि केंद्रीय बैंक की ओर से निर्देश देने और विदेशों में रखी आरक्षित संपत्तियों पर नियंत्रण का अधिकार किसके पास है।
इसलिए यह मामला बैंक ऑफ इंग्लैंड के साधारण तौर पर सोना लौटाने से इनकार का नहीं, बल्कि सरकार की मान्यता और उससे जुड़े मुकदमे का है। ब्रिटेन की अदालतों को तय करना है कि वेनेजुएला की कौन-सी सत्ता इन संपत्तियों के बारे में वैध निर्देश दे सकती है। बैंक ऑफ इंग्लैंड और ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने सोना जारी करने की सार्वजनिक प्रतिबद्धता नहीं जताई है।
कोविड-19 महामारी के दौरान वेनेजुएला के अधिकारियों ने पहले भी इन भंडारों तक पहुंच पाने की कोशिश की थी। उस समय प्रस्ताव था कि सोने से मिलने वाली रकम को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संयुक्त राष्ट्र के जरिए इस्तेमाल किया जाए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ब्रिटेन की अदालतों में यह प्रयास असफल रहा।
24 जून, 2026 को आए दो भूकंपों में समकालीन रिपोर्टों के अनुसार 6,000 से अधिक लोगों की मौत हुई। इस आपदा से वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा झटका लगा और नुकसान देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP के करीब 6% के बराबर आंका गया।
यह मानवीय संकट ऐसे समय आया जब वेनेजुएला पहले ही गंभीर आर्थिक दबाव में था। केंद्रीय बैंक के अनुसार, जुलाई में देश की मासिक महंगाई करीब 20% रही। ऐसे में अधिकारियों ने पुनर्निर्माण और लंदन में रखे सोने तक पहुंच को तत्काल प्राथमिकताओं में रखा।
यही परिस्थिति सरकार और विपक्ष के बीच असामान्य सहयोग को समझने में मदद करती है। दोनों पक्ष राजनीतिक सत्ता को लेकर अब भी विभाजित हैं, लेकिन भूकंप प्रभावित लोगों के लिए संसाधन जुटाने में उनका साझा हित है। फिर भी वेनेजुएला के भीतर बनी राजनीतिक सहमति ब्रिटेन से जुड़ा अलग कानूनी सवाल अपने-आप हल नहीं कर सकती।
यदि बरामद धन को अमेरिकी ट्रेजरी के माध्यम से संचालित खाते में रखा जाता है, तो उसके इस्तेमाल पर बाहरी नियंत्रण और निगरानी की एक व्यवस्था बनेगी। प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय ऑडिट से धन के दुरुपयोग का जोखिम घटेगा और वेनेजुएला के विभिन्न राजनीतिक गुटों तथा विदेशी सरकारों को भरोसा मिलेगा।
लेकिन इससे वेनेजुएला की राज्य संपत्तियों के प्रबंधन में वॉशिंगटन का प्रभाव भी बढ़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका वेनेजुएला की निर्यात आय—विशेषकर कच्चे तेल की बिक्री से मिलने वाले राजस्व—से जुड़े भुगतान के समय और रकम पर नियंत्रण रखता रहा है। वेनेजुएला के अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के करीब 4.5 अरब डॉलर के विशेष आहरण अधिकार (Special Drawing Rights या SDR) और अमेरिका तथा यूरोप में जमा अन्य जमी हुई सरकारी संपत्तियों तक पहुंच की मांग भी की है।
इस वजह से प्रस्तावित व्यवस्था राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। इससे जवाबदेही बेहतर हो सकती है, लेकिन यह वेनेजुएला की संपत्तियों के प्रबंधन में अमेरिकी प्रभाव को और गहरा भी कर सकती है।
तत्काल अगला कदम सोने का हस्तांतरण नहीं, बल्कि वेनेजुएला सरकार और इसमें शामिल विपक्षी समूहों की ओर से संयुक्त दावा पेश करना है। इसके बाद ब्रिटेन की कानूनी प्रक्रिया को तय करना होगा कि इन संपत्तियों के संबंध में वैध निर्देश देने का अधिकार किस प्राधिकरण के पास है।
सबसे महत्वपूर्ण अंतर यह है कि सोना वापस मांगने पर सहमति और अदालत से सोना जारी होने की मंजूरी एक ही बात नहीं हैं। पहली बात की रिपोर्ट सामने आई है; दूसरी अभी नहीं हुई है। जब तक ब्रिटेन की अदालत और बैंकिंग-कस्टडी से जुड़े सवालों का समाधान नहीं होता, तब तक ये 31 टन सोना पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित संसाधन तो है, लेकिन उपलब्ध नकदी नहीं।
दोनों पक्षों ने बैंक ऑफ इंग्लैंड में रखी वेनेजुएला की अंतरराष्ट्रीय आरक्षित संपत्तियों को वापस पाने के लिए मिलकर कदम उठाने की बात कही है। वार्ता के इसी दौर में वेनेजुएला के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के नवीनीकरण की प्रक्रिया फिर से शुरू करने पर भी सहमति बनने की खबर है।
प्रस्तावित धन का इस्तेमाल मानवीय राहत और पुनर्निर्माण से जुड़े कामों में किया जाना है। प्राथमिकताओं में घरों और बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाना, भूकंप का मलबा हटाना तथा उन परिवारों की सहायता करना शामिल है जिनके घर नष्ट हुए या जिन्हें विस्थापित होना पड़ा।
