ये दो जेनेटिक एडिट P2RY8 और GNAS जीन को निष्क्रिय (नॉकआउट) करना हैं, जिन्हें सॉलिड ट्यूमर से पीड़ित जीवित चूहों में मानव टी कोशिकाओं पर किए गए पहले जीनोम वाइड CRISPR स्क्रीन के माध्यम से खोजा गया। P2RY8 को हटाने से ट्यूमर में टी कोशिकाओं की घुसपैठ नाटकीय रूप से बढ़ जाती है, जबकि GNAS को हटाने से ट्यूमर के माइक्रोएन्...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What two genetic edits, discovered through the first genome-wide CRISPR screen conducted in human T cells inside living animals, were found. Article summary: The two genetic edits are knockout (loss-of-function) of **P2RY8** and **GNAS**, discovered through the first-ever genome-wide CRISPR screen performed in human T cells inside living mice bearing solid tumors. The work wa. Topic tags: general, government, academic, general web, education. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks
CAR-T सेल थेरेपी ने रक्त कैंसर के इलाज में क्रांति ला दी है, लेकिन सॉलिड ट्यूमर (ठोस ट्यूमर) एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ट्यूमर का माइक्रोएन्वायरमेंट प्रतिरक्षा कोशिकाओं को सक्रिय रूप से दबाता है, उन्हें ट्यूमर के ऊतकों में घुसपैठ करने और उन्हें नष्ट करने से रोकता है। अब, ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट्स और यूसी सैन फ्रांसिस्को (UCSF) के वैज्ञानिकों ने दो जेनेटिक एडिट्स (आनुवंशिक संपादन) की खोज की है जो इन बाधाओं को दूर करते हैं, जिससे CAR-T कोशिकाएं प्रीक्लिनिकल मॉडल में सॉलिड ट्यूमर के खिलाफ नाटकीय रूप से अधिक प्रभावी हो जाती हैं ।
यह खोज जीवित जानवरों के अंदर मानव टी कोशिकाओं में पहली बार किए गए जीनोम-वाइड CRISPR स्क्रीन की बदौलत संभव हुई। यह काम क्यूई लियू, जूलिया कार्नेवाले और एलेक्स मार्सन के नेतृत्व में किया गया और 2026 में Nature पत्रिका में प्रकाशित हुआ ।
इस स्क्रीन ने दो ऐसे जीनों की पहचान की, जिन्हें निष्क्रिय (नॉकआउट) करने से सॉलिड ट्यूमर के खिलाफ CAR-T कोशिकाओं के प्रदर्शन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है: P2RY8 और GNAS। प्रत्येक जीन एक अलग तंत्र के माध्यम से काम करता है, और दोनों एडिट्स को मिलाकर एक शक्तिशाली सहक्रियात्मक प्रभाव पैदा होता है ।
ट्यूमर एक अणु उत्पन्न करते हैं जो टी कोशिकाओं पर P2RY8 रिसेप्टर को सक्रिय करता है। यह एक ब्रेक की तरह काम करता है जो टी कोशिकाओं को ट्यूमर में प्रवेश करने से शारीरिक रूप से रोकता है। P2RY8 को हटाने से यह ब्रेक समाप्त हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में टी कोशिकाएं सॉलिड ट्यूमर में प्रवेश कर जाती हैं । P2RY8 जीन एक G प्रोटीन-युग्मित रिसेप्टर (GPCR) को एनकोड करता है, जो सक्रिय होने पर Gα13 के माध्यम से संकेत भेजकर टी सेल के आवागमन को प्रतिबंधित करता है। इस मार्ग को बाधित करके, शोधकर्ताओं ने टी कोशिकाओं को ट्यूमर के अंदर उन स्तरों पर जमा होने में सक्षम बनाया जो सामान्य CAR-T कोशिकाओं के साथ असंभव था ।
एक बार ट्यूमर के अंदर पहुंचने के बाद, टी कोशिकाओं को एक प्रतिकूल माइक्रोएन्वायरमेंट का सामना करना पड़ता है जो दमनकारी संकेतों से भरा होता है। GNAS (जो Gαs प्रोटीन को एनकोड करता है) एक केंद्रीय सिग्नलिंग हब के रूप में कार्य करता है जो ट्यूमर माइक्रोएन्वायरमेंट से कई दमनकारी संकेतों को प्रोसेस करता है। GNAS को हटाने से टी कोशिकाएं उन संकेतों के प्रति काफी हद तक असंवेदनशील हो जाती हैं, जिससे वे इंटरफेरॉन-गामा (IFN-γ) का उच्च उत्पादन बनाए रख पाती हैं, जो एक प्रमुख एंटी-ट्यूमर प्रभावकारी अणु है । यह टी कोशिकाओं को उन इम्यूनोसप्रेसिव स्थितियों के प्रति प्रतिरोधी बनाता है जो आम तौर पर सॉलिड ट्यूमर के अंदर प्रतिरक्षा कार्य को पंगु बना देती हैं।
