IRGC के वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रजा नक्दी ने PBS न्यूज़आवर को दिए दुर्लभ इंटरव्यू में चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ईरान पर परमाणु हथियार का इस्तेमाल किया, तो अगली सुबह दुनिया भर में अमेरिकी सैन्य ठिकानो... नक्दी ने तर्क दिया कि ईरान को परमाणु बम की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि उसकी असली ताकत जनता का समर्थन...
शोध उत्तर

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ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के एक शीर्ष जनरल ने अमेरिकी टीवी नेटवर्क PBS न्यूज़आवर को एक दुर्लभ इंटरव्यू दिया है, जिसमें उन्होंने तीन बड़ी चेतावनियाँ और रणनीतियाँ रखी हैं। ये बयान तेहरान के अमेरिका के प्रति मौजूदा रुख को साफ करते हैं: परमाणु हमले का जवाब देने की धमकी, परमाणु बम न बनाने का औचित्य, और युद्ध को जानबूझकर अगले अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यकाल तक खींचने की योजना।
IRGC के कमांडर-इन-चीफ के वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रजा नक्दी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ परमाणु हथियार का इस्तेमाल किया, तो दुनिया भर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को जब्त या कब्जे में ले लिया जाएगा । उन्होंने किसी भी संभावित अमेरिकी परमाणु हमले को 'बहुत बड़ी भूल' बताते हुए कहा कि इससे दुनिया भर में भारी प्रतिक्रिया होगी और द्वितीय विश्व युद्ध के सबक का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया भर में अमेरिकी ठिकानों पर हमला होगा या उन्हें कब्जे में ले लिया जाएगा
।
'जिस सुबह वे बम का इस्तेमाल करेंगे, उसके बाद दुनिया भर में अमेरिका के सभी सैन्य ठिकानों पर कब्ज़ा कर लिया जाएगा। आज, हालात द्वितीय विश्व युद्ध से बिल्कुल अलग हैं,' नक्दी ने PBS को बताया
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यह चेतावनी IRGC के एक लंबे समय से चले आ रहे सिद्धांत को दोहराती है: अमेरिका के पास दुनिया भर में ऐसी कमज़ोरियाँ हैं जिनका ईरान असममित (asymmetric) तरीकों से फायदा उठा सकता है, भले ही उसके पास अमेरिका जैसी परमाणु क्षमता न हो।
नक्दी ने तर्क दिया कि ईरान को परमाणु बम बनाने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि उसकी असली निरोधक शक्ति (deterrence) जनता का समर्थन और जनसैलाब (popular mobilization) है । PBS इंटरव्यू में उन्होंने कहा: 'हमें ऐसी निरोधक शक्ति हासिल करनी होगी कि दुश्मन हम पर हमला करने की हिम्मत न करे, ताकि हम सुरक्षित रह सकें'—लेकिन उन्होंने इस निरोधक शक्ति को परमाणु शस्त्रागार से नहीं, बल्कि लंबे असममित युद्ध और कीमत वसूलने की ईरान की क्षमता से जोड़ा
।
यह रुख ईरान की लंबे समय से चली आ रही आधिकारिक नीति के अनुरूप है, हालांकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताएँ दशकों से बनी हुई हैं।
नक्दी ने स्पष्ट रूप से एक रणनीति बताई जिसके तहत ईरान जानबूझकर अमेरिका के साथ युद्ध को तब तक खींचेगा जब तक कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जनवरी 2029 में पद नहीं छोड़ देते । इस योजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
'एक तरीका यह है कि इस युद्ध को राष्ट्रपति पद के अगले कार्यकाल तक खींचा जाए और घिसाव पैदा किया जाए, ताकि अगर कोई और ईरान पर हमला करना चाहे, तो उसे पता चले कि इसकी एक कीमत चुकानी होगी,' नक्दी ने कहा ।
नक्दी के बयान केवल अलग-थलग बयानबाजी नहीं हैं। वे तीन मोर्चों पर ईरान के समन्वित कदमों के अनुरूप हैं: हुर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण, तेल रिसाव मुआवजे के दावे और ठप पड़ी कूटनीति।
