क्षेत्रीय शेयर बाजारों में अलग-अलग चाल – एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयर सप्ताह के मध्य में घबराहट के साथ ऊपर बढ़े, जबकि वॉल स्ट्रीट सोमवार और मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुआ। मंगलवार को S&P 500 0.32% और Nasdaq 0.60% गिर गया । इस गिरावट की अगुआई Amazon और Alphabet जैसी बड़ी टेक कंपनियों ने की, क्योंकि शांति की उम्मीदें कम हो गईं
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सोना चढ़ा – भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच सोने की कीमतें सप्ताह की शुरुआत में नौ सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं, क्योंकि निवेशकों ने सुरक्षित निवेश (safe-haven) को तरजीह दी ।
विशेषज्ञों की टिप्पणियों में एक केंद्रीय विषय यह है कि भू-राजनीतिक जोखिम की गंभीरता और शेयर बाजारों में देखी जा रही अपेक्षाकृत संयमित अस्थिरता के बीच एक अंतर (डिस्कनेक्ट) है।
"डिस्कनेक्ट जो लंबे समय तक नहीं टिकेगा" – तेल की कीमतें अपने हालिया शिखर से नीचे हैं, भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य को जल्द खोलने की संभावनाएं धूमिल हो रही हैं। विश्लेषकों का कहना है कि वास्तविक आपूर्ति जोखिम को देखते हुए यह स्थिति अनिश्चित काल तक नहीं चल सकती ।
अस्थिरता अब 'एक संरचनात्मक स्थिति' – ब्लूमबर्ग के विश्लेषण के अनुसार, अस्थिरता अब कोई गुजरने वाला चरण नहीं बल्कि एक संरचनात्मक स्थिति है, जो भू-राजनीतिक, व्यापक आर्थिक और तकनीकी ताकतों के आपसी टकराव से पैदा हुई है। शेयर, क्रेडिट और ब्याज दर बाजार अलग-अलग कहानियां बता रहे हैं ।
भू-राजनीतिक जोखिम 'प्रमुख चर' – अमेरिकी बैंक, अमुंडी और यूकैपिटल जैसी संस्थाओं के अनुसार, ईरान संघर्ष, अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध और यूरोपीय राजनीतिक अस्थिरता ने सुनिश्चित कर दिया है कि भू-राजनीतिक जोखिम निवेशकों के व्यवहार और परिसंपत्ति आवंटन का प्रमुख चालक बन गया है ।
शेयर बाजार अभी भू-राजनीति को 'नजरअंदाज' कर रहे हैं – फिलहाल – कुछ रणनीतिकारों का मानना है कि बाजार मजबूत कॉर्पोरेट आय, कम होती महंगाई और मजबूत श्रम बाजार के कारण भू-राजनीतिक अस्थिरता को नजरअंदाज कर पा रहे हैं । हालांकि, होर्मुज गतिरोध लंबा खिंचने के साथ इस शांति की मजबूती पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं ।