इसे एक पारंपरिक निर्यात मार्ग के बजाय शटल व्यवस्था के रूप में समझना बेहतर होगा:
10 अगस्त को उपग्रह तस्वीरों में ओमान और UAE के तटों के पास तेल के 12 शिप-टू-शिप ट्रांसफर दिखे। इससे संकेत मिलता है कि कुछ टैंकर अब भी AIS बंद करके होर्मुज़ पार कर रहे हैं, जबकि सार्वजनिक रूप से ट्रैक किए जा रहे जहाज़ों की संख्या बहुत घट गई है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि जलडमरूमध्य सामान्य कारोबारी अर्थों में खुला हुआ है। BBC द्वारा उद्धृत Kpler के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त की शुरुआत में दो दिनों के दौरान केवल आठ और 11 जहाज़ होर्मुज़ से गुज़रे, जबकि युद्ध से पहले रोजाना 100 से अधिक जहाज़ गुजरते थे। CNN की अलग रिपोर्ट के अनुसार, एक सप्ताह में कुल 84 जहाज़ों ने जलडमरूमध्य पार किया—यानी संघर्ष से पहले अपेक्षित यातायात का करीब 20 प्रतिशत।
ये गुप्त शिपमेंट ऐसे समय में आपूर्ति का एक सीमित रास्ता बनाए रखते हैं, जब खुले तौर पर दिखने वाली समुद्री आवाजाही लगभग ठप है। भौतिक रूप से तेल का बाहर निकलना तत्काल कमी को कम कर सकता है। इससे बाजार में घबराहट, जमाखोरी और कच्चे तेल की कीमतों में जुड़ने वाला जोखिम प्रीमियम भी सीमित हो सकता है। उपलब्ध रिपोर्टों में कहा गया है कि यह प्रवाह कीमतों को तेज उछाल से रोकने में मदद कर रहा है।
फिर भी आपूर्ति को स्थिर करना और आपूर्ति को सुरक्षित बनाना दो अलग बातें हैं। 4 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक का प्रवाह महत्वपूर्ण है, लेकिन यह युद्ध-पूर्व स्तर से काफी नीचे है। अगर ट्रांसफर क्षेत्रों पर हमला होता है, और अधिक चालक दल या जहाज़-मालिक इस मार्ग से हटते हैं, या किसी ‘डार्क’ टैंकर पर सफल हमला हो जाता है, तो बची हुई आपूर्ति का बड़ा हिस्सा तेजी से गायब हो सकता है।
मुख्य आंकड़ा विवादित है, क्योंकि AIS बंद करके चलने वाले जहाज़ों को गिनना कठिन है। विश्लेषक उन जहाज़ों को मिस कर सकते हैं जो अपनी लोकेशन प्रसारित नहीं करते। साथ ही, शिप-टू-शिप ट्रांसफर के दौरान एक ही माल को जहाज़ बदलने से पहले और बाद में दर्ज किया जाए तो उसकी दोहरी गणना भी हो सकती है। उपलब्ध अनुमान इस प्रकार हैं:
इन आंकड़ों की सीधे तुलना नहीं की जा सकती। कुछ केवल कच्चे तेल से जुड़े हैं, कुछ में पेट्रोलियम उत्पाद भी शामिल हैं, और अलग-अलग अनुमान अलग समय-अवधि या मार्गों को कवर कर सकते हैं। सबसे सुरक्षित निष्कर्ष यही है कि क्षेत्र से महत्वपूर्ण मात्रा में तेल बाहर जा रहा है, लेकिन किसी एक आंकड़े को वास्तविक समय की सटीक गिनती नहीं माना जाना चाहिए।
UAE से जुड़ी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के जहाज़ों पर हमलों की रिपोर्टें पहली नजर में विरोधाभासी लग सकती हैं। असल अंतर अक्सर तारीख और गिनती के दायरे का होता है।
Reuters ने 8 अगस्त को एक ADNOC-संबद्ध जहाज़ को निशाना बनाए जाने की खबर दी। 13 अगस्त की एक अन्य Reuters रिपोर्ट में दो ADNOC जहाज़ों पर हमले की बात कही गई, जबकि 14 अगस्त की रिपोर्ट में एक ADNOC जहाज़ पर हमले का उल्लेख था।
