ज़ेलेंस्की ने अपने रात्रिकालीन वीडियो संबोधन में कहा, "हमने अमेरिकी पक्ष को अपने प्रस्ताव सौंप दिए हैं" । ये प्रस्ताव शांति प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने के लिए अमेरिकी वार्ता टीम को दिए गए। ज़ेलेंस्की ने यह भी चेतावनी दी कि रूस सितंबर 2026 में होने वाले अपने संसदीय चुनाव को बहाना बनाकर एक नई लामबंदी (मोबिलाइज़ेशन) की घोषणा कर सकता है । हालांकि पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है, लेकिन यूक्रेन ने लगातार क्षेत्रीय रियायतों के खिलाफ अपना रुख बनाए रखा है। ज़ेलेंस्की का कहना है कि यूक्रेनी और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उनके पास ज़मीन सौंपने का अधिकार नहीं है । अगस्त के मध्य की रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित ढाँचा (फ्रेमवर्क) मौजूदा फ्रंटलाइन पर लड़ाई रोकने का प्रावधान करता है, लेकिन यूक्रेन कब्जे वाले क्षेत्रों पर रूस की संप्रभुता को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं देगा ।
मॉस्को की प्रतिक्रिया तीखी और पहले जैसी सख्त है:
युद्ध अध्ययन संस्थान (Institute for the Study of War) ने 14 अगस्त को आकलन किया कि "क्रेमलिन अधिकारी लगातार रूस की इस अनिच्छा को दोहरा रहे हैं कि वह यूक्रेन के पूर्ण समर्पण की अपनी माँगों को पूरा किए बिना किसी भी सार्थक शांति वार्ता में शामिल नहीं होगा" ।
ज़ेलेंस्की चाहते हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका एक केंद्रीय मध्यस्थ और गारंटर के रूप में सक्रिय भूमिका निभाए। विशेष रूप से, उन्होंने वाशिंगटन से निम्नलिखित माँगें रखी हैं:
यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने अगस्त की शुरुआत में पुष्टि की कि अमेरिका की भागीदारी वाली शांति वार्ता प्रक्रिया फिलहाल "रुकी हुई" है और कीव अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के आगमन का इंतजार कर रहा है ।
नीचे दी गई तालिका उन मुख्य असहमतियों को दर्शाती है जिन्होंने किसी भी ठोस प्रगति को रोका है:
| मुद्दा | यूक्रेन का रुख | रूस का रुख |
|---|---|---|
| क्षेत्र | कोई भूमि रियायत नहीं; 1991 की सीमाओं की पूर्ण बहाली | डोनेट्स्क, लुहान्स्क, ज़ापोरिज़िया, खेरसॉन और क्रीमिया के पूर्ण समर्पण की मांग; अब कब्जे वाली कोई भी ज़मीन लौटाने से इनकार |
| नाटो सदस्यता | सुरक्षा गारंटी चाहता है, जिसमें अंततः नाटो या समान गठबंधन शामिल हो | मांग है कि यूक्रेन स्थायी रूप से तटस्थ रहे और कभी नाटो में शामिल न हो |
| युद्धविराम की शर्तें | आपसी विश्वास बढ़ाने के लिए हवाई/काला सागर युद्धविराम का समर्थन करता है | आंशिक युद्धविराम को खारिज करता है; पहले यूक्रेन के पूर्ण समर्पण की मांग करता है |
| वार्ता का प्रारूप | द्विपक्षीय (अमेरिकी मध्यस्थता) या बहुपक्षीय (यूरोपीय भागीदारों सहित) | केवल "एक पक्ष" (मॉस्को की शर्तों) के प्रस्तावों पर विचार करना चाहता है, यूक्रेन के नहीं |
| लामबंदी की चिंता | आशंका है कि रूस सितंबर 2026 के चुनावों का उपयोग अधिक सैनिकों की भर्ती के लिए करेगा | कोई कमी का संकेत नहीं; क्रेमलिन का कहना है कि वह अमेरिकी प्रस्तावों की प्रतीक्षा करते हुए लड़ता रहेगा |
दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर अड़े हुए हैं और मास्को समझौते के लिए कोई लचीलापन नहीं दिखा रहा है, ऐसे में निकट भविष्य में कूटनीतिक सफलता की संभावनाएँ धूमिल ही हैं। यूक्रेन और रूस में अमेरिकी दूतों का आगामी दौरा यह परखेगा कि क्या वाशिंगटन इस गतिरोध को तोड़ पाता है।