विपक्षी प्रतिनिधि रैमोन लोपेज़ ने कहा कि बरामद धन को अमेरिकी ट्रेजरी के माध्यम से संचालित खाते में रखा जाएगा और योग्य अंतरराष्ट्रीय ऑडिट कंपनियां इसके इस्तेमाल की निगरानी करेंगी। लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्पष्ट नहीं है कि योजना में सोने की भौतिक खेप अमेरिका भेजना, सोना बेचकर रकम स्थानांतरित करना या कोई अन्य कस्टोडियल व्यवस्था शामिल होगी। अमेरिकी ट्रेजरी से जुड़े इस विवरण की राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज़ के प्रशासन ने भी सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड के पास वेनेजुएला का करीब 31 टन सोना मौजूदा विवाद से पहले से जमा है। 2018 में ब्रिटेन ने निकोलस मादुरो की सरकार को मान्यता देना बंद कर दिया। इसके बाद वेनेजुएला में प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक प्राधिकरण इस बात को लेकर आमने-सामने आ गए कि केंद्रीय बैंक की ओर से निर्देश देने और विदेशों में रखी आरक्षित संपत्तियों पर नियंत्रण का अधिकार किसके पास है।
इसलिए यह मामला बैंक ऑफ इंग्लैंड के साधारण तौर पर सोना लौटाने से इनकार का नहीं, बल्कि सरकार की मान्यता और उससे जुड़े मुकदमे का है। ब्रिटेन की अदालतों को तय करना है कि वेनेजुएला की कौन-सी सत्ता इन संपत्तियों के बारे में वैध निर्देश दे सकती है। बैंक ऑफ इंग्लैंड और ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने सोना जारी करने की सार्वजनिक प्रतिबद्धता नहीं जताई है।
कोविड-19 महामारी के दौरान वेनेजुएला के अधिकारियों ने पहले भी इन भंडारों तक पहुंच पाने की कोशिश की थी। उस समय प्रस्ताव था कि सोने से मिलने वाली रकम को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संयुक्त राष्ट्र के जरिए इस्तेमाल किया जाए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ब्रिटेन की अदालतों में यह प्रयास असफल रहा।
24 जून, 2026 को आए दो भूकंपों में समकालीन रिपोर्टों के अनुसार 6,000 से अधिक लोगों की मौत हुई। इस आपदा से वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा झटका लगा और नुकसान देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP के करीब 6% के बराबर आंका गया।
यह मानवीय संकट ऐसे समय आया जब वेनेजुएला पहले ही गंभीर आर्थिक दबाव में था। केंद्रीय बैंक के अनुसार, जुलाई में देश की मासिक महंगाई करीब 20% रही। ऐसे में अधिकारियों ने पुनर्निर्माण और लंदन में रखे सोने तक पहुंच को तत्काल प्राथमिकताओं में रखा।
यही परिस्थिति सरकार और विपक्ष के बीच असामान्य सहयोग को समझने में मदद करती है। दोनों पक्ष राजनीतिक सत्ता को लेकर अब भी विभाजित हैं, लेकिन भूकंप प्रभावित लोगों के लिए संसाधन जुटाने में उनका साझा हित है। फिर भी वेनेजुएला के भीतर बनी राजनीतिक सहमति ब्रिटेन से जुड़ा अलग कानूनी सवाल अपने-आप हल नहीं कर सकती।
यदि बरामद धन को अमेरिकी ट्रेजरी के माध्यम से संचालित खाते में रखा जाता है, तो उसके इस्तेमाल पर बाहरी नियंत्रण और निगरानी की एक व्यवस्था बनेगी। प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय ऑडिट से धन के दुरुपयोग का जोखिम घटेगा और वेनेजुएला के विभिन्न राजनीतिक गुटों तथा विदेशी सरकारों को भरोसा मिलेगा।
लेकिन इससे वेनेजुएला की राज्य संपत्तियों के प्रबंधन में वॉशिंगटन का प्रभाव भी बढ़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका वेनेजुएला की निर्यात आय—विशेषकर कच्चे तेल की बिक्री से मिलने वाले राजस्व—से जुड़े भुगतान के समय और रकम पर नियंत्रण रखता रहा है। वेनेजुएला के अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के करीब 4.5 अरब डॉलर के विशेष आहरण अधिकार (Special Drawing Rights या SDR) और अमेरिका तथा यूरोप में जमा अन्य जमी हुई सरकारी संपत्तियों तक पहुंच की मांग भी की है।
इस वजह से प्रस्तावित व्यवस्था राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। इससे जवाबदेही बेहतर हो सकती है, लेकिन यह वेनेजुएला की संपत्तियों के प्रबंधन में अमेरिकी प्रभाव को और गहरा भी कर सकती है।
तत्काल अगला कदम सोने का हस्तांतरण नहीं, बल्कि वेनेजुएला सरकार और इसमें शामिल विपक्षी समूहों की ओर से संयुक्त दावा पेश करना है। इसके बाद ब्रिटेन की कानूनी प्रक्रिया को तय करना होगा कि इन संपत्तियों के संबंध में वैध निर्देश देने का अधिकार किस प्राधिकरण के पास है।
सबसे महत्वपूर्ण अंतर यह है कि सोना वापस मांगने पर सहमति और अदालत से सोना जारी होने की मंजूरी एक ही बात नहीं हैं। पहली बात की रिपोर्ट सामने आई है; दूसरी अभी नहीं हुई है। जब तक ब्रिटेन की अदालत और बैंकिंग-कस्टडी से जुड़े सवालों का समाधान नहीं होता, तब तक ये 31 टन सोना पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित संसाधन तो है, लेकिन उपलब्ध नकदी नहीं।