यह स्थिति डिलीवरी योग्य धातु के लिए तेज प्रतिस्पर्धा दिखाती है। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि पूरे साल के लिए दुनिया में तांबा खत्म हो रहा है। फिलहाल संकेत यह है कि जिन खरीदारों को तांबा अभी चाहिए, उनके लिए धातु सही जगह पर उपलब्ध नहीं है।
आमतौर पर पर्याप्त सप्लाई वाले बाजार में बाद की तारीख वाले वायदा अनुबंध, तत्काल कीमत से ऊपर कारोबार कर सकते हैं। इसकी वजह भंडारण, वित्तपोषण और बीमा की लागत होती है। इसके उलट स्थिति को बैकवर्डेशन कहा जाता है—यानी कैश या नजदीकी अनुबंध की कीमत बाद की डिलीवरी वाले अनुबंध से ऊपर हो।
14 अगस्त को एलएमई कॉपर के अगस्त-सितंबर अनुबंध का प्रीमियम $370 प्रति टन तक पहुंच गया। इसके बाद कैश-टू-थ्री-मंथ स्प्रेड लगभग $478 से $545 प्रति टन के बीच पहुंच गया, जो 2021 के कॉपर स्क्वीज़ के बाद की सबसे तनावपूर्ण स्थितियों में से है।
इस स्प्रेड का संदेश सीधा है: बाजार बाद में आने वाले तांबे के वादे की तुलना में अभी डिलीवरी योग्य तांबे को कहीं अधिक मूल्य दे रहा है। नजदीकी अनुबंधों में शॉर्ट पोजीशन रखने वाले कारोबारियों के सामने कठिन विकल्प है। उन्हें या तो एक्सचेंज-मान्य तांबा डिलीवरी के लिए जुटाना होगा, या अपने फ्यूचर्स अनुबंध वापस खरीदने होंगे। ऐसे में वे दूसरे शॉर्ट विक्रेताओं के साथ उसी सीमित सप्लाई के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।
एलएमई कॉपर स्टॉक लगातार 42 सत्रों की गिरावट के बाद 204,975 टन पर आ गया, जो फरवरी के बाद का सबसे निचला स्तर है। उपलब्ध बाजार कवरेज के अनुसार, बची हुई धातु का लगभग आधा हिस्सा पहले ही निकासी के लिए चिन्हित था। 10 से 14 अगस्त वाले सप्ताह में एलएमई सिस्टम में वास्तव में उपलब्ध स्टॉक करीब 94,875 टन रह गया था।
यह अंतर महत्वपूर्ण है। एक्सचेंज का कुल स्टॉक नजदीकी अनुबंधों की डिलीवरी के लिए पूरी तरह उपलब्ध नहीं होता। कुछ तांबा पहले ही वेयरहाउस से निकाले जाने के लिए प्रतिबद्ध हो चुका होता है, भले ही वह कुल स्टॉक के आंकड़े में शामिल रहे। लगातार निकासी एलएमई के तत्काल डिलीवरी वाले अनुबंधों के पीछे मौजूद सुरक्षा-भंडार को कम करती है और अचानक डिलीवरी की होड़ का जोखिम बढ़ाती है।
गिरावट की रफ्तार भी तेज रही है। मई के बाद से एलएमई स्टॉक 40% से अधिक घट चुका है और कई हजार टन की खेपें लगातार वेयरहाउस नेटवर्क से बाहर जा रही हैं। यह घटता हुआ बफर समझाता है कि खरीद या बिक्री के दबाव में अपेक्षाकृत छोटे बदलाव भी नजदीकी स्प्रेड में असामान्य रूप से बड़े उतार-चढ़ाव क्यों पैदा कर रहे हैं।
