सबसे अधिक चर्चा उस प्रावधान की है जिसमें ईरानी अधिकारियों द्वारा ‘शत्रुतापूर्ण’ माने जाने वाले मीडिया से संपर्क को अपराध बनाने की बात कही गई है। रिपोर्टों में अमेरिकी और इजरायली मीडिया तथा इनमें से किसी देश से वित्तपोषित संस्थानों का उदाहरण दिया गया है। ऐसे मीडिया को इंटरव्यू देना, उनकी चर्चाओं में हिस्सा लेना या अन्य संचार करना प्रतिबंधित किया जा सकता है।
रिपोर्ट किए गए मसौदे का दायरा केवल मीडिया तक सीमित नहीं है। इसमें विदेशी संपर्कों की कई श्रेणियां शामिल बताई गई हैं, जैसे:
बताए गए अन्य प्रावधानों के तहत विदेशों में सूचना, फोटो या वीडियो भेजने पर रोक लग सकती है। बिना मंजूरी वाली विदेशी सरकारों या विश्वविद्यालयों से छात्रवृत्ति स्वीकार करना और ईरान के खुफिया मंत्रालय की अनुमति के बिना विदेशी विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों या संगठनों के साथ वैज्ञानिक सहयोग करना भी दंडनीय हो सकता है।
क्योंकि बिल का पूरा पाठ अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है, इसलिए इन बिंदुओं को लागू कानून के निश्चित प्रावधानों के बजाय मसौदे के बारे में सामने आई रिपोर्टों के रूप में देखा जाना चाहिए।
कुछ मीडिया-संबंधी गतिविधियों—जिनमें कथित रूप से ‘शत्रुतापूर्ण’ मीडिया को इंटरव्यू देना तथा फोटो या वीडियो भेजना शामिल है—के लिए छह महीने से दो साल तक की जेल की सजा रिपोर्ट की गई है। बिना आवश्यक मंजूरी विदेशी संस्थानों के साथ वैज्ञानिक सहयोग के लिए भी इसी अवधि की सजा बताए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके अलावा पेशेवर पाबंदियां, आर्थिक दंड और संपत्ति से जुड़े प्रतिबंध लगाए जा सकने की बात कही गई है। हालांकि, इन उपायों का वास्तविक दायरा और इस्तेमाल बिल के अंतिम पाठ पर निर्भर करेगा।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, गंभीर मामलों की सुनवाई रिवोल्यूशनरी कोर्ट कर सकती है और कुछ अपराधों में 30 साल तक की सजा संभव हो सकती है। उपलब्ध स्रोत यह स्पष्ट नहीं करते कि यह अधिकतम सजा किन विशिष्ट अपराधों पर लागू होगी। इसलिए इसे किसी इंटरव्यू या सामान्य अकादमिक संपर्क के लिए स्वतः लागू होने वाली सजा नहीं समझना चाहिए।
प्रस्तावित ढांचा विदेशी मीडिया के प्रकार के आधार पर अलग-अलग स्तर का जोखिम पैदा कर सकता है। अधिकारियों द्वारा ‘शत्रुतापूर्ण’ घोषित मीडिया से संपर्क पर कथित रूप से पूर्ण प्रतिबंध होगा, जबकि अन्य विदेशी मीडिया को इंटरव्यू देने के लिए खुफिया मंत्रालय को सूचना देना या उसकी अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।
इससे पत्रकारों, शोधकर्ताओं, विश्लेषकों, विशेषज्ञों और अन्य स्रोतों पर आपराधिक कार्रवाई का खतरा बढ़ सकता है—भले ही उनकी गतिविधियां सामान्य अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग या सार्वजनिक बहस का हिस्सा हों। ‘शत्रुतापूर्ण’ मीडिया और विदेशी प्रभाव की सीमाएं ईरानी अधिकारी तय करेंगे, इसलिए ऐसे प्रावधानों से आत्म-सेंसरशिप बढ़ने की आशंका जताई जा सकती है। यह एक संभावित प्रभाव है, कोई पुष्ट परिणाम नहीं।