P2RY8 और GNAS दोनों को एक साथ हटाने से एक सहक्रियात्मक लाभ मिलता है: टी कोशिकाएं अधिक संख्या में ट्यूमर में प्रवेश करती हैं और अंदर पहुंचने के बाद अत्यधिक सक्रिय रहती हैं। फेफड़ों के कैंसर के एक माउस मॉडल में, CAR-T कोशिकाओं की बहुत कम खुराक पर भी, अध्ययन के अंत में दो-तिहाई चूहे ट्यूमर-मुक्त थे, जबकि नियंत्रण-एडिटेड CAR-T कोशिकाएं प्राप्त करने वाले किसी भी चूहे का ट्यूमर साफ नहीं हुआ ।
इन एडिट्स के लाभ केवल फेफड़ों के कैंसर तक ही सीमित नहीं हैं। केवल GNAS की कमी वाली CAR-T कोशिकाओं ने कई सॉलिड ट्यूमर मॉडलों में ट्यूमर को सिकोड़ दिया, जिनमें मेलेनोमा, फेफड़ों का कैंसर, अग्नाशय का कैंसर, गैस्ट्रोएसोफेगल एडेनोकार्सिनोमा और गर्भाशय सार्कोमा शामिल हैं । संयोजन एडिट्स ने डिम्बग्रंथि कैंसर और मेलेनोमा रोगियों से प्राप्त टी कोशिकाओं में भी काम किया, जो रोगी-व्युत्पन्न कोशिकाओं में अनुवादनीयता की पुष्टि करता है
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ट्यूमर साफ होने के बाद छह महीने से अधिक समय तक देखे गए चूहों में कोई दीर्घकालिक दुष्प्रभाव नहीं देखा गया, जो एक अनुकूल सुरक्षा प्रोफाइल का सुझाव देता है ।
P2RY8 और GNAS की पहचान उसी टीम द्वारा विकसित एक उपन्यास इन विवो CRISPR स्क्रीनिंग प्लेटफॉर्म द्वारा संभव हुई। यह प्लेटफॉर्म ट्यूमर-युक्त चूहों के भीतर प्राथमिक मानव टी कोशिकाओं में जीनोम-स्केल लॉस-ऑफ-फंक्शन स्क्रीन की अनुमति देता है, जो पिछली सीमाओं को पार करता है जो CRISPR स्क्रीन को इन विट्रो सेटिंग्स तक सीमित करती थीं या बड़ी संख्या में जानवरों की आवश्यकता होती थी । इस प्रणाली में ट्यूमर कोशिकाओं पर CD3 scFv को ओवरएक्सप्रेस करना शामिल है ताकि ट्यूमर-इनफिल्ट्रेटिंग टी कोशिकाओं की उच्च रिकवरी प्राप्त हो सके, जो अपेक्षाकृत कम संख्या में जानवरों के साथ व्यापक विश्लेषण की अनुमति देता है
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ये निष्कर्ष CAR-T सेल थेरेपी को सॉलिड ट्यूमर के खिलाफ प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं, जो अधिकांश कैंसर के लिए जिम्मेदार हैं। यह दोहरी-एडिटिंग रणनीति सॉलिड ट्यूमर इम्यूनोथेरेपी के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण बाधाओं को संबोधित करती है: खराब टी सेल घुसपैठ और इम्यूनोसप्रेसिव ट्यूमर माइक्रोएन्वायरमेंट। लंबी अवधि के माउस अध्ययनों में देखा गया अनुकूल सुरक्षा प्रोफाइल नैदानिक परीक्षण की दिशा में आगे के विकास का भी समर्थन करता है ।
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ये दो जेनेटिक एडिट P2RY8 और GNAS जीन को निष्क्रिय (नॉकआउट) करना हैं, जिन्हें सॉलिड ट्यूमर से पीड़ित जीवित चूहों में मानव टी कोशिकाओं पर किए गए पहले जीनोम वाइड CRISPR स्क्रीन के माध्यम से खोजा गया।
ये दो जेनेटिक एडिट P2RY8 और GNAS जीन को निष्क्रिय (नॉकआउट) करना हैं, जिन्हें सॉलिड ट्यूमर से पीड़ित जीवित चूहों में मानव टी कोशिकाओं पर किए गए पहले जीनोम वाइड CRISPR स्क्रीन के माध्यम से खोजा गया। P2RY8 को हटाने से ट्यूमर में टी कोशिकाओं की घुसपैठ नाटकीय रूप से बढ़ जाती है, जबकि GNAS को हटाने से ट्यूमर के माइक्रोएन्वायरमेंट में मौजूद दमनकारी संकेतों के प्रति टी कोशिकाएं प्रतिरोधी बन जाती हैं, जिससे उनकी कैंसर व...
दोनों एडिट का संयोजन एक शक्तिशाली सहक्रियात्मक प्रभाव पैदा करता है: फेफड़ों के कैंसर के एक माउस मॉडल में, दोहरे एडिटेड CAR T कोशिकाओं से उपचारित दो तिहाई चूहे ट्यूमर मुक्त हो गए, जबकि सामान्य CAR T कोशिकाओं से उपचारित...