कथित बैकचैनल का उद्देश्य ईरान की औपचारिक वार्ता टीम के बजाय सीधे IRGC नेतृत्व से संपर्क करना बताया गया। Axios की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने बरज़ानी को इसलिए चुना क्योंकि उनके अमेरिकी और IRGC, दोनों पक्षों के लोगों से संबंध माने जाते थे। वॉशिंगटन यह स्पष्ट करना चाहता था कि संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची IRGC की ओर से भी बोलने का अधिकार रखते हैं या नहीं।
हालांकि, संपर्क के बाद की घटनाओं पर रिपोर्टें पूरी तरह समान नहीं हैं। Axios के अनुसार, एक IRGC अधिकारी एरबिल में बरज़ानी के कार्यालय पहुंचा और सुरक्षित फोन कॉल के जरिए संपर्क हुआ। दूसरी रिपोर्ट में कहा गया कि एरबिल में प्रस्तावित गुप्त बैठक हुई ही नहीं और पाकिस्तान तथा ओमान के मध्यस्थ अपने प्रयास जारी रखते रहे।
इसलिए उपलब्ध सामग्री से किसी सक्रिय अमेरिका-IRGC शांति प्रक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती। ईरान के सार्वजनिक खंडन के कारण कथित संपर्क का अस्तित्व और उसका दायरा अभी विवादित है।
मोहेब्बी का रुख बेहद स्पष्ट था। उन्होंने कहा कि IRGC अधिकारियों और अमेरिकियों के बीच कोई चर्चा नहीं चल रही और ईरान का कूटनीतिक तंत्र भी फिलहाल वॉशिंगटन से बातचीत नहीं कर रहा। उनके मुताबिक, अमेरिका ने अपने वादे तोड़े और समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है। उन्होंने ट्रंप के दावे को युद्ध में अमेरिकी हार और निराशा से जुड़ी ‘कल्पनाएं’ बताया।
मोहेब्बी ने IRGC और ईरान की आधिकारिक कूटनीति के बीच संस्थागत अंतर पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, IRGC एक सैन्य-सुरक्षा संगठन है, कूटनीतिक वार्ता का औपचारिक माध्यम नहीं। ईरान की ओर से बातचीत राज्य की अधिकृत संस्थाओं के जरिए होती है। इस तर्क के मुताबिक, किसी अनौपचारिक IRGC चैनल को ईरान की आधिकारिक कूटनीतिक मशीनरी का विकल्प नहीं माना जा सकता।
बघाई ने इराकी कुर्दिस्तान के अधिकारियों के जरिए संपर्क और एरबिल में गुप्त बैठक की खबरों को भी खारिज किया। ईरानी अधिकारियों ने ऐसी रिपोर्टों को मनोवैज्ञानिक या हाइब्रिड युद्ध का हिस्सा बताया—ऐसा प्रयास, जिसका उद्देश्य राजनीतिक विभाजन पैदा करना और ईरान को कमजोर दिखाना हो सकता है। इन खबरों का मकसद तेल या ऊर्जा कीमतों को प्रभावित करना था, यह ईरानी अधिकारियों का आरोप है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन तेहरान जून के समझौते के कथित उल्लंघनों का समाधान होने तक सीधी वार्ता में वापस नहीं आएगा।
17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें संघर्षविराम, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक राहत और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़े प्रावधान शामिल थे। समझौते ने अंतिम करार के लिए 60 दिनों की अवधि तय की, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में इस ढांचे से स्थायी समाधान या बाद का पूरा समझौता होने की पुष्टि नहीं मिलती।
ईरान ने व्यापक समझौते के लिए कई मांगें रखी हैं। इनमें हमलों और कथित अमेरिकी उल्लंघनों का अंत, युद्ध क्षतिपूर्ति, जमे हुए ईरानी धन की रिहाई, अमेरिकी सैनिकों की वापसी और अमेरिका तथा इज़राइल से जुड़े जहाजों पर प्रतिबंध शामिल हैं। हालांकि, उपलब्ध स्रोत इन सभी मांगों को विशेष रूप से मोहेब्बी की व्यक्तिगत वार्ता-स्थिति के रूप में स्थापित नहीं करते; इन्हें व्यापक ईरानी नेतृत्व के रुख के तौर पर देखना अधिक उचित है।
ईरान और ओमान के बीच चल रही समानांतर बातचीत को अमेरिका-ईरान वार्ता नहीं माना जा रहा। अराघची ने इसे हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और समुद्री मार्गों के प्रबंधन पर तकनीकी चर्चा बताया। उनके अनुसार, ओमान के साथ किसी व्यवस्था पर सहमति बनने का अर्थ यह नहीं होगा कि जलडमरूमध्य अपने आप पूरी तरह खोल दिया जाएगा। इसके लिए अमेरिका की ओर से अतिरिक्त रियायतें जरूरी होंगी।
यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हॉर्मुज़ का समुद्री मुद्दा व्यापक संघर्ष से जुड़ा हुआ है। ईरान का कहना है कि अमेरिका की शर्तें पूरी होने तक जलडमरूमध्य पूरी तरह नहीं खुलेगा। इसी बीच, रिपोर्टों में वहां एक और जहाज को निशाना बनाए जाने की बात भी सामने आई।
ईरान के न्यायपालिका प्रमुख ग़ुलाम-हुसैन मोहसेनी एजेई ने राष्ट्रीय एकजुटता, युद्धकालीन फैसलों में तेजी और अमेरिकी दबाव के खिलाफ प्रतिरोध का आह्वान किया। उनके बयान ईरानी अधिकारियों के उस व्यापक वर्णन के अनुरूप हैं, जिसमें संघर्ष को सैन्य, आर्थिक, मीडिया और आंतरिक सुरक्षा—सभी मोर्चों पर दबाव के रूप में पेश किया जाता है।
हालांकि, उपलब्ध स्रोत इस दावे की पुष्टि नहीं करते कि एजेई ने विशेष रूप से पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रति आज्ञाकारिता का आह्वान किया था। दिए गए समकालीन स्रोत इस परिदृश्य में मोज़तबा खामेनेई को ईरान का सर्वोच्च नेता बताते हैं। इसलिए सत्यापित बयानों और बाद के द्वितीयक सारांशों में जोड़े गए दावों के बीच अंतर रखना जरूरी है।
कथित बैकचैनल से यह साबित नहीं होता कि अमेरिका और IRGC के बीच कोई प्रभावी शांति प्रक्रिया चल रही थी। इससे इतना जरूर संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन ने ईरान के सैन्य नेतृत्व तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ता तलाशा, जबकि तेहरान ने सार्वजनिक रूप से ऐसे संपर्क से इनकार किया और ठोस रियायतों के बिना नई कूटनीति से दूरी बनाए रखी।
गतिरोध के तीन प्रमुख कारण सामने आते हैं:
जब तक अधिकार, शर्तों के क्रम और समझौतों को लागू कराने के तरीके पर सहमति नहीं बनती, तब तक गुप्त संपर्कों की खबरें कूटनीतिक प्रगति से ज्यादा दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास का संकेत बनी रहेंगी।
कथित बैकचैनल का उद्देश्य ईरान की औपचारिक वार्ता टीम के बजाय सीधे IRGC नेतृत्व से संपर्क करना बताया गया। Axios की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने बरज़ानी को इसलिए चुना क्योंकि उनके अमेरिकी और IRGC, दोनों पक्षों के लोगों से संबंध माने जाते थे। वॉशिंगटन यह स्पष्ट करना चाहता था कि संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची IRGC की ओर से भी बोलने का अधिकार रखते हैं या नहीं।
हालांकि, संपर्क के बाद की घटनाओं पर रिपोर्टें पूरी तरह समान नहीं हैं। Axios के अनुसार, एक IRGC अधिकारी एरबिल में बरज़ानी के कार्यालय पहुंचा और सुरक्षित फोन कॉल के जरिए संपर्क हुआ। दूसरी रिपोर्ट में कहा गया कि एरबिल में प्रस्तावित गुप्त बैठक हुई ही नहीं और पाकिस्तान तथा ओमान के मध्यस्थ अपने प्रयास जारी रखते रहे।
इसलिए उपलब्ध सामग्री से किसी सक्रिय अमेरिका-IRGC शांति प्रक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती। ईरान के सार्वजनिक खंडन के कारण कथित संपर्क का अस्तित्व और उसका दायरा अभी विवादित है।
मोहेब्बी का रुख बेहद स्पष्ट था। उन्होंने कहा कि IRGC अधिकारियों और अमेरिकियों के बीच कोई चर्चा नहीं चल रही और ईरान का कूटनीतिक तंत्र भी फिलहाल वॉशिंगटन से बातचीत नहीं कर रहा। उनके मुताबिक, अमेरिका ने अपने वादे तोड़े और समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है। उन्होंने ट्रंप के दावे को युद्ध में अमेरिकी हार और निराशा से जुड़ी ‘कल्पनाएं’ बताया।
मोहेब्बी ने IRGC और ईरान की आधिकारिक कूटनीति के बीच संस्थागत अंतर पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, IRGC एक सैन्य-सुरक्षा संगठन है, कूटनीतिक वार्ता का औपचारिक माध्यम नहीं। ईरान की ओर से बातचीत राज्य की अधिकृत संस्थाओं के जरिए होती है। इस तर्क के मुताबिक, किसी अनौपचारिक IRGC चैनल को ईरान की आधिकारिक कूटनीतिक मशीनरी का विकल्प नहीं माना जा सकता।