इस स्क्वीज़ का एक बड़ा कारण भौगोलिक है। संभावित टैरिफ निर्णय से पहले कारोबारी रिफाइंड तांबा अमेरिका भेज रहे हैं, ताकि आयात महंगा होने पर बनने वाले प्रीमियम का लाभ उठाया जा सके। उपलब्ध रिपोर्टिंग के अनुसार, जुलाई में अमेरिका का रिफाइंड कॉपर आयात 200,000 टन से अधिक रहा—12 वर्षों में किसी एक महीने का सबसे ऊंचा स्तर।
इन खेपों से वैश्विक अंतिम खपत तुरंत बढ़े बिना भी बाकी बाजार में सप्लाई तंग हो सकती है। अमेरिका के बंदरगाहों तक पहुंचा तांबा यूरोप, चीन और अन्य व्यापारिक केंद्रों के खरीदारों के लिए कम उपलब्ध रहता है। इसमें एलएमई वेयरहाउस सिस्टम भी शामिल है। नतीजा एक क्षेत्रीय असंतुलन है: अमेरिका में स्टॉक बढ़ता है, जबकि उसके बाहर एक्सचेंज पर उपलब्ध स्टॉक घटता जाता है।
इस स्थिति में उलटफेर का जोखिम भी साफ है। अगर अमेरिकी टैरिफ की उम्मीद कमजोर पड़ती है, तो अमेरिका में जमा किया गया कुछ तांबा व्यापक बाजार में वापस आ सकता है। इससे तुरंत डिलीवरी वाले तांबे का प्रीमियम घट सकता है, हालांकि इसकी गति और पैमाना अभी अनिश्चित हैं।
चीन दबाव का दूसरा बड़ा केंद्र है। जून में चीन का रिफाइंड कॉपर आयात नौ महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा, जबकि स्मेल्टर रखरखाव के कारण घरेलू सप्लाई प्रभावित हुई। चीन की खरीदारी की निगरानी के लिए इस्तेमाल होने वाला यांगशान कॉपर इंपोर्ट प्रीमियम चार साल के उच्च स्तर $115 प्रति टन पर पहुंच गया। इसी दौरान शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज के कॉपर स्टॉक मार्च के 433,458 टन से घटकर जुलाई के अंत तक 69,610 टन रह गए।
चीनी स्मेल्टरों को कॉपर कंसंट्रेट और स्क्रैप की सप्लाई हासिल करने में भी कठिनाई हो रही है। उपलब्ध बाजार कवरेज में उद्धृत एक अनुमान के अनुसार, चीन की कुल स्मेल्टिंग क्षमता के 81.97% का प्रतिनिधित्व करने वाले उत्पादकों का अगस्त रिफाइंड आउटपुट करीब 1.05 मिलियन टन रह सकता है—एक साल पहले की तुलना में 2.83% कम।
इस तरह दबाव दोनों दिशाओं से काम कर रहा है: चीन अंतरराष्ट्रीय बाजार से रिफाइंड तांबा खींच रहा है, जबकि कच्चे माल की कमी उसकी अपनी रिफाइनिंग व्यवस्था को सीमित कर रही है। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य से कॉपर और कोबाल्ट कंसंट्रेट के निर्यात पर बताई गई पाबंदी ने कच्चे माल के बाजार पर दबाव और बढ़ाया है। हालांकि, उपलब्ध रॉयटर्स विश्लेषण के अनुसार, यह पाबंदी अकेले वैश्विक कॉपर बैलेंस में बड़ा बदलाव नहीं लाएगी; इसका अधिक असर पहले से दबाव में चल रहे कंसंट्रेट बाजार को और तंग करना हो सकता है।
बैकवर्डेशन में किसी नजदीकी अनुबंध पर शॉर्ट पोजीशन बनाए रखना महंगा हो जाता है। अगर शॉर्ट विक्रेता आवश्यक एक्सचेंज-ग्रेड तांबा डिलीवर नहीं कर पाता, तो उसे अनुबंध वापस खरीदना पड़ सकता है या किसी अन्य धारक से वारंट और भौतिक धातु जुटानी पड़ सकती है।
