येन की कमजोरी कोई अस्थायी सट्टेबाजी नहीं है, बल्कि यह एक संरचनात्मक समस्या है। इसके मुख्य कारण हैं:
बाजार की उम्मीदें तीन मुख्य कारणों से बढ़ी हैं:
हालांकि कुछ भविष्यवाणी बाजार (prediction markets) में 60-70% के आसपास भी दरें दिख रही हैं, लेकिन रुझान एक ही है: सितंबर में दर बढ़ोतरी की ओर तेजी से बदलाव ।
प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की सरकार और BOJ के बीच सीधा-सादा तालमेल नहीं है। दोनों ओर से मिले-जुले संकेत आ रहे हैं:
कुल मिलाकर, सरकार येन को कमजोर होने से बचाने के लिए धीरे-धीरे दरें बढ़ाने के पक्ष में तो है, लेकिन बढ़ती जेजीबी यील्ड और डॉविश नियुक्तियों की चिंता इसमें बाधा बन सकती है ।
1-2 अगस्त का हस्तक्षेप ऐतिहासिक था, लेकिन इसके नतीजे ज्यादा दिन नहीं टिके। दो हफ्तों में ही येन ने अपनी आधी बढ़त खो दी । इसके कारण:
एक पूर्व BOJ अधिकारी ने इस संयुक्त कार्रवाई को "सतर्कता की भावना पैदा करने में अत्यधिक प्रभावी" बताया, लेकिन इसे एक अस्थायी सहारा ही माना ।
यह बैठक BOJ की विश्वसनीयता के लिए बहुत बड़ा जोखिम लेकर आई है। आइए दोनों संभावनाओं को समझते हैं:
अगर BOJ दरें 0.25% बढ़ाकर 1.25% कर देता है:
अगर BOJ दरों में कोई बदलाव नहीं करता है:
मुख्य तनाव यह है कि BOJ का अपना जुलाई सारांश दर बढ़ोतरी की ओर इशारा करता है, लेकिन ताकाइची का जेजीबी यील्ड को कम रखने का राजनीतिक दबाव BOJ को झिझकने पर मजबूर कर सकता है । बाजार यह मानकर चल रहा है कि BOJ बॉन्ड बाजार को खुश करने के बजाय येन की स्थिरता और महंगाई पर नियंत्रण को प्राथमिकता देगा - लेकिन यह दांव गलत भी साबित हो सकता है।