संकट से पहले हर दिन लगभग 90 से 110 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते थे । लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद यह संख्या 90% से भी ज़्यादा गिर गई । मार्च 2026 की शुरुआत तक तो टैंकरों का आवागमन पूरी तरह शून्य हो गया था । अगस्त 2026 की शुरुआत में हालात में थोड़ा सुधार हुआ और Kpler नामक संस्था ने कुछ दिनों में लगभग 8 जहाजों के आवागमन की सूचना दी । इसके बावजूद, ईरान और ओमान के बीच 60 दिनों के पुन: खोलने के प्रस्ताव पर बातचीत चलने के कारण यह जलमार्ग लगभग बंद ही माना जा रहा है ।
वीएलसीसी (Very Large Crude Carrier - बहुत बड़े कच्चे तेल वाहक) की दैनिक चार्टर दरें लगभग $500,000 प्रति दिन (लगभग ₹4 करोड़) तक पहुंच गईं, जो सामान्य स्तरों की तुलना में लगभग दस गुना अधिक है ! उदाहरण के लिए, दक्षिण कोरिया की कंपनी सिनोकोर मैरीटाइम और भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज को एक सुपरटैंकर को किराए पर लेने के लिए $23-25 मिलियन (लगभग ₹200 करोड़) तक खर्च करने पड़े । जून के अंत में फारस की खाड़ी से भारत जाने वाले एक वीएलसीसी को 897 वर्ल्डस्केल प्वाइंट (सामान्य से लगभग 9 गुना) पर बुक किया गया ।
डीज़ल क्रैक स्प्रेड (कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पाद की कीमत का अंतर) जुलाई 2026 में $60 प्रति बैरल के पार पहुंचकर ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर पहुंच गया । एशियाई रिफाइनरियों ने मार्च 2026 से ही अपना उत्पादन घटाना शुरू कर दिया था, जबकि कई ने तो अपनी यूनिटें ही बंद कर दीं । अप्रैल 2026 तक डीज़ल और जेट ईंधन का उत्पादन कम से कम 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन कम हो गया था । एशिया में कच्चे तेल का आयात 10 साल के निचले स्तर पर आ गया । चीन को भी कच्चे तेल की कमी की भरपाई के लिए अपने रिफाइनरी उत्पादन में भारी कटौती करनी पड़ी ।
तेल की कीमतें: ब्रेंट क्रूड की कीमत मात्र दो कारोबारी सत्रों में 8% उछलकर $71.32 से $77.24 प्रति बैरल (27 फरवरी से 2 मार्च) हो गई । 26 कारोबारी दिनों में तेल 60-70% उछला और मार्च के अंत में ब्रेंट लगभग $116 प्रति बैरल तक पहुंच गया । हालांकि, अगस्त 2026 तक हालात कुछ सामान्य हुए और ब्रेंट लगभग $84.46/बैरल पर आ गया । गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि व्यापारी तेल की कीमत में $14/बैरल का जोखिम प्रीमियम शामिल कर रहे हैं ।
ऊर्जा शेयर और गैस: अमेरिका में S&P 500 एनर्जी सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया और तेल की कीमतों के साथ उछल गया । यूरोपीय प्राकृतिक गैस की कीमतें संकट शुरू होने के बाद से 70% से अधिक बढ़ गईं । अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, खाड़ी देशों ने निर्यात में आई रुकावट के कारण कुल तेल उत्पादन में कम से कम 10 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कटौती की ।
महत्वपूर्ण नोट: यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ (न कि 2025 में)। इस लेख में सभी तिथियां वर्ष 2026 को संदर्भित करती हैं।