फेज थेरेपी को तीन तरीकों से दिया गया: नस में (इंट्रावेनस), घावों पर सीधे लगाकर (टॉपिकल), और गांठ के अंदर इंजेक्ट करके। इसके साथ ही एंटीबायोटिक्स, एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन C) और बेथेनकॉल भी दिए जाते रहे । परिणाम तेज और लंबे समय तक रहने वाले थे:
यह मामला 'क्लिनिकल इंफेक्शियस डिजीज' (Clinical Infectious Diseases) नामक प्रतिष्ठित पत्रिका में 11 अगस्त, 2026 को प्रकाशित हुआ ।
CRISPR-सशक्त फेज दो तरीकों से काम करते हैं:
यह मामला दुनिया का पहला सबूत है कि CRISPR-सशक्त बैक्टीरियोफेज थेरेपी एक ऐसे मरीज में, जहां सभी एंटीबायोटिक्स फेल हो चुकी थीं, सुरक्षित रूप से नाटकीय क्लिनिकल सुधार ला सकती है। अब असली परीक्षण कठोर नियंत्रित क्लिनिकल ट्रायल (RCT) का है, जो यह साबित करेंगे कि यह एक मानक इलाज बन सकता है या नहीं।