UN ने कहा कि मिसाइल और ड्रोन जैसे लंबी दूरी के हथियार जुलाई में नागरिक हताहतों का सबसे बड़ा कारण बने। इनसे 183 लोगों की मौत और 967 लोग घायल हुए—यानी सत्यापित नागरिक हताहतों का 38%।
ये आंकड़े मिशन द्वारा सत्यापित मामले हैं, हर घटना की पूरी संख्या नहीं। जहां पहुंच और स्वतंत्र पुष्टि सीमित है, विशेषकर कब्जे वाले इलाकों में, वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।
यूक्रेन ने रूस के भीतर भी लंबी दूरी के ड्रोन हमले किए। 14 अगस्त की रिपोर्टों के अनुसार, यूक्रेन से 800 किलोमीटर से अधिक दूर रूस के बाल्टिक तट पर स्थित उस्त-लुगा तेल और गैस निर्यात टर्मिनल में कुछ समय के लिए आग लगी। रूस के लेनिनग्राद क्षेत्र के अधिकारियों ने बाद में आग बुझने की बात कही।
रूस के त्वेर क्षेत्र में ऑनलाइन रिटेल कंपनी Wildberries के एक वेयरहाउस को भी ड्रोन के मलबे से नुकसान पहुंचने की सूचना मिली। किसी कर्मचारी के घायल होने की खबर नहीं थी। रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा ने 18 क्षेत्रों में 553 यूक्रेनी ड्रोन intercept किए। यह आधिकारिक रूसी दावा था और उपलब्ध रिपोर्टों से इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।
इन घटनाओं से संघर्ष की बढ़ती पहुंच सामने आती है: रूस यूक्रेन के रिहायशी इलाकों पर हवाई हमले जारी रखे हुए है, जबकि यूक्रेन रूस की लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा-निर्यात व्यवस्था को दूर तक निशाना बना रहा है।
युद्ध का क्षेत्रीय असर लातविया में भी दिखाई दिया। NATO के Baltic Air Policing मिशन के तहत काम कर रहे इटली के एक लड़ाकू विमान ने लातविया के हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर चुके एक अज्ञात ड्रोन को मार गिराया। लातवियाई अधिकारियों ने कहा कि ड्रोन रूसी इलेक्ट्रॉनिक या विद्युत-चुंबकीय युद्ध के कारण अपने मार्ग से भटका हो सकता है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में उसके मूल की स्वतंत्र पुष्टि नहीं थी।
इस घटना से यह साबित नहीं होता कि NATO क्षेत्र को जानबूझकर निशाना बनाया गया था। हालांकि, यह जरूर दिखाता है कि इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप, ड्रोन की अनियंत्रित दिशा और हवाई सुरक्षा अभियानों के कारण यूक्रेन युद्ध का जोखिम पड़ोसी देशों तक फैल सकता है।
14 अगस्त की तस्वीर एक ऐसे युद्ध की है जो मिसाइलों, ड्रोन और ग्लाइड बमों पर अधिक निर्भर होता जा रहा है। इस बढ़ती तीव्रता का सबसे बड़ा पैमाना केवल यह नहीं है कि हमले कितनी दूर तक पहुंच रहे हैं, बल्कि यह भी है कि उनका असर आम लोगों पर कितना विनाशकारी हो रहा है—घर में मारे जा रहे परिवार, ढहती आवासीय इमारतों में फंसे लोग और लगातार बढ़ता नागरिक नुकसान।
UN ने कहा कि मिसाइल और ड्रोन जैसे लंबी दूरी के हथियार जुलाई में नागरिक हताहतों का सबसे बड़ा कारण बने। इनसे 183 लोगों की मौत और 967 लोग घायल हुए—यानी सत्यापित नागरिक हताहतों का 38%।
ये आंकड़े मिशन द्वारा सत्यापित मामले हैं, हर घटना की पूरी संख्या नहीं। जहां पहुंच और स्वतंत्र पुष्टि सीमित है, विशेषकर कब्जे वाले इलाकों में, वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।
यूक्रेन ने रूस के भीतर भी लंबी दूरी के ड्रोन हमले किए। 14 अगस्त की रिपोर्टों के अनुसार, यूक्रेन से 800 किलोमीटर से अधिक दूर रूस के बाल्टिक तट पर स्थित उस्त-लुगा तेल और गैस निर्यात टर्मिनल में कुछ समय के लिए आग लगी। रूस के लेनिनग्राद क्षेत्र के अधिकारियों ने बाद में आग बुझने की बात कही।
रूस के त्वेर क्षेत्र में ऑनलाइन रिटेल कंपनी Wildberries के एक वेयरहाउस को भी ड्रोन के मलबे से नुकसान पहुंचने की सूचना मिली। किसी कर्मचारी के घायल होने की खबर नहीं थी। रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा ने 18 क्षेत्रों में 553 यूक्रेनी ड्रोन intercept किए। यह आधिकारिक रूसी दावा था और उपलब्ध रिपोर्टों से इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।
इन घटनाओं से संघर्ष की बढ़ती पहुंच सामने आती है: रूस यूक्रेन के रिहायशी इलाकों पर हवाई हमले जारी रखे हुए है, जबकि यूक्रेन रूस की लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा-निर्यात व्यवस्था को दूर तक निशाना बना रहा है।
युद्ध का क्षेत्रीय असर लातविया में भी दिखाई दिया। NATO के Baltic Air Policing मिशन के तहत काम कर रहे इटली के एक लड़ाकू विमान ने लातविया के हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर चुके एक अज्ञात ड्रोन को मार गिराया। लातवियाई अधिकारियों ने कहा कि ड्रोन रूसी इलेक्ट्रॉनिक या विद्युत-चुंबकीय युद्ध के कारण अपने मार्ग से भटका हो सकता है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में उसके मूल की स्वतंत्र पुष्टि नहीं थी।
इस घटना से यह साबित नहीं होता कि NATO क्षेत्र को जानबूझकर निशाना बनाया गया था। हालांकि, यह जरूर दिखाता है कि इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप, ड्रोन की अनियंत्रित दिशा और हवाई सुरक्षा अभियानों के कारण यूक्रेन युद्ध का जोखिम पड़ोसी देशों तक फैल सकता है।
14 अगस्त की तस्वीर एक ऐसे युद्ध की है जो मिसाइलों, ड्रोन और ग्लाइड बमों पर अधिक निर्भर होता जा रहा है। इस बढ़ती तीव्रता का सबसे बड़ा पैमाना केवल यह नहीं है कि हमले कितनी दूर तक पहुंच रहे हैं, बल्कि यह भी है कि उनका असर आम लोगों पर कितना विनाशकारी हो रहा है—घर में मारे जा रहे परिवार, ढहती आवासीय इमारतों में फंसे लोग और लगातार बढ़ता नागरिक नुकसान।