इस थेरेपी में मरीज के खुद के शरीर की रोग प्रतिरोधक कोशिकाओं (T-कोशिकाओं) का इस्तेमाल किया गया । राष्ट्रीय ट्यूमर रोग केंद्र (NCT) हीडलबर्ग में डॉ. पैट्रिक श्मिड्ट के नेतृत्व में टीम ने इन कोशिकाओं को आनुवंशिक रूप से बदल दिया। उनमें एक विशेष T-सेल रिसेप्टर (TCR) डाला गया जो PRAME प्रोटीन को पहचानने और उस पर हमला करने में सक्षम है
। यह TCR जैव प्रौद्योगिकी कंपनी इमैटिक्स (Immatics) द्वारा प्रदान किया गया था
।
जुलाई 2025 में, मरीज को इन इंजीनियर्ड T-कोशिकाओं का सिर्फ एक इन्फ्यूजन (नसों के ज़रिए चढ़ाया गया) दिया गया । इसके बाद जो हुआ वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। कुछ ही महीनों में, पेट के बड़े ट्यूमर और फेफड़ों, लिवर, पेल्विस और यहाँ तक कि दिमाग में फैले कैंसर (मेटास्टेसिस) पूरी तरह से गायब हो गए
। डॉक्टरों को यकीन नहीं हो रहा था। एक साल से अधिक समय बाद भी मरीज में कैंसर का कोई लक्षण नहीं पाया गया है, और वह पूरी तरह कैंसर-मुक्त है
।
इस ऐतिहासिक सफलता के बाद, अब इस थेरेपी को और बच्चों तक पहुँचाने की तैयारी है।