अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 14 अगस्त, 2026 को घोषणा की कि वह जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करेंगे। ईरान ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया, बसीज प्रमुख ने कहा कि जलडमरूमध्य 'ईरान के नियंत्रण और प्रबंधन में है' और जब तक वाशिंगटन अपना व्यवहार नहीं बदलता, यह नहीं खुलेगा। अंतरराष्ट्रीय का...
शोध उत्तर

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है, जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को 'अमेरिकी क्षेत्र' घोषित करने की बात कही है। यह बयान अंतरराष्ट्रीय कानून की दृष्टि से बेमिसाल है, तेहरान ने इसे तुरंत खारिज कर दिया है, और यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही इस जलमार्ग पर लगभग पूर्ण नाकेबंदी से जूझ रहा है।
आइए, ट्रंप के इस बयान, इसके कानूनी पहलुओं, ईरान की प्रतिक्रिया, ध्वस्त हुए युद्धविराम और तेल की कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को विस्तार से समझते हैं।
न्यूयॉर्क के गार्डन सिटी में 14 अगस्त, 2026 को एक रैली को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, 'ईरान को हराने के बाद, जो बुरी तरह हार रहा है, बहुत जल्द मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को संयुक्त राज्य अमेरिका का क्षेत्र घोषित करूंगा।' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने नाकेबंदी कर रखी है और 'जब तक हम न चाहें, कोई जहाज नहीं गुजर सकता।'
यह टिप्पणी उनके ट्रुथ सोशल पोस्ट के बाद आई है, जिसमें उन्होंने जलडमरूमध्य पर अमेरिका का 'पूर्ण नियंत्रण' होने का दावा किया था और लिखा था, 'मुझे लगता है हम इसे अपने पास रखेंगे।' उन्होंने फॉक्स न्यूज को भी बताया कि अमेरिका का इस जलमार्ग पर 'मजबूत नियंत्रण' है
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होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, जो संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के तहत शासित होता है, जहां ट्रांजिट पैसेज (पारगमन मार्ग) में बाधा नहीं डाली जा सकती । अपने सबसे संकरे बिंदु पर यह 30 मील से भी कम चौड़ा है और इसका पानी ईरान और ओमान के प्रादेशिक जल (territorial sea) के अंतर्गत आता है
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अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, तटीय राज्यों (यहाँ ईरान और ओमान) का अपने प्रादेशिक जल पर संप्रभुता तो है, लेकिन यह संप्रभुता सभी जहाजों (युद्धपोतों सहित) के लिए ट्रांजिट पैसेज के अधिकार के अधीन है । ट्रांजिट पैसेज का यह अधिकार निलंबित नहीं किया जा सकता
।
एक महत्वपूर्ण पेच यह है कि न तो अमेरिका और न ही ईरान UNCLOS के पक्षकार हैं । ईरान ने इस संधि पर हस्ताक्षर तो किए हैं लेकिन अनुसमर्थन नहीं किया, जबकि अमेरिका ने भी हस्ताक्षर किए लेकिन कभी अनुमोदन नहीं किया
। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मतलब है कि ईरान को संधि कानून के रूप में UNCLOS के ट्रांजिट-पैसेज मानकों पर नहीं रोका जा सकता, हालांकि कुछ का तर्क है कि यह शासन प्रथागत अंतरराष्ट्रीय कानून को दर्शाता है
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जलडमरूमध्य पर अमेरिका की एकतरफा संप्रभुता की घोषणा का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय (यूएन सहित) द्वारा इसे लगभग निश्चित रूप से खारिज कर दिया जाएगा ।
ईरान ने ट्रंप के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। 13 अगस्त को ईरान के बसीज अर्धसैनिक बल के नए प्रमुख हुसैन तायब ने घोषणा की कि जलडमरूमध्य 'ईरान के नियंत्रण और प्रबंधन में है' और यह तब तक नहीं खुलेगा जब तक अमेरिका ईरान की माँगों को स्वीकार नहीं करता और अपना व्यवहार नहीं बदलता ।
ईरान ने जुलाई में UN शिपिंग एजेंसी को बताया था कि 'होर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्से ईरान के प्रादेशिक जल में आते हैं' और उसका उन हिस्सों पर अधिकार है । तेहरान का तर्क है कि समुद्र के अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, एक तटीय राज्य अपने प्रादेशिक जल पर संप्रभुता का प्रयोग करता है
।
दोनों पक्षों के दावों के बीच यह गतिरोध पैदा हो गया है, जहाँ हर कोई एक-दूसरे पर अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के उल्लंघन का आरोप लगा रहा है, और किसी के पास स्पष्ट कानूनी बढ़त नहीं है।
जून 2026 में पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक 14-सूत्रीय 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसमें शत्रुता समाप्त करने और जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की घोषणा की गई थी । इस समझौते का उद्देश्य स्थायी शांति के लिए बातचीत हेतु 60 दिनों की खिड़की प्रदान करना था ।
हालाँकि, यह समझौता हफ्तों के भीतर ही ध्वस्त हो गया। 8 जुलाई को ट्रंप ने इस अंतरिम समझौते को 'खत्म' घोषित कर दिया । जुलाई के मध्य तक, अमेरिका-ईरान के बीच फिर से शुरू हुई शत्रुता ने युद्धविराम को खत्म कर दिया, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगाया
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रॉयटर्स के अनुसार, 12 अगस्त तक एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र का कहना था कि 60 दिनों के युद्धविराम को बढ़ाने पर कोई बातचीत नहीं हुई है और ईरान माँग करता है कि वाशिंगटन मूल अंतरिम समझौते पर वापस आए ।
28 फरवरी, 2026 से, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ अपना हवाई अभियान शुरू किया था, तब से होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान द्वारा बड़े पैमाने पर अवरुद्ध कर दिया गया है । अगस्त के मध्य में इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या एक सप्ताह में मात्र आठ रह गई थी
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अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तेल भंडार 'तेजी से घट रहे हैं' । इस नाकाबंदी के परिणामस्वरूप तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है
। ट्रंप के इस आग्रह के बावजूद कि जलडमरूमध्य खुला है, वहाँ यातायात 'नगण्य' बना हुआ है
।
14 अगस्त को ट्रंप ने अमेरिकियों से 'पेट्रोल की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी' को ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की आवश्यक कीमत के रूप में स्वीकार करने का आग्रह किया । उन्होंने भीड़ से कहा, 'पंप पर थोड़ा अधिक भुगतान करना, बस याद रखें कि आप ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकने के लिए ऐसा कर रहे हैं।'
यह संघर्ष के दौरान उनके रवैये के अनुरूप है। फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने के बाद से, ट्रंप ने बढ़ती ईंधन लागतों को लेकर चिंताओं को कई बार खारिज किया है:
अप्रैल 2026 में अमेरिका में औसत पेट्रोल की कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुँच गई थी और तब से यह ऊँची बनी हुई है ।
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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 14 अगस्त, 2026 को घोषणा की कि वह जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 14 अगस्त, 2026 को घोषणा की कि वह जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करेंगे। ईरान ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया, बसीज प्रमुख ने कहा कि जलडमरूमध्य 'ईरान के नियंत्रण और प्रबंधन में है' और जब तक वाशिंगटन अपना व्यवहार नहीं बदलता, यह नहीं खुलेगा।
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, जहाँ किसी भी देश को एकतरफा संप्रभुता का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है।