जब कई कारोबारी एक ही समय पर तुरंत डिलीवरी वाला तांबा तलाशते हैं, तो उनकी खरीद नजदीकी कीमत को बाद की डिलीवरी वाले फ्यूचर्स से कहीं तेज ऊपर धकेल सकती है। इसी वजह से भौतिक सप्लाई स्क्वीज़ कीमतों में अनुपात से अधिक उछाल ला सकता है। मूल समस्या केवल तेजी की भावना नहीं, बल्कि तत्काल डिलीवरी की जरूरत पूरी करने वाली सीमित धातु है। उपलब्ध बाजार रिपोर्टों के अनुसार, मौजूदा स्प्रेड 2021 के स्क्वीज़ के बाद सबसे चौड़ा है, जिसके समय एक्सचेंज को हस्तक्षेप करना पड़ा था।
जब उपलब्ध स्टॉक कम हो और नजदीकी पोजीशन बहुत अधिक केंद्रित हो जाएं, तो एलएमई के पास अव्यवस्थित कारोबार का जोखिम घटाने के लिए कई उपाय हैं। इसके नियमों में मेटल-लेंडिंग की शर्तें, ‘टॉम-नेक्स्ट’ बैकवर्डेशन पर नियंत्रण और बैकवर्डेशन कैप शामिल हैं। कुछ परिस्थितियों में एक्सचेंज स्थगित डिलीवरी की व्यवस्था भी लागू कर सकता है।
ये उपाय स्क्वीज़ की बाजार-यांत्रिकी को कुछ हद तक नियंत्रित कर सकते हैं—मसलन, धातु उधार देने को बढ़ावा देकर या कुछ नजदीकी स्प्रेड की सीमा तय करके। लेकिन वे नया तांबा पैदा नहीं कर सकते। अमेरिका भेजी जा चुकी खेपों को वापस नहीं ला सकते, कैंसल किए गए वारंट के बाद वेयरहाउस खाली होने की भरपाई नहीं कर सकते और चीनी स्मेल्टरों का उत्पादन तुरंत बहाल नहीं कर सकते।
यही अंतर महत्वपूर्ण है। मौजूदा तनाव बाजार की पोजीशनिंग और भौतिक धातु के अलग-अलग क्षेत्रों में फंस जाने—दोनों का परिणाम है। नियामकीय नियंत्रण अव्यवस्थित ‘कॉर्नर’ बनने का जोखिम कम कर सकते हैं, लेकिन डिलीवरी योग्य स्टॉक कम रहने पर बाजार फिर भी तंग बना रह सकता है।
निकट अवधि में सबसे महत्वपूर्ण संकेतक होंगे—एलएमई वेयरहाउस में नई डिलीवरी, कैंसल किए गए वारंट का वापस सक्रिय होना और नजदीकी अनुबंधों की समाप्ति के दौरान कैश-टू-थ्री-मंथ स्प्रेड का व्यवहार। एलएमई में धातु का पर्याप्त प्रवाह डिलीवरी जोखिम घटा सकता है। लेकिन अगर स्टॉक गिरता रहा और नजदीकी शॉर्ट पोजीशन रखने वालों को तांबा जुटाना पड़ा, तो एलएमई कीमत जनवरी के रिकॉर्ड से ऊपर जा सकती है।
यह संभावना है, गारंटी नहीं। जनवरी का उच्चतम स्तर $14,527.50 प्रति टन था, जबकि 17 अगस्त की बाजार रिपोर्टिंग में तीन-महीने वाला कॉपर $14,396 पर था। भौतिक कमी और शॉर्ट कवरिंग तेज होने पर कीमत नया रिकॉर्ड बना सकती है। दूसरी ओर, अमेरिकी टैरिफ की उम्मीद कम होने, चीनी खरीदारी धीमी पड़ने या वेयरहाउस की धातु बाजार में लौटने पर कीमतें तेजी से नीचे भी आ सकती हैं। फिलहाल उपलब्ध प्रमाण स्थायी वैश्विक कमी की तुलना में निकट अवधि की गंभीर सप्लाई-तंगी को अधिक मजबूती से दर्शाते हैं।
