फरवरी 2026 में Alphabet ने 31.51 अरब डॉलर का वैश्विक बॉन्ड सौदा पूरा किया था। इसमें 100 साल की अवधि वाला एक असामान्य पाउंड बॉन्ड भी शामिल था। पिछले 12 महीनों में Alphabet और Amazon ने मिलकर विभिन्न मुद्राओं में लगभग 60 अरब डॉलर के बॉन्ड जारी किए हैं। यह दिखाता है कि बड़े क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाताओं को चिप्स, डेटा सेंटर और संबंधित क्षमता के लिए आंतरिक नकदी से आगे जाकर पूंजी जुटानी पड़ रही है।
25 अरब डॉलर के Alphabet बॉन्ड सौदे के लिए 115 अरब डॉलर के ऑर्डर यह संकेत देते हैं कि निवेशक अभी भी कंपनी के क्रेडिट पर भरोसा कर रहे हैं और AI से जुड़े कर्ज में उनकी रुचि बनी हुई है।
इतनी मजबूत मांग Alphabet को क्षेत्रीय बाजारों में भी अपेक्षाकृत प्रतिस्पर्धी शर्तों पर धन जुटाने का अवसर दे सकती है। लेकिन अमेरिकी डॉलर वाले सौदे की सफलता से यह गारंटी नहीं मिलती कि ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बॉन्ड को भी उतनी ही मांग मिलेगी या उसकी स्प्रेड और ब्याज दर समान होगी। स्थानीय मुद्रा, ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों की प्राथमिकताएं और उस समय बाजार की स्थिति अंतिम परिणाम तय करेंगी।
Alphabet जैसी उच्च-गुणवत्ता वाली अमेरिकी टेक कंपनी का पदार्पण ऑस्ट्रेलिया को वैश्विक ब्लू-चिप कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण फंडिंग केंद्र के रूप में मजबूत कर सकता है। स्थानीय निवेशकों को एक दुर्लभ, उच्च-रेटिंग वाले टेक्नोलॉजी बॉन्ड में निवेश का विकल्प मिलेगा।
यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब कंगारू बॉन्ड बाजार पहले ही तेज विस्तार देख रहा है। जुलाई के अंत तक विदेशी कंपनियों द्वारा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में जारी बॉन्ड की कुल मात्रा करीब 60 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी लगभग 42 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई थी। यह रिकॉर्ड स्तर था और 2025 की समान अवधि से लगभग 40% अधिक था।
Alphabet की ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पेशकश का अंतिम आकार, बॉन्ड की अवधि, कूपन, मूल्य निर्धारण और निवेशक ऑर्डर बुक अभी सार्वजनिक नहीं हैं। इसलिए इसे पूरी हो चुकी बॉन्ड बिक्री नहीं, बल्कि बाजार में पेश की गई संभावित योजना के रूप में देखना चाहिए।
फिर भी, इसका व्यापक संदेश स्पष्ट है: AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता खर्च टेक कंपनियों की पूंजी जुटाने की रणनीति को अमेरिकी बाजार से निकालकर वैश्विक बना रहा है। Alphabet का संभावित कंगारू बॉन्ड इसी बदलाव का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण है।