हालांकि, साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) में प्रकाशित एक ओप-एड में, विश्लेषक थॉमस ओ. फॉक का तर्क है कि यह प्रतिबंध अमेरिकी रोबोटिक्स उद्योग के लिए किसी भी तरह से फायदेमंद नहीं है । उनके अनुसार, इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
फॉक का तर्क है कि वैश्विक ह्यूमनॉइड रोबोट बाजार में चीनी निर्माताओं की पहले से ही लगभग 85% हिस्सेदारी है । इसलिए, यह कहना कि कोई 'स्थापित' अमेरिकी उद्योग को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, सही नहीं है। बल्कि, यह एक नवजात उद्योग को संरक्षण देने का प्रयास है, जिसे बिना प्रतिस्पर्धा के पाला जा रहा है। फॉक के अनुसार, प्रतिस्पर्धा से दूर रहना कमजोरी की निशानी है, ताकत की नहीं ।
प्रतिबंध में एक बड़ी खामी यह है कि इसमें अमेरिकी संघीय सरकार (Federal Government) को छूट दी गई है । इसका मतलब है कि सरकार वही डिवाइस खरीदना जारी रख सकती है जिन्हें आम नागरिकों के लिए 'अस्वीकार्य जोखिम' माना गया है। फॉक इसे 'वर्दी में छिपा एक टैरिफ' (tariff in uniform) कहते हैं । उनका कहना है कि अगर ये उपकरण वास्तव में साइबर सुरक्षा के लिए खतरा हैं, तो ये सरकारी उपयोग के लिए भी उतने ही खतरनाक होने चाहिए ।
फॉक ने इस मामले में चीनी सोलर पैनल के ऐतिहासिक उदाहरण का जिक्र किया है। अमेरिका ने 2012 में चीनी सोलर पैनल पर एंटी-डंपिंग शुल्क (एक तरह का प्रतिबंधात्मक कर) लगाया था, ताकि अपने स्थानीय उद्योग को बढ़ावा दे सके । लेकिन आज, चीन दुनिया भर में सोलर पैनल निर्माण के हर चरण (कच्चे माल से लेकर अंतिम उत्पाद तक) में 80% से अधिक नियंत्रण रखता है । इससे साबित होता है कि सिर्फ दीवार खड़ी करने से कोई उद्योग विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी नहीं बनता। फॉक का मानना है कि रोबोट पर प्रतिबंध भी वही गलती दोहरा सकता है - यह अमेरिकी कंपनियों को प्रतिस्पर्धा से तो बचाएगा, लेकिन उन्हें दुनिया में अग्रणी बनने में मदद नहीं करेगा ।
संक्षेप में, थॉमस ओ. फॉक का तर्क है कि यह प्रतिबंध सुरक्षा से ज्यादा एक संरक्षणवादी नीति है, जो लंबे समय में अमेरिकी रोबोटिक्स उद्योग को कमजोर ही करेगी ।
हालांकि, साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) में प्रकाशित एक ओप-एड में, विश्लेषक थॉमस ओ. फॉक का तर्क है कि यह प्रतिबंध अमेरिकी रोबोटिक्स उद्योग के लिए किसी भी तरह से फायदेमंद नहीं है । उनके अनुसार, इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
फॉक का तर्क है कि वैश्विक ह्यूमनॉइड रोबोट बाजार में चीनी निर्माताओं की पहले से ही लगभग 85% हिस्सेदारी है । इसलिए, यह कहना कि कोई 'स्थापित' अमेरिकी उद्योग को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, सही नहीं है। बल्कि, यह एक नवजात उद्योग को संरक्षण देने का प्रयास है, जिसे बिना प्रतिस्पर्धा के पाला जा रहा है। फॉक के अनुसार, प्रतिस्पर्धा से दूर रहना कमजोरी की निशानी है, ताकत की नहीं ।
प्रतिबंध में एक बड़ी खामी यह है कि इसमें अमेरिकी संघीय सरकार (Federal Government) को छूट दी गई है । इसका मतलब है कि सरकार वही डिवाइस खरीदना जारी रख सकती है जिन्हें आम नागरिकों के लिए 'अस्वीकार्य जोखिम' माना गया है। फॉक इसे 'वर्दी में छिपा एक टैरिफ' (tariff in uniform) कहते हैं । उनका कहना है कि अगर ये उपकरण वास्तव में साइबर सुरक्षा के लिए खतरा हैं, तो ये सरकारी उपयोग के लिए भी उतने ही खतरनाक होने चाहिए ।
फॉक ने इस मामले में चीनी सोलर पैनल के ऐतिहासिक उदाहरण का जिक्र किया है। अमेरिका ने 2012 में चीनी सोलर पैनल पर एंटी-डंपिंग शुल्क (एक तरह का प्रतिबंधात्मक कर) लगाया था, ताकि अपने स्थानीय उद्योग को बढ़ावा दे सके । लेकिन आज, चीन दुनिया भर में सोलर पैनल निर्माण के हर चरण (कच्चे माल से लेकर अंतिम उत्पाद तक) में 80% से अधिक नियंत्रण रखता है । इससे साबित होता है कि सिर्फ दीवार खड़ी करने से कोई उद्योग विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी नहीं बनता। फॉक का मानना है कि रोबोट पर प्रतिबंध भी वही गलती दोहरा सकता है - यह अमेरिकी कंपनियों को प्रतिस्पर्धा से तो बचाएगा, लेकिन उन्हें दुनिया में अग्रणी बनने में मदद नहीं करेगा ।
संक्षेप में, थॉमस ओ. फॉक का तर्क है कि यह प्रतिबंध सुरक्षा से ज्यादा एक संरक्षणवादी नीति है, जो लंबे समय में अमेरिकी रोबोटिक्स उद्योग को कमजोर ही करेगी ।