यमन में बढ़ता तनाव: 181 सैन्य अभियानों का क्या मतलब है?
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना ने 16 अगस्त को कहा कि उसने 24 घंटे में हूती ठिकानों के खिलाफ 181 अभियान चलाए। मारिब में हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों में दो लोगों की मौत और 14 के घायल होने की खबर है; मोखा बंदरगाह पर 25 से अधिक मिसाइल हमलों में सात लोगों की मौत, 30 से 35 लोगों के घायल होने और...
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यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना ने 16 अगस्त को कहा कि उसने 24 घंटे में हूती ठिकानों के खिलाफ 181 अभियान चलाए।
मारिब में हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों में दो लोगों की मौत और 14 के घायल होने की खबर है; मोखा बंदरगाह पर 25 से अधिक मिसाइल हमलों में सात लोगों की मौत, 30 से 35 लोगों के घायल होने और लगभग 1.6 करोड़ डॉलर के नुकसान की रिपो...
हूतियों की 20 जुलाई की सऊदी समुद्री पाबंदी और लाल सागर के जहाजों पर हमलों की धमकियों ने संघर्ष को यमन की जमीनी सीमाओं से आगे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग तक पहुंचा दिया है।
संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने चेतावनी दी है कि यमन 2022 के संघर्षविराम के बाद बड़े पैमाने पर युद्ध में लौटने के सबसे गंभीर जोखिम का सामना कर रहा है।
What happened in Yemen during the latest escalation of fighting: how many military operations did Yemeni armed forces conduct against HouthiIllustrative AI-generated image representing the Yemen and Red Sea escalation; it is not a photograph of a verified event.
AI संकेत
Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What happened in Yemen during the latest escalation of fighting: how many military operations did Yemeni armed forces conduct against Houthi. Article summary: Yemen’s August escalation has revived nationwide combat after years of relative front-line calm and is being treated by the UN as the gravest risk of a return to full-scale war since the April 2022 truce. The available r. Topic tags: general, news, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts w
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यमन में ताजा संघर्ष अब केवल आंतरिक मोर्चों तक सीमित नहीं रहा। इसकी चपेट में रिहायशी इलाके, विस्थापितों के शिविर, एक रणनीतिक बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग आ गए हैं। 16 अगस्त को यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना ने दावा किया कि उसने पिछले 24 घंटे में हूती ठिकानों के खिलाफ 181 सैन्य अभियान चलाए। यह घोषणा रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल माजिद अल-नज़ीली ने की। उनके अनुसार, अभियानों में ड्रोन, तोपखाने और रॉकेट लॉन्चर इस्तेमाल किए गए। सेना ने कहा कि निशानों में हूती ठिकाने, हथियारों के भंडार, सैन्य वाहन और हमले शुरू करने के लिए इस्तेमाल होने वाले अन्य स्थान शामिल थे। सरकार ने दर्जनों हूती लड़ाकों के मारे जाने या घायल होने और सैन्य उपकरणों के नष्ट होने का भी दावा किया है। इन आंकड़ों और युद्धक्षेत्र के नतीजों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
181 अभियानों में किन ठिकानों को निशाना बनाया गया?