ज़ेलेंस्की ने अपने रात्रिकालीन वीडियो संबोधन में कहा, "हमने अमेरिकी पक्ष को अपने प्रस्ताव सौंप दिए हैं" । ये प्रस्ताव शांति प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने के लिए अमेरिकी वार्ता टीम को दिए गए। ज़ेलेंस्की ने यह भी चेतावनी दी कि रूस सितंबर 2026 में होने वाले अपने संसदीय चुनाव को बहाना बनाकर एक नई लामबंदी (मोबिलाइज़ेशन) की घोषणा कर सकता है । हालांकि पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है, लेकिन यूक्रेन ने लगातार क्षेत्रीय रियायतों के खिलाफ अपना रुख बनाए रखा है। ज़ेलेंस्की का कहना है कि यूक्रेनी और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उनके पास ज़मीन सौंपने का अधिकार नहीं है । अगस्त के मध्य की रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित ढाँचा (फ्रेमवर्क) मौजूदा फ्रंटलाइन पर लड़ाई रोकने का प्रावधान करता है, लेकिन यूक्रेन कब्जे वाले क्षेत्रों पर रूस की संप्रभुता को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं देगा ।
मॉस्को की प्रतिक्रिया तीखी और पहले जैसी सख्त है:
युद्ध अध्ययन संस्थान (Institute for the Study of War) ने 14 अगस्त को आकलन किया कि "क्रेमलिन अधिकारी लगातार रूस की इस अनिच्छा को दोहरा रहे हैं कि वह यूक्रेन के पूर्ण समर्पण की अपनी माँगों को पूरा किए बिना किसी भी सार्थक शांति वार्ता में शामिल नहीं होगा" ।
ज़ेलेंस्की चाहते हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका एक केंद्रीय मध्यस्थ और गारंटर के रूप में सक्रिय भूमिका निभाए। विशेष रूप से, उन्होंने वाशिंगटन से निम्नलिखित माँगें रखी हैं:
यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने अगस्त की शुरुआत में पुष्टि की कि अमेरिका की भागीदारी वाली शांति वार्ता प्रक्रिया फिलहाल "रुकी हुई" है और कीव अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के आगमन का इंतजार कर रहा है ।
नीचे दी गई तालिका उन मुख्य असहमतियों को दर्शाती है जिन्होंने किसी भी ठोस प्रगति को रोका है:
| मुद्दा | यूक्रेन का रुख | रूस का रुख |
|---|---|---|
| क्षेत्र | कोई भूमि रियायत नहीं; 1991 की सीमाओं की पूर्ण बहाली | डोनेट्स्क, लुहान्स्क, ज़ापोरिज़िया, खेरसॉन और क्रीमिया के पूर्ण समर्पण की मांग; अब कब्जे वाली कोई भी ज़मीन लौटाने से इनकार |
| नाटो सदस्यता | सुरक्षा गारंटी चाहता है, जिसमें अंततः नाटो या समान गठबंधन शामिल हो | मांग है कि यूक्रेन स्थायी रूप से तटस्थ रहे और कभी नाटो में शामिल न हो |
| युद्धविराम की शर्तें | आपसी विश्वास बढ़ाने के लिए हवाई/काला सागर युद्धविराम का समर्थन करता है | आंशिक युद्धविराम को खारिज करता है; पहले यूक्रेन के पूर्ण समर्पण की मांग करता है |
| वार्ता का प्रारूप | द्विपक्षीय (अमेरिकी मध्यस्थता) या बहुपक्षीय (यूरोपीय भागीदारों सहित) | केवल "एक पक्ष" (मॉस्को की शर्तों) के प्रस्तावों पर विचार करना चाहता है, यूक्रेन के नहीं |
| लामबंदी की चिंता | आशंका है कि रूस सितंबर 2026 के चुनावों का उपयोग अधिक सैनिकों की भर्ती के लिए करेगा | कोई कमी का संकेत नहीं; क्रेमलिन का कहना है कि वह अमेरिकी प्रस्तावों की प्रतीक्षा करते हुए लड़ता रहेगा |
दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर अड़े हुए हैं और मास्को समझौते के लिए कोई लचीलापन नहीं दिखा रहा है, ऐसे में निकट भविष्य में कूटनीतिक सफलता की संभावनाएँ धूमिल ही हैं। यूक्रेन और रूस में अमेरिकी दूतों का आगामी दौरा यह परखेगा कि क्या वाशिंगटन इस गतिरोध को तोड़ पाता है।