आमतौर पर ब्लड प्रेशर तब मापा जाता है, जब व्यक्ति बैठा हुआ और स्थिर हो। आराम की स्थिति की रीडिंग के लिए यह तरीका उपयोगी है, लेकिन इससे दिनभर के ब्लड प्रेशर पैटर्न की पूरी तस्वीर नहीं मिलती।
गहरी नींद के दौरान या जागने के तुरंत बाद ब्लड प्रेशर अक्सर मापा नहीं जाता। ऐसे में रातभर होने वाले बदलाव या जागने के बाद ब्लड प्रेशर में तेज बढ़ोतरी जैसी बातें कभी-कभार दिन में की गई जांच से छूट सकती हैं। NUS का प्रोटोटाइप इन्हीं बदलावों को उस समय दर्ज करने के लिए बनाया गया है, जब वे वास्तव में हो रहे हों।
व्यायाम के दौरान सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर तेजी से बदल सकता है। गतिविधि के समय निगरानी से यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर मेहनत के प्रति असामान्य रूप से अधिक या कम प्रतिक्रिया दे रहा है या नहीं—ऐसी जानकारी आराम की स्थिति में लगाए गए कफ से नहीं मिलती। टीम ने यात्रा, नींद और व्यायाम, जिसमें कठिन व्यायाम भी शामिल था, के दौरान सिस्टम का परीक्षण किया।
बांह पर बांधा जाने वाला कफ ब्लड प्रेशर मापने का परिचित संदर्भ है, लेकिन उसे फुलाने के लिए व्यक्ति को आमतौर पर स्थिर रहना पड़ता है। रात में कफ का फूलना नींद में खलल भी डाल सकता है। दूसरी ओर, कलाई पर पहनी जाने वाली डिवाइस लगातार पहनने में आसान होती हैं, लेकिन उन्हें चार्ज करना पड़ता है और कफ-रहित ब्लड-प्रेशर अनुमान की सटीकता को मानक तरीकों के मुकाबले सावधानी से जांचना अभी भी जरूरी है।
NUS का प्रोटोटाइप दोनों समस्याओं को कम करने की कोशिश करता है: इसे सामान्य गतिविधियों के दौरान त्वचा पर बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया है और हर सेंसर पर अलग बैटरी की जरूरत नहीं पड़ती। फिर भी, सुविधा को क्लिनिकल उपयोग के लिए तैयार होने के बराबर नहीं समझना चाहिए।
यह सिस्टम बांह के चारों ओर कफ फुलाकर सीधे दबाव नहीं मापता। इसके बजाय यह दिल से जुड़ी विद्युत गतिविधि और कलाई तक पहुंचने वाली नाड़ी के समय को मिलाकर अनुमान लगाता है:
इसी वजह से इसे कफ-रहित ब्लड-प्रेशर एस्टिमेटर कहना अधिक सही है। इसके परिणाम सेंसर संकेतों, समय की गणना और कैलिब्रेशन पर निर्भर करते हैं। अलग-अलग लोगों और परिस्थितियों में इसकी क्षमता का आकलन स्थापित संदर्भ मापों के मुकाबले करना होगा।
इस प्रोटोटाइप में सामान्य लंबी बांह वाली शर्ट भी पहनने योग्य सेंसर नेटवर्क का हिस्सा बन जाती है। तांबा-निकेल से बने कंडक्टिव फैब्रिक का ट्रैक सेंसरों की जगहों को जोड़ता है, जबकि उपयोगकर्ता ऊपरी बांह पर स्मार्टफोन रखता है।
सिस्टम दो अलग वायरलेस चैनलों का इस्तेमाल करता है:
टेक्सटाइल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि निकट-क्षेत्र पावर चैनल और Bluetooth डेटा चैनल अलग-अलग काम कर सकें। इस व्यवस्था में स्मार्टफोन हब की तरह काम करता है—वह त्वचा पर लगे सेंसरों को वायरलेस तरीके से ऊर्जा देता है और उनसे डेटा प्राप्त करता है, जबकि सेंसरों पर बैटरी लगाने की जरूरत नहीं होती।