सरकार के अनुसार, ये अभियान हूतियों के हमलों में तेज बढ़ोतरी के बाद चलाए गए। निशानों में हूती लड़ाके, सैन्य संसाधन, हथियार भंडारण केंद्र और विभिन्न मोर्चों पर गोलीबारी के स्रोत शामिल थे। ड्रोन, तोपखाने और रॉकेट लॉन्चर के इस्तेमाल से संकेत मिलता है कि यह एक साथ कई मोर्चों पर चलाया गया अभियान था, न कि केवल एक मिसाइल या हवाई हमला।
इससे पहले सरकार ने मारिब और हद्रामौत में हूती हमलों के बाद कई मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई की घोषणा की थी। कर्नल अल-नज़ीली ने तब कहा था कि अभियान का लक्ष्य संपर्क रेखाओं के कई हिस्सों में हूती लड़ाके और सैन्य उपकरण थे।
मारिब: रिहायशी इलाकों और विस्थापित शिविरों पर मिसाइल हमले
संघर्ष का असर अब नागरिक आबादी के और करीब पहुंच गया है। 7 अगस्त को हूतियों ने मारिब में विस्थापितों के शिविरों और रिहायशी इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। स्थानीय अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें दो लोगों की मौत हुई और 14 घायल हुए। यमनी सेना ने कहा कि उसने कई मोर्चों पर हूती बलों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की।
एक अलग रिपोर्ट में मारिब और हद्रामौत में कम-से-कम 12 अतिरिक्त हूती मिसाइल हमलों का उल्लेख किया गया। ये हमले ऐसे पूर्ववर्ती हमले के बाद हुए, जिसके बारे में सरकारी सूत्रों ने कम-से-कम 30 सैनिकों के मारे जाने और 15 के घायल होने का दावा किया था। ये संख्या संघर्ष में शामिल पक्षों के दावे हैं, इसलिए इन्हें सावधानी से देखा जाना चाहिए।
मारिब का महत्व दोहरा है। यह सरकार का एक प्रमुख गढ़ है और यहां बड़ी संख्या में विस्थापित लोग रहते हैं। इसलिए वहां जारी हमले इस जोखिम को बढ़ाते हैं कि संघर्ष केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित न रहकर और अधिक नागरिक मौतों तथा विस्थापन का कारण बनेगा।
मोखा बंदरगाह: 25 से अधिक मिसाइल हमलों के बाद कामकाज ठप
यमन के पश्चिमी तट पर स्थित मोखा, जिसे अल-मखा भी कहा जाता है, इस तनाव का सबसे स्पष्ट प्रतीक बन गया है। बंदरगाह के निदेशक ने कहा कि कुछ दिनों में इस पर 25 से अधिक मिसाइलें दागी गईं। उनके अनुसार, हमलों में सात लोगों की मौत हुई और करीब 1.6 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ। वाणिज्यिक और समुद्री गतिविधियां रोकनी पड़ीं तथा बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।
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इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
"यमन में बढ़ता तनाव: 181 सैन्य अभियानों का क्या मतलब है?" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना ने 16 अगस्त को कहा कि उसने 24 घंटे में हूती ठिकानों के खिलाफ 181 अभियान चलाए।
सबसे पहले सत्यापित करने योग्य मुख्य बिंदु क्या हैं?
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हूतियों की 20 जुलाई की सऊदी समुद्री पाबंदी और लाल सागर के जहाजों पर हमलों की धमकियों ने संघर्ष को यमन की जमीनी सीमाओं से आगे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग तक पहुंचा दिया है।
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यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना ने 16 अगस्त को कहा कि उसने 24 घंटे में हूती ठिकानों के खिलाफ 181 अभियान चलाए।
मारिब में हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों में दो लोगों की मौत और 14 के घायल होने की खबर है; मोखा बंदरगाह पर 25 से अधिक मिसाइल हमलों में सात लोगों की मौत, 30 से 35 लोगों के घायल होने और लगभग 1.6 करोड़ डॉलर के नुकसान की रिपो...
