इससे पहले भी हमलों और अमेरिकी नाकाबंदी के बीच जहाज़ों के रुकने या यू-टर्न लेने की रिपोर्ट सामने आ चुकी है। एक दिन में केवल तीन कमोडिटी जहाज़ों का गुजरना मई के बाद का सबसे कम दैनिक स्तर बताया गया था।
जहाज़ों की आवाजाही में गिरावट और जज़ान रिफाइनरी पर हमले ने पिछले सप्ताह तेल बाजार में तेजी को हवा दी। 9 अगस्त को ब्रेंट क्रूड 4.99% बढ़कर 87.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। अमेरिकी WTI 5.05% चढ़कर 82.13 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा।
हालांकि इसके बाद कीमतों में बहुत बड़ा अतिरिक्त उछाल नहीं आया। इसका एक कारण यह हो सकता है कि बाजार ने तत्काल जोखिम का बड़ा हिस्सा पहले ही कीमतों में शामिल कर लिया था। कारोबारियों को यह भी उम्मीद रही होगी कि कुछ जहाज़ और ऊर्जा आपूर्ति सीमित स्तर पर जारी रहेंगे।
फिर भी जोखिम खत्म नहीं हुआ है। यदि जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है या हमले फैलते हैं, तो तेल में दोबारा तेज उछाल आ सकता है। 11 अगस्त को ब्रेंट 1.4% बढ़कर 88.91 डॉलर और WTI 1.3% बढ़कर 83.20 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य खाड़ी क्षेत्र को अरब सागर और आगे वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला संकरा समुद्री मार्ग है। पहले यहां से समुद्र के रास्ते होने वाले कच्चे तेल और LNG व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता था।
इस मार्ग में लंबे समय तक बाधा आने पर:
यानी समस्या केवल कच्चे तेल की कीमत तक सीमित नहीं है। यदि संकट लंबा खिंचता है, तो इसका असर ऊर्जा से लेकर वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं तक फैल सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत रुकी हुई है। ईरान ने कथित तौर पर जहाज़ों की आवाजाही फिर शुरू करने को अमेरिकी रियायतों से जोड़ा है, जबकि वॉशिंगटन ने कहा है कि वह नाकाबंदी अनिश्चित समय तक जारी रख सकता है। इससे निकट भविष्य में किसी भरोसेमंद समाधान की संभावना कम दिखाई देती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह कहना कि अमेरिकी नागरिकों को कुछ अधिक महंगी गैसोलीन कीमतें स्वीकार करनी पड़ सकती हैं, संकट की घरेलू आर्थिक कीमत को दर्शाता है। वहीं, आयात-निर्भर देशों के लिए जोखिम और बड़ा हो सकता है। रिपोर्टों में फिलीपींस की 2026 की आर्थिक वृद्धि के कमजोर अनुमान का भी उल्लेख किया गया है।
सबसे बड़ा सवाल संकट की अवधि है। थोड़े समय की रुकावट को रणनीतिक भंडार, सीमित आपूर्ति और वैकल्पिक मार्गों से संभाला जा सकता है। लेकिन लंबे समय तक चलने वाली नाकाबंदी तेल, महंगाई और आर्थिक वृद्धि—तीनों के लिए व्यापक झटका बन सकती है।
इससे पहले भी हमलों और अमेरिकी नाकाबंदी के बीच जहाज़ों के रुकने या यू-टर्न लेने की रिपोर्ट सामने आ चुकी है। एक दिन में केवल तीन कमोडिटी जहाज़ों का गुजरना मई के बाद का सबसे कम दैनिक स्तर बताया गया था।
जहाज़ों की आवाजाही में गिरावट और जज़ान रिफाइनरी पर हमले ने पिछले सप्ताह तेल बाजार में तेजी को हवा दी। 9 अगस्त को ब्रेंट क्रूड 4.99% बढ़कर 87.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। अमेरिकी WTI 5.05% चढ़कर 82.13 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा।
हालांकि इसके बाद कीमतों में बहुत बड़ा अतिरिक्त उछाल नहीं आया। इसका एक कारण यह हो सकता है कि बाजार ने तत्काल जोखिम का बड़ा हिस्सा पहले ही कीमतों में शामिल कर लिया था। कारोबारियों को यह भी उम्मीद रही होगी कि कुछ जहाज़ और ऊर्जा आपूर्ति सीमित स्तर पर जारी रहेंगे।
फिर भी जोखिम खत्म नहीं हुआ है। यदि जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है या हमले फैलते हैं, तो तेल में दोबारा तेज उछाल आ सकता है। 11 अगस्त को ब्रेंट 1.4% बढ़कर 88.91 डॉलर और WTI 1.3% बढ़कर 83.20 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य खाड़ी क्षेत्र को अरब सागर और आगे वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला संकरा समुद्री मार्ग है। पहले यहां से समुद्र के रास्ते होने वाले कच्चे तेल और LNG व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता था।
इस मार्ग में लंबे समय तक बाधा आने पर:
यानी समस्या केवल कच्चे तेल की कीमत तक सीमित नहीं है। यदि संकट लंबा खिंचता है, तो इसका असर ऊर्जा से लेकर वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं तक फैल सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत रुकी हुई है। ईरान ने कथित तौर पर जहाज़ों की आवाजाही फिर शुरू करने को अमेरिकी रियायतों से जोड़ा है, जबकि वॉशिंगटन ने कहा है कि वह नाकाबंदी अनिश्चित समय तक जारी रख सकता है। इससे निकट भविष्य में किसी भरोसेमंद समाधान की संभावना कम दिखाई देती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह कहना कि अमेरिकी नागरिकों को कुछ अधिक महंगी गैसोलीन कीमतें स्वीकार करनी पड़ सकती हैं, संकट की घरेलू आर्थिक कीमत को दर्शाता है। वहीं, आयात-निर्भर देशों के लिए जोखिम और बड़ा हो सकता है। रिपोर्टों में फिलीपींस की 2026 की आर्थिक वृद्धि के कमजोर अनुमान का भी उल्लेख किया गया है।
सबसे बड़ा सवाल संकट की अवधि है। थोड़े समय की रुकावट को रणनीतिक भंडार, सीमित आपूर्ति और वैकल्पिक मार्गों से संभाला जा सकता है। लेकिन लंबे समय तक चलने वाली नाकाबंदी तेल, महंगाई और आर्थिक वृद्धि—तीनों के लिए व्यापक झटका बन सकती है।