यह विचार शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर लगे बैटरी-रहित सेंसरों को जोड़ने वाले near-field-enabled कपड़ों पर हुए पहले के शोध पर भी आधारित है।
परियोजना का विकास 2021 में NUS के Wireless Bioelectronics Group में शुरू हुआ। इसमें University of Arizona और Tsinghua University के शोधकर्ताओं ने भी सहयोग किया, जैसा कि परियोजना पर हुई रिपोर्टिंग में बताया गया है। इस काम को Nature Electronics में बैटरी-रहित वायरलेस epidermal sensor network के रूप में रिपोर्ट किया गया, जिसका उद्देश्य लगातार सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर मॉनिटर करना है।
इस परियोजना के पीछे एक व्यक्तिगत अनुभव भी था। शोधकर्ता Selman Kurt के पिता को “white-coat” hypertension का अनुभव हुआ था—यानी क्लिनिकल माहौल में ब्लड प्रेशर बढ़ जाना। चौबीस घंटे चलने वाली कफ मॉनिटरिंग के दौरान, खासकर सोते समय कफ के फूलने से उन्हें असुविधा होती थी। इस अनुभव ने दिन और रात के दौरान ब्लड प्रेशर देखने के लिए कम बाधा डालने वाले तरीके की जरूरत को रेखांकित किया।
प्रोटोटाइप को प्रयोगशाला से रोजमर्रा के उपयोग तक पहुंचाने के लिए तकनीकी और क्लिनिकल, दोनों तरह के सुधार जरूरी होंगे।
परिकल्पित सिस्टम में ऐसा ऐप होना चाहिए, जो स्मार्टफोन पर ब्लड-प्रेशर रीडिंग रियल टाइम में दिखाए। सेंसर संकेतों को स्पष्ट और भरोसेमंद जानकारी में बदलना जरूरी होगा, तभी यह तकनीक प्रयोगशाला प्रदर्शन से आगे बढ़कर उपयोगी पहनने योग्य सिस्टम बन सकेगी।
मौजूदा फैब्रिक लगभग 10 बार धुलने तक काम करता है। इसके बाद पावर और डेटा ले जाने की क्षमता कमजोर पड़ने लगती है। कपड़ों पर आधारित सेंसरिंग को व्यावहारिक बनाने के लिए फैब्रिक को बार-बार धुलाई और रोजमर्रा के इस्तेमाल को अधिक भरोसेमंद ढंग से सहना होगा।
पांच लोगों का परीक्षण यह दिखा सकता है कि सिस्टम की मूल संरचना काम करती है, लेकिन इससे पूरी आबादी में इसकी सटीकता या बीमारी की जांच के लिए इसकी उपयुक्तता साबित नहीं होती। आगे के अध्ययनों में अधिक लोगों, अलग-अलग गतिविधियों और विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के बीच इसके अनुमान की तुलना स्वीकृत ब्लड-प्रेशर संदर्भ विधियों से करनी होगी। व्यावसायिक क्लिनिकल उपयोग से पहले नियामकीय सत्यापन भी आवश्यक होगा।
NUS सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसकी संरचना है: त्वचा से चिपके सेंसर, कपड़ों के जरिए बैटरी-रहित पावर सप्लाई और स्मार्टफोन पर डेटा संग्रह—तीनों को एक नेटवर्क में जोड़ा गया है। इससे नींद, जागने, व्यायाम और सामान्य गतिविधियों के दौरान ब्लड प्रेशर के पैटर्न देखना आसान हो सकता है, जबकि बीच-बीच में लिया गया कफ मापन अक्सर केवल सीमित समय की तस्वीर देता है।
फिलहाल इसे मान्य बांह-कफ का विकल्प नहीं, बल्कि एक संभावनाशील शोध प्रोटोटाइप समझना चाहिए। इसका भविष्य बड़े पैमाने पर सटीकता साबित करने, फैब्रिक की टिकाऊपन बढ़ाने और व्यावहारिक सिस्टम में भरोसेमंद रियल-टाइम रीडिंग उपलब्ध कराने पर निर्भर करेगा।