हूतियों की 20 जुलाई की सऊदी समुद्री पाबंदी और लाल सागर के जहाजों पर हमलों की धमकियों ने संघर्ष को यमन की जमीनी सीमाओं से आगे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग तक पहुंचा दिया है।
संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने चेतावनी दी है कि यमन 2022 के संघर्षविराम के बाद बड़े पैमाने पर युद्ध में लौटने के सबसे गंभीर जोखिम का सामना कर रहा है।
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सरकार के अनुसार, ये अभियान हूतियों के हमलों में तेज बढ़ोतरी के बाद चलाए गए। निशानों में हूती लड़ाके, सैन्य संसाधन, हथियार भंडारण केंद्र और विभिन्न मोर्चों पर गोलीबारी के स्रोत शामिल थे। ड्रोन, तोपखाने और रॉकेट लॉन्चर के इस्तेमाल से संकेत मिलता है कि यह एक साथ कई मोर्चों पर चलाया गया अभियान था, न कि केवल एक मिसाइल या हवाई हमला।
इससे पहले सरकार ने मारिब और हद्रामौत में हूती हमलों के बाद कई मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई की घोषणा की थी। कर्नल अल-नज़ीली ने तब कहा था कि अभियान का लक्ष्य संपर्क रेखाओं के कई हिस्सों में हूती लड़ाके और सैन्य उपकरण थे।
मारिब: रिहायशी इलाकों और विस्थापित शिविरों पर मिसाइल हमले
संघर्ष का असर अब नागरिक आबादी के और करीब पहुंच गया है। 7 अगस्त को हूतियों ने मारिब में विस्थापितों के शिविरों और रिहायशी इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। स्थानीय अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें दो लोगों की मौत हुई और 14 घायल हुए। यमनी सेना ने कहा कि उसने कई मोर्चों पर हूती बलों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की।
एक अलग रिपोर्ट में मारिब और हद्रामौत में कम-से-कम 12 अतिरिक्त हूती मिसाइल हमलों का उल्लेख किया गया। ये हमले ऐसे पूर्ववर्ती हमले के बाद हुए, जिसके बारे में सरकारी सूत्रों ने कम-से-कम 30 सैनिकों के मारे जाने और 15 के घायल होने का दावा किया था। ये संख्या संघर्ष में शामिल पक्षों के दावे हैं, इसलिए इन्हें सावधानी से देखा जाना चाहिए।
मारिब का महत्व दोहरा है। यह सरकार का एक प्रमुख गढ़ है और यहां बड़ी संख्या में विस्थापित लोग रहते हैं। इसलिए वहां जारी हमले इस जोखिम को बढ़ाते हैं कि संघर्ष केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित न रहकर और अधिक नागरिक मौतों तथा विस्थापन का कारण बनेगा।
मोखा बंदरगाह: 25 से अधिक मिसाइल हमलों के बाद कामकाज ठप
यमन के पश्चिमी तट पर स्थित मोखा, जिसे अल-मखा भी कहा जाता है, इस तनाव का सबसे स्पष्ट प्रतीक बन गया है। बंदरगाह के निदेशक ने कहा कि कुछ दिनों में इस पर 25 से अधिक मिसाइलें दागी गईं। उनके अनुसार, हमलों में सात लोगों की मौत हुई और करीब 1.6 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ। वाणिज्यिक और समुद्री गतिविधियां रोकनी पड़ीं तथा बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।
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"यमन में बढ़ता तनाव: 181 सैन्य अभियानों का क्या मतलब है?" का संक्षिप्त उत्तर क्या है?
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यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना ने 16 अगस्त को कहा कि उसने 24 घंटे में हूती ठिकानों के खिलाफ 181 अभियान चलाए। मारिब में हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों में दो लोगों की मौत और 14 के घायल होने की खबर है; मोखा बंदरगाह पर 25 से अधिक मिसाइल हमलों में सात लोगों की मौत, 30 से 35 लोगों के घायल होने और लगभग 1.6 करोड़ डॉलर के नुकसान की रिपो...
मुझे अभ्यास में आगे क्या करना चाहिए?