बिल का असर पत्रकारिता से आगे भी जा सकता है। विदेशी छात्रवृत्ति, सम्मेलन के निमंत्रण, शोध साझेदारी और वैज्ञानिक सहयोग सरकारी मंजूरी या अधिकृत माने गए संस्थानों के साथ काम करने पर निर्भर हो सकते हैं।
रिपोर्टों में विदेशी संस्थाओं के साथ बिना अनुमति आर्थिक गतिविधि और संपर्क पर भी पाबंदियों का उल्लेख है। यदि बिल इसी रूप में लागू हुआ, तो विश्वविद्यालयों, कारोबारों, सांस्कृतिक समूहों और नागरिक-सामाजिक संगठनों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का कानूनी जोखिम बढ़ सकता है।
बिल का आधार यह तर्क है कि विदेशी खुफिया सेवाएं, सरकारें और संस्थान ईरानी समाज या निर्णय-प्रक्रिया में घुसपैठ कर सकते हैं। इस वजह से प्रस्तावित कानून का दायरा केवल जासूसी तक सीमित नहीं दिखता। अधिकारी विदेशी संपर्कों, सूचना साझा करने और ऐसी गतिविधियों की जांच कर सकते हैं जिन्हें वे विदेशी प्रभाव से प्रभावित मानते हों।
कुछ रिपोर्टों में विदेशी खुफिया प्रभाव से तैयार या प्रभावित मानी जाने वाली नीतियों और गतिविधियों के लिए 30 साल तक की सजा की संभावना बताई गई है। लेकिन उपलब्ध जानकारी यह तय करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि ऐसे प्रावधानों की व्याख्या और लागू करने का तरीका क्या होगा।
रिवोल्यूशनरी कोर्ट: रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित ढांचे के तहत कुछ गंभीर आरोपों की सुनवाई इन अदालतों में हो सकती है। इन्हीं रिपोर्टों में कुछ मामलों में 30 साल तक की सजा की संभावना का उल्लेख है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह अधिकतम दंड किन अपराधों के लिए होगा।
गार्डियन काउंसिल: संसद की मंजूरी के बाद भी बिल कानून नहीं बनता। गार्डियन काउंसिल को इसे ईरान के संविधान और इस्लामी कानून के अनुरूप जांचना होगा। परिषद इसे मंजूर कर सकती है या बदलाव के लिए संसद को वापस भेज सकती है। इसलिए अंतिम दायरा और दंड अभी बदल सकते हैं।
यह प्रस्ताव 2025 में पारित उस अलग कानून के बाद आया है, जिसका उद्देश्य कथित जासूसी और अमेरिका, इजरायल तथा अन्य ‘शत्रुतापूर्ण’ पक्षों के साथ सहयोग के लिए सजा बढ़ाना था। उस कानून पर रिपोर्टों में कथित सहयोग के कुछ रूपों के लिए मृत्युदंड तक की संभावना बताई गई थी।
दोनों पहलों को साथ रखकर देखें तो ईरान में कार्रवाई का दायरा पारंपरिक जासूसी अपराधों से आगे बढ़ता दिखता है। विदेशी मीडिया को इंटरव्यू, सूचना या सामग्री भेजना, विदेशी छात्रवृत्ति, अकादमिक संबंध और विदेशों की संस्थाओं के साथ सहयोग भी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी प्रभाव की व्यापक अवधारणाओं के तहत जांच के दायरे में आ सकते हैं। फिर भी, एंटी-इन्फिल्ट्रेशन बिल अभी प्रस्तावित अवस्था में है और इसका अंतिम कानूनी असर संसद तथा गार्डियन काउंसिल द्वारा मंजूर किए जाने वाले पाठ पर निर्भर करेगा।
