11 अगस्त, 2026 को अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के नेतृत्व में 41 देशों ने जिनेवा में निरस्त्रीकरण सम्मेलन में एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर ICBM, SLBM और अंतरिक्ष प्रक्षेपण यानों के प्रक्षेपण से कम से कम 24 घंटे पहले... अमेरिका ने अलग से चीन की आलोचना करते हुए कहा कि 6 जुलाई के प्रक्षेपण से पहले उसने 'अधिकतम दो घंटे...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What joint statement did 41 nations, including the U.S., South Korea, Japan, Australia, and NATO allies, issue on August 11 demanding advanc. Article summary: On August 11, 2026, 41 nations — including the United States, South Korea, Japan, Australia, and numerous NATO allies — issued a joint statement at the Conference on Disarmament in Geneva calling for advance notification. Topic tags: general, government, news, general web, user generated. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermar
11 अगस्त, 2026 को, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया और कई नाटो सहयोगियों सहित 41 देशों के एक गठबंधन ने जिनेवा में निरस्त्रीकरण सम्मेलन में एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रक्षेपण की अग्रिम सूचना देने का आह्वान किया । यह वक्तव्य 6 जुलाई, 2026 को दक्षिण चीन सागर से प्रशांत महासागर में चीन द्वारा बिना सूचना के किए गए पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) परीक्षण की सीधी प्रतिक्रिया थी
।
संयुक्त वक्तव्य में सभी देशों से अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM), पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइलों (SLBM) और अंतरिक्ष प्रक्षेपण यानों (SLV) के प्रक्षेपण के लिए कम से कम 24 घंटे की अग्रिम सूचना देने का आह्वान किया गया । आवश्यक जानकारी में शामिल हैं:
अमेरिका ने एक अलग राष्ट्रीय वक्तव्य में, चीन द्वारा 6 जुलाई के SLBM प्रक्षेपण से पहले "अधिकतम दो घंटे की सूचना" देने की तीखी आलोचना की । अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि चीन की सूचना "प्रक्षेपण से कुछ घंटे पहले आई और इसमें पर्याप्त विवरण नहीं था, जो अन्य सभी P5 परमाणु हथियार संपन्न राज्यों द्वारा अपनाए गए मानकों से काफी कम है"
। अमेरिका ने चीन के इस कार्य को "तेज और अपारदर्शी परमाणु हथियार निर्माण" का हिस्सा बताया
।
संयुक्त वक्तव्य में इस बात पर जोर दिया गया कि "नियमित, पारदर्शी सूचना व्यवस्थाएं किसी भी देश के सैन्य विकास या परिचालन आवश्यकताओं को बाधित नहीं करतीं," बल्कि ये "गलत आकलन के जोखिम को कम करती हैं, विश्वास का निर्माण करती हैं, और सामरिक स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं" । इसमें चेतावनी दी गई कि "पर्याप्त अग्रिम सूचना और विवरण के बिना परमाणु-क्षमता वाले बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण करना खतरनाक है और इससे इन परीक्षणों के निकटवर्ती संबंधित देशों की शांति एवं सुरक्षा भंग होती है"
।
वक्तव्य में बैलिस्टिक मिसाइल प्रसार के विरुद्ध हेग आचार संहिता (HCOC) का उल्लेख किया गया, जो ऐसी सूचनाओं के लिए मौजूदा ढांचा है, और निहितार्थ रूप से चेतावनी दी गई कि जो राज्य अपनी जिम्मेदारियों से पीछे रहेंगे, उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा जवाबदेह ठहराया जाएगा ।
चीन ने संयुक्त वक्तव्य को खारिज कर दिया। निरस्त्रीकरण मामलों के राजदूत ली चिजियांग ने जोर देकर कहा कि चीन के "वैध और उचित रक्षा आधुनिकीकरण पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए" और अग्रिम सूचना देने में बीजिंग की सद्भावना के "राजनीतिक हेरफेर" से आगाह किया । चीन ने कहा कि उसने संबंधित देशों को पहले से सूचित कर दिया था, रक्षा मंत्रालय के एक बयान में दावा किया गया कि यह परीक्षण "चीनी सेना के खुलेपन और पारदर्शिता" को प्रदर्शित करता है
।
यह परीक्षण एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था: चीन ने सार्वजनिक रूप से वर्षों में पहली बार एक बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी से प्रशांत महासागर में एक सामरिक मिसाइल प्रक्षेपित करने की बात स्वीकार की । विश्लेषकों ने हथियार की पहचान या तो JL-2 या JL-3 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल के रूप में की, जिसे 094A प्रकार की परमाणु-संचालित पनडुब्बी से, संभवतः दक्षिण चीन सागर से, प्रक्षेपित किया गया था
। मिसाइल लगभग 7,300 किलोमीटर के उड़ान पथ पर एक सिम्युलेटेड प्रशिक्षण हथियार ले गई, जो फिलीपींस के कुछ हिस्सों के ऊपर से उड़ी और दक्षिण प्रशांत परमाणु-मुक्त क्षेत्र में उतरी
।
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11 अगस्त, 2026 को अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के नेतृत्व में 41 देशों ने जिनेवा में निरस्त्रीकरण सम्मेलन में एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर ICBM, SLBM और अंतरिक्ष प्रक्षेपण यानों के प्रक्षेपण से कम से कम 24 घंटे पहले...
11 अगस्त, 2026 को अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के नेतृत्व में 41 देशों ने जिनेवा में निरस्त्रीकरण सम्मेलन में एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर ICBM, SLBM और अंतरिक्ष प्रक्षेपण यानों के प्रक्षेपण से कम से कम 24 घंटे पहले... अमेरिका ने अलग से चीन की आलोचना करते हुए कहा कि 6 जुलाई के प्रक्षेपण से पहले उसने 'अधिकतम दो घंटे' की सूचना दी, जो 'अन्य सभी P5 परमाणु हथियार संपन्न राज्यों द्वारा अपनाए गए मानकों से काफी कम' थी [10][11]।
जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड ने भी चीन की अपर्याप्त सूचना की निंदा की, जबकि चीन ने संयुक्त वक्तव्य को खारिज करते हुए इसे 'राजनीतिक हेरफेर' बताया [5][6][7]।