आमतौर पर ब्लड प्रेशर तब मापा जाता है, जब व्यक्ति बैठा हुआ और स्थिर हो। आराम की स्थिति की रीडिंग के लिए यह तरीका उपयोगी है, लेकिन इससे दिनभर के ब्लड प्रेशर पैटर्न की पूरी तस्वीर नहीं मिलती।
गहरी नींद के दौरान या जागने के तुरंत बाद ब्लड प्रेशर अक्सर मापा नहीं जाता। ऐसे में रातभर होने वाले बदलाव या जागने के बाद ब्लड प्रेशर में तेज बढ़ोतरी जैसी बातें कभी-कभार दिन में की गई जांच से छूट सकती हैं। NUS का प्रोटोटाइप इन्हीं बदलावों को उस समय दर्ज करने के लिए बनाया गया है, जब वे वास्तव में हो रहे हों।
व्यायाम के दौरान सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर तेजी से बदल सकता है। गतिविधि के समय निगरानी से यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर मेहनत के प्रति असामान्य रूप से अधिक या कम प्रतिक्रिया दे रहा है या नहीं—ऐसी जानकारी आराम की स्थिति में लगाए गए कफ से नहीं मिलती। टीम ने यात्रा, नींद और व्यायाम, जिसमें कठिन व्यायाम भी शामिल था, के दौरान सिस्टम का परीक्षण किया।
बांह पर बांधा जाने वाला कफ ब्लड प्रेशर मापने का परिचित संदर्भ है, लेकिन उसे फुलाने के लिए व्यक्ति को आमतौर पर स्थिर रहना पड़ता है। रात में कफ का फूलना नींद में खलल भी डाल सकता है। दूसरी ओर, कलाई पर पहनी जाने वाली डिवाइस लगातार पहनने में आसान होती हैं, लेकिन उन्हें चार्ज करना पड़ता है और कफ-रहित ब्लड-प्रेशर अनुमान की सटीकता को मानक तरीकों के मुकाबले सावधानी से जांचना अभी भी जरूरी है।
NUS का प्रोटोटाइप दोनों समस्याओं को कम करने की कोशिश करता है: इसे सामान्य गतिविधियों के दौरान त्वचा पर बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया है और हर सेंसर पर अलग बैटरी की जरूरत नहीं पड़ती। फिर भी, सुविधा को क्लिनिकल उपयोग के लिए तैयार होने के बराबर नहीं समझना चाहिए।
यह सिस्टम बांह के चारों ओर कफ फुलाकर सीधे दबाव नहीं मापता। इसके बजाय यह दिल से जुड़ी विद्युत गतिविधि और कलाई तक पहुंचने वाली नाड़ी के समय को मिलाकर अनुमान लगाता है:
इसी वजह से इसे कफ-रहित ब्लड-प्रेशर एस्टिमेटर कहना अधिक सही है। इसके परिणाम सेंसर संकेतों, समय की गणना और कैलिब्रेशन पर निर्भर करते हैं। अलग-अलग लोगों और परिस्थितियों में इसकी क्षमता का आकलन स्थापित संदर्भ मापों के मुकाबले करना होगा।
इस प्रोटोटाइप में सामान्य लंबी बांह वाली शर्ट भी पहनने योग्य सेंसर नेटवर्क का हिस्सा बन जाती है। तांबा-निकेल से बने कंडक्टिव फैब्रिक का ट्रैक सेंसरों की जगहों को जोड़ता है, जबकि उपयोगकर्ता ऊपरी बांह पर स्मार्टफोन रखता है।
सिस्टम दो अलग वायरलेस चैनलों का इस्तेमाल करता है:
टेक्सटाइल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि निकट-क्षेत्र पावर चैनल और Bluetooth डेटा चैनल अलग-अलग काम कर सकें। इस व्यवस्था में स्मार्टफोन हब की तरह काम करता है—वह त्वचा पर लगे सेंसरों को वायरलेस तरीके से ऊर्जा देता है और उनसे डेटा प्राप्त करता है, जबकि सेंसरों पर बैटरी लगाने की जरूरत नहीं होती।
