शोधकर्ताओं को संकेत मिला कि दिमाग हर तरह की जानकारी के लिए अलग न्यूरॉन समूह तय नहीं करता; प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स के कुछ समूह अलग अलग सामग्री पर एक ही computation दोहरा सकते हैं। [2] चूहों के delayed match to sample परीक्षण में वही प्रीफ्रंटल समूह पहले ध्वनि की याद और बाद में निर्णय या action plan को working memory में...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What did MIT and Princeton neuroscientists discover about the brain’s use of flexible, reusable neural modules, how did experiments in mice. Article summary: MIT–Princeton researchers found evidence that the brain need not allocate a separate neural population to every kind of information.. Topic tags: general web, ai, workflow, productivity, design. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers, clickbait thumbnails, icons, and tiny thumbnail layouts. Make it u
MIT और Princeton से जुड़े न्यूरोसाइंटिस्टों को ऐसा प्रमाण मिला है कि दिमाग हर प्रकार की जानकारी के लिए अलग-अलग न्यूरॉन आबादी तय करने के बजाय कुछ लचीले, दोबारा इस्तेमाल होने वाले neural modules का उपयोग कर सकता है। प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स के कुछ न्यूरॉन समूह एक समय में किसी संवेदी संकेत—जैसे आवाज़—की याद बनाए रख सकते हैं और बाद के चरण में उसी computation का इस्तेमाल action plan या निर्णय को working memory में रखने के लिए कर सकते हैं।
इसे शोधकर्ता दिमाग के “cognitive Legos” यानी ऐसे मानसिक ब्लॉक्स के रूप में समझाते हैं, जिन्हें अलग-अलग कामों के लिए जोड़कर और फिर नए तरीके से संयोजित करके व्यवहार तैयार किया जा सकता है।
चूहों को delayed match-to-sample with delayed report परीक्षण कराया गया। इसमें उन्हें पहले बजाई गई ऊँची या नीची pitch वाली ध्वनि याद रखनी थी, फिर दूसरी ध्वनि से उसकी तुलना करनी थी और अंत में अपना निर्णय या प्रतिक्रिया देने की योजना कुछ समय तक बनाए रखनी थी। इस दौरान शोधकर्ताओं ने medial prefrontal cortex और posterior parietal cortex में हजारों न्यूरॉनों की गतिविधि रिकॉर्ड की।
कम्प्यूटेशनल clustering analysis से stimulus processing और memory maintenance से जुड़े अलग-अलग neural subspaces की पहचान हुई।
मुख्य निष्कर्ष यह था कि प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स के कुछ clusters पहले delay के दौरान संवेदी memory बनाए रखने में सक्रिय थे, लेकिन अगले delay में वही clusters action plan को बनाए रखने के लिए दोबारा इस्तेमाल होते दिखे। यानी न्यूरॉन समूह की भूमिका जानकारी के प्रकार के साथ बदल सकती है, जबकि मूल computation—जानकारी को अस्थायी रूप से सक्रिय रखना—समान रह सकता है।
इसके विपरीत, posterior parietal cortex के clusters अपेक्षाकृत अधिक specialized पाए गए। वे लगातार किसी खास प्रकार की जानकारी से जुड़े रहे और प्रीफ्रंटल समूहों की तरह भूमिकाएँ बदलते हुए नहीं दिखे। यह अंतर दोनों क्षेत्रों के बीच संभावित division of labor की ओर इशारा करता है: प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स अधिक flexible reuse कर सकता है, जबकि parietal cortex कुछ कार्यों में अधिक विशिष्ट योगदान दे सकता है।
शोधकर्ताओं ने समान task demands पर artificial recurrent neural networks को भी train किया। इन networks में भी reusable modular organization विकसित हुई। विशिष्ट clusters को silencing करने पर खास computations बाधित हुईं, जिससे यह विचार मजबूत हुआ कि ऐसा modular ढाँचा केवल रिकॉर्ड किए गए चूहों की विशेषता नहीं, बल्कि task को कुशलता से हल करने का एक उपयोगी computational समाधान भी हो सकता है।
