अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च सर्विस के आकलन के अनुसार, 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के आक्रमण के बाद अमेरिकी और यूरोपीय अधिकारियों ने रूस पर यूरोप में लगातार और बढ़ती “दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों” का आरोप लगाया है। इनमें तोड़फोड़, हत्या के प्रयास या हत्याएं, राजनीतिक प्रभाव अभियान, साइबर हमले, हवाई क्षेत्र का उल्लंघन, जीपीएस जैमिंग और महत्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
रिंकेविच्स ने भी कहा है कि लातविया, लिथुआनिया और अन्य नाटो सदस्य देशों की एजेंसियों से साझा की गई जानकारी रूस की ओर से तोड़फोड़ के विभिन्न प्रयासों की ओर इशारा करती है। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से हर घटना का विवरण या लक्षित देशों की सूची नहीं दी।
हाइब्रिड अभियान का उद्देश्य अक्सर खुला सैन्य संघर्ष शुरू किए बिना विरोधी देश पर लागत डालना और उसकी राजनीतिक इच्छाशक्ति को परखना होता है। किसी बुनियादी ढांचे को बाधित करना, लॉजिस्टिक्स में रुकावट डालना, साइबर नेटवर्क को निशाना बनाना या दुष्प्रचार के जरिए भय और भ्रम पैदा करना—इन सभी तरीकों से किसी देश की प्रतिक्रिया क्षमता पर दबाव पड़ सकता है। साथ ही, ऐसे अभियानों में जिम्मेदारी से इनकार की गुंजाइश भी बनी रहती है।
ड्रोन इस चिंता का एक अहम हिस्सा हैं। जर्मनी के शीर्ष सैन्य अधिकारी जनरल कार्स्टन ब्रॉयर के अनुसार, रूस यूरोपीय हवाई सुरक्षा की कमजोरियां तलाशने के लिए ड्रोन का व्यवस्थित इस्तेमाल कर रहा है। इससे कम ऊंचाई पर निगरानी, रडार कवरेज और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों की व्यावहारिक कमियां सामने आ सकती हैं।
उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से यह साबित नहीं होता कि रूस ने बाल्टिक देशों या नाटो के पूर्वी हिस्से पर तत्काल बड़े आक्रमण का फैसला किया है। रिंकेविच्स ने खुद भी दोनों बातों के बीच अंतर किया है: रूस के पास अभी ऐसे आक्रमण की क्षमता न हो, फिर भी वह यूरोप में शत्रुतापूर्ण हाइब्रिड गतिविधियां चला सकता है।
हाल के अमेरिकी खुफिया आकलनों में ऐसी संभावनाओं पर विचार किया गया है जिनमें साइबर हमला, सीमित सैन्य घुसपैठ या किसी सहयोगी देश के खिलाफ छोटा हमला शामिल है। इन आकलनों के अनुसार, उद्देश्य नाटो की एकजुटता और उसके सामूहिक रक्षा प्रावधान—अनुच्छेद 5—की राजनीतिक विश्वसनीयता को परखना हो सकता है।
मीडिया रिपोर्टों में संभावित समयावधि 2026 की शरद ऋतु से 2029 तक बताई गई है और बाल्टिक क्षेत्र तथा पोलैंड को संभावित दबाव-बिंदुओं के रूप में पेश किया गया है। लेकिन ये वर्गीकृत जानकारी पर आधारित आकस्मिक आकलन हैं, हमले की निश्चित भविष्यवाणी नहीं।
चिंता का एक दूसरा पहलू रूस के कैलिनिनग्राद क्षेत्र और मुख्य रूसी भूभाग के बीच लिथुआनिया से होकर होने वाला सीमित ट्रांजिट है। यूरोपीय संघ ने 2003 में कैलिनिनग्राद के लिए विशेष सुविधायुक्त ट्रांजिट दस्तावेजों की व्यवस्था बनाई थी। संबंधित व्यवस्था में ट्रांजिट की अवधि सीमित रखने का प्रावधान था।
मौजूदा नियमों के तहत कुछ दस्तावेजों के लिए लिथुआनिया से होकर यात्रा की अधिकतम अवधि 24 घंटे तक हो सकती है, जबकि रेल ट्रांजिट दस्तावेज के लिए प्रत्येक यात्रा में छह घंटे की सीमा बताई गई है।
लिथुआनिया के सेइमास सदस्य और पूर्व रक्षा मंत्री अरविदास अनुषाउसकास ने रूसी नागरिकों के लिए सड़क मार्ग से ट्रांजिट की अनुमत अवधि छह घंटे करने का प्रस्ताव दिया है। उनका तर्क है कि इससे यूरोपीय संघ के नियमों को एकतरफा बदले बिना निगरानी और प्रवर्तन मजबूत किया जा सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, नियमों के उल्लंघन के दर्ज मामले 2024 में 360 से बढ़कर 2025 में 1,493 हो गए। इसी अवधि में लगभग 13,000 रूसी नंबर प्लेट वाली यात्री कारों ने सरल ट्रांजिट दस्तावेजों के तहत लिथुआनिया से यात्रा की।
ये आंकड़े 24 घंटे की समयसीमा की निगरानी कठिन होने और सख्त नियंत्रण की जरूरत का आधार देते हैं। हालांकि, केवल इन आंकड़ों से यह साबित नहीं होता कि ट्रांजिट करने वाले लोग जासूसी या तोड़फोड़ में शामिल थे।
रूस द्वारा यूरोपीय महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के खिलाफ “यूक्रेनी ड्रोन” इस्तेमाल किए जाने की किसी विशिष्ट योजना को साबित करने वाला पर्याप्त सार्वजनिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। अधिक ठोस निष्कर्ष यह है कि सस्ते और आसानी से अनुकूलित किए जा सकने वाले ड्रोन यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक वास्तविक कमजोरी हैं। इसलिए निगरानी, पहचान और उन्हें निष्क्रिय करने वाली प्रणालियों को प्राथमिकता दी जा रही है।
लातविया, लिथुआनिया, एस्टोनिया और पोलैंड के लिए मुख्य चुनौती सामूहिक जोखिम घटाना है। इसके लिए नाटो और यूरोपीय संघ के स्तर पर:
पर जोर दिया जा सकता है।
इसका व्यापक उद्देश्य रूस को ऐसा सीमित और नकारने योग्य परीक्षण करने से रोकना है, जो नाटो की एकजुटता को कमजोर कर सके। इसलिए रिंकेविच्स की चेतावनी को न तो नजरअंदाज करना उचित है और न ही इसे तत्काल पारंपरिक युद्ध शुरू होने का प्रमाण मानना।
अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च सर्विस के आकलन के अनुसार, 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के आक्रमण के बाद अमेरिकी और यूरोपीय अधिकारियों ने रूस पर यूरोप में लगातार और बढ़ती “दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों” का आरोप लगाया है। इनमें तोड़फोड़, हत्या के प्रयास या हत्याएं, राजनीतिक प्रभाव अभियान, साइबर हमले, हवाई क्षेत्र का उल्लंघन, जीपीएस जैमिंग और महत्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
रिंकेविच्स ने भी कहा है कि लातविया, लिथुआनिया और अन्य नाटो सदस्य देशों की एजेंसियों से साझा की गई जानकारी रूस की ओर से तोड़फोड़ के विभिन्न प्रयासों की ओर इशारा करती है। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से हर घटना का विवरण या लक्षित देशों की सूची नहीं दी।
हाइब्रिड अभियान का उद्देश्य अक्सर खुला सैन्य संघर्ष शुरू किए बिना विरोधी देश पर लागत डालना और उसकी राजनीतिक इच्छाशक्ति को परखना होता है। किसी बुनियादी ढांचे को बाधित करना, लॉजिस्टिक्स में रुकावट डालना, साइबर नेटवर्क को निशाना बनाना या दुष्प्रचार के जरिए भय और भ्रम पैदा करना—इन सभी तरीकों से किसी देश की प्रतिक्रिया क्षमता पर दबाव पड़ सकता है। साथ ही, ऐसे अभियानों में जिम्मेदारी से इनकार की गुंजाइश भी बनी रहती है।
ड्रोन इस चिंता का एक अहम हिस्सा हैं। जर्मनी के शीर्ष सैन्य अधिकारी जनरल कार्स्टन ब्रॉयर के अनुसार, रूस यूरोपीय हवाई सुरक्षा की कमजोरियां तलाशने के लिए ड्रोन का व्यवस्थित इस्तेमाल कर रहा है। इससे कम ऊंचाई पर निगरानी, रडार कवरेज और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों की व्यावहारिक कमियां सामने आ सकती हैं।
उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से यह साबित नहीं होता कि रूस ने बाल्टिक देशों या नाटो के पूर्वी हिस्से पर तत्काल बड़े आक्रमण का फैसला किया है। रिंकेविच्स ने खुद भी दोनों बातों के बीच अंतर किया है: रूस के पास अभी ऐसे आक्रमण की क्षमता न हो, फिर भी वह यूरोप में शत्रुतापूर्ण हाइब्रिड गतिविधियां चला सकता है।
हाल के अमेरिकी खुफिया आकलनों में ऐसी संभावनाओं पर विचार किया गया है जिनमें साइबर हमला, सीमित सैन्य घुसपैठ या किसी सहयोगी देश के खिलाफ छोटा हमला शामिल है। इन आकलनों के अनुसार, उद्देश्य नाटो की एकजुटता और उसके सामूहिक रक्षा प्रावधान—अनुच्छेद 5—की राजनीतिक विश्वसनीयता को परखना हो सकता है।
मीडिया रिपोर्टों में संभावित समयावधि 2026 की शरद ऋतु से 2029 तक बताई गई है और बाल्टिक क्षेत्र तथा पोलैंड को संभावित दबाव-बिंदुओं के रूप में पेश किया गया है। लेकिन ये वर्गीकृत जानकारी पर आधारित आकस्मिक आकलन हैं, हमले की निश्चित भविष्यवाणी नहीं।
चिंता का एक दूसरा पहलू रूस के कैलिनिनग्राद क्षेत्र और मुख्य रूसी भूभाग के बीच लिथुआनिया से होकर होने वाला सीमित ट्रांजिट है। यूरोपीय संघ ने 2003 में कैलिनिनग्राद के लिए विशेष सुविधायुक्त ट्रांजिट दस्तावेजों की व्यवस्था बनाई थी। संबंधित व्यवस्था में ट्रांजिट की अवधि सीमित रखने का प्रावधान था।
मौजूदा नियमों के तहत कुछ दस्तावेजों के लिए लिथुआनिया से होकर यात्रा की अधिकतम अवधि 24 घंटे तक हो सकती है, जबकि रेल ट्रांजिट दस्तावेज के लिए प्रत्येक यात्रा में छह घंटे की सीमा बताई गई है।
लिथुआनिया के सेइमास सदस्य और पूर्व रक्षा मंत्री अरविदास अनुषाउसकास ने रूसी नागरिकों के लिए सड़क मार्ग से ट्रांजिट की अनुमत अवधि छह घंटे करने का प्रस्ताव दिया है। उनका तर्क है कि इससे यूरोपीय संघ के नियमों को एकतरफा बदले बिना निगरानी और प्रवर्तन मजबूत किया जा सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, नियमों के उल्लंघन के दर्ज मामले 2024 में 360 से बढ़कर 2025 में 1,493 हो गए। इसी अवधि में लगभग 13,000 रूसी नंबर प्लेट वाली यात्री कारों ने सरल ट्रांजिट दस्तावेजों के तहत लिथुआनिया से यात्रा की।
ये आंकड़े 24 घंटे की समयसीमा की निगरानी कठिन होने और सख्त नियंत्रण की जरूरत का आधार देते हैं। हालांकि, केवल इन आंकड़ों से यह साबित नहीं होता कि ट्रांजिट करने वाले लोग जासूसी या तोड़फोड़ में शामिल थे।
रूस द्वारा यूरोपीय महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के खिलाफ “यूक्रेनी ड्रोन” इस्तेमाल किए जाने की किसी विशिष्ट योजना को साबित करने वाला पर्याप्त सार्वजनिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। अधिक ठोस निष्कर्ष यह है कि सस्ते और आसानी से अनुकूलित किए जा सकने वाले ड्रोन यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक वास्तविक कमजोरी हैं। इसलिए निगरानी, पहचान और उन्हें निष्क्रिय करने वाली प्रणालियों को प्राथमिकता दी जा रही है।
लातविया, लिथुआनिया, एस्टोनिया और पोलैंड के लिए मुख्य चुनौती सामूहिक जोखिम घटाना है। इसके लिए नाटो और यूरोपीय संघ के स्तर पर:
पर जोर दिया जा सकता है।
इसका व्यापक उद्देश्य रूस को ऐसा सीमित और नकारने योग्य परीक्षण करने से रोकना है, जो नाटो की एकजुटता को कमजोर कर सके। इसलिए रिंकेविच्स की चेतावनी को न तो नजरअंदाज करना उचित है और न ही इसे तत्काल पारंपरिक युद्ध शुरू होने का प्रमाण मानना।