इन घटनाओं को ADNOC के 7 अगस्त के व्यापक बयान से सीधे विरोधाभास नहीं माना जा सकता। कंपनी ने कहा था कि संघर्ष शुरू होने के बाद उसके 15 जहाज़ों पर हमला हुआ था, जिनमें उस सप्ताह के तीन जहाज़ शामिल थे। इससे पहले Mombasa B और Al Bahyah नामक दो अमीराती टैंकरों पर हमले में एक भारतीय चालक दल सदस्य की मौत और आठ लोगों के घायल होने की खबर आई थी।
इसलिए अंतर मुख्यतः समय-अवधि और दायरे का है। कोई रिपोर्ट एक नई घटना बता सकती है, जबकि ADNOC का आंकड़ा पूरे संघर्ष के दौरान हुए हमलों का संचयी कुल हो सकता है। उपलब्ध रिपोर्टों में ADNOC के स्वामित्व वाले, ADNOC से जुड़े और केवल निशाना बनाए गए जहाज़ों के लिए अलग-अलग शब्दों का इस्तेमाल हुआ है। इन आंकड़ों को परिभाषा जांचे बिना जोड़ना उचित नहीं होगा।
AIS बंद करके चलना पहले से ही खतरनाक जलमार्ग में एक अतिरिक्त जोखिम पैदा करता है। अपनी लोकेशन प्रसारित न करने वाला जहाज़ दूसरे जहाज़ों, नौसैनिक बलों और बचाव सेवाओं के लिए पहचानना कठिन हो जाता है। रात में जलडमरूमध्य पार करना और समुद्र में माल स्थानांतरित करना नेविगेशन, टक्कर, आग और आपातकालीन सहायता से जुड़े खतरे बढ़ाता है।
टैंकरों को मिसाइल और ड्रोन हमलों का भी सामना करना पड़ रहा है। जुलाई में दो अमीराती टैंकरों पर हमलों में एक चालक दल सदस्य की मौत और आठ लोग घायल हुए थे। बाद में एक कतरी LNG टैंकर होर्मुज़ के पास क्षतिग्रस्त हुआ। उसके इंजन कक्ष में लगी आग से विस्फोट का खतरा पैदा हुआ और चालक दल को निकालना पड़ा।
जहाज़-मालिकों के लिए जोखिम केवल भौतिक नुकसान तक सीमित नहीं हैं। संकट के कारण जहाज़ों का मार्ग बदलना, देरी, माल का जोखिम और बीमा की गंभीर समस्याएं पैदा हुई हैं। Brookings के अनुसार, जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज़ों का बीमा या तो उपलब्ध नहीं था या बेहद महंगा हो गया था, जबकि कई समुद्री कर्मचारी इस यात्रा के लिए तैयार नहीं थे।
UAE होर्मुज़ को आंशिक रूप से बायपास करने के लिए अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन का इस्तेमाल कर सकता है। यह पाइपलाइन देश के अंदरूनी उत्पादन क्षेत्रों को जलडमरूमध्य के बाहर स्थित फुजैराह टर्मिनल से जोड़ती है। इसकी मौजूदा क्षमता करीब 1.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन बताई गई है। फुजैराह पर ईरानी हमले के बाद व्यवधान के बावजूद UAE लगभग इसी स्तर पर—यानी युद्ध-पूर्व उत्पादन का करीब आधा—निर्यात कर रहा था।
UAE की नई वेस्ट–ईस्ट पाइपलाइन फुजैराह के रास्ते ADNOC की निर्यात क्षमता दोगुनी करने के लिए बनाई जा रही है। लेकिन इसके 2027 में चालू होने की उम्मीद है, तत्काल नहीं। इसलिए लगभग 3 अरब डॉलर की यह परियोजना मौजूदा आपूर्ति अंतर को अभी नहीं भर सकती।
सऊदी अरब की ईस्ट–वेस्ट पाइपलाइन, जिसे पेट्रोलाइन भी कहा जाता है, देश के पूर्वी तेल क्षेत्रों से लाल सागर स्थित यानबू तक कच्चा तेल ले जाती है। Reuters ने इसकी नाममात्र क्षमता 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक बताई, लेकिन टैंकर और जेट्टी की उपलब्धता के आधार पर प्रभावी निर्यात क्षमता करीब 4.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन आंकी गई।