यह स्थिति डिलीवरी योग्य धातु के लिए तेज प्रतिस्पर्धा दिखाती है। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि पूरे साल के लिए दुनिया में तांबा खत्म हो रहा है। फिलहाल संकेत यह है कि जिन खरीदारों को तांबा अभी चाहिए, उनके लिए धातु सही जगह पर उपलब्ध नहीं है।
आमतौर पर पर्याप्त सप्लाई वाले बाजार में बाद की तारीख वाले वायदा अनुबंध, तत्काल कीमत से ऊपर कारोबार कर सकते हैं। इसकी वजह भंडारण, वित्तपोषण और बीमा की लागत होती है। इसके उलट स्थिति को बैकवर्डेशन कहा जाता है—यानी कैश या नजदीकी अनुबंध की कीमत बाद की डिलीवरी वाले अनुबंध से ऊपर हो।
14 अगस्त को एलएमई कॉपर के अगस्त-सितंबर अनुबंध का प्रीमियम $370 प्रति टन तक पहुंच गया। इसके बाद कैश-टू-थ्री-मंथ स्प्रेड लगभग $478 से $545 प्रति टन के बीच पहुंच गया, जो 2021 के कॉपर स्क्वीज़ के बाद की सबसे तनावपूर्ण स्थितियों में से है।
इस स्प्रेड का संदेश सीधा है: बाजार बाद में आने वाले तांबे के वादे की तुलना में अभी डिलीवरी योग्य तांबे को कहीं अधिक मूल्य दे रहा है। नजदीकी अनुबंधों में शॉर्ट पोजीशन रखने वाले कारोबारियों के सामने कठिन विकल्प है। उन्हें या तो एक्सचेंज-मान्य तांबा डिलीवरी के लिए जुटाना होगा, या अपने फ्यूचर्स अनुबंध वापस खरीदने होंगे। ऐसे में वे दूसरे शॉर्ट विक्रेताओं के साथ उसी सीमित सप्लाई के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।
एलएमई कॉपर स्टॉक लगातार 42 सत्रों की गिरावट के बाद 204,975 टन पर आ गया, जो फरवरी के बाद का सबसे निचला स्तर है। उपलब्ध बाजार कवरेज के अनुसार, बची हुई धातु का लगभग आधा हिस्सा पहले ही निकासी के लिए चिन्हित था। 10 से 14 अगस्त वाले सप्ताह में एलएमई सिस्टम में वास्तव में उपलब्ध स्टॉक करीब 94,875 टन रह गया था।
यह अंतर महत्वपूर्ण है। एक्सचेंज का कुल स्टॉक नजदीकी अनुबंधों की डिलीवरी के लिए पूरी तरह उपलब्ध नहीं होता। कुछ तांबा पहले ही वेयरहाउस से निकाले जाने के लिए प्रतिबद्ध हो चुका होता है, भले ही वह कुल स्टॉक के आंकड़े में शामिल रहे। लगातार निकासी एलएमई के तत्काल डिलीवरी वाले अनुबंधों के पीछे मौजूद सुरक्षा-भंडार को कम करती है और अचानक डिलीवरी की होड़ का जोखिम बढ़ाती है।
गिरावट की रफ्तार भी तेज रही है। मई के बाद से एलएमई स्टॉक 40% से अधिक घट चुका है और कई हजार टन की खेपें लगातार वेयरहाउस नेटवर्क से बाहर जा रही हैं। यह घटता हुआ बफर समझाता है कि खरीद या बिक्री के दबाव में अपेक्षाकृत छोटे बदलाव भी नजदीकी स्प्रेड में असामान्य रूप से बड़े उतार-चढ़ाव क्यों पैदा कर रहे हैं।