बघाई ने इराकी कुर्दिस्तान के अधिकारियों के जरिए संपर्क और एरबिल में गुप्त बैठक की खबरों को भी खारिज किया। ईरानी अधिकारियों ने ऐसी रिपोर्टों को मनोवैज्ञानिक या हाइब्रिड युद्ध का हिस्सा बताया—ऐसा प्रयास, जिसका उद्देश्य राजनीतिक विभाजन पैदा करना और ईरान को कमजोर दिखाना हो सकता है। इन खबरों का मकसद तेल या ऊर्जा कीमतों को प्रभावित करना था, यह ईरानी अधिकारियों का आरोप है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन तेहरान जून के समझौते के कथित उल्लंघनों का समाधान होने तक सीधी वार्ता में वापस नहीं आएगा।
17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें संघर्षविराम, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक राहत और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़े प्रावधान शामिल थे। समझौते ने अंतिम करार के लिए 60 दिनों की अवधि तय की, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में इस ढांचे से स्थायी समाधान या बाद का पूरा समझौता होने की पुष्टि नहीं मिलती।
ईरान ने व्यापक समझौते के लिए कई मांगें रखी हैं। इनमें हमलों और कथित अमेरिकी उल्लंघनों का अंत, युद्ध क्षतिपूर्ति, जमे हुए ईरानी धन की रिहाई, अमेरिकी सैनिकों की वापसी और अमेरिका तथा इज़राइल से जुड़े जहाजों पर प्रतिबंध शामिल हैं। हालांकि, उपलब्ध स्रोत इन सभी मांगों को विशेष रूप से मोहेब्बी की व्यक्तिगत वार्ता-स्थिति के रूप में स्थापित नहीं करते; इन्हें व्यापक ईरानी नेतृत्व के रुख के तौर पर देखना अधिक उचित है।
ईरान और ओमान के बीच चल रही समानांतर बातचीत को अमेरिका-ईरान वार्ता नहीं माना जा रहा। अराघची ने इसे हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और समुद्री मार्गों के प्रबंधन पर तकनीकी चर्चा बताया। उनके अनुसार, ओमान के साथ किसी व्यवस्था पर सहमति बनने का अर्थ यह नहीं होगा कि जलडमरूमध्य अपने आप पूरी तरह खोल दिया जाएगा। इसके लिए अमेरिका की ओर से अतिरिक्त रियायतें जरूरी होंगी।
यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हॉर्मुज़ का समुद्री मुद्दा व्यापक संघर्ष से जुड़ा हुआ है। ईरान का कहना है कि अमेरिका की शर्तें पूरी होने तक जलडमरूमध्य पूरी तरह नहीं खुलेगा। इसी बीच, रिपोर्टों में वहां एक और जहाज को निशाना बनाए जाने की बात भी सामने आई।
ईरान के न्यायपालिका प्रमुख ग़ुलाम-हुसैन मोहसेनी एजेई ने राष्ट्रीय एकजुटता, युद्धकालीन फैसलों में तेजी और अमेरिकी दबाव के खिलाफ प्रतिरोध का आह्वान किया। उनके बयान ईरानी अधिकारियों के उस व्यापक वर्णन के अनुरूप हैं, जिसमें संघर्ष को सैन्य, आर्थिक, मीडिया और आंतरिक सुरक्षा—सभी मोर्चों पर दबाव के रूप में पेश किया जाता है।
हालांकि, उपलब्ध स्रोत इस दावे की पुष्टि नहीं करते कि एजेई ने विशेष रूप से पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रति आज्ञाकारिता का आह्वान किया था। दिए गए समकालीन स्रोत इस परिदृश्य में मोज़तबा खामेनेई को ईरान का सर्वोच्च नेता बताते हैं। इसलिए सत्यापित बयानों और बाद के द्वितीयक सारांशों में जोड़े गए दावों के बीच अंतर रखना जरूरी है।
कथित बैकचैनल से यह साबित नहीं होता कि अमेरिका और IRGC के बीच कोई प्रभावी शांति प्रक्रिया चल रही थी। इससे इतना जरूर संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन ने ईरान के सैन्य नेतृत्व तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ता तलाशा, जबकि तेहरान ने सार्वजनिक रूप से ऐसे संपर्क से इनकार किया और ठोस रियायतों के बिना नई कूटनीति से दूरी बनाए रखी।
गतिरोध के तीन प्रमुख कारण सामने आते हैं:
जब तक अधिकार, शर्तों के क्रम और समझौतों को लागू कराने के तरीके पर सहमति नहीं बनती, तब तक गुप्त संपर्कों की खबरें कूटनीतिक प्रगति से ज्यादा दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास का संकेत बनी रहेंगी।