वॉल स्ट्रीट जर्नल का कहना है कि केंद्रीय बैंकों का ‘अंतिम सहारा देने वाले ऋणदाता’ से ‘अंतिम सहारा देने वाला बाजार निर्माता’ बनना संकटों का एक आत्म पोषित चक्र बना सकता है: आपात सुविधाएं लीवरेज और जोखिम को बढ़ावा देती ह... सितंबर 2025 तक हेज फंडों का अमेरिकी ट्रेजरी कैश फ्यूचर्स बेसिस ट्रेड लगभग 830 अरब डॉलर पहुंच गया...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What concerns does The Wall Street Journal raise about central bank emergency facilities potentially fueling excessive leverage, and how do. Article summary: The WSJ's central warning is that by becoming market makers of last resort, central banks have created a self-reinforcing cycle: the safety net encourages hedge funds to pile into enormous, levered basis trades; those tr. Topic tags: general, government, education, news, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, ch
वॉल स्ट्रीट जर्नल के जेम्स मैकिन्टोश के अगस्त 2026 के विश्लेषण के मुताबिक, वित्तीय संकटों के दौरान केंद्रीय बैंकों की भूमिका में बड़ा बदलाव आया है। वे अब केवल ‘अंतिम सहारा देने वाले ऋणदाता’ नहीं रहे, बल्कि कई मौकों पर ‘अंतिम सहारा देने वाले बाजार निर्माता’ की भूमिका भी निभा रहे हैं।
2008 के वैश्विक वित्तीय संकट और फिर 2020 में केंद्रीय बैंकों ने कॉरपोरेट तथा सरकारी बॉन्ड बाजारों को सुचारु बनाए रखने के लिए असाधारण हस्तक्षेप किए। इन कदमों ने तत्काल संकट को टालने में मदद की, लेकिन इनके अनपेक्षित प्रभाव भी सामने आ रहे हैं: सरकारी उधारी को अप्रत्यक्ष सहारा मिलना, निवेशकों का अधिक कर्ज लेकर जोखिम उठाना और मौद्रिक नीति के संचालन में संभावित बाधा ।
केंद्रीय बैंक अधिकारियों की चिंता अब उस ‘रिंस-एंड-रिपीट’ चक्र को लेकर है, जिसमें एक संकट से निपटने के लिए बनाई गई सुविधा अगली बार और बड़े जोखिम की जमीन तैयार कर देती है ।
इस पूरे मामले का सबसे स्पष्ट उदाहरण अमेरिकी ट्रेजरी बाजार का कैश-फ्यूचर्स बेसिस ट्रेड है। इसमें हेज फंड वास्तविक ट्रेजरी बॉन्ड खरीदते हैं और उनसे जुड़े फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट पर शॉर्ट पोजीशन लेते हैं। दोनों कीमतों के बीच छोटे अंतर से लाभ कमाने वाली यह रणनीति सामान्य परिस्थितियों में एक तरह का आर्बिट्राज है।
फेडरल रिजर्व के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 तक इस ट्रेड का आकार लगभग 830 अरब डॉलर हो गया था—2020 की शुरुआत के पिछले शिखर से करीब दोगुना। यह हेज फंडों के कुल लॉन्ग ट्रेजरी एक्सपोजर का लगभग 35% था । साल 2025 के अंत तक हेज फंडों का कुल अमेरिकी ट्रेजरी लॉन्ग एक्सपोजर करीब 2.4 ट्रिलियन डॉलर बताया गया
।
समस्या इस रणनीति के आकार से ही नहीं, बल्कि इसके वित्तपोषण के तरीके से भी जुड़ी है। इन पोजीशन को लगभग पूरी तरह रेपो उधारी से वित्तपोषित किया जाता है। रेपो में प्रतिभूतियों को गिरवी रखकर अल्पकालिक कर्ज लिया जाता है। इसलिए बाजार में कीमतें तेजी से बदलने या मार्जिन बढ़ने पर हेज फंडों को पोजीशन बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है ।
फेड की मई 2026 की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के अनुसार, व्यापक आंकड़े उपलब्ध होने की अवधि में हेज फंड लीवरेज रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास स्थिर बना रहा। बेसिस ट्रेड में कुछ कमी की भरपाई अन्य रिलेटिव-वैल्यू ट्रेडों, जैसे स्वैप-स्प्रेड ट्रेड, से हुई ।
अगर इतने बड़े पैमाने पर पोजीशन अचानक खत्म की जाने लगे, तो इसका असर लगभग 29 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी ट्रेजरी बाजार पर पड़ सकता है ।
यहां मॉरल हैज़र्ड का अर्थ है कि किसी जोखिम का नुकसान पूरी तरह खुद न उठाने की उम्मीद निवेशक को और अधिक जोखिम लेने के लिए प्रेरित कर सकती है। यदि बाजार को भरोसा हो कि संकट के समय केंद्रीय बैंक नुकसान को सीमित करने के लिए आ जाएगा, तो बड़े और अधिक उधारी-आधारित दांव लगाने का प्रोत्साहन बढ़ सकता है।
मार्च 2025 में कश्यप, स्टीन, वॉलेन और यंगर के ब्रुकिंग्स पेपर में सुझाव दिया गया कि अत्यधिक तनाव के समय फेड एक ऐसी सुविधा बनाए, जो हेज फंडों की बेसिस ट्रेड पोजीशन को बैकस्टॉप कर सके। इसका मतलब होगा कि जब हेज फंड अपनी पोजीशन बेचने लगें, तो फेड उन पोजीशन को अपने ऊपर ले—मसलन, ट्रेजरी खरीदे और संबंधित फ्यूचर्स बेचे ।
इस प्रस्ताव के पीछे तर्क है कि व्यापक रूप से बाजार खरीदने के बजाय सीधे प्रभावित पोजीशन को संभालना कम विघटनकारी हो सकता है। लेकिन इससे वही मुख्य सवाल उठता है: अगर हेज फंडों को पता हो कि चरम संकट में केंद्रीय बैंक उनके ट्रेड को संभाल सकता है, तो वे शुरुआत में कितना अधिक लीवरेज ले सकते हैं?