सबसे अधिक चर्चा उस प्रावधान की है जिसमें ईरानी अधिकारियों द्वारा ‘शत्रुतापूर्ण’ माने जाने वाले मीडिया से संपर्क को अपराध बनाने की बात कही गई है। रिपोर्टों में अमेरिकी और इजरायली मीडिया तथा इनमें से किसी देश से वित्तपोषित संस्थानों का उदाहरण दिया गया है। ऐसे मीडिया को इंटरव्यू देना, उनकी चर्चाओं में हिस्सा लेना या अन्य संचार करना प्रतिबंधित किया जा सकता है।
रिपोर्ट किए गए मसौदे का दायरा केवल मीडिया तक सीमित नहीं है। इसमें विदेशी संपर्कों की कई श्रेणियां शामिल बताई गई हैं, जैसे:
बताए गए अन्य प्रावधानों के तहत विदेशों में सूचना, फोटो या वीडियो भेजने पर रोक लग सकती है। बिना मंजूरी वाली विदेशी सरकारों या विश्वविद्यालयों से छात्रवृत्ति स्वीकार करना और ईरान के खुफिया मंत्रालय की अनुमति के बिना विदेशी विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों या संगठनों के साथ वैज्ञानिक सहयोग करना भी दंडनीय हो सकता है।
क्योंकि बिल का पूरा पाठ अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है, इसलिए इन बिंदुओं को लागू कानून के निश्चित प्रावधानों के बजाय मसौदे के बारे में सामने आई रिपोर्टों के रूप में देखा जाना चाहिए।
कुछ मीडिया-संबंधी गतिविधियों—जिनमें कथित रूप से ‘शत्रुतापूर्ण’ मीडिया को इंटरव्यू देना तथा फोटो या वीडियो भेजना शामिल है—के लिए छह महीने से दो साल तक की जेल की सजा रिपोर्ट की गई है। बिना आवश्यक मंजूरी विदेशी संस्थानों के साथ वैज्ञानिक सहयोग के लिए भी इसी अवधि की सजा बताए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके अलावा पेशेवर पाबंदियां, आर्थिक दंड और संपत्ति से जुड़े प्रतिबंध लगाए जा सकने की बात कही गई है। हालांकि, इन उपायों का वास्तविक दायरा और इस्तेमाल बिल के अंतिम पाठ पर निर्भर करेगा।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, गंभीर मामलों की सुनवाई रिवोल्यूशनरी कोर्ट कर सकती है और कुछ अपराधों में 30 साल तक की सजा संभव हो सकती है। उपलब्ध स्रोत यह स्पष्ट नहीं करते कि यह अधिकतम सजा किन विशिष्ट अपराधों पर लागू होगी। इसलिए इसे किसी इंटरव्यू या सामान्य अकादमिक संपर्क के लिए स्वतः लागू होने वाली सजा नहीं समझना चाहिए।
प्रस्तावित ढांचा विदेशी मीडिया के प्रकार के आधार पर अलग-अलग स्तर का जोखिम पैदा कर सकता है। अधिकारियों द्वारा ‘शत्रुतापूर्ण’ घोषित मीडिया से संपर्क पर कथित रूप से पूर्ण प्रतिबंध होगा, जबकि अन्य विदेशी मीडिया को इंटरव्यू देने के लिए खुफिया मंत्रालय को सूचना देना या उसकी अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।
इससे पत्रकारों, शोधकर्ताओं, विश्लेषकों, विशेषज्ञों और अन्य स्रोतों पर आपराधिक कार्रवाई का खतरा बढ़ सकता है—भले ही उनकी गतिविधियां सामान्य अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग या सार्वजनिक बहस का हिस्सा हों। ‘शत्रुतापूर्ण’ मीडिया और विदेशी प्रभाव की सीमाएं ईरानी अधिकारी तय करेंगे, इसलिए ऐसे प्रावधानों से आत्म-सेंसरशिप बढ़ने की आशंका जताई जा सकती है। यह एक संभावित प्रभाव है, कोई पुष्ट परिणाम नहीं।
बिल का असर पत्रकारिता से आगे भी जा सकता है। विदेशी छात्रवृत्ति, सम्मेलन के निमंत्रण, शोध साझेदारी और वैज्ञानिक सहयोग सरकारी मंजूरी या अधिकृत माने गए संस्थानों के साथ काम करने पर निर्भर हो सकते हैं।
रिपोर्टों में विदेशी संस्थाओं के साथ बिना अनुमति आर्थिक गतिविधि और संपर्क पर भी पाबंदियों का उल्लेख है। यदि बिल इसी रूप में लागू हुआ, तो विश्वविद्यालयों, कारोबारों, सांस्कृतिक समूहों और नागरिक-सामाजिक संगठनों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का कानूनी जोखिम बढ़ सकता है।
बिल का आधार यह तर्क है कि विदेशी खुफिया सेवाएं, सरकारें और संस्थान ईरानी समाज या निर्णय-प्रक्रिया में घुसपैठ कर सकते हैं। इस वजह से प्रस्तावित कानून का दायरा केवल जासूसी तक सीमित नहीं दिखता। अधिकारी विदेशी संपर्कों, सूचना साझा करने और ऐसी गतिविधियों की जांच कर सकते हैं जिन्हें वे विदेशी प्रभाव से प्रभावित मानते हों।
कुछ रिपोर्टों में विदेशी खुफिया प्रभाव से तैयार या प्रभावित मानी जाने वाली नीतियों और गतिविधियों के लिए 30 साल तक की सजा की संभावना बताई गई है। लेकिन उपलब्ध जानकारी यह तय करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि ऐसे प्रावधानों की व्याख्या और लागू करने का तरीका क्या होगा।
रिवोल्यूशनरी कोर्ट: रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित ढांचे के तहत कुछ गंभीर आरोपों की सुनवाई इन अदालतों में हो सकती है। इन्हीं रिपोर्टों में कुछ मामलों में 30 साल तक की सजा की संभावना का उल्लेख है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह अधिकतम दंड किन अपराधों के लिए होगा।
गार्डियन काउंसिल: संसद की मंजूरी के बाद भी बिल कानून नहीं बनता। गार्डियन काउंसिल को इसे ईरान के संविधान और इस्लामी कानून के अनुरूप जांचना होगा। परिषद इसे मंजूर कर सकती है या बदलाव के लिए संसद को वापस भेज सकती है। इसलिए अंतिम दायरा और दंड अभी बदल सकते हैं।
यह प्रस्ताव 2025 में पारित उस अलग कानून के बाद आया है, जिसका उद्देश्य कथित जासूसी और अमेरिका, इजरायल तथा अन्य ‘शत्रुतापूर्ण’ पक्षों के साथ सहयोग के लिए सजा बढ़ाना था। उस कानून पर रिपोर्टों में कथित सहयोग के कुछ रूपों के लिए मृत्युदंड तक की संभावना बताई गई थी।
दोनों पहलों को साथ रखकर देखें तो ईरान में कार्रवाई का दायरा पारंपरिक जासूसी अपराधों से आगे बढ़ता दिखता है। विदेशी मीडिया को इंटरव्यू, सूचना या सामग्री भेजना, विदेशी छात्रवृत्ति, अकादमिक संबंध और विदेशों की संस्थाओं के साथ सहयोग भी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी प्रभाव की व्यापक अवधारणाओं के तहत जांच के दायरे में आ सकते हैं। फिर भी, एंटी-इन्फिल्ट्रेशन बिल अभी प्रस्तावित अवस्था में है और इसका अंतिम कानूनी असर संसद तथा गार्डियन काउंसिल द्वारा मंजूर किए जाने वाले पाठ पर निर्भर करेगा।