इस स्क्वीज़ का एक बड़ा कारण भौगोलिक है। संभावित टैरिफ निर्णय से पहले कारोबारी रिफाइंड तांबा अमेरिका भेज रहे हैं, ताकि आयात महंगा होने पर बनने वाले प्रीमियम का लाभ उठाया जा सके। उपलब्ध रिपोर्टिंग के अनुसार, जुलाई में अमेरिका का रिफाइंड कॉपर आयात 200,000 टन से अधिक रहा—12 वर्षों में किसी एक महीने का सबसे ऊंचा स्तर।
इन खेपों से वैश्विक अंतिम खपत तुरंत बढ़े बिना भी बाकी बाजार में सप्लाई तंग हो सकती है। अमेरिका के बंदरगाहों तक पहुंचा तांबा यूरोप, चीन और अन्य व्यापारिक केंद्रों के खरीदारों के लिए कम उपलब्ध रहता है। इसमें एलएमई वेयरहाउस सिस्टम भी शामिल है। नतीजा एक क्षेत्रीय असंतुलन है: अमेरिका में स्टॉक बढ़ता है, जबकि उसके बाहर एक्सचेंज पर उपलब्ध स्टॉक घटता जाता है।
इस स्थिति में उलटफेर का जोखिम भी साफ है। अगर अमेरिकी टैरिफ की उम्मीद कमजोर पड़ती है, तो अमेरिका में जमा किया गया कुछ तांबा व्यापक बाजार में वापस आ सकता है। इससे तुरंत डिलीवरी वाले तांबे का प्रीमियम घट सकता है, हालांकि इसकी गति और पैमाना अभी अनिश्चित हैं।
चीन दबाव का दूसरा बड़ा केंद्र है। जून में चीन का रिफाइंड कॉपर आयात नौ महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा, जबकि स्मेल्टर रखरखाव के कारण घरेलू सप्लाई प्रभावित हुई। चीन की खरीदारी की निगरानी के लिए इस्तेमाल होने वाला यांगशान कॉपर इंपोर्ट प्रीमियम चार साल के उच्च स्तर $115 प्रति टन पर पहुंच गया। इसी दौरान शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज के कॉपर स्टॉक मार्च के 433,458 टन से घटकर जुलाई के अंत तक 69,610 टन रह गए।
चीनी स्मेल्टरों को कॉपर कंसंट्रेट और स्क्रैप की सप्लाई हासिल करने में भी कठिनाई हो रही है। उपलब्ध बाजार कवरेज में उद्धृत एक अनुमान के अनुसार, चीन की कुल स्मेल्टिंग क्षमता के 81.97% का प्रतिनिधित्व करने वाले उत्पादकों का अगस्त रिफाइंड आउटपुट करीब 1.05 मिलियन टन रह सकता है—एक साल पहले की तुलना में 2.83% कम।
इस तरह दबाव दोनों दिशाओं से काम कर रहा है: चीन अंतरराष्ट्रीय बाजार से रिफाइंड तांबा खींच रहा है, जबकि कच्चे माल की कमी उसकी अपनी रिफाइनिंग व्यवस्था को सीमित कर रही है। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य से कॉपर और कोबाल्ट कंसंट्रेट के निर्यात पर बताई गई पाबंदी ने कच्चे माल के बाजार पर दबाव और बढ़ाया है। हालांकि, उपलब्ध रॉयटर्स विश्लेषण के अनुसार, यह पाबंदी अकेले वैश्विक कॉपर बैलेंस में बड़ा बदलाव नहीं लाएगी; इसका अधिक असर पहले से दबाव में चल रहे कंसंट्रेट बाजार को और तंग करना हो सकता है।
बैकवर्डेशन में किसी नजदीकी अनुबंध पर शॉर्ट पोजीशन बनाए रखना महंगा हो जाता है। अगर शॉर्ट विक्रेता आवश्यक एक्सचेंज-ग्रेड तांबा डिलीवर नहीं कर पाता, तो उसे अनुबंध वापस खरीदना पड़ सकता है या किसी अन्य धारक से वारंट और भौतिक धातु जुटानी पड़ सकती है।
