जीई वर्नोवा का गैस टर्बाइन ऑर्डर बैकलॉग Q2 2026 के अंत तक 116 GW के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो Q1 2026 में 100 GW था । इसकी गैस टर्बाइन मांग का लगभग 20% अब सीधे डेटा सेंटर ग्राहकों से आता है, जबकि बाकी पारंपरिक उपयोगिता कंपनियों से
। सीमेंस एनर्जी ने अपने Q2 वित्त वर्ष 2026 में गैस सर्विसेज के तहत €8.9 बिलियन के ऑर्डर (77 टर्बाइन, लगभग 12 GW) दर्ज किए
और आने वाले वर्षों के लिए वैश्विक गैस टर्बाइन वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 110-120 GW कर दिया
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डेटा सेंटर/AI मांग: इस उछाल का मुख्य कारण AI डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली खपत है। JPMorgan, सीमेंस एनर्जी और जीई वर्नोवा सभी AI-संचालित बिजली की जरूरतों को मुख्य उत्प्रेरक मानते हैं । अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि वैश्विक डेटा सेंटर बिजली खपत 2025 में लगभग 485 TWh से बढ़कर 2030 तक लगभग 950 TWh हो जाएगी । अकेले AI-केंद्रित डेटा सेंटरों की बिजली खपत में 2025 में 50% की वृद्धि हुई ।
सप्लाई चेन में कमी और लागत वृद्धि: मांग ने विनिर्माण क्षमता को पछाड़ दिया है:
व्यापक विद्युतीकरण: डेटा सेंटरों के अलावा, परिवहन, भवनों और उद्योगों का चल रहा विद्युतीकरण भी बिजली की मांग पर संरचनात्मक दबाव बढ़ा रहा है ।
बिजली की मांग में रिकॉर्ड वृद्धि: अमेरिकी बिजली खपत ने 2025 में लगातार दूसरा वार्षिक रिकॉर्ड बनाया, और EIA का अनुमान है कि AI डेटा सेंटरों और विद्युतीकरण के कारण 2026 और 2027 में भी नए रिकॉर्ड बनेंगे । EIA इसे 2000 के बाद से चार वर्षों की सबसे मजबूत मांग वृद्धि अवधि बता रहा है । 2026 में अमेरिकी बिजली लोड में 1.9% और 2027 में 2.5% की वृद्धि का अनुमान है, जबकि टेक्सास के ERCOT क्षेत्र में औसत वार्षिक लोड वृद्धि 10% है ।
ब्रिज फ्यूल के रूप में प्राकृतिक गैस: EIA को उम्मीद है कि अगले दो वर्षों में जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन बढ़ेगा, क्योंकि डेटा सेंटरों की मांग नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रिड इंटरकनेक्शन क्षमता के विकास से आगे निकल जाएगी । प्राकृतिक गैस प्रमुख अल्पकालिक समाधान है, क्योंकि गैस टर्बाइनों को बड़े पैमाने पर सौर/पवन और बैटरी स्टोरेज की तुलना में तेजी से और अधिक लचीले ढंग से स्थापित किया जा सकता है। एनवेरस इंटेलिजेंस रिसर्च का अनुमान है कि हाइपरस्केलर 2030 तक डेटा सेंटरों के लिए 62 GW का ऑफ-ग्रिड, प्राकृतिक-गैस-आधारित बिजली उत्पादन बनाने पर लगभग $5 ट्रिलियन खर्च कर सकते हैं ।
'सुपर साइकल' थीसिस: JPMorgan और अन्य जगहों के विश्लेषक गैस टर्बाइनों को एक 'सुपर साइकल' में प्रवेश करते हुए बता रहे हैं, जहां निर्माताओं का उत्पादन शेड्यूल पहले से ही 2030 तक बढ़ा दिया गया है । सीमेंस एनर्जी 70-80 GW प्रति वर्ष का एक 'बेस मार्केट' (कोल-टू-गैस स्विचिंग और रिप्लेसमेंट) देखता है, जिसके ऊपर डेटा सेंटर और विद्युतीकरण मांग से अतिरिक्त 30-40 GW जुड़ता है, जो 110-120 GW की रन रेट को बनाए रखता है
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क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर प्रभाव: हाइपरस्केलर ग्रिड इंटरकनेक्शन में देरी से बचने के लिए तेजी से 'बिहाइंड-द-मीटर' गैस जनरेशन अपना रहे हैं - यानी डेटा सेंटर साइटों पर या उसके पास ही समर्पित प्राकृतिक गैस बिजली संयंत्र बनाना । यह क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के अर्थशास्त्र को बदल रहा है: बिजली की उपलब्धता और टर्बाइन आपूर्ति अनुबंध अब चिप आपूर्ति जितने ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। इसका दुष्परिणाम यह है कि गैस टर्बाइन आपूर्ति बाधाएं अब डेटा सेंटर निर्माण की समय-सीमा के लिए एक अड़चन बन गई हैं, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं और छोटे खिलाड़ी कतार से बाहर हो रहे हैं ।