हूतियों की 20 जुलाई की सऊदी समुद्री पाबंदी और लाल सागर के जहाजों पर हमलों की धमकियों ने संघर्ष को यमन की जमीनी सीमाओं से आगे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग तक पहुंचा दिया है।
घायलों की संख्या को लेकर रिपोर्टों में अंतर है। एक रिपोर्ट में 35 घायल बताए गए, जबकि दूसरी में ताजा हमले में 30 लोगों के घायल होने की बात कही गई। इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर घायलों की संख्या 30 से 35 के बीच बताई जा सकती है, न कि एक निर्विवाद आंकड़े के रूप में।
हूतियों का कहना है कि उनका निशाना मोखा के पास सऊदी सैनिक, हथियारों के भंडार और सैन्य उपकरण थे। सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि हमले ने बंदरगाह सहित नागरिक और आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। ये युद्धकालीन पक्षकारों के परस्पर विरोधी दावे हैं; उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर हमले का वास्तविक लक्ष्य और नुकसान की पूरी सीमा स्वतंत्र रूप से तय नहीं की जा सकती।
मोखा का महत्व स्थानीय लड़ाई से कहीं अधिक है। यह बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के पास है—लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के महत्वपूर्ण मार्ग पर। बंदरगाह का बंद होना यमन के व्यापार और समुद्री पहुंच को प्रभावित कर सकता है तथा जमीन पर हो रहे हमलों के व्यापक शिपिंग गलियारे तक फैलने की आशंका बढ़ाता है।
संयुक्त राष्ट्र को बड़े युद्ध की वापसी का गंभीर खतरा क्यों दिख रहा है?
यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने सुरक्षा परिषद को बताया कि 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुए संघर्षविराम के बाद से यमन के बड़े पैमाने के युद्ध में लौटने का जोखिम अब सबसे अधिक है। लंबे समय से अपेक्षाकृत शांत रहे मोर्चों पर सैन्य गतिविधि तेज हुई है और हमलों में सैनिकों तथा नागरिकों दोनों के हताहत होने की खबरें आई हैं।
ग्रुंडबर्ग ने यह भी चेतावनी दी कि लाल सागर और अदन की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर हूती हमले यमन को व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में और गहराई तक खींच सकते हैं। चिंता केवल हमलों की संख्या को लेकर नहीं है; तनाव एक साथ घरेलू मोर्चों, बंदरगाहों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर बढ़ रहा है।
2022 के संघर्षविराम ने देशव्यापी भारी लड़ाई को कम किया था, लेकिन यमन के राजनीतिक विवाद का स्थायी समाधान नहीं हुआ। इसलिए मौजूदा हिंसा उस नाजुक शांति को खत्म कर सकती है, जबकि कोई अंतिम राजनीतिक समझौता अभी मौजूद नहीं है।
समुद्री मोर्चा और सऊदी अरब
20 जुलाई को हूतियों ने सऊदी जहाजों के खिलाफ समुद्री प्रतिबंध या नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा की। समूह के सैन्य प्रवक्ता ने इसे हूती-नियंत्रित यमनी बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर सऊदी नाकेबंदी के कथित जवाब के रूप में पेश किया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि वह इसका “कड़ा” जवाब देगा।
इसके बाद हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी तेल टैंकर NCC GHAZAL पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया, क्योंकि उसने समुद्री प्रतिबंध का उल्लंघन किया था। समूह ने कहा कि जहाज को पीछे हटने के लिए मजबूर किया गया। समुद्री सुरक्षा से जुड़ी रिपोर्टों ने एक टैंकर से जुड़ी घटना की पुष्टि की, लेकिन हूती दावों के हर विवरण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की।
बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर खतरे का असर यमन और सऊदी अरब से आगे तक जा सकता है। रॉयटर्स के अनुसार, इस जलडमरूमध्य के पूरी तरह बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 7 प्रतिशत प्रभावित हो सकता है। यह संभावित व्यवधान का अनुमान है, मौजूदा आपूर्ति में दर्ज नुकसान का आंकड़ा नहीं।
अल-अलीमी ने एक और अस्थायी संघर्षविराम से इनकार किया
यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष राशद अल-अलीमी ने कहा कि हूतियों की आगे की कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब हूतियों को अकेले यह तय करने की अनुमति नहीं दी जाएगी कि यमन कब युद्ध करेगा और कब शांति।
अल-अलीमी ने एक और अस्थायी संघर्षविराम या साधारण सीजफायर को भी खारिज किया। उनके अनुसार, स्थायी शांति ऐसी व्यवस्था पर आधारित होनी चाहिए जिसमें हथियारों और संप्रभुता पर राज्य का एकाधिकार हो। उन्होंने हूतियों से हथियार डालकर राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने और अन्य राजनीतिक ताकतों के साथ चुनाव लड़ने का आह्वान किया।
इस रुख से पुराने संघर्षविराम मॉडल की त्वरित वापसी की संभावना कम होती है। यह उस मूल राजनीतिक विवाद को भी सामने लाता है कि यमन की भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था में स्वतंत्र सशस्त्र हूती आंदोलन की भूमिका होगी या सभी हथियार अंततः राज्य के नियंत्रण में आएंगे।
मानवीय संकट और गहरा रहा है
यमन में नई लड़ाई ऐसे समय बढ़ी है जब देश पहले ही गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, देश की आधी से अधिक आबादी गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है और लाखों लोग भोजन की आपात स्थिति में हैं।
धन की कमी ने राहत कार्यों को भी सीमित कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के राहत प्रमुख टॉम फ्लेचर ने कहा कि यमन के लिए मानवीय अपील को मुश्किल से 20 प्रतिशत धन मिला है। उन्होंने चेतावनी दी कि धन की कमी के कारण राशन घटाने, क्लीनिक बंद करने और सुरक्षा सेवाओं के समाप्त होने की स्थिति पैदा हो रही है।
उपलब्ध जानकारी भूख, विस्थापन और सहायता तक घटती पहुंच के बढ़ते जोखिम की ओर इशारा करती है, खासकर यदि हमले बंदरगाहों और अग्रिम मोर्चों के आसपास के समुदायों को प्रभावित करते रहें। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि पूरे देश में अकाल घोषित हो चुका है। तत्काल चिंता यह है कि नई लड़ाई पहले से कमजोर आबादी को संकट से और गंभीर खाद्य असुरक्षा की ओर धकेल सकती है।
क्षेत्र में एक अलग पर्यावरणीय असर
क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान ईरान के क़ेश्म द्वीप के पास तेल रिसाव की सफाई की जा रही थी। यह रिसाव यमन में नहीं हुआ था, लेकिन यह दिखाता है कि ईरान से जुड़े व्यापक क्षेत्रीय टकराव के सैन्य और मानवीय नुकसान के साथ पर्यावरणीय प्रभाव भी सामने आ रहे हैं।
निष्कर्ष
इस तनाव का सबसे बड़ा सैन्य आंकड़ा है—24 घंटे में 181 अभियान। इसकी घोषणा यमनी सैन्य प्रवक्ता कर्नल माजिद अल-नज़ीली ने की। सरकार के अनुसार, ड्रोन, तोपखाने और रॉकेट लॉन्चर से हूती ठिकानों, हथियार भंडारों, वाहनों और अन्य सैन्य संसाधनों पर हमला किया गया। लेकिन हताहतों और तबाही से जुड़े दावे अभी भी युद्धक्षेत्र में शामिल एक पक्ष के दावे हैं।
इस स्थिति को खास तौर पर खतरनाक बनाने वाली बात इसका विस्तार है: मारिब में नागरिक इलाकों पर हमले, मोखा बंदरगाह पर 25 से अधिक मिसाइल हमलों के बाद संचालन का रुकना और सऊदी-संबंधित जहाजरानी तक पहुंचता संघर्ष। संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी के अनुसार, यमन 2022 के संघर्षविराम के बाद बड़े पैमाने पर युद्ध में लौटने के सबसे गंभीर जोखिम के करीब है। इससे देश का मानवीय संकट और गहरा सकता है और लाल सागर के आसपास अस्थिरता बढ़ सकती है।