जब कई कारोबारी एक ही समय पर तुरंत डिलीवरी वाला तांबा तलाशते हैं, तो उनकी खरीद नजदीकी कीमत को बाद की डिलीवरी वाले फ्यूचर्स से कहीं तेज ऊपर धकेल सकती है। इसी वजह से भौतिक सप्लाई स्क्वीज़ कीमतों में अनुपात से अधिक उछाल ला सकता है। मूल समस्या केवल तेजी की भावना नहीं, बल्कि तत्काल डिलीवरी की जरूरत पूरी करने वाली सीमित धातु है। उपलब्ध बाजार रिपोर्टों के अनुसार, मौजूदा स्प्रेड 2021 के स्क्वीज़ के बाद सबसे चौड़ा है, जिसके समय एक्सचेंज को हस्तक्षेप करना पड़ा था।
जब उपलब्ध स्टॉक कम हो और नजदीकी पोजीशन बहुत अधिक केंद्रित हो जाएं, तो एलएमई के पास अव्यवस्थित कारोबार का जोखिम घटाने के लिए कई उपाय हैं। इसके नियमों में मेटल-लेंडिंग की शर्तें, ‘टॉम-नेक्स्ट’ बैकवर्डेशन पर नियंत्रण और बैकवर्डेशन कैप शामिल हैं। कुछ परिस्थितियों में एक्सचेंज स्थगित डिलीवरी की व्यवस्था भी लागू कर सकता है।
ये उपाय स्क्वीज़ की बाजार-यांत्रिकी को कुछ हद तक नियंत्रित कर सकते हैं—मसलन, धातु उधार देने को बढ़ावा देकर या कुछ नजदीकी स्प्रेड की सीमा तय करके। लेकिन वे नया तांबा पैदा नहीं कर सकते। अमेरिका भेजी जा चुकी खेपों को वापस नहीं ला सकते, कैंसल किए गए वारंट के बाद वेयरहाउस खाली होने की भरपाई नहीं कर सकते और चीनी स्मेल्टरों का उत्पादन तुरंत बहाल नहीं कर सकते।
यही अंतर महत्वपूर्ण है। मौजूदा तनाव बाजार की पोजीशनिंग और भौतिक धातु के अलग-अलग क्षेत्रों में फंस जाने—दोनों का परिणाम है। नियामकीय नियंत्रण अव्यवस्थित ‘कॉर्नर’ बनने का जोखिम कम कर सकते हैं, लेकिन डिलीवरी योग्य स्टॉक कम रहने पर बाजार फिर भी तंग बना रह सकता है।
निकट अवधि में सबसे महत्वपूर्ण संकेतक होंगे—एलएमई वेयरहाउस में नई डिलीवरी, कैंसल किए गए वारंट का वापस सक्रिय होना और नजदीकी अनुबंधों की समाप्ति के दौरान कैश-टू-थ्री-मंथ स्प्रेड का व्यवहार। एलएमई में धातु का पर्याप्त प्रवाह डिलीवरी जोखिम घटा सकता है। लेकिन अगर स्टॉक गिरता रहा और नजदीकी शॉर्ट पोजीशन रखने वालों को तांबा जुटाना पड़ा, तो एलएमई कीमत जनवरी के रिकॉर्ड से ऊपर जा सकती है।
यह संभावना है, गारंटी नहीं। जनवरी का उच्चतम स्तर $14,527.50 प्रति टन था, जबकि 17 अगस्त की बाजार रिपोर्टिंग में तीन-महीने वाला कॉपर $14,396 पर था। भौतिक कमी और शॉर्ट कवरिंग तेज होने पर कीमत नया रिकॉर्ड बना सकती है। दूसरी ओर, अमेरिकी टैरिफ की उम्मीद कम होने, चीनी खरीदारी धीमी पड़ने या वेयरहाउस की धातु बाजार में लौटने पर कीमतें तेजी से नीचे भी आ सकती हैं। फिलहाल उपलब्ध प्रमाण स्थायी वैश्विक कमी की तुलना में निकट अवधि की गंभीर सप्लाई-तंगी को अधिक मजबूती से दर्शाते हैं।