| IRGC कमांडर-इन-चीफ | अहमद वहीदी — मेजर जनरल के पद पर पदोन्नत | खामेनेई ने उन्हें 'शक्तिशाली आक्रामक अभियानों' और 'अधिकतम निवारण' (maximum deterrence) की तैयारी का आदेश दिया |
| सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ | अली अब्दुल्लाही — मेजर जनरल | उनका मुख्य काम सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ का खातम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय (जो संयुक्त युद्ध संचालन की देखरेख करता है) में विलय पूरा करना है |
| डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ | कियोमर्स हैदरी | कमांड एकीकरण प्रयास में सहायता |
| IRGC नौसेना प्रमुख | अली ओज़माई — रियर एडमिरल | युद्ध में हुए नुकसान के बाद नौसेना कमान का पुनर्निर्माण |
| बसीज प्रमुख | होसैन ताएब — पूर्व खुफिया प्रमुख और विरोध प्रदर्शनों के दमन के लिए जाने जाते हैं | बसीज के जमीनी स्तर के खुफिया नेटवर्क और घरेलू निगरानी का विस्तार करने का मिशन |
| सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ में अतिरिक्त भूमिका | (एक और नियुक्ति) | पुनर्गठित कमान ढांचे में एक खाली जगह को भरना |
ये नियुक्तियां पांच महीने के युद्ध से उत्पन्न नेतृत्व के खालीपन को भरती हैं। कई पूर्व कमांडर या तो मारे गए थे या पद अस्थायी रूप से खाली थे ।
IRGC कमांडर के वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रजा नकदी ने 11-13 अगस्त के बीच तीन अहम बयान दिए हैं, जो सीधे तौर पर इन नियुक्तियों से जुड़े हैं :
ये बयान फेरबदल का सैद्धांतिक आधार (doctrinal justification) प्रदान करते हैं। हर नियुक्ति इसी 'लंबी और आक्रामक' रणनीति पर खरी उतरती है।
होसैन ताएब की बसीज प्रमुख के रूप में वापसी सबसे स्पष्ट घरेलू नियंत्रण का संकेत है। उन्हें अर्धसैनिक बल (paramilitary) के खुफिया नेटवर्क का विस्तार करने और नई तकनीकों के जरिए आबादी पर निगरानी रखने का आदेश दिया गया है । इससे पता चलता है कि सरकार को लंबे युद्ध के दौरान आंतरिक अशांति की आशंका है और वह उसे कुचलने के लिए पहले से तैयारी कर रही है।
कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम (ceasefire) की बातचीत ठप है या 'गतिरोध' में फंस गई है । मोहसिन रजाई की SNSC में नियुक्ति, जो परमाणु और सुरक्षा वार्ताओं की देखरेख करने वाली संस्था है, इस बातचीत में एक कट्टरपंथी अधिकारी को लेकर आई है, जिससे जल्दी किसी समझौते की संभावना कम हो गई है
। पाकिस्तान को मध्यस्थता (mediation) में लगे होने की खबरें हैं, लेकिन नए सैन्य बदलावों और नकदी के 'ट्रंप को पीछे छोड़ने' वाले बयानों ने युद्ध विराम की किसी भी संभावना को प्रभावी रूप से खत्म कर दिया है
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