आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ कि चीन की अर्थव्यवस्था में कमजोरी केवल कारखानों या उत्पादन क्षमता से जुड़ी नहीं है। परिवारों का खर्च सीमित बना हुआ है और उपभोक्ता विश्वास कमजोर है। संपत्ति क्षेत्र में जारी गिरावट ने घरों से जुड़ा निवेश, स्थानीय सरकारों का राजस्व, निर्माण गतिविधि और लोगों का भरोसा प्रभावित किया है।
यही वजह है कि ली च्यांग ने घरेलू मांग की कमी को प्रमुख समस्या के रूप में रेखांकित किया और अर्थव्यवस्था में अधिक मजबूत प्रति-चक्रात्मक समर्थन की जरूरत बताई। इसका अर्थ है कि आर्थिक मंदी के दबाव को कम करने के लिए सरकार राजकोषीय, मौद्रिक और अन्य नीतिगत साधनों का इस्तेमाल बढ़ा सकती है।
चीन की कैबिनेट बैठक में ली ने अधिकारियों से कहा कि मौजूदा नीतियों का असर अधिक प्रभावी बनाया जाए और समय पर व्यावहारिक तथा प्रभावी अतिरिक्त नीतियां तैयार की जाएं। उन्होंने वार्षिक आर्थिक और सामाजिक विकास लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयास जारी रखने पर भी जोर दिया।
उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं:
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में राष्ट्रीय विकास एवं सुधार आयोग (NDRC) की ओर से किसी विस्तृत नए प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा का उल्लेख नहीं है। इसलिए फिलहाल इसे किसी बड़े राहत पैकेज के बजाय मांग को सहारा देने और प्रति-चक्रात्मक समायोजन मजबूत करने की व्यापक नीति-दिशा के रूप में देखना अधिक उचित है।
घरेलू अर्थव्यवस्था की कमजोरी के बीच चीन के निर्यात ने महत्वपूर्ण सहारा दिया है। जुलाई में डॉलर के आधार पर निर्यात सालाना 23.9% बढ़ा। वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) बुनियादी ढांचे की मांग ने चिप्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य हाई-टेक उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दिया।
AI क्षेत्र में वैश्विक निवेश ने चीनी निर्माताओं को समर्थन दिया है। ऑटोमोबाइल निर्यात भी मजबूत रहा और जून में पहली बार एक महीने में 10 लाख वाहनों का आंकड़ा पार कर गया। हाई-टेक और उपकरण निर्माण जैसे क्षेत्र संपत्ति और पारंपरिक निर्माण क्षेत्र की कमजोरी की कुछ भरपाई कर सकते हैं, क्योंकि इनमें निवेश अधिक उन्नत उत्पादन क्षमता की ओर जाता है।
कमजोर घरेलू खपत: खुदरा बिक्री की धीमी वृद्धि बताती है कि परिवार अभी भी खर्च को लेकर सतर्क हैं। यदि उत्पादन और निर्यात मजबूत भी रहें, तो कमजोर घरेलू मांग समग्र वृद्धि को अस्थिर बना सकती है।
संपत्ति क्षेत्र का संकट: रियल एस्टेट में जारी गिरावट को जल्दी से हाई-टेक विनिर्माण से बदलना संभव नहीं है। संपत्ति क्षेत्र लंबे समय तक निवेश, रोजगार, स्थानीय सरकारी आय और निर्माण मांग का बड़ा आधार रहा है।
निवेश में असंतुलन: हाई-टेक क्षमता में बढ़ोतरी उत्पादकता बढ़ा सकती है, लेकिन खपत मजबूत न होने पर अतिरिक्त क्षमता और कीमतों में गिरावट का दबाव भी बढ़ सकता है।
निर्यात पर निर्भरता: AI से जुड़ा निर्यात फिलहाल वृद्धि को थामे हुए है, लेकिन इससे चीन वैश्विक मांग, अमेरिकी व्यापार नीति और विदेशी बाजारों पर अधिक निर्भर रहता है।
व्यापार और भू-राजनीतिक जोखिम: संभावित अमेरिकी शुल्क, व्यापक व्यापार तनाव और मध्य पूर्व से जुड़े ऊर्जा कीमतों तथा शिपिंग व्यवधानों से बाहरी मांग कमजोर हो सकती है या लागत बढ़ सकती है। अमेरिकी शुल्क बढ़ने की आशंका से कुछ कंपनियों ने पहले ही अमेरिका भेजी जाने वाली खेपों में तेजी की थी।
बीजिंग के सामने सबसे कठिन संतुलन यह है कि वह 2026 के आर्थिक लक्ष्य को समर्थन देने के लिए पर्याप्त कदम उठाए, लेकिन फिर से अत्यधिक कर्ज और संपत्ति-आधारित प्रोत्साहन पर निर्भर न हो। इसलिए मौजूदा बदलाव किसी बड़े, एकमुश्त राहत पैकेज की बजाय धीरे-धीरे घरेलू मांग, उन्नत विनिर्माण और अधिक टिकाऊ विकास मॉडल की ओर बढ़ने वाला हो सकता है। उपलब्ध साक्ष्य इस नीति-संतुलन को एक विश्लेषणात्मक जोखिम के रूप में दिखाते हैं, किसी विशिष्ट नई नीति के अंतिम निर्णय के रूप में नहीं।