इससे पहले, जनवरी 2024 में उसी टीम ने एक सतत टाइम क्रिस्टल बनाया था जो घंटों तक स्थिर रहा . नए प्रयोग में उन्होंने पाया कि ये विचित्र ऑसिलेटर अलग-अलग काम नहीं करते; सही परिस्थितियों में ये आपस में जुड़कर एक साझा आवृत्ति (फ़्रीक्वेंसी) पर झूलने लगते हैं .
टीम ने इंडियम गैलियम आर्सेनाइड (InGaAs) नामक एक अर्धचालक का इस्तेमाल किया—यह वही सामग्री है जो आज के इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स में अहम भूमिका निभाती है . इस सामग्री की 10 माइक्रोमीटर मोटी परत में 3% इंडियम और थोड़ी मात्रा में सिलिकॉन मिलाया गया . इस सामग्री में अरबों स्वतंत्र स्पिन सिस्टम होते हैं, जहाँ सिलिकॉन डोनर्स के पास के इलेक्ट्रॉन अपने चारों ओर के लगभग 10 लाख नाभिकीय स्पिनों (न्यूक्लियर स्पिन) के साथ संपर्क करते हैं . पूरा प्रयोग लगभग -270°C (3 केल्विन) के बेहद कम तापमान पर किया गया ताकि स्पिन सिस्टम अपनी सुसंगति (कोहरेंस) बनाए रख सके .
यह तंत्र उसी सिद्धांत पर काम करता है जिसे 17वीं सदी के वैज्ञानिक क्रिश्चियन ह्यूजेंस ने पेंडुलम घड़ियों में देखा था: एक साझा माध्यम के ज़रिए कमज़ोर कपलिंग दोलनों को एक समान कर देती है . इस प्रयोग में, एक चौड़ी पंप लेज़र (लगभग 200 माइक्रोमीटर) सेमीकंडक्टर के कई क्षेत्रों को एक साथ उत्तेजित करती है, जिससे अलग-अलग आवृत्तियों पर झूलने वाले ऑसिलेटर एक समान लय में बंध जाते हैं .
टीम ने इसकी पुष्टि के लिए दो अलग-अलग पंप लेज़रों का इस्तेमाल किया :
टाइम क्रिस्टल 40 माइक्रोमीटर तक की दूरी पर एक-दूसरे से सिंक्रोनाइज़ हो सकते हैं . यह दूरी एक अकेले ऑसिलेटर के आकार से 1,000 गुना अधिक है। और सबसे खास बात यह है कि यह तालमेल तब भी टूटता नहीं जब दूर के ऑसिलेटरों की प्राकृतिक आवृत्तियों में 40% तक का अंतर हो ।
शोधकर्ताओं ने पाया कि इस तालमेल का माध्यम 'स्पिन-ध्रुवित इलेक्ट्रॉन' हैं जो सामग्री में फैलते (डिफ्यूज़) हैं . इन इलेक्ट्रॉनों की अनुमानित प्रसार लंबाई (स्पिन-डिफ्यूज़न लेंथ) लगभग 17 माइक्रोमीटर है, जो देखी गई सिंक्रोनाइज़ेशन सीमा से बिल्कुल मेल खाती है। नाभिकीय स्पिन प्रसार और इलेक्ट्रॉन हॉपिंग को बहुत धीमा या बहुत कम दूरी का होने के कारण खारिज कर दिया गया ।
यह खोज केवल एक वैज्ञानिक जिज्ञासा नहीं है। इसका सीधा असर स्पिन-आधारित तकनीकों पर पड़ेगा :
चूँकि सेमीकंडक्टर तकनीक पहले से ही परिपक्व है, इसलिए इसे डिवाइसेज़ में शामिल करना कई अन्य क्वांटम सिस्टमों की तुलना में अधिक व्यावहारिक है ।
यह काम उसी टीम के पिछले शोधों पर आधारित है। जनवरी 2024 में, ग्रेलिच की टीम ने उसी सामग्री से एक सतत टाइम क्रिस्टल बनाया जो कम से कम 40 मिनट तक चला—यह पिछले प्रदर्शनों से 10 मिलियन गुना अधिक था . मार्च 2025 में एक अनुवर्ती अध्ययन ने ऐसे टाइम क्रिस्टलों की अरैखिक गतिशीलता (नॉनलीनियर डायनामिक्स) का पता लगाया, जो एक ही सेमीकंडक्टर संरचना में पूर्ण तालमेल से लेकर अराजक व्यवहार तक के विविध परिघटनाओं को दिखाता है ।
Nature Communications में प्रकाशित यह नया शोध टाइम क्रिस्टल की अवधारणा को एक पृथक जिज्ञासा से उठाकर स्पिन-आधारित तकनीकों के लिए एक उपयोगी बिल्डिंग ब्लॉक बना देता है ।