सामान्य usernames के लिए first come, first served नियम है, लेकिन पब्लिक फिगर, सरकारों और अन्य हाई-प्रोफाइल संस्थाओं से जुड़े नाम सुरक्षित रखे जाएंगे। मकसद यह है कि कोई ठग किसी मंत्री, सरकारी विभाग या मशहूर व्यक्ति के नाम से अकाउंट बनाकर लोगों का भरोसा न जीते।
सिंगापुर में @LawrenceWong, @OngYeKung और @VivianBalakrishnan जैसे handles उपलब्ध नहीं पाए गए। इनके मिलते-जुलते रूप—जैसे अंत में underscore या नंबर जोड़ने वाले नाम—भी रोके गए। ये नाम क्रमशः सिंगापुर के प्रधानमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और विदेश मंत्री से जुड़े हैं।
इसका मतलब यह भी हो सकता है कि उसी नाम का कोई आम व्यक्ति exact handle दावा न कर पाए। WhatsApp के अनुसार protected-name claims और disputes की जांच की जाएगी, ताकि सुरक्षित नाम उनके वास्तविक धारकों को मिलें। हालांकि, अभी उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से किसी पूरी तरह पारदर्शी स्वतंत्र appeal process की पुष्टि नहीं होती।
Username का इस्तेमाल करने पर नए संपर्कों, ग्राहकों, विक्रेताओं, क्रिएटर्स या ग्रुप सदस्यों को फोन नंबर बताने की जरूरत कम हो सकती है। फिर भी यह anonymity नहीं है—हर WhatsApp अकाउंट सत्यापित नंबर से जुड़ा रहेगा।
WhatsApp ने username की खुली, सार्वजनिक directory बनाने की बात नहीं कही है। किसी व्यक्ति से पहली बार संपर्क करने के लिए सामने वाले को exact username पता होना चाहिए; username अपने-आप खोज परिणामों में सुझाया नहीं जाएगा।
यूजर्स चाहें तो अलग username key भी जोड़ सकेंगे। ऐसी स्थिति में केवल username जानना संदेश भेजने के लिए पर्याप्त नहीं होगा; संपर्क करने वाले को username के साथ वह key भी चाहिए होगी।
WhatsApp का कहना है कि किसी नए username संपर्क से पहली बार संदेश आने पर प्राप्तकर्ता को संदर्भ सहित सुरक्षा जानकारी दिखाई जाएगी। इसमें देश और अकाउंट से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है। अनचाहे संदेशों को block या report करने के विकल्प भी बने रहेंगे।
कंपनी suspicious-account detection और नए संपर्कों को भेजे जाने वाले संदेशों की सीमाओं का इस्तेमाल कर सकती है। ये उपाय दुरुपयोग का पैमाना घटा सकते हैं, लेकिन इनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संदिग्ध अकाउंट कितनी तेजी से पहचाने और बंद किए जाते हैं।
Username से फोन नंबर को सार्वजनिक रूप से साझा करने की जरूरत घट सकती है। इससे अनचाही कॉल, नंबरों का संग्रह और फोन नंबर को निशाना बनाने वाले कुछ हमलों का जोखिम कम हो सकता है।
लेकिन username पहचान का प्रमाण नहीं है। ठग मिलते-जुलते नाम, चुराई गई प्रोफाइल फोटो, हैक किए गए अकाउंट, social engineering या संदिग्ध लिंक का इस्तेमाल कर सकते हैं। कुछ हाई-प्रोफाइल नामों को सुरक्षित रखना आम लोगों, स्थानीय कारोबार, रिश्तेदारों या ऐसे अधिकारियों की impersonation को खत्म नहीं करता जिनके नाम protected list में नहीं हैं।
फोन नंबर तब भी सामने आ सकता है जब कोई व्यक्ति उसे खुद साझा करे, पहले से फोन कॉन्टैक्ट या ग्रुप के जरिए जुड़ा हो, पुराने नंबर-आधारित चैट का इस्तेमाल करे या ऐसी सेवा के जरिए बातचीत करे जहां नंबर दिखता हो। इसलिए यह फीचर privacy-enhancing है, anonymous नहीं।
सुरक्षित रहने के लिए किसी संदेश पर केवल handle या display name देखकर भरोसा न करें। पैसे, पासवर्ड, OTP या तुरंत कार्रवाई की मांग होने पर किसी ज्ञात आधिकारिक चैनल से अलग से सत्यापन करें। संदिग्ध अकाउंट को block और report करें।
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने WhatsApp से भारत में rollout रोकने और इस व्यवस्था के दुरुपयोग को रोकने की विस्तृत जानकारी देने को कहा है। मंत्रालय की मुख्य चिंता है कि pseudonymous handles phishing, impersonation और ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वालों की पहचान और जांच को कठिन बना सकते हैं।
WhatsApp का जवाब है कि usernames वैकल्पिक होंगे, अकाउंट के लिए सत्यापित नंबर जरूरी रहेगा और protected names, username keys, पहली बार संपर्क की चेतावनियों तथा संदिग्ध अकाउंट पहचानने जैसे सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे।
विवाद का मूल सवाल यही है: क्या आम यूजर्स के फोन नंबर का रोजमर्रा में कम खुलासा होने से मिलने वाला privacy लाभ, ठगों के लिए बनाए जा सकने वाले नए और आसानी से ब्रांड किए जाने वाले संपर्क माध्यम के जोखिम से अधिक है?