यूक्रेनी ड्रोन हमले: मुख्य वजह
जनवरी से मई 2026 के बीच यूक्रेन ने रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले दोगुने कर दिए। इस दौरान 16 रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया, जिससे रोजाना लगभग 7 लाख बैरल तेल शोधन क्षमता ठप हो गई । फाइनेंशियल टाइम्स के विश्लेषण के अनुसार, जुलाई 2026 तक रूस की 30% से अधिक चालू रिफाइनिंग क्षमता और 45% से अधिक नाममात्र क्षमता बेकार हो चुकी थी । मई 2026 तक मध्य रूस की लगभग सभी बड़ी रिफाइनरियों ने अपना उत्पादन बंद या सीमित कर दिया था ।
कई दशकों का सबसे निचला स्तर
जुलाई 2026 की शुरुआत तक रूसी पेट्रोल उत्पादन सामान्य खपत के 65% तक गिर गया, जबकि डीज़ल उत्पादन मुश्किल से घरेलू मांग के बराबर रह गया । यह सीधा परिणाम है लगातार हो रहे नुकसान का, जिसकी भरपाई मॉस्को जल्दी नहीं कर पा रहा है।
गर्मियों की चरम मांग
गर्मियों में ईंधन की मांग बढ़ने से यह आपूर्ति संकट और गहरा गया ।
निर्यात पर प्रतिबंध
रूस ने मार्च 2024 से पेट्रोल निर्यात पर रुक-रुक कर प्रतिबंध लगाए। जुलाई 2026 में आपातकालीन उपायों के तहत पूरी तरह से डीज़ल निर्यात पर रोक लगा दी गई । डीज़ल निर्यात पर यह प्रतिबंध अब जनवरी 2027 तक बढ़ा दिया गया है ।
बेलारूस से रिकॉर्ड आयात
जुलाई 2026 में बेलारूस से पेट्रोल और डीज़ल का रूस को आयात नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। बेलारूसी रिफाइनरियों से पेट्रोल शिपमेंट जून की तुलना में 13% बढ़कर लगभग 2,12,000 टन हो गया, जबकि डीज़ल शिपमेंट लगभग दोगुना होकर 1,62,000 टन हो गया । जनवरी से जुलाई 2026 तक बेलारूस से रूस को पेट्रोल की आपूर्ति 25 गुना बढ़ गई ।
निम्न गुणवत्ता वाले पेट्रोल का पुनरुद्धार
अगस्त 2026 में रूसी सरकार ने अस्थायी रूप से ईंधन गुणवत्ता मानकों में ढील दे दी। अब K2-K4 श्रेणी (यूरो-2 से यूरो-4 के बराबर) के निम्न ग्रेड के पेट्रोल के उत्पादन, आयात और बिक्री की अनुमति 1 जुलाई 2027 तक के लिए दे दी गई है। यूरो-2 पेट्रोल को रूस में 2013 में ही प्रतिबंधित कर दिया गया था, क्योंकि इसमें सल्फर और अन्य प्रदूषकों की मात्रा बहुत अधिक होती है ।
अन्य देशों से आयात
उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने घोषणा की कि रूस बेलारूस के अलावा अन्य देशों से भी पेट्रोलियम उत्पादों का आयात शुरू करेगा। इस पैकेज में आयात बढ़ाने और डीज़ल निर्यात प्रतिबंध जैसे उपाय शामिल हैं ।
रिफाइनिंग मार्जिन पर असर
रॉयटर्स के विश्लेषकों का कहना है कि रूसी रिफाइनरियों पर हमलों से वैश्विक रिफाइनिंग मुनाफा बढ़ सकता है, खासकर अमेरिकी रिफाइनरों के लिए। इससे रूसी उत्पादों का निर्यात सीमित होगा और दुनिया भर में रिफाइंड उत्पादों की आपूर्ति कड़ी होगी । ऑक्सफोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी स्टडीज की रिपोर्ट पुष्टि करती है कि ये हमले रूसी तेल निर्यात के प्रवाह और संरचना को बदल रहे हैं, घरेलू स्तर पर ईंधन की कमी पैदा कर रहे हैं और वैश्विक उत्पाद व्यापार पैटर्न को नया आकार दे रहे हैं ।
डीज़ल आपूर्ति पर दबाव
रूस के मध्य क्षेत्रों की रिफाइनरियां, जो देश का लगभग 25% डीज़ल उत्पादन करती हैं, बंद पड़ी हैं । डीज़ल उत्पादन मुश्किल से घरेलू मांग को पूरा कर पा रहा है । ऐसे में रूसी डीज़ल निर्यात लगभग ठप हो गया है, जिससे वैश्विक डीज़ल बाजारों पर दबाव बढ़ गया है और डीज़ल क्रैक (रिफाइनिंग मार्जिन) बढ़ गए हैं। केप्लर के स्वतंत्र विश्लेषण के अनुसार, रूसी डीज़ल निर्यात में गिरावट अटलांटिक बेसिन में मध्य डिस्टिलेट बाजारों को लगातार कड़ा कर रही है ।