अमेरिका ईरान संघर्ष, टैंकरों पर हमलों और ईरान से जुड़े जहाज़ों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी ने हॉर्मुज़ से गुजरना व्यावसायिक और भौतिक, दोनों रूप से जोखिमभरा बना दिया है। संयुक्त अरब अमीरात ने तीन ADNOC संबद्ध टैंकरों पर हुए हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार बताया है; इसी दौरान सऊदी अरामको की जज़ान रिफाइनरी पर हमले ने ऊर...
शोध उत्तर

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हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात लगभग ठप होने की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा सैन्य तनाव है। टैंकरों पर कथित हमले, ईरान से जुड़े समुद्री कारोबार पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और रुकी हुई बातचीत ने जहाज़ मालिकों तथा बीमा कंपनियों को बेहद सतर्क कर दिया है। कई ऑपरेटर जहाज़ों को रोक रहे हैं, वापस मोड़ रहे हैं या ऐसे मार्ग चुन रहे हैं जिनमें अतिरिक्त जोखिम और लागत है।
तत्काल चिंता तब बढ़ी जब तीन ADNOC-संबद्ध टैंकरों पर कथित हमला हुआ। संयुक्त अरब अमीरात ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार बताया है। इसके साथ ही ईरान-समर्थित हूती समूह द्वारा सऊदी अरामको की जज़ान रिफाइनरी पर हमले की खबर ने यह डर बढ़ाया कि संकट केवल जहाज़ों तक सीमित नहीं रहेगा और खाड़ी की ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।
ADNOC ने अलग से कहा है कि संघर्ष शुरू होने के बाद से हॉर्मुज़ पार करते समय उसके 15 जहाज़ों पर मिसाइल और ड्रोन हमले हुए। कंपनी के मुताबिक, एक चालक दल के सदस्य की मौत हुई और 20 लोग घायल हुए हैं।
शिपिंग-डेटा कंपनी Kpler के अनुसार, शनिवार को केवल पांच कमोडिटी जहाज़ हॉर्मुज़ से गुजरे और रविवार के लिए कोई पारगमन दर्ज नहीं हुआ। इसके मुकाबले पिछले सप्ताहांत 31 पारगमन दर्ज किए गए थे।
शनिवार को दिखे सीमित आवागमन में एक खाली बहुत बड़ा कच्चा तेल टैंकर यानी VLCC शामिल था, जिसका AIS बंद था। एक भारतीय ध्वज वाला बहुत बड़ा गैस-वाहक जहाज़ ईरान द्वारा सुझाए गए मार्ग से गुजरता दिखा। इससे संकेत मिलता है कि जो कुछ जहाज़ अभी भी चल रहे हैं, वे असामान्य सावधानियां बरत रहे हैं या वैकल्पिक रूट अपना रहे हैं।
यहां AIS का मतलब ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम है—जहाज़ों की पहचान और स्थिति प्रसारित करने वाली प्रणाली। यदि कोई जहाज़ इसे बंद कर देता है, तो वह वास्तविक समय के ट्रैकिंग डेटा में दिखाई नहीं दे सकता। इसलिए रविवार को “कोई जहाज़ दर्ज नहीं हुआ” का अर्थ यह नहीं है कि निश्चित रूप से एक भी जहाज़ नहीं गुजरा; लेकिन यह जरूर बताता है कि दिखाई देने वाला वाणिज्यिक यातायात बेहद कम हो गया है।
इससे पहले भी हमलों और अमेरिकी नाकाबंदी के बीच जहाज़ों के रुकने या यू-टर्न लेने की रिपोर्ट सामने आ चुकी है। एक दिन में केवल तीन कमोडिटी जहाज़ों का गुजरना मई के बाद का सबसे कम दैनिक स्तर बताया गया था।
जहाज़ों की आवाजाही में गिरावट और जज़ान रिफाइनरी पर हमले ने पिछले सप्ताह तेल बाजार में तेजी को हवा दी। 9 अगस्त को ब्रेंट क्रूड 4.99% बढ़कर 87.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। अमेरिकी WTI 5.05% चढ़कर 82.13 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा।
हालांकि इसके बाद कीमतों में बहुत बड़ा अतिरिक्त उछाल नहीं आया। इसका एक कारण यह हो सकता है कि बाजार ने तत्काल जोखिम का बड़ा हिस्सा पहले ही कीमतों में शामिल कर लिया था। कारोबारियों को यह भी उम्मीद रही होगी कि कुछ जहाज़ और ऊर्जा आपूर्ति सीमित स्तर पर जारी रहेंगे।
फिर भी जोखिम खत्म नहीं हुआ है। यदि जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है या हमले फैलते हैं, तो तेल में दोबारा तेज उछाल आ सकता है। 11 अगस्त को ब्रेंट 1.4% बढ़कर 88.91 डॉलर और WTI 1.3% बढ़कर 83.20 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य खाड़ी क्षेत्र को अरब सागर और आगे वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला संकरा समुद्री मार्ग है। पहले यहां से समुद्र के रास्ते होने वाले कच्चे तेल और LNG व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता था।
इस मार्ग में लंबे समय तक बाधा आने पर:
यानी समस्या केवल कच्चे तेल की कीमत तक सीमित नहीं है। यदि संकट लंबा खिंचता है, तो इसका असर ऊर्जा से लेकर वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं तक फैल सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत रुकी हुई है। ईरान ने कथित तौर पर जहाज़ों की आवाजाही फिर शुरू करने को अमेरिकी रियायतों से जोड़ा है, जबकि वॉशिंगटन ने कहा है कि वह नाकाबंदी अनिश्चित समय तक जारी रख सकता है। इससे निकट भविष्य में किसी भरोसेमंद समाधान की संभावना कम दिखाई देती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह कहना कि अमेरिकी नागरिकों को कुछ अधिक महंगी गैसोलीन कीमतें स्वीकार करनी पड़ सकती हैं, संकट की घरेलू आर्थिक कीमत को दर्शाता है। वहीं, आयात-निर्भर देशों के लिए जोखिम और बड़ा हो सकता है। रिपोर्टों में फिलीपींस की 2026 की आर्थिक वृद्धि के कमजोर अनुमान का भी उल्लेख किया गया है।
सबसे बड़ा सवाल संकट की अवधि है। थोड़े समय की रुकावट को रणनीतिक भंडार, सीमित आपूर्ति और वैकल्पिक मार्गों से संभाला जा सकता है। लेकिन लंबे समय तक चलने वाली नाकाबंदी तेल, महंगाई और आर्थिक वृद्धि—तीनों के लिए व्यापक झटका बन सकती है।
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अमेरिका ईरान संघर्ष, टैंकरों पर हमलों और ईरान से जुड़े जहाज़ों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी ने हॉर्मुज़ से गुजरना व्यावसायिक और भौतिक, दोनों रूप से जोखिमभरा बना दिया है।
अमेरिका ईरान संघर्ष, टैंकरों पर हमलों और ईरान से जुड़े जहाज़ों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी ने हॉर्मुज़ से गुजरना व्यावसायिक और भौतिक, दोनों रूप से जोखिमभरा बना दिया है। संयुक्त अरब अमीरात ने तीन ADNOC संबद्ध टैंकरों पर हुए हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार बताया है; इसी दौरान सऊदी अरामको की जज़ान रिफाइनरी पर हमले ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई।
ADNOC के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से हॉर्मुज़ पार करते समय उसके 15 जहाज़ों पर मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं; एक चालक दल के सदस्य की मौत हुई और 20 लोग घायल हुए। [8]