एक जोखिम विश्लेषक ने इसे इस तरह संक्षेप में रखा: “जिस नीति से कैश-फ्यूचर्स बेसिस में लीवरेज वाली पोजीशन लेते समय हेज फंडों के सामने मौजूद मुख्य जोखिम हट जाता है, उसके साथ मॉरल हैज़र्ड की चिंता स्वाभाविक है” । अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च सर्विस ने भी नए सरकारी बैकस्टॉप का आकलन करते समय मॉरल हैज़र्ड के प्रति सजग रहने की जरूरत बताई है
। FDIC के शोध में भी आपातकालीन ऋण देने के मॉरल हैज़र्ड संबंधी परिणामों की पुष्टि की गई है ।
चक्र कुछ इस तरह बनता है:
नीतिनिर्माता और अर्थशास्त्री अब व्यापक बाजार-बैकस्टॉप के बजाय अधिक लक्षित उपायों पर विचार कर रहे हैं:
इन विकल्पों से यह संकेत मिलता है कि व्यापक रूप से बाजार में उतरने वाला ‘मार्केट मेकर ऑफ लास्ट रिजॉर्ट’ मॉडल अपने साथ नए जोखिम भी लेकर आया है। फिर भी कोई भी समाधान पूरी तरह आसान नहीं है। नीति निर्माताओं को एक तरफ अव्यवस्थित बिकवाली और बाजार जाम होने से रोकना है, तो दूसरी तरफ ऐसा सुरक्षा-जाल नहीं बनाना है जो निवेशकों को पहले से ही अधिक जोखिम लेने के लिए उकसाए।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की चेतावनी आपातकालीन ऋण व्यवस्था के खिलाफ नहीं है। असली सवाल केंद्रीय बैंकों की बदलती भूमिका और उससे पैदा हो रहे प्रोत्साहनों का है। जब केंद्रीय बैंक संकट में बाजारों को सीधे सहारा देने लगते हैं, तो सुरक्षा-जाल वित्तीय व्यवस्था के सबसे अधिक लीवरेज वाले हिस्सों तक पहुंच जाता है।
830 अरब डॉलर का ट्रेजरी बेसिस ट्रेड इस समस्या का बड़ा उदाहरण है: सामान्य समय में यह बाजार को तरलता और मूल्य-संतुलन दे सकता है, लेकिन उधारी पर आधारित इसका विशाल आकार अचानक बिकवाली को प्रणालीगत जोखिम में बदल सकता है ।
यदि नीति निर्माता अधिक लक्षित उपायों से इस चक्र को नहीं तोड़ते, तो आज का संकट-रोधी हस्तक्षेप कल के और बड़े जोखिम की नींव रख सकता है।
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वॉल स्ट्रीट जर्नल का कहना है कि केंद्रीय बैंकों का ‘अंतिम सहारा देने वाले ऋणदाता’ से ‘अंतिम सहारा देने वाला बाजार निर्माता’ बनना संकटों का एक आत्म पोषित चक्र बना सकता है: आपात सुविधाएं लीवरेज और जोखिम को बढ़ावा देती ह...
वॉल स्ट्रीट जर्नल का कहना है कि केंद्रीय बैंकों का ‘अंतिम सहारा देने वाले ऋणदाता’ से ‘अंतिम सहारा देने वाला बाजार निर्माता’ बनना संकटों का एक आत्म पोषित चक्र बना सकता है: आपात सुविधाएं लीवरेज और जोखिम को बढ़ावा देती ह... सितंबर 2025 तक हेज फंडों का अमेरिकी ट्रेजरी कैश फ्यूचर्स बेसिस ट्रेड लगभग 830 अरब डॉलर पहुंच गया था—2020 की शुरुआत के पिछले शिखर से करीब दोगुना और उनके कुल लॉन्ग ट्रेजरी एक्सपोजर का 35% [5]।
नीतिनिर्माता सीमित फेड बैकस्टॉप, रेपो पर ज्यादा हेयरकट, अनिवार्य सेंट्रल क्लियरिंग और ट्रेजरी बायबैक जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, लेकिन हर उपाय के साथ मॉरल हैज़र्ड का जोखिम बना हुआ है [2][3]।