13 मार्च 2026 को अमेरिकी वायु सेना ने ईरान के सबसे बड़े तेल निर्यात केंद्र खार्क द्वीप पर बड़ा बमबारी हमला किया, जिसमें 90 से अधिक ईरानी सैन्य स्थलों को निशाना बनाया गया ।
अगले दिन ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आरोप लगाया कि ये हमले यूएई की धरती से किए गए, खासकर रास अल खैमा और दुबई के पास स्थित ठिकानों से ।
यूएई ने इस आरोप को पूरी तरह खारिज कर दिया। राष्ट्रपति के कूटनीतिक सलाहकार अनवर गरगाश ने ईरान की नीति को "भ्रमित और निराधार" बताते हुए कहा कि ईरान ने "अपनी आक्रामकता को उजागर कर दिया है" ।
ईरान ने इसके बाद पहली बार यूएई के तीन प्रमुख बंदरगाहों (जेबेल अली, खलीफा पोर्ट और फुजैराह) को खाली करने की चेतावनी दी ।
यूएई ने ईरान से आए 15 मिसाइलों और 4 ड्रोनों को रोका। तीन लोग घायल हुए । ईरान ने हमले से इनकार किया, लेकिन चेतावनी दी कि अगर यूएई से कोई हमला हुआ तो वह "निर्णायक जवाब" देगा
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नए अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने फिर से यूएई, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन को निशाना बनाया । अमेरिका ने पूरे ईरानी तट पर नौसेना नाकाबंदी की घोषणा की
। इस लहर में 1,500 से अधिक उड़ानें प्रभावित हुईं
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यूएई ने आरोप लगाया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में उसके एक ADNOC टैंकर को मिसाइल से निशाना बनाया । 12 अगस्त 2026 तक युद्ध समाप्त करने की बातचीत विफल रही और शिपिंग पर हमले जारी हैं
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इस संघर्ष ने वैश्विक विमानन को COVID-19 के बाद सबसे ज़्यादा बाधित किया:
ईरान और अमेरिका के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई युद्ध विराम नहीं हो पाया है। ईरान खाड़ी देशों को अमेरिकी सैन्य अभियानों का सहयोगी मानकर निशाना बना रहा है, जबकि यूएई अपने आत्मरक्षा के अधिकार पर अड़ा है ।