11 अगस्त के ड्रोन हमले के बाद रूस के ओर्स्कनेफ्तेऑर्गसिन्तेज रिफाइनरी ने प्रसंस्करण रोक दिया। उद्योग सूत्रों ने संयंत्र के बंद होने की पुष्टि की, जबकि क्षेत्रीय गवर्नर ने कहा कि अहम ढाँचे को हुए नुकसान की मरम्मत में छह महीने तक लग सकते हैं।
रूस के कई क्षेत्रों में पेट्रोल की कमी, लंबी कतारें, बढ़ी हुई कीमतें और बिक्री पर सीमाएँ देखने को मिली हैं। अगस्त में कम-से-कम 10 क्षेत्रों के अधिकारियों ने पेट्रोल पंपों पर ईंधन बिक्री के नियंत्रण फिर कड़े किए। मॉस्को क्षेत्र के कुछ पंपों पर पेट्रोल उपलब्ध नहीं था, हालांकि कई स्थानों पर डीजल मिल रहा था।
सरकार ने घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के लिए ईंधन निर्यात पर रोक या सीमाएँ लगाईं। इसके अलावा बेलारूस और कजाखस्तान से आयात बढ़ाने तथा रेल के जरिए आपूर्ति लाने जैसे उपाय किए गए। कुछ रिफाइनरियों को कम पर्यावरणीय मानकों वाला ईंधन बनाने की अनुमति भी दी गई।
ये कदम स्थानीय स्तर पर कमी कम कर सकते हैं, लेकिन क्षतिग्रस्त रिफाइनरियों की खोई हुई प्रसंस्करण क्षमता वापस नहीं ला सकते। यही वजह है कि रूस जैसा तेल उत्पादक देश भी कुछ बाजारों में आयात और राशनिंग का सहारा ले रहा है।
मौजूदा दबाव कच्चे तेल की कमी से ज्यादा रिफाइंड उत्पादों—पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन—की कमी का संकट है। रूस की रिफाइनरियों पर हमलों के साथ-साथ ईरान युद्ध से जुड़े व्यवधानों ने भी वैश्विक बाजार पर दबाव बढ़ाया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आवाजाही प्रभावित हुई है और मध्य-पूर्व की कुछ रिफाइनरियाँ हमलों के कारण आंशिक या पूरी तरह बंद रही हैं।
कम वैश्विक भंडार और कृषि क्षेत्र में मौसमी डीजल मांग ने स्थिति को और कठिन बनाया। रॉयटर्स के अनुसार, हाल के महीनों में यूक्रेन और ईरान युद्धों से जुड़े हमलों ने दुनिया की लगभग 9% रिफाइनिंग क्षमता को प्रभावित किया।
इस तंगी का एक संकेत अमेरिकी डीजल ‘क्रैक स्प्रेड’ भी है। 17 अगस्त को यह रिकॉर्ड 102.20 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया। क्रैक स्प्रेड कच्चे तेल और उससे बनने वाले डीजल के दाम का अंतर होता है और यह रिफाइनिंग से मिलने वाले मूल्य का संकेत देता है। इसका 102.20 डॉलर होना यह नहीं बताता कि पेट्रोल पंप पर डीजल 100 डॉलर महँगा हो गया है; यह डीजल की कच्चे तेल की तुलना में असाधारण कमी दर्शाता है।
ईंधन की कमी सरकार पर राजनीतिक दबाव डाल सकती है, विशेषकर तब जब इसका असर रोजमर्रा के परिवहन, कृषि और क्षेत्रीय बाजारों पर दिखाई दे। लेकिन उपलब्ध साक्ष्य रूस में ईंधन की घटती उपलब्धता, निर्यात क्षमता में कमी, भारत और बेलारूस से आयात तथा क्षेत्रीय बिक्री नियंत्रणों की पुष्टि करते हैं—राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की लोकप्रियता में किसी निश्चित गिरावट की नहीं।
इसी तरह, रूसी रिफाइनरी उत्पादन के ‘रिकॉर्ड निचले स्तर’ पर पहुँचने या सेंट पीटर्सबर्ग में पेट्रोल बिक्री और ईंधन निर्यात में किसी निश्चित मात्रात्मक गिरावट के दावों को उपलब्ध उच्च-गुणवत्ता वाले प्रमाणों से स्थापित नहीं किया जा सकता। ऐसे राजनीतिक निष्कर्षों के लिए स्वतंत्र और विश्वसनीय जनमत सर्वेक्षणों के साथ कारणात्मक विश्लेषण भी जरूरी होगा।