घायलों की संख्या को लेकर रिपोर्टों में अंतर है। एक रिपोर्ट में 35 घायल बताए गए, जबकि दूसरी में ताजा हमले में 30 लोगों के घायल होने की बात कही गई। इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर घायलों की संख्या 30 से 35 के बीच बताई जा सकती है, न कि एक निर्विवाद आंकड़े के रूप में।
हूतियों का कहना है कि उनका निशाना मोखा के पास सऊदी सैनिक, हथियारों के भंडार और सैन्य उपकरण थे। सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि हमले ने बंदरगाह सहित नागरिक और आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। ये युद्धकालीन पक्षकारों के परस्पर विरोधी दावे हैं; उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर हमले का वास्तविक लक्ष्य और नुकसान की पूरी सीमा स्वतंत्र रूप से तय नहीं की जा सकती।
मोखा का महत्व स्थानीय लड़ाई से कहीं अधिक है। यह बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के पास है—लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के महत्वपूर्ण मार्ग पर। बंदरगाह का बंद होना यमन के व्यापार और समुद्री पहुंच को प्रभावित कर सकता है तथा जमीन पर हो रहे हमलों के व्यापक शिपिंग गलियारे तक फैलने की आशंका बढ़ाता है।
संयुक्त राष्ट्र को बड़े युद्ध की वापसी का गंभीर खतरा क्यों दिख रहा है?
यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने सुरक्षा परिषद को बताया कि 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुए संघर्षविराम के बाद से यमन के बड़े पैमाने के युद्ध में लौटने का जोखिम अब सबसे अधिक है। लंबे समय से अपेक्षाकृत शांत रहे मोर्चों पर सैन्य गतिविधि तेज हुई है और हमलों में सैनिकों तथा नागरिकों दोनों के हताहत होने की खबरें आई हैं।
ग्रुंडबर्ग ने यह भी चेतावनी दी कि लाल सागर और अदन की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर हूती हमले यमन को व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में और गहराई तक खींच सकते हैं। चिंता केवल हमलों की संख्या को लेकर नहीं है; तनाव एक साथ घरेलू मोर्चों, बंदरगाहों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर बढ़ रहा है।
2022 के संघर्षविराम ने देशव्यापी भारी लड़ाई को कम किया था, लेकिन यमन के राजनीतिक विवाद का स्थायी समाधान नहीं हुआ। इसलिए मौजूदा हिंसा उस नाजुक शांति को खत्म कर सकती है, जबकि कोई अंतिम राजनीतिक समझौता अभी मौजूद नहीं है।
समुद्री मोर्चा और सऊदी अरब
20 जुलाई को हूतियों ने सऊदी जहाजों के खिलाफ समुद्री प्रतिबंध या नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा की। समूह के सैन्य प्रवक्ता ने इसे हूती-नियंत्रित यमनी बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर सऊदी नाकेबंदी के कथित जवाब के रूप में पेश किया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि वह इसका “कड़ा” जवाब देगा।
इसके बाद हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी तेल टैंकर NCC GHAZAL पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया, क्योंकि उसने समुद्री प्रतिबंध का उल्लंघन किया था। समूह ने कहा कि जहाज को पीछे हटने के लिए मजबूर किया गया। समुद्री सुरक्षा से जुड़ी रिपोर्टों ने एक टैंकर से जुड़ी घटना की पुष्टि की, लेकिन हूती दावों के हर विवरण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की।
बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर खतरे का असर यमन और सऊदी अरब से आगे तक जा सकता है। रॉयटर्स के अनुसार, इस जलडमरूमध्य के पूरी तरह बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 7 प्रतिशत प्रभावित हो सकता है। यह संभावित व्यवधान का अनुमान है, मौजूदा आपूर्ति में दर्ज नुकसान का आंकड़ा नहीं।
अल-अलीमी ने एक और अस्थायी संघर्षविराम से इनकार किया
यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष राशद अल-अलीमी ने कहा कि हूतियों की आगे की कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब हूतियों को अकेले यह तय करने की अनुमति नहीं दी जाएगी कि यमन कब युद्ध करेगा और कब शांति।
अल-अलीमी ने एक और अस्थायी संघर्षविराम या साधारण सीजफायर को भी खारिज किया। उनके अनुसार, स्थायी शांति ऐसी व्यवस्था पर आधारित होनी चाहिए जिसमें हथियारों और संप्रभुता पर राज्य का एकाधिकार हो। उन्होंने हूतियों से हथियार डालकर राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने और अन्य राजनीतिक ताकतों के साथ चुनाव लड़ने का आह्वान किया।
इस रुख से पुराने संघर्षविराम मॉडल की त्वरित वापसी की संभावना कम होती है। यह उस मूल राजनीतिक विवाद को भी सामने लाता है कि यमन की भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था में स्वतंत्र सशस्त्र हूती आंदोलन की भूमिका होगी या सभी हथियार अंततः राज्य के नियंत्रण में आएंगे।
मानवीय संकट और गहरा रहा है
यमन में नई लड़ाई ऐसे समय बढ़ी है जब देश पहले ही गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, देश की आधी से अधिक आबादी गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है और लाखों लोग भोजन की आपात स्थिति में हैं।
धन की कमी ने राहत कार्यों को भी सीमित कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के राहत प्रमुख टॉम फ्लेचर ने कहा कि यमन के लिए मानवीय अपील को मुश्किल से 20 प्रतिशत धन मिला है। उन्होंने चेतावनी दी कि धन की कमी के कारण राशन घटाने, क्लीनिक बंद करने और सुरक्षा सेवाओं के समाप्त होने की स्थिति पैदा हो रही है।
उपलब्ध जानकारी भूख, विस्थापन और सहायता तक घटती पहुंच के बढ़ते जोखिम की ओर इशारा करती है, खासकर यदि हमले बंदरगाहों और अग्रिम मोर्चों के आसपास के समुदायों को प्रभावित करते रहें। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि पूरे देश में अकाल घोषित हो चुका है। तत्काल चिंता यह है कि नई लड़ाई पहले से कमजोर आबादी को संकट से और गंभीर खाद्य असुरक्षा की ओर धकेल सकती है।
क्षेत्र में एक अलग पर्यावरणीय असर
क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान ईरान के क़ेश्म द्वीप के पास तेल रिसाव की सफाई की जा रही थी। यह रिसाव यमन में नहीं हुआ था, लेकिन यह दिखाता है कि ईरान से जुड़े व्यापक क्षेत्रीय टकराव के सैन्य और मानवीय नुकसान के साथ पर्यावरणीय प्रभाव भी सामने आ रहे हैं।
निष्कर्ष
इस तनाव का सबसे बड़ा सैन्य आंकड़ा है—24 घंटे में 181 अभियान। इसकी घोषणा यमनी सैन्य प्रवक्ता कर्नल माजिद अल-नज़ीली ने की। सरकार के अनुसार, ड्रोन, तोपखाने और रॉकेट लॉन्चर से हूती ठिकानों, हथियार भंडारों, वाहनों और अन्य सैन्य संसाधनों पर हमला किया गया। लेकिन हताहतों और तबाही से जुड़े दावे अभी भी युद्धक्षेत्र में शामिल एक पक्ष के दावे हैं।
इस स्थिति को खास तौर पर खतरनाक बनाने वाली बात इसका विस्तार है: मारिब में नागरिक इलाकों पर हमले, मोखा बंदरगाह पर 25 से अधिक मिसाइल हमलों के बाद संचालन का रुकना और सऊदी-संबंधित जहाजरानी तक पहुंचता संघर्ष। संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी के अनुसार, यमन 2022 के संघर्षविराम के बाद बड़े पैमाने पर युद्ध में लौटने के सबसे गंभीर जोखिम के करीब है। इससे देश का मानवीय संकट और गहरा सकता है और लाल सागर के आसपास अस्थिरता बढ़ सकती है।