यह क्षमता होर्मुज़ से गुजरने वाले पूरे क्षेत्रीय प्रवाह का तत्काल विकल्प नहीं है। इसका उपयोग पाइपलाइन विन्यास, भंडारण, टर्मिनल, टैंकर, सुरक्षा और उपलब्ध कच्चे तेल की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। इसके अलावा, यह कुवैत, कतर, इराक या UAE से निकलने वाले तेल को सीधे नहीं ले जा सकती।
तेल पाइपलाइनें कतर की LNG समस्या हल नहीं कर सकतीं। कतर की गैस को विदेशी खरीदारों तक समुद्र के रास्ते पहुंचना होता है, इसलिए वह उसी समुद्री खतरे के संपर्क में है। Reuters के अनुसार, कतरी LNG वाहक Al Rekayyat पर हमले के बाद वह ओमान के पास फंस गया था। उसके इंजन कक्ष में आग लगने से विस्फोट का खतरा पैदा हुआ और चालक दल को निकाल लिया गया।
अलग से, QatarEnergy ने कहा कि ईरानी हमलों में कतर के 14 LNG ट्रेनों में से दो और उसकी दो गैस-टू-लिक्विड सुविधाओं में से एक क्षतिग्रस्त हुई। इससे LNG निर्यात क्षमता का अनुमानित 17 प्रतिशत प्रभावित हुआ। कच्चे तेल को पाइपलाइन से मोड़ देने भर से इस नुकसान की तुरंत भरपाई नहीं हो सकती।
चीन के रणनीतिक और वाणिज्यिक कच्चे तेल भंडार यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं कि संकट का असर वैश्विक कीमतों तक कितनी तेजी से पहुंचेगा। अगर चीनी कंपनियां या सरकार भंडारित तेल का इस्तेमाल करती हैं, तो तत्काल समुद्री आपूर्ति के लिए प्रतिस्पर्धा कम हो सकती है। लेकिन अगर चीन भंडार बढ़ाने लगे या बचे हुए समुद्री कार्गो के लिए आक्रामक बोली लगाए, तो बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है।
उपलब्ध रिपोर्टें चीन के इस्तेमाल योग्य भंडार का आकार, उसकी पहुंच और उसे जारी करने की नीति स्पष्ट नहीं करतीं। इसलिए चीन फिलहाल राहत का भरोसेमंद स्रोत नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण अनिश्चितता है।
‘डार्क’ टैंकर नेटवर्क दिखाता है कि होर्मुज़ को केवल “खुला” या “बंद” कहना पर्याप्त नहीं है। कुछ तेल अब भी अत्यधिक सीमित और कठिनाई से मापे जा सकने वाले मार्ग से बाहर जा रहा है—जोखिम भरी समुद्री यात्राओं और ओमान के पास माल स्थानांतरण से यह संभव हो रहा है।
लेकिन यह व्यवस्था उन जहाज़ों पर निर्भर है जो गंभीर खतरे वाले क्षेत्र में जाने को तैयार हों, उन चालक दलों पर जो वहां काम करें, उन बीमाकर्ताओं पर जो जोखिम उठाएं और उन ट्रांसफर क्षेत्रों पर जो सुलभ बने रहें। रिपोर्टेड प्रवाह लगभग 3 मिलियन से 9 मिलियन बैरल प्रतिदिन के बीच है, इसलिए बाजार को आपूर्ति की दिशा का अंदाजा तो है, पर उसका सटीक पैमाना नहीं।
फिलहाल, गुप्त शिपमेंट झटके को कुछ हद तक नरम कर रहे हैं। वे खाड़ी की ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित नहीं बना रहे। ट्रांसफर क्षेत्रों पर नया हमला, बीमा प्रतिबंधों का कड़ा होना, चालक दल की कमी या चीन की खरीद नीति में बदलाव इस नियंत्रित कमी को बहुत बड़े तेल और LNG संकट में बदल सकता है।