यह मॉडल compositional cognition का समर्थन करता है। इसके अनुसार सीमित neural resources से कई व्यवहार तैयार किए जा सकते हैं, क्योंकि दिमाग पहले से सीखे गए छोटे cognitive components को नए संयोजनों में इस्तेमाल करता है।
इससे सीखना अधिक sample-efficient हो सकता है। हर नया task शून्य से सीखने के बजाय दिमाग पहले से सीखे गए operations को नए नियम, memory या action के साथ जोड़ सकता है। यही क्षमता अचानक बदलती परिस्थितियों में task, rule, memory और plan के बीच तेज़ी से switch करने में मदद कर सकती है।
AI के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण design idea है। कई AI प्रणालियों को मिलते-जुलते नए tasks के लिए व्यापक retraining की जरूरत पड़ती है। reusable modules का ढाँचा ऐसी प्रणालियाँ बनाने में मदद कर सकता है, जो पुराने skills को बनाए रखते हुए नई क्षमताएँ सीखें। हालांकि, यह अभी एक संभावित दिशा है—मौजूदा निष्कर्ष अपने-आप में किसी नए AI architecture की गारंटी नहीं देते।
यह अध्ययन मानव जैसी flexible thought की पूरी कार्यप्रणाली सिद्ध नहीं करता। चूहों में की गई neural recordings activity patterns को दिखाती हैं, जो clusters के repurposing के अनुरूप हैं; लेकिन वे यह निर्णायक रूप से साबित नहीं करतीं कि कोई एक cluster अकेले उस व्यवहार का कारण बनता है।
इसके अलावा, उपलब्ध स्रोतों में उद्धृत अध्ययन का एक संस्करण preprint के रूप में दर्ज है और peer review की स्थिति स्पष्ट रूप से बताई गई है।
शोधकर्ता पहचाने गए prefrontal clusters को task के अलग-अलग चरणों में चुनिंदा रूप से perturb या manipulate करने की योजना बना रहे हैं। इससे जाँचा जा सकेगा कि किसी cluster की भूमिका सचमुच समय के साथ संवेदी memory बनाए रखने से action plan बनाए रखने में बदलती है या नहीं।
मुख्य prediction यह है कि यदि एक ही cluster को अलग-अलग समय-बिंदुओं पर बाधित किया जाए, तो उससे अलग-अलग information functions प्रभावित होनी चाहिए। उपलब्ध evidence में intervention की सटीक तकनीक या timeline का पर्याप्त विवरण नहीं है।
उपलब्ध स्रोतों से इस विशेष MIT-Princeton अध्ययन की funding की पुष्टि नहीं होती। Princeton के एक अन्य mouse-connectomics project के लिए U.S. Office of the Director of National Intelligence और National Institutes of Health की funding का उल्लेख है, लेकिन उसे इस अध्ययन की funding के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
Studio Global AI
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शोधकर्ताओं को संकेत मिला कि दिमाग हर तरह की जानकारी के लिए अलग न्यूरॉन समूह तय नहीं करता; प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स के कुछ समूह अलग अलग सामग्री पर एक ही computation दोहरा सकते हैं। [2]
शोधकर्ताओं को संकेत मिला कि दिमाग हर तरह की जानकारी के लिए अलग न्यूरॉन समूह तय नहीं करता; प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स के कुछ समूह अलग अलग सामग्री पर एक ही computation दोहरा सकते हैं। [2] चूहों के delayed match to sample परीक्षण में वही प्रीफ्रंटल समूह पहले ध्वनि की याद और बाद में निर्णय या action plan को working memory में बनाए रखने में शामिल दिखे। [2][4]
पश्च पार्श्विका कॉर्टेक्स के समूह अपेक्षाकृत अधिक specialized रहे, जबकि recurrent neural networks में भी पुन: इस्तेमाल होने वाले modular संगठन का विकास हुआ। [4][11]