13 अगस्त को हूतियों ने दो ड्रोन से एक और हमले का दावा किया। रॉयटर्स ने इस दावे की रिपोर्ट की, लेकिन बताया कि सऊदी अरब की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी। इसका मतलब यह है कि तीन अलग-अलग बातों को मिलाकर नहीं देखा जाना चाहिए—हूती बयान, आग के दृश्य प्रमाण और लंबे समय तक रिफाइनरी क्षमता के बंद रहने की स्वतंत्र पुष्टि।
हूतियों ने लाल सागर में सऊदी जहाजों के खिलाफ समुद्री प्रतिबंध की घोषणा की। कुछ रिपोर्टों में इसे सऊदी-सम्बद्ध जहाजों के लिए बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को बंद करने या नियंत्रित करने की धमकी बताया गया। उपलब्ध साक्ष्य जहाजरानी में गंभीर बाधा और ऑपरेटरों द्वारा जोखिम से बचने की कोशिश का समर्थन करते हैं, लेकिन जलडमरूमध्य के सभी सऊदी यातायात के लिए पूरी तरह बंद होने की पुष्टि नहीं करते।
सऊदी अरब के पश्चिमी तट से होने वाली तेल लोडिंग पूरी तरह रुकने के बजाय दूसरे मार्गों पर भेजी गई। द नेशनल के अनुसार, प्रतिबंध की घोषणा के बाद बाब अल-मंदेब के रास्ते सऊदी कच्चे तेल की लोडिंग लगभग शून्य हो गई, जबकि स्वेज़ नहर के रास्ते प्रवाह बढ़कर संबंधित सप्ताह में लगभग 10.6 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया।
प्रतिबंध से पहले लोड किए गए कुछ टैंकर जलडमरूमध्य से गुजरते रहे। इससे भी स्पष्ट होता है कि “नाकाबंदी” शब्द को अपने-आप सभी जहाजों के लिए पूर्ण भौतिक बंदी नहीं समझा जाना चाहिए।
रॉयटर्स के अनुसार, यनबू से सऊदी कच्चा तेल ले जाने वाले टैंकरों ने हमले के जोखिम को कम करने के लिए अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम यानी AIS के सिग्नल बंद करना शुरू कर दिया। विश्लेषकों ने कहा कि हाल की लोडिंग “डार्क” तरीके से की गई—यानी जहाजों की सार्वजनिक ट्रैकिंग सीमित या बंद थी।
इससे निर्यात में वास्तविक गिरावट का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया। 3 अगस्त से शुरू हुए सप्ताह के लिए अलग-अलग डेटा प्रदाताओं ने यनबू की लोडिंग के काफी अलग आंकड़े दिए। इसलिए गिरावट का सटीक आकार अभी निश्चित नहीं है।
सबसे मजबूत स्रोत-आधारित आरोप ईरानी कर्मियों और सैन्य उपकरणों से संबंधित है। चार सूत्रों—जिनमें दो ईरानी स्रोत भी शामिल थे—का हवाला देते हुए रॉयटर्स ने बताया कि ईरान ने जुलाई में IRGC कमांडरों, सैन्य सलाहकारों और मिसाइल व ड्रोन से जुड़े उपकरणों को विमान के जरिए यमन पहुंचाया। रिपोर्ट के अनुसार, इसका उद्देश्य लाल सागर की शिपिंग को धमकाने की हूतियों की क्षमता मजबूत करना प्रतीत होता है।
एक अलग रॉयटर्स रिपोर्ट में सऊदी अधिकारी ने कहा कि रियाद को IRGC की निगरानी में इराकी मिलिशिया और हूतियों के संभावित समन्वित हमलों की आशंका थी। अधिकारी के अनुसार, ऊर्जा ढांचा, बंदरगाह और हवाई अड्डे संभावित निशाने हो सकते थे।
लेकिन इन रिपोर्टों से साथ-साथ चल रहे हर विस्तृत दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती। कथित तौर पर पकड़ी गई बातचीत, विशिष्ट लक्ष्य-सूचियां, नौसैनिक हथियारों की तैनाती, मिसाइल रखने के निर्देश, सऊदी जवाबी कार्रवाई से बचने की सलाह और इराकी मिलिशिया के ड्रोन हमलों का निश्चित समन्वय—इन सबको खुफिया आरोपों के रूप में पेश किया जाना चाहिए, स्थापित तथ्य के रूप में नहीं।
व्यावसायिक असर मार्गों और आवंटन से जुड़े फैसलों में दिखाई दे रहा है:
हालांकि, उपलब्ध स्रोत इस दावे की विश्वसनीय रूप से पुष्टि नहीं करते कि सऊदी लोडिंग गतिविधि का 70 प्रतिशत निलंबित था या परिवहन लागत में ठीक 5 से 9 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि हुई। इन आंकड़ों को पुष्ट निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
सऊदी समर्थित बलों ने सऊदी लाल सागर तेल ठिकानों पर हमलों के बाद हूती ठिकानों पर हमला किया। इससे हमले और जवाबी हमलों का चक्र और व्यापक हुआ।
रियाद ने लाल सागर, बाब अल-मंदेब और अदन की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजरानी, नौवहन की स्वतंत्रता और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा के लिए बहुराष्ट्रीय समुद्री रक्षा ढांचा बनाने की योजना भी पेश की।
गठबंधन के समर्थन और औपचारिक सदस्यता से जुड़े आंकड़े समय के साथ बदलते रहे। शुरुआती रिपोर्टों में कहा गया कि मिस्र, तुर्की और पाकिस्तान सहित 14 देशों ने पहल का समर्थन किया। बाद की रिपोर्टिंग ने घोषणा पर हस्ताक्षर करने वाले देशों और औपचारिक रूप से शामिल देशों के बीच अंतर किया। इसलिए “14 देशों का गठबंधन” एक बदलता हुआ राजनीतिक-संगठनात्मक वर्णन है, किसी स्थिर परिचालन क्षमता का निश्चित माप नहीं।
क्षेत्रीय संकट के बीच सऊदी अरब ने पाकिस्तान और तुर्की के साथ पारस्परिक रक्षा समझौता भी किया। इन कदमों से संकेत मिलता है कि रियाद इस संकट को केवल तेल सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौती भी मान रहा है।
उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा के आधार पर निम्न दावों की पुष्टि नहीं हुई है:
साक्ष्य एक गंभीर वृद्धि की पुष्टि करते हैं। हूती हमलों और धमकियों ने सऊदी ऊर्जा परिसंपत्तियों तथा लाल सागर के निर्यात मार्गों पर दबाव बढ़ाया है। रिपोर्टें ईरानी लॉजिस्टिक समर्थन और सऊदी नेतृत्व वाली सैन्य व समुद्री जवाबी तैयारियों की ओर भी इशारा करती हैं।
सबसे सटीक निष्कर्ष यह नहीं है कि इस घटनाक्रम का हर विवरण साबित हो चुका है। बल्कि यह है कि सऊदी कच्चे तेल के निर्यात के पीछे मौजूद मार्ग, सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्थाएं पहले ही बाधित हो चुकी हैं। यदि हमले अन्य बंदरगाहों, रिफाइनरियों या समुद्री गलियारों तक फैलते हैं, तो इसका असर और गंभीर हो सकता है।