यह विचार शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर लगे बैटरी-रहित सेंसरों को जोड़ने वाले near-field-enabled कपड़ों पर हुए पहले के शोध पर भी आधारित है।
परियोजना का विकास 2021 में NUS के Wireless Bioelectronics Group में शुरू हुआ। इसमें University of Arizona और Tsinghua University के शोधकर्ताओं ने भी सहयोग किया, जैसा कि परियोजना पर हुई रिपोर्टिंग में बताया गया है। इस काम को Nature Electronics में बैटरी-रहित वायरलेस epidermal sensor network के रूप में रिपोर्ट किया गया, जिसका उद्देश्य लगातार सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर मॉनिटर करना है।
इस परियोजना के पीछे एक व्यक्तिगत अनुभव भी था। शोधकर्ता Selman Kurt के पिता को “white-coat” hypertension का अनुभव हुआ था—यानी क्लिनिकल माहौल में ब्लड प्रेशर बढ़ जाना। चौबीस घंटे चलने वाली कफ मॉनिटरिंग के दौरान, खासकर सोते समय कफ के फूलने से उन्हें असुविधा होती थी। इस अनुभव ने दिन और रात के दौरान ब्लड प्रेशर देखने के लिए कम बाधा डालने वाले तरीके की जरूरत को रेखांकित किया।
प्रोटोटाइप को प्रयोगशाला से रोजमर्रा के उपयोग तक पहुंचाने के लिए तकनीकी और क्लिनिकल, दोनों तरह के सुधार जरूरी होंगे।
परिकल्पित सिस्टम में ऐसा ऐप होना चाहिए, जो स्मार्टफोन पर ब्लड-प्रेशर रीडिंग रियल टाइम में दिखाए। सेंसर संकेतों को स्पष्ट और भरोसेमंद जानकारी में बदलना जरूरी होगा, तभी यह तकनीक प्रयोगशाला प्रदर्शन से आगे बढ़कर उपयोगी पहनने योग्य सिस्टम बन सकेगी।
मौजूदा फैब्रिक लगभग 10 बार धुलने तक काम करता है। इसके बाद पावर और डेटा ले जाने की क्षमता कमजोर पड़ने लगती है। कपड़ों पर आधारित सेंसरिंग को व्यावहारिक बनाने के लिए फैब्रिक को बार-बार धुलाई और रोजमर्रा के इस्तेमाल को अधिक भरोसेमंद ढंग से सहना होगा।
पांच लोगों का परीक्षण यह दिखा सकता है कि सिस्टम की मूल संरचना काम करती है, लेकिन इससे पूरी आबादी में इसकी सटीकता या बीमारी की जांच के लिए इसकी उपयुक्तता साबित नहीं होती। आगे के अध्ययनों में अधिक लोगों, अलग-अलग गतिविधियों और विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के बीच इसके अनुमान की तुलना स्वीकृत ब्लड-प्रेशर संदर्भ विधियों से करनी होगी। व्यावसायिक क्लिनिकल उपयोग से पहले नियामकीय सत्यापन भी आवश्यक होगा।
NUS सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसकी संरचना है: त्वचा से चिपके सेंसर, कपड़ों के जरिए बैटरी-रहित पावर सप्लाई और स्मार्टफोन पर डेटा संग्रह—तीनों को एक नेटवर्क में जोड़ा गया है। इससे नींद, जागने, व्यायाम और सामान्य गतिविधियों के दौरान ब्लड प्रेशर के पैटर्न देखना आसान हो सकता है, जबकि बीच-बीच में लिया गया कफ मापन अक्सर केवल सीमित समय की तस्वीर देता है।
फिलहाल इसे मान्य बांह-कफ का विकल्प नहीं, बल्कि एक संभावनाशील शोध प्रोटोटाइप समझना चाहिए। इसका भविष्य बड़े पैमाने पर सटीकता साबित करने, फैब्रिक की टिकाऊपन बढ़ाने और व्यावहारिक सिस्टम में भरोसेमंद रियल-टाइम रीडिंग उपलब्ध कराने पर निर्भर करेगा।