हुर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण: ईरान की संसद एक विधेयक की समीक्षा कर रही है जिसमें युद्ध क्षति के मुआवजे के भुगतान तक अमेरिकी और इजरायली जहाजों पर प्रतिबंध लगाने और अन्य देशों से टोल वसूलने का प्रस्ताव है । ईरान का कहना है कि उसने ओमान के साथ नई शिपिंग लेन को लेकर एक समझौते को अंतिम रूप दे दिया है, जो अमेरिकी और इजरायली जहाजों पर प्रतिबंध लगाएगा और उल्लंघनकर्ताओं पर कार्गो मूल्य का 20% तक जुर्माना लगाएगा
। ईरान ने जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को अमेरिकी रियायतों, जिसमें मुआवजा, प्रतिबंध हटाना और नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करना शामिल है, से जोड़ दिया है
।
तेल रिसाव मुआवज़ा: 13 अगस्त, 2026 को, ईरान ने अपने दक्षिणी क्षेत्र क़ेशम द्वीप (Qeshm Island) तक पहुँचने वाले तेल के छीटों के बाद शिपिंग राष्ट्रों से मुआवजे की मांग की, जिसमें हुर्मुज जलडमरूमध्य में पर्यावरणीय गिरावट का हवाला दिया गया । ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस रिसाव ने 'फारस की खाड़ी और ओमान सागर के पानी को खराब कर दिया है' । TankerTrackers, एक अमेरिकी-निगरानी सेवा ने बताया कि यह रिसाव 3 अगस्त को ओमानी जल में बल्क कैरियर 'मिनोअन पायनियर' (Minoan Pioneer) पर ईरानी हमले से हुआ प्रतीत होता है
।
ठप पड़ी कूटनीति: अमेरिका-ईरान अंतरिम समझौता—जून 2026 में हस्ताक्षरित एक 14-सूत्रीय 'इस्लामाबाद ज्ञापन' (Islamabad Memorandum of Understanding) जिसने युद्ध की समाप्ति और 60-दिवसीय युद्धविराम की घोषणा की थी—प्रभावी रूप से ढह गया है । एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र का कहना है कि इसे पुनर्जीवित करने की बातचीत में 'बिल्कुल कोई प्रगति नहीं' हुई है और तेहरान युद्धविराम के किसी भी विस्तार पर चर्चा नहीं कर रहा है । ईरान का कहना है कि वाशिंगटन को पहले जून के अंतरिम समझौते पर वापस आना होगा और कोई भी आगे की बातचीत शुरू होने से पहले प्रतिबद्धताओं के लिए एक समय-सारणी तय करनी होगी । दोनों पक्ष एक-दूसरे से मुआवजे की माँग कर रहे हैं, जिससे हुर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और संघर्ष को समाप्त करने की संभावनाएँ और धूमिल हो गई हैं ।
PBS को दिया गया नक्दी का इंटरव्यू ईरान की मौजूदा सैन्य और कूटनीतिक रणनीति की सबसे सीधी अभिव्यक्तियों में से एक है। परमाणु चेतावनी, जन-समर्थन-आधारित निरोधक सिद्धांत और ट्रंप प्रशासन को पछाड़ने के उद्देश्य से घिसाव युद्ध की समय-सीमा का संयोजन बताता है कि तेहरान एक त्वरित कूटनीतिक निकास की तलाश करने के बजाय लंबे टकराव की तैयारी कर रहा है। जून के अंतरिम समझौते का ढहना, हुर्मुज जलडमरूमध्य की चल रही नाकाबंदी और वाशिंगटन व तेहरान के बीच आपसी मुआवजे की माँगें सभी इसी प्रक्षेपवक्र को मजबूत करती हैं।
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IRGC के वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रजा नक्दी ने PBS न्यूज़आवर को दिए दुर्लभ इंटरव्यू में चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ईरान पर परमाणु हथियार का इस्तेमाल किया, तो अगली सुबह दुनिया भर में अमेरिकी सैन्य ठिकानो...
IRGC के वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रजा नक्दी ने PBS न्यूज़आवर को दिए दुर्लभ इंटरव्यू में चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ईरान पर परमाणु हथियार का इस्तेमाल किया, तो अगली सुबह दुनिया भर में अमेरिकी सैन्य ठिकानो... नक्दी ने तर्क दिया कि ईरान को परमाणु बम की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि उसकी असली ताकत जनता का समर्थन और जनसैलाब है, जो परमाणु शक्ति से कहीं बड़ा निवारक (deterrence) है [3][11][12]।
उन्होंने स्पष्ट रणनीति बताई कि ईरान अमेरिका के साथ युद्ध को जानबूझकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल (जनवरी 2029) तक खींच सकता है, ताकि अमेरिका को थकाया जा सके और भविष्य के किसी भी हमले की भारी कीमत चुकानी पड़े [...