सियोल ने उल्ची फ्रीडम शील्ड को आगे बढ़ाने की योजना बनाई थी। हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में ट्रंप के अंतिम समय के ‘दायरा घटाने’ वाले आदेश पर दक्षिण कोरियाई सरकार की कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आती। इतना स्पष्ट है कि इस फैसले ने ऐसे अभ्यास को लेकर अनिश्चितता पैदा की, जो उत्तर कोरियाई खतरे से निपटने की तैयारी के लिए बनाया गया था।
यह अभ्यास राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की दक्षिण कोरियाई सरकार के कार्यकाल में हो रहा था। उस समय अंतर-कोरियाई तनाव बढ़ा हुआ था, जिससे सैन्य तैयारी और संवाद—दोनों के बीच संतुलन सियोल के लिए अहम बना हुआ था।
ट्रंप के आदेश से पहले ही प्योंगयांग ने अमेरिका-दक्षिण कोरिया के प्रस्तावित अभ्यासों की आलोचना की थी। उत्तर कोरिया ने इन्हें पिछले साल के अभ्यासों से अधिक उकसावे वाला बताया और अमेरिका, जापान तथा दक्षिण कोरिया के बढ़ते सैन्य सहयोग को ‘परमाणु गठबंधन’ के रूप में पेश किया। उसने कहा कि बढ़ते खतरे के जवाब में वह अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को नए स्तर तक मजबूत करेगा।
अभ्यास शुरू होने से कुछ दिन पहले उत्तर कोरिया ने समुद्र की ओर एक बैलिस्टिक मिसाइल भी दागी थी। दक्षिण कोरियाई और जापानी अधिकारियों ने इस प्रक्षेपण की जानकारी दी थी।
ट्रंप के फैसले को व्यापक रूप से किम जोंग उन के साथ संपर्क का रास्ता खुला रखने या संबंधों में नरमी का संकेत देने की कोशिश के रूप में देखा गया। ट्रंप ने अपने व्यक्तिगत संबंधों पर जोर दिया, जबकि दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की सरकार उत्तर कोरियाई खतरे के बीच संयुक्त अभ्यास की